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सोमवार, 21 जनवरी 2019

सोनपुर को ‘सुलभ जल’ का उपहार

बिहार के विश्व प्रसिद्ध सोनपुर के बाबा हरिहर नाथ मंदिर में सुलभ ने शुद्ध पेयजल एटीएम लगाया है, इस एटीएम से इलाके के लोगों को 1 रुपया प्रति लीटर की दर पर शुद्ध पेय ‘सुलभ जल’ उपलब्ध

बिहार का विश्व प्रसिद्ध सोनपुर मेला हमेशा की तरह इस बार भी ऐतिहासिक रहा। क्योंकि हमेशा की तरह ही स्वच्छता और सामाजिक सुधार संस्था सुलभ इंटरनेशनल ने समस्या नहीं गिनाई, बल्कि उसका हल प्रस्तुत किया। गंगा के तटीय इलाकों में लगातार दूषित हो रहे पानी और इसके आर्सेनिक से प्रभावित होने की समस्या का सुलभ इंटरनेशनल ने सोनपुर गांव के बाबा हरिहर नाथ मंदिर में शुद्ध पेयजल एटीएम लगा कर एक बड़ा समाधान पेश किया। यह वाटर एटीएम सुलभ के शंग्रिला प्रोजेक्ट्स के तहत सुलभ इंटरनेशनल की सहयोगी शंग्रिला प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड और डेनमार्क की कंपनी नार्डिक टेक्नोलॉजी के वित्तीय सहयोग से शुरू की गई है, जिसका उद्घाटन बिहार के लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण मंत्री विनोद नारायण झा ने किया। इस वाटर एटीएम से इलाके के लोगों को 1 रुपया प्रति लीटर की बेहद सस्ती दर पर आर्सेनिक मुक्त शुद्ध पेय ‘सुलभ जल’ मिलेगा। साथ ही इस मौके पर राजस्थान के अलवर और टोंक जिले की पुनर्वासित स्कैवेंजर्स महिलाओं, वृंदावन से आई विधवा माताओं और जम्मू-कश्मीर के उखराल स्थित सुलभ प्रशिक्षण केंद्र के छात्रों ने सोनपुर में ड्रग्स, शराब और नशीले पदार्थों के खिलाफ एक मार्च भी निकाला। मार्च में नशीले पदार्थों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले खतरनाक प्रभावों को दर्शाया गया।

सुलभ जल से मिल रही जिंदगी
स्वच्छता और शौचालय के क्षेत्र में पिछले 5 दशक से काम कर रहे सुलभ इंटरनेशनल ने लगातार दूषित हो रहे जल की समस्या से निजात दिलाने के लिए बड़ी पहल की। सुलभ प्रणेता डॉ. विन्देश्वर पाठक की प्रेरणा से सुलभ ने देश में सबसे सस्ती दर पर शुद्ध जल देना शुरू किया है। बंगाल और दिल्ली के लोगों को पहले से ही शुद्ध सुलभ जल बेहद सस्ती दर पर मिल रहा था। अब बिहार के लोग भी इस महत्वपूर्ण और सुरक्षित जीवन देने वाली इस पहल का फायदा उठा सकेंगे। बंगाल में मात्र 50 पैसे प्रति लीटर की दर से शुद्ध पेयजल सुलभ की तरफ से उपलब्ध है तो वहीं दिल्ली में भी शुद्ध सुलभ पेयजल मात्र 1 रुपया प्रति लीटर की दर से मिल रहा है।
 
जिसकी बिहार को जरूरत थी वह सुलभ ने दे दिया - विनोद नारायण झा
इस शुभ अवसर पर मुख्य अतिथि बिहार के लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण मंत्री विनोद नारायण झा ने कहा कि 70 फीसदी बीमारियां अशुद्ध पानी पीने से होती हैं। इसीलिए अगर हमें शुद्ध पानी उपलब्ध होने लगे तो हमारी आधी से ज्यादा समस्याएं अपने आप ही हल हो जाएंगी और आर्थिक तौर पर हमें बचत भी होगी। उन्होंने सुलभ के वाटर एटीएम प्रोजेक्ट की प्रशंसा करते हुए कहा कि सुलभ का यह काम सच में बहुत महान है और इलाके के लोगों के लिए यह बहुत बड़ी राहत ले कर आया है। साफ-सफाई एवं शौचालय के क्षेत्र में समाज को जो कुछ भी सुलभ ने दिया है उसके लिए उसे हमेशा याद किया जाएगा। शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के क्षेत्र में सुलभ निरंतर बढ़-चढ़कर प्रयास कर रहा है। स्वच्छता के क्षेत्र में डॉ. विन्देश्वर पाठक के कार्यों को देखते हुए उन्हें आधुनिक गांधी कहना बिलकुल सही होगा। इतिहास में ऐसे लोगों के नाम स्वर्ण अक्षरों में लिखे जाएंगे। 
इलाके में बढ़ते दूषित जल की समस्या पर चिंता प्रकट करते हुए उन्होंने कहा कि गंगा के तटीय इलाकों में नदी के तट से लगभग 20 किलोमीटर की लंबाई तक का भूमिगत जल अशुद्ध हो रहा है। उन्होंने कहा कि मैं पेयजल मंत्री भी हूं, मेरा काम लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना है ताकि लोग बीमार न हों। यह मेरा दायित्व है कि मैं अपने लोगों तक शुद्ध पेयजल पहुंचाऊं और इसके लिए मुझे ऐसी ही मशीन की जरूरत थी। मैं डॉ. पाठक का दिल से आभार व्यक्त करता हूं कि उन्होंने हमारे लोगों के लिए ऐसी मशीन दी। मुझे इसका उद्घाटन करते हुए बेहद खुशी हो रही थी। स्वच्छता और शुद्ध पेयजल अस्पताल जाने से बचने के लिए सबसे जरूरी कदम हैं।
झा ने कहा कि पहले हमें यह पता नहीं होता था कि गंगा का पानी और हमारे जमीन के नीचे का पानी दूषित भी हो सकता है। लेकिन अब हमें पता चल चुका है कि ऐसा हो सकता है। लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग ऐसा प्रयास कर रहा है कि लोग अशुद्ध पानी पीने से बीमार नहीं पड़ें। उन्होंने कहा कि इसकी जांच की जा रही है कि गंगा नदी का तटीय इलाका ही आर्सेनिक से क्यों प्रभावित है। उन्होंने बताया कि छपरा और वैशाली जिले के इलाके भी आर्सेनिक से प्रभावित हैं। हम इस समस्या के निदान के लिए तेजी से काम कर रहे हैं।

स्वच्छता ही नहीं सामाजिक बदलाव भी हमारा ध्येय- डॉ. विन्देश्वर पाठक
इस शुभ मौके पर सुलभ स्वच्छता और सामाजिक सुधार आंदोलन के संस्थापक डॉ. विन्देश्वर पाठक ने कहा कि स्वच्छता और सार्वजनिक शौचालय के क्षेत्र के अलावा सुलभ कई तरह के सामाजिक कार्यों को कर रहा है और आम लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए प्रतिबद्ध है। डॉ. पाठक ने बताया कि सुलभ काफी समय से बंगाल में भी आर्सेनिक युक्त पानी की समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए काम कर रहा है और वहां भी ऐसा ही जल संयंत्र लगाया गया है। अब वहां के लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध हो रहा है और लोग बीमारियों से बच रहे हैं। साथ ही देश में लोगों को मैला ढोने जैसे घृणित काम से बाहर निकालकर सुलभ ने अपने प्रशिक्षण कार्यों के माध्यम से उन्हें रोजगार के नए साधन मुहैया कराए और उन्हें सम्मानजनक जिंदगी दी है।
उन्होंने कहा कि एक ऐसा समय था जब लोग शौचालय की बात भी करना पसंद नहीं करते थे और घरों में शौचालय बनवाना धर्म के खिलाफ मानते थे। लेकिन आज सुलभ के निरंतर कार्यों से स्थितियां बदल चुकी हैं। सुलभ ने स्वच्छता को एक जन-आंदोलन का रूप दिया और हर घर में शौचालय के लिए लंबा संघर्ष किया। अब शौचालय इज्जत और सम्मान की बात बन चुका है, महानायक अमिताभ बच्चन और सुपरस्टार अक्षय कुमार भी इसका प्रचार कर रहे हैं। डॉ. पाठक ने कहा कि सिर्फ स्वच्छता ही नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव के लिए भी सुलभ लंबे समय से काम कर रहा है। मैला ढोने वाली स्कैवेंजर्स महिलाएं जिन्हें अछूत समझा जाता था, आज सुलभ की वजह से इनकी जिंदगियों में बड़ा बदलाव है और ये अपने यजमानों के साथ बैठती हैं और उनके घरों में उनके साथ हर कार्यक्रम में शरीक होती हैं। इतना ही नहीं सामाजिक बदलाव की दिशा में सुलभ ने वृंदावन, वाराणसी और उत्तराखंड की विधवा माताओं को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। 
डॉ. पाठक ने एक महत्वपूर्ण सुझाव देते हुए कहा कि देश की आबादी लगभग 1 अरब 30 करोड़ है, लेकिन इस आबादी में 10 करोड़ संपन्न लोग भी हैं। इन संपन्न लोगों में अगर एक व्यक्ति एक परिवार की मदद कर दे, तो समाज में बड़ा बदलाव आ सकता है। सुलभ के कार्यों को पूरी दुनिया में मान्यता मिल रही है, अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर के मेयर ने सुलभ के कार्यों से प्रभावित होकर 14 अप्रैल को ‘पाठक डे’ मनाए जाने का निर्णय लिया है। 
डॉ. पाठक ने इस मौके राजनीतिक शुचिता और नैतिकता की बात करते हुए देश के बेहतर भविष्य के लिए इसे जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि राजनीति में साफ-सुथरी छवि के लोग आएं तो सब कुछ बदल सकता है, क्योंकि अच्छे लोग ही बेहतर नीतियां बनाते हैं।

3 रुपए रोज खर्च कर जिंदगी बचेगी - गुप्तेश्वर पाण्डेय
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि बिहार सैन्य पुलिस के महानिदेशक और मंदिर के न्यास समिति के अध्यक्ष गुप्तेश्वर पाण्डेय ने कहा कि इस पेयजल का उपयोग मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं के साथ-साथ सोनपुर इलाके के निवासी भी कर सकेंगे। यह हम सभी के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। किसी भी स्वस्थ व्यक्ति के लिए हर रोज 3 लीटर पानी पीना जरूरी होता है। अब इतना शुद्ध पानी मात्र 3 रुपए में उपलब्ध रहेगा। इससे न जाने कितने लोग अपने जीवन को सुरक्षित बना सकते हैं। स्वस्थ जीवन के लिए इससे सस्ता आपको बाजार में कुछ और नहीं मिलेगा। यह मशीन मंदिर की आय का भी स्थाई स्रोत बन गई है। इतनी बड़ी जन-सेवा का कार्य सिर्फ डॉ. पाठक ही कर सकते थे।

बैक्टीरिया मुक्त है सुलभ जल - जेसपर वाईब हैंस
भारत में डेनमार्क दूतावास में वाणिज्य विभाग और इनोवेशन सेंटर के प्रमुख जेसपर वाईब हैंस ने नार्डिक टेक्नोलॉजी के बारे में बताते हुए कहा कि यह टेक्नोलॉजी पानी शुद्धीकरण को लेकर बहुत दिनों से काम कर रही है और काफी प्रचलित है। हमने यहां के पानी की जांच की है। इसमें बैक्टीरिया पाए गए हैं। लेकिन यह मशीन उन बैक्टीरिया से निपटने में सक्षम तो है ही, साथ ही यह उन्हें कभी पनपने भी नहीं देगी। क्योंकि यह मशीन पानी को तीन चरणों में साफ करती है और तापमान को 12 डिग्री सेंटीग्रेड पर बनाए रखती है जिससे पानी में बैक्टीरिया नहीं पनप पाते हैं।
सुलभ की उपाध्यक्ष आभा कुमार ने इस मौके पर बताया कि किस प्रकार सुलभ ने इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट की शुरुआत की और यहां इसे स्थापित किया। साथ ही इस अवसर पर राजस्थान के अलवर और टोंक जिले की कई पुनर्वासित महिला स्कैवेंजर्स अपने यजमानों के साथ उपस्थित रहीं। डॉ. पाठक ने इन महिलाओं का उदाहरण देते हुए इसे महिला सशक्तीकरण की दिशा में बहुत बड़ा कदम बताया। वहीं सुलभ की सामाजिक बदलाव के लिए की गई बड़ी पहलों की प्रतिमूर्ति के रूप में वृंदावन से आई विधवा माताएं भी इस कार्यक्रम में उपस्थित रहीं, जिनके अधूरे जीवन में सुलभ प्रणेता की प्रेरणा से अनगिनत रंग भर गए। साथ ही हरियाणा, जम्मू-कश्मीर और लुधियाना से आईं ऐसी कई महिलाएं भी इस मौके पर उपस्थित थीं, जिनके घरों में शौचालय नहीं था, लेकिन सुलभ के प्रयासों और सहायता से आज उनके घर में ‘इज्जत घर’ अर्थात शौचालय है और उनका परिवार कई बीमारियों से मुक्त होकर खुशियों भरा जीवन जी रहा है। इस शुभ मौके पर सभी गणमान्य अथितियों, डॉ. पाठक और उनकी पत्नी अमोला पाठक को शॉल और फूल देकर सम्मानित किया गया। 



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