sulabh swatchh bharat

गुरुवार, 20 जून 2019

विज्ञान के क्षेत्र में आगे आएं महिलाएंः केसरीनाथ त्रिपाठी

मणिपुर विश्वविद्यालय में 7वीं महिला विज्ञान कांग्रेस में महिलाओं को विज्ञान प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आगे लाने पर बल दिया गया

विकास के विभिन्न मापदंडों को पूरा करने में भारतीय महिलाओं का अहम योगदान है। पर, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में महिलाओं की हिस्सेदारी उम्मीद से काफी कम है। महिला विज्ञान कांग्रेस इस कमी को पूरा करते हुए राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण हो साबित हो सकती है। 
ये बातें पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केसरीनाथ त्रिपाठी ने मणिपुर विश्वविद्यालय में 7वीं महिला विज्ञान कांग्रेस को संबोधित करते हुए कही हैं। उन्होंने कहा कि कई योग्य महिलाएं शिक्षित होने के बावजूद मुख्यधारा के विज्ञान से दूर रह जाती हैं और उन्हें प्रमुख वैज्ञानिक के रूप में काम करने का अवसर नहीं मिल पाता। महिला विज्ञान कांग्रेस के जरिए विज्ञान के क्षेत्र में सक्रिय अनुसंधान से खुद को जोड़ने के लिए अधिक से अधिक महिलाएं वैज्ञानिक समुदाय का हिस्सा बनने के लिए प्रेरित होंगी। 
 महिला विज्ञान कांग्रेस में मौजूद भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग से जुड़ीं वरिष्ठ वैज्ञानिक नमिता गुप्ता ने बताया कि वैज्ञानिक शोध में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार की ओर से कई कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, जिनमें वर्ष 2002 में शुरू की गई महिला वैज्ञानिक योजना प्रमुख है। इस योजना का उद्देश्य 27-57 वर्ष की उन महिला वैज्ञानिकों एवं प्रौद्योगिकीविदों को मुख्यधारा में लौटने के अवसर प्रदान करना है, जो पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण अपने करियर में पिछड़ जाती हैं। महिला विज्ञान कांग्रेस महिलाओं को विज्ञान के क्षेत्र से जोड़ने के ऐसे प्रयासों का ही एक हिस्सा है।
भारतीय विज्ञान कांग्रेस एसोसिएशन की पूर्व महासचिव विजयलक्ष्मी सक्सेना ने बताया कि महिलाओं को नजरअंदाज किया जाता है तो हम अपने आधे कार्यबल को एक तरह से उपेक्षित कर देते हैं, जो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अपने योगदान से समाज को ऊंचाई पर ले जाने में उपयोगी हो सकती हैं। जानकी अम्मल, प्रो. अशिमा चैटर्जी, प्रो. मंजू शर्मा, प्रो. अर्चना शर्मा, प्रो. इंदिरा नाथ, प्रो. आनंदीबाई जोशी, प्रो. कस्तूरी दत्ता, प्रो. शिप्रा गुहा मुखर्जी और डॉ स्नेह भार्गव जैसी प्रसिद्ध महिला वैज्ञानिक इसकी मिसाल कही जा सकती हैं। विषमता, लैंगिक भेदभाव, शिक्षा तंत्र में लैंगिक भेदभाव को खत्म करने के लिए महिला वैज्ञानिकों के लिए अवसर पैदा करना और उच्च शिक्षा क्षेत्र में उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया जाना जरूरी है। विज्ञान कांग्रेस जैसे आयोजन इस दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकते हैं। 
भारतीय विज्ञान कांग्रेस एसोसिएशन के अध्यक्ष अच्युता सामंत के अनुसार, ‘महिला विज्ञान कांग्रेस हर साल आयोजित होने वाले भारतीय विज्ञान कांग्रेस का एक अभिन्न अंग बन चुका है। महिला विज्ञान कांग्रेस का महत्व इसीलिए अधिक है, क्योंकि इसमें शामिल महिला वैज्ञानिक महिलाओं को मुख्यधारा में शामिल करने से जुड़ी चुनौतियों को दूर करने के साथ-साथ विज्ञान कांग्रेस की थीम- रीचिंग टू अनरीच्ड थ्रू साइंस ऐंड टेक्नोलॉजी जैसे विषय को केंद्र में रखकर गहनता से विचार-विमर्श कर रही हैं।’ 
मणिपुर विश्वविद्यालय के उप-कुलपति आद्याप्रसाद पांडेय के अनुसार, ‘मणिपुर में व्यापार, वाणिज्य, आर्थिक एवं राजनीतिक क्षेत्र में महिलाओं के योगदान का इतिहास रहा है। इस राज्य के आर्थिक एवं सामाजिक विकास में महिलाओं की भूमिका बेहद अहम है। इसीलिए दूरदराज के इस राज्य में महिला विज्ञान कांग्रेस का आयोजन इस राज्य की महिलाओं को विज्ञान के क्षेत्र से जुड़ने के लिए निश्चित रूप से प्रोत्साहित करेगा। उम्मीद की जानी चाहिए कि महिला विज्ञान कांग्रेस का मंच यहां आए वैज्ञानिकों, छात्रों, शोधकर्ताओं एवं शिक्षाविदों को विचारों के आदान-प्रदान का अवसर प्रदान करेगा।’
महिला विज्ञान कांग्रेस की संयोजक मणिपुर विश्वविद्यालय की प्रो. मेमचा के अनुसार महिला विज्ञान कांग्रेस में महिलाओं के समन्वित विकास के लिए विज्ञान कांग्रेस की विस्तृत थीम के मुताबिक चर्चा की जाती है। इसके अंतर्गत विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, गणित और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में महिलाओं की स्थिति के बारे में विचार किया जाता है। इससे जुड़ी चुनौतियों से निपटने और लैंगिक समानता स्थापित करने के लिए आवश्यक रणनीति पर भी चर्चा की जाती है।



Bringing smiles to every face hindi ad copy %281%29

ऑडियो