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रविवार, 16 जून 2019

यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका

26 सितंबर से 30 सितंबर 2014 तक प्रधानमंत्री मोदी ने संयुक्त राज्य अमेरिका की चार दिवसीय यात्रा की। इस यात्रा ने भारत-अमेरिका संबंधों को सुदृढ़ करने की दिशा में नए प्रतिमान स्थापित किए। प्रधानमंत्री मोदी और तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने एक विजन स्टेटमेंट के माध्यम से दोनों देशों के बीच व्यापक सामरिक और वैश्विक साझेदारी का समर्थन किया। इसके साथ ही दोनों देशों के रिश्तों ने एक नए चरण में प्रवेश किया। ये समझौते, दोनों देशों के आपसी हितों को लेकर हर क्षेत्र में सहयोग के लिए एक मार्गदर्शिका का काम करेंगे

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी इस यात्रा को एक बेहतर सुअवसर में बदलते हुए कहा कि भारत, संयुक्त राज्य को अपनी ‘लुक ईस्ट, लिंक वेस्ट’ नीति का एक अभिन्न हिस्सा मानता है। पहली बार संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति और भारत के प्रधानमंत्री ने एक डिजिटल पहल के तहत ‘वाशिंगटन पोस्ट’ के साथ बातचीत की, जो अखबार में संयुक्त संपादकीय के तौर पर प्रकाशित हुआ, जिसका शीर्षक था - एक बेहतर कल के रिश्तों के पथप्रदर्शक के लिए ‘चलें साथ-साथ’। मोदी ने लिखा, ‘अमेरिका को भारत एक ‘प्राकृतिक वैश्विक भागीदार’ के रूप देखता है।
दोनों देशों ने रक्षा, व्यापार, खुफिया, आतंकवाद, अफगानिस्तान, अंतरिक्ष अन्वेषण, विज्ञान, ऊर्जा, जलवायु परिवर्तन, उच्च प्रौद्योगिकी और स्वास्थ्य के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए हामी भरी और समझौते किए।
मैडिसन स्क्वायर गार्डन पर मोदी ने भारतीय मूल के लोगों को संबोधित किया। अमेरिका की धरती पर, किसी भारतीय नेता के भाषण के दौरान सबसे अधिक भीड़ देखी गई। मोदी ने अपने भाषण में जोर दिया कि भारत में जनसांख्यिकीय लाभांश को विश्व स्तर पर स्वीकार किया जाना चाहिए। उनके भाषण का मुख्य केंद्र कौशल विकास और घरेलू तथा एनआरआई प्रतिभा समूह के उपयोग पर था। 
उन्होंने वादा किया कि भारतीय मूल के व्यक्तियों (पीआईओ), कार्डधारकों को ‘आजीवन भारतीय वीजा’ मिलेगा और अमेरिकी पर्यटकों को भी आगमन पर वीजा (वीजा ऑन अराइवल’ दिया जाएगा।
संयुक्त राष्ट्र महासभा के 67 वें सत्र को संबोधित करते हुए, उन्होंने विश्व के नेताओं से एक दीर्घकालिक दुनिया की दिशा में काम करने की अपील की। उन्होंने आतंकवाद के मुद्दे पर, विशेष रूप से पाकिस्तान के संदर्भ में, और दक्षिण एशिया में शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की आवश्यकता पर व्यापक रूप से बात की।
प्रमुख निवेशकों और फाइनेंसरों के साथ एक बैठक में, मोदी ने भारत को एक आर्थिक अवसर वाले राष्ट्र के रूप में देखने और लाल फीताशाही के उनके डर को हटाने का आग्रह किया।
एक दुर्लभ घटना में, मोदी और ओबामा ने अफ्रीकी-अमेरिकी नागरिक अधिकार आंदोलन के नेता मार्टिन लूथर किंग को संयुक्त रूप से श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए मार्टिन लूथर किंग जूनियर मेमोरियल का दौरा किया।



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