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बुधवार, 24 अप्रैल 2019

जब बना सुलभ शौचालय तो आई असली आजादी

सिक्किम के राज्यपाल गंगा प्रसाद ने सुलभ ग्राम का दौरा किया, जहां डॉ. विन्देश्वर पाठक पुनर्वासित स्कैवेंजर्स और विधवा माताओं ने उनका स्वागत किया

उत्तर-पूर्वी भारत के छोटे राज्य सिक्किम के लोगों के चेहरों पर एक चमकीली, खूबसूरत मुस्कुराहट हर वक्त देखने को मिलती है। लोगों में गर्व की भावना रहती है। वजह ऐसी उपलब्धियां हैं, जो मानव जीवन की मूलभूत आवश्यकताओं में शामिल है। यह गौरव, भारत के पहले खुले में शौचालय से मुक्त (ओडीएफ) राज्य के होने का है।
लेकिन सिक्किम का यह महान सफाई अभियान सिर्फ एक रात में ही संभव नहीं हुआ। यह लोगों के उस निरंतर प्रयास के कारण ही हुआ, जो 15 साल पहले साल 2003 में शुरू हुआ था। ऐसे प्रयासों के पीछे सिक्किम के लोगों की प्रतिबद्धता और आत्मनिर्भर अनुशासन था। लोगों ने एक ऐसा समग्र दृष्टिकोण अपनाया, जो स्वच्छता और स्वास्थ्य में सुधार करे, पर्यावरण की रक्षा करे और राज्य के विकास की गति को उच्चतम स्तर पर ले जाए।
शौचालयों के निर्माण से लेकर हर घर में प्रचार-प्रसार किया गया, स्कूलों में स्वच्छता और स्वास्थ्य से जुड़े शिक्षा के कार्यक्रम शुरू किए गए। एक दशक से अधिक समय तक ऐसे ही अनेक प्रयास हुए, जिनके माध्यम से सिक्किम को स्वच्छता और सफाई के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार मिला और यह 'निर्मल राज्य' के रूप में उभरा और आखिर में देश में ओडीएफ घोषित होने वाला पहला राज्य बना।
सिक्किम में साफ भोजन, साफ हवा और साफ पानी है। यह पूरी तरह से आर्गेनिक (जैविक) राज्य भी है। सिक्किम स्वच्छ, स्वस्थ और खुश रहने का एक आदर्श उदाहरण है।
इस तरह के एक सुंदर राज्य के शासन का हिस्सा होना गर्व का विषय है, लेकिन यह सबकी जिम्मेदारी को भी बढ़ा देता है। स्वच्छता सर्वोच्च प्राथमिकता है, क्योंकि किसी उपलब्धि को बनाए रखना उस ऊंचाई तक पहुंचने से कहीं अधिक कठिन और आवश्यक होता है। स्वच्छता की भावना और उसकी महत्वपूर्ण भूमिका, सिक्किम के 16वें राज्यपाल गंगा प्रसाद के दृष्टिकोण में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। प्रसाद की बातों में ही आपको सबसे स्वच्छ राज्य के राज्यपाल होने की झलक मिल जाएगी।
ऐसे ही एक अन्य व्यक्ति जिनके लिए स्वच्छता और साफ-सफाई ही जीवन का सबसे बड़ा उद्देश्य है, सुलभ इंटरनेशनल सोशल सर्विस ऑर्गनाइजेशन के संस्थापक डॉ. विन्देश्वर पाठक हैं, जो स्वच्छता अभियान सिक्किम से भी काफी पहले शुरू कर चुके थे। एक ऐसी यात्रा जो डॉ. पाठक ने 50 साल पहले शुरू की थी, आज उससे पूरी दुनिया अवगत है। इसीलिए सिक्किम के माननीय राज्यपाल जिनके बारे में अब तक सुनते-पढ़ते आए थे, उसका साक्षात अनुभव करने के लिए उन्होंने नई दिल्ली में सुलभ ग्राम का दौरा किया। 
पूरा सुलभ परिसर, माननीय राज्यपाल का स्वागत करने के लिए उत्साहित था। राज्यपाल गंगा प्रसाद शंख ध्वनि की गूंज के बीच सुलभ परिसर पहुंचे, जहां डॉ. विन्देश्वर पाठक द्वारा माला पहनाकर गर्मजोशी से उनका स्वागत किया गया। इसके बाद सुलभ के वरिष्ठ लोगों, अलवर से आईं पुनर्वासित स्कैवेंजर्स और वृंदावन की विधवा माताओं ने भी राज्यपाल महोदय का हार्दिक स्वागत किया।

स्वतंत्रता और धर्म
डॉ. पाठक और सुलभ संगठन द्वारा हजारों लोगों के जीवन को बदहाली से खुशहाली में बदला गया है। डॉ. पाठक की पहल से जिन लोगों के जीवन में बेहतर परिवर्तन आए, उनमें से कुछ कार्यक्रम में उपस्थित थे और उन्होंने गंगा प्रसाद को अपने जीवन में आए बदलाव के बारे में बताया।
इस अवसर पर सुलभ इंटरनेशनल की अध्यक्ष और अलवर की रहने वाली उषा शर्मा (पहले चौमर) ने अपनी मार्मिक कहानी सुनाई, कि किस तरह सिर पर मैला ढोने से लेकर एक गरिमामय जीवन जीने के लिए उन्होंने सुलभ और डॉ. पाठक की सहायता से लड़ाई लड़ी। उन्होंने कहा, ‘यह एक सुखद क्षण है कि हमें आज महामहिम गंगा प्रसाद से मिलने, उनका स्वागत करने और उनसे बात करने का अवसर मिला है। इससे पहले जब हम शुष्क शौचालयों की सफाई के घृणित कार्य में लगे थे, हमें किसी से भी मिलने की अनुमति नहीं थी। हम 'अस्पृश्य' थे। लेकिन सुलभ ने हमें इस घृणित कार्य से मुक्त कराया और उसके बाद तो पूरा जीवन ही बदल गया। अब हम न केवल सबसे मिलते हैं, स्वागत करते हैं, बल्कि एक साथ बैठते हैं, एक साथ खाते हैं, एक साथ प्रार्थना करते हैं और समाज के किसी अन्य व्यक्ति की तरह ही वार्तालाप भी करते हैं।’
उन्होंने कहा, ‘पाठक जी हमारी दुर्दशा को समझ सकते थे, क्योंकि हमारे दर्द को व्यावहारिक रूप से अनुभव करने के लिए वह खुद अपने ​िसर पर मानव मल ढोने की हिम्मत जुटा सके। डॉ. पाठक हमारे गांधी हैं, वह हमारे भगवान हैं।’
लुधियाना से आई परमजीत कौर ने इस मौके पर कहा, ‘हमारे घरों में शौचालय नहीं थे और हम खुले में जाते थे। हमें मीलों चलना पड़ता था और यह हमारे दैनिक जीवन में किसी बहुत बड़ी बाधा की तरह शामिल था। हम गरीब थे, इसीलिए हम अपने घर में शौचालय नहीं बना सके। लेकिन जब मेरे घर में सुलभ शौचालय बना, तभी लगा की अब हमें असली आजादी मिली है। हमारा घर सच में सपनों का घर बन गया। आज हमारे घरों में शौचालय हैं, जिनके कारण हम परेशानी से मुक्त होकर दिनभर काम कर रहे हैं, साथ ही बच्चे पूरी तरह से अपने अध्ययन पर ध्यान केंद्रित कर पा रहे हैं। इस सबके साथ ही, भारत ने अपनी असली आजादी हासिल की है। और यह असली आजादी, हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और डॉ. पाठक ने हमें दी है।
इस अवसर पर जम्मू-कश्मीर से आए अब्दुल लतीफ खान ने डॉ. पाठक को दूसरा गांधी बताते हुए अपने संबोधन में कहा, ‘डॉ. पाठक के मिशन को परिभाषित करने और प्रशंसा करने के लिए कोई भी शब्द पर्याप्त नहीं है। डॉ. पाठक भगवान हैं, डॉ. पाठक एक धर्म हैं। हमारे पाठक जी वह धर्म हैं, जिसने सभी को स्वीकार किया है, गरीबों को समाज में ऊपर उठाया है, समाज में 'अस्पृश्य' शब्द के मायने खत्म कर दिए हैं।

आजादी का दूसरा आंदोलन
इस अवसर पर अपने संबोधन में, डॉ. विन्देश्वर पाठक ने कहा कि उन्होंने वह सब कुछ किया है, जो वह कर सकते थे और वह अभी भी कर रहे हैं। लोग आमतौर पर केवल समस्याओं की बात करते हैं, लेकिन सुलभ उन समस्याओं का समाधान करता है।
परमजीत कौर की बातों को दुहराते हुए डॉ. पाठक ने कहा, ‘कौर का कहना है कि जब उनके घर में शौचालय बना, तो उन्हें लगा कि उन्हें सच में आजादी मिली है और यही उनके लिए स्वतंत्रता का असली अर्थ था। परमजीत का यह कहना सच में बड़ी बात है। यह हमारे लिए भी एक संदेश है। हम गांधी के स्वतंत्रता आंदोलन का हिस्सा नहीं थे। लेकिन उनका दूसरा सबसे बड़ा आंदोलन जातिवाद, लिंग पूर्वाग्रह, विधवाओं के साथ कठोर व्यवहार, उचित स्वच्छता की कमी के खिलाफ एक लड़ाई थी।’
इसके साथ ही डॉ. पाठक ने बताया कि कैसे बिहार ने आजादी के दोनों आंदोलन में बड़ा योगदान दिया है। गांधी ने बिहार से ही अपना दूसरा स्वतंत्रता आंदोलन शुरू किया था। और गांधीजी के दूसरे स्वतंत्रता आंदोलन (स्वच्छ भारत), जिसका उन्होंने हमेशा सपना देखा, को भी सुलभ ने बिहार से ही शुरू किया। गौरतलब है की महामहिम गंगा प्रसाद भी बिहार से हैं और डॉ. पाठक भी यहीं से हैं। इसीलिए माननीय राज्यपाल पहले से ही डॉ. पाठक के कार्यों से अवगत हैं।
डॉ. पाठक ने कहा कि सुलभ ने सक्रिय रूप से इस स्वतंत्रता आंदोलन को आगे बढ़ाया है और यह सब अहिंसा के साथ किया है। डॉ. पाठक या उनके संगठन ने कभी भी कोई विरोध प्रदर्शन नहीं किया है और न ही उन्होंने कभी भी किसी के लिए बुरे शब्दों का प्रयोग किया है। उन्होंने समाज की दुर्दशाओं को देखा और समझा है और उन समस्याओं को हल करने के ऐसे तरीके ईजाद किए जिन्हें समाज आसानी से स्वीकार कर सकता है।
‘आज आप पूर्व स्कैवेंजर्स और जिनके घर ये स्कैवेंजर्स मानव-मल साफ करने जाते थे, उन दोनों से मिले हैं। आज, वे सुलभ ग्राम में आपका स्वागत करने के लिए एक साथ खड़े हैं। यह एक बड़ा सामाजिक परिवर्तन है, कि जिन लोगों को कभी एक-दूसरे को छूने की इजाजत भी नहीं थी, वे आज साथ खड़े होकर बात कर रहे हैं और आपका स्वागत कर रहे हैं। यही वह असली आजादी है, जिसे सुलभ ने दी है।’

वह बनो जो आपको गरिमा दे
महात्मा गांधी चाहते थे कि उन्हें (मैनुअल स्कैवेंजर्स को) इस समाज में सम्मानजनक जगह मिलनी चाहिए। सुलभ ने एक कदम आगे बढ़ाया और न केवल उनके उस सम्मान को सुनिश्चित किया जिसके वे हकदार थे, बल्कि उन्हें समाज में ब्राह्मणों के रूप में भी बदल दिया। डॉ. पाठक याद करते हैं कि इन लोगों को पहले धमकी दी गई थी कि यदि वे मंत्रों-वेदों को पढ़ने की कोशिश करेंगे, तो उनकी जीभ काट दी जाएगी और कान में कांच के टुकड़े भर दिए जाएंगे।
‘उसी समुदाय की महिलाओं ने आज आपके स्वागत में संस्कृत श्लोकों का जाप किया। इस बदलाव को लाने के लिए, हमने कोई भी हिंसा से भरा और निरर्थक कदम नहीं उठाया, न तो वेदों या पुराणों को फाड़ा और ना ही उन्हें जलाया।’
डॉ. पाठक ने कहा कि लोग अक्सर उनसे सवाल करते हैं कि आपने उन्हें सिर्फ 'ब्राह्मण' ही क्यों बनाया? इसके जवाब में डॉ. पाठक कहते हैं, ‘मुझे लगता है कि यह केवल 'ब्राह्मण' के रूप में ऊंची जाति को अपनाने के बारे में नहीं है, बल्कि इस तरह से आप किसी भी उस जाति को अपना सकते हैं जिससे आपको उचित सम्मान मिले। ये आपकी पसंद है। मैं एक ब्राह्मण हूं, इसीलिए मैंने उन्हें भी इसी जाति में परिवर्तित किया, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि सभी को ब्राह्मण ही बनाना या बनना है।’  
डॉ. पाठक ने कहा, ‘गांधी ने कहा था कि दोनों में से केवल एक ही अस्तित्व में रह सकता है - या तो हिन्दू धर्म या जातिवाद। तो मैंने सोचा कि अस्पृश्यता से छुटकारा पाने के लिए जब बेहतर रास्ते मौजूद हैं तो धर्म को क्यों खत्म होना चाहिए। तो मैं इस सिद्धांत के साथ आया कि अगर लोगों को अपने धर्मों को बदलने की इजाजत है, तो जाति को बदलने की क्यों नहीं? आप जैसे भी चाहें अपनी जाति को बदलने के लिए स्वतंत्र हैं।’

ईएम फोस्टर ने लिखा, सुलभ ने किया
ईएम फोस्टर ने कहा था कि 'अस्पृश्यों' को उनकी दुर्दशा से बाहर निकालने के लिए शौचालयों की आवश्यकता है। मुल्कराज आनंद के 1935 में लिखे उपन्यास 'अस्पृश्य' (अनटचेबल) की प्रस्तावना में उन्होंने लिखा कि सिर्फ और सिर्फ फ्लश सिस्टम ही अस्पृश्यों को बचा सकता है। 5000 साल पुरानी प्रथा को समाप्त करने के लिए सुलभ ने सबसे पहले 'सुलभ शौचालय' का आविष्कार किया। डॉ. पाठक ने कहा कि अगर सुलभ ने इसका आविष्कार नहीं किया होता, तो न ही मैनुअल स्कैवेंजिंग की घृणित प्रथा समाप्त होती और न ही देश खुले में शौचालय से मुक्ति पाने की तरफ आगे बढ़ता।
गांधीजी चाहते थे कि वाल्मीकि समाज की किसी महिला को इस देश का राष्ट्रपति बनाना चाहिए। डॉ. पाठक ने बताया कि गांधी के इस विचार ने उन्हें अपनी संस्था का अध्यक्ष उषा शर्मा को बनाने के लिए प्रेरित किया। ‘मैंने सोचा कि देश का राष्ट्रपति चुनने का मुझे कोई अधिकार नहीं है, लेकिन क्यों न इस विचार को सुलभ संस्था में अपनाया जाए। और आज हमारी संस्था की अध्यक्ष पूर्व स्कैवेंजर उषा शर्मा हैं। अगर आप मुझसे पूछें कि पिछले पांच दशकों में मैंने क्या किया है, तो अब मुझे जवाब देने की जरूरत नहीं होगी। क्योंकि मेरे जवाब की जगह मेरी किताबें यानी मेरे लोग खुद ही इस बारे में बता देंगे। आज ये सभी लोग जो यहां उपस्थित हैं और मन की बात कहने आए हैं, इस बात का सबूत हैं कि मेरी किताबें, मेरे पौधे बोलते हैं।’ डॉ पाठक ने अंत में कहा कि वही जीवन सार्थक है जो दूसरों के लिए जिया जाता है।

इस वक्त की जरूरत
इस मौके पर लोगों को संबोधित करते हुए सिक्किम के राज्यपाल गंगा प्रसाद ने कहा कि शौचालय के बिना बना घर, बीमारियों का घर होता है। जब बाहर अंधेरा रहेगा तब तो महिलाएं खुले में शौच के लिए चली जाएंगी, लेकिन दिन के वक्त क्या होगा जब बाहर उजाला रहेगा, उस वक्त महिलाएं कैसे शौच के लिए जाएंगी। शौच को लंबे समय तक रोक कर रखना, कई सारी बीमारियों को दावत देना है।
‘आज जब मैंने सुलभ ग्राम परिसर का दौरा किया और डॉ. पाठक के कार्यों को करीब से जांचा-परखा, तब मुझे बेहद खुशी हुई कि वह सच में दिल से महात्मा गांधी के सपनों को पूरा कर रहे हैं। अपनी सुलभ संस्था के माध्यम से डॉ. पाठक स्वच्छता, साफ-सफाई और हाईजीन को बढ़ावा दे रहे हैं। उनके प्रयासों ने एक समय समाज में निचले पायदान पर रहने वाले स्कैवेंजर्स को बेहतर जीवन दिया है। पाठक जी के योगदान को सिर्फ समाज ने ही नहीं, बल्कि सरकार ने भी सराहा और सम्मानित किया है।’
पटना का निवासी होने के नाते उन्होंने बताया कि वह डॉ. पाठक के कार्यों के लंबे समय से साक्षी रहे हैं। बेहद मुश्किल वक्त को झेलने के बाद भी उनका समर्पण और योगदान अद्वितीय है। यह उनकी सच्चाई, मजबूत इच्छाशक्ति, प्यार और लोगों का उनको समर्थन ही है जो उन्हें लगातार आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रहा है।
गंगा प्रसाद ने कहा, ‘यह इस वक्त की जरूरत है कि हम स्वच्छता के माध्यम से मानव अभिरुचियों को पूरा करें। समाज ऐसे व्यक्तित्व को सलाम करता है। केवल कुछ ही ऐसे लोग हैं जो अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए अपना रास्ता बनाते हैं और उसी पर चलते हैं। ऐसे ही एक दुर्लभ व्यक्ति डॉ. पाठक भी हैं। यह रास्ता समाज को फायदा पहुंचाता है, उत्पीड़ितों को ऊपर उठाता है, गरीबी को दूर करता है और समाज को एकता के सूत्र में पिरोता है। डॉ. पाठक ने समाज को विकास का रास्ता दिखाया है।

कोई भी कार्य छोटा या बड़ा नहीं होता
राज्यपाल ने अस्पृश्यता और जातिवाद जैसी प्रथाओं को ‘समाज के लिए नासूर’ बताया। उन्होंने कहा कि यही कारण थे कि हमारा देश ब्रिटिश राज का दास बन गया। 
उन्होंने आगे कहा, ‘सामाजिक व्यवस्था को बनाए रखने के लिए यह आवश्यक है कि हम सभी मानव कल्याण की ओर अपनी ऊर्जा का निवेश करें। उदारता और करुणा मानव को विनम्र बनाते हैं। जो हमेशा मानवता को प्रतिबिंबित करते हैं और समाज के प्रति समर्पित होते हैं, ऐसे व्यक्तित्व ही इतिहास बनाते हैं। डॉ. पाठक उन्हीं व्यक्तित्वों में से हैं।’ उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि कैसे देश के लगभग हर नुक्कड़ और कोने में सुलभ शौचालयों की उपस्थिति के साथ भारत के स्वच्छता परिदृश्य में सुधार संभव है। इंदौर एशिया का सबसे साफ शहर है और सुलभ इंटरनेशनल ने उसे इस ऊंचाई पर पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सुलभ ने सिखाया है कि कोई काम छोटा या बड़ा नहीं होता है। बस उस काम की ओर आपका जुनून उसे आकार देता है।
राज्यपाल ने कहा, ‘मुझे सूचित किया गया है कि सुलभ ने स्वच्छ पेयजल प्रदान करने के लिए भी अपने प्रयासों को आगे बढ़ाया है। देश के सपनों को वास्तविकता में बदलने के लिए स्वच्छता और स्वास्थ्य जैसे सुलभ द्वारा उठाए गए कदम प्रशंसनीय हैं।’

स्वच्छ भारत, स्वस्थ भारत
माननीय राज्यपाल ने आग्रह करते हुए कहा, ‘आज समाज और राष्ट्र निर्माण के लिए नागरिकों को साफ और स्वस्थ पर्यावरण मुहैया करना सबसे बड़ी जरूरत है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपने प्रमुख ‘स्वच्छ भारत अभियान’ के तहत लोगों को स्वच्छता के महत्वपूर्ण आयामों के बारे में अवगत करा चुके हैं। राष्ट्र के हर नागरिक को उनके ‘स्वच्छ भारत, स्वस्थ भारत’ मिशन को कामयाब बनाने के लिए योगदान करना होगा।’ खुले में शौच के अभ्यास को समाप्त करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के परिणामस्वरूप हमारे गांव एक के बाद एक खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) हो रहे हैं। यह एक संकेत है कि हमारा देश स्वस्थ भारत बनने की ओर बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि विभिन्न स्थानों पर डॉ. पाठक द्वारा निर्मित शौचालय लोगों के लिए एक वरदान हैं। लोग खुश हैं कि वे उचित शौचालय सुविधाओं का उपयोग करते हैं और निश्चित रूप से उन्हें उनके काम के लिए आशीर्वाद देना चाहिए। ‘जैसा कि डॉ. पाठक ने कहा, यह उन सभी लोगों के लिए स्वतंत्रता की भावना की तरह है। सबसे पहले ब्रिटिश शासन से स्वतंत्रता थी और अब इस तरह के कलंक से स्वतंत्रता है। दुनिया ने भी उनके योगदान के लिए डॉ. पाठक को मान्यता दी है।’

डॉ. पाठक की प्रशंसा
प्रसाद ने सभी के लिए शौचालयों के अलावा सुलभ की अन्य पहलों की भी खूब बात की। उन्होंने कहा कि शिक्षा एक राष्ट्र और उसके समाज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है सुलभ पब्लिक स्कूल और सुलभ व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्र बच्चों और महिलाओं को स्वतंत्र और आत्मनिर्भर बना रहा है, जिससे हम मजबूत भारत का रास्ता तय करने के लिए आगे बढ़ सकते हैं और खुद को राष्ट्र की सेवा में समर्पित कर सकते हैं।
‘डॉ पाठक ने शौचालयों का निर्माण करके अपना आंदोलन शुरू किया और वे दुनिया को सुलभ जैव गैस संयंत्र, सुलभ जल उपचार संयंत्र, शौचालय के अनोखे सुलभ म्यूजियम (संग्रहालय) और मानव-अपशिष्ट से बिजली उत्पादन जैसी तकनीकें देने के लिए आगे बढ़े। वह सच में प्रशंसा के पात्र हैं।’
अंत में राज्यपाल ने कहा, ‘डॉ. पाठक के साथ मेरी शुभकामनाएं हैं कि वह समाज के विकास, प्रगति और सुधार में अपना बहुमूल्य योगदान देते रहें। गौतम बुद्ध, महावीर और महात्मा गांधी जैसे लोगों के लिए बिहार प्रेरणा और ज्ञान की भूमि रही है। अब डॉ. पाठक जैसे लोग न केवल भारत बल्कि दुनिया को जागृत कर रहे हैं और लगातार सामाजिक कार्य भी कर रहे हैं। उनके बारे में कहने के लिए कोई भी शब्द पर्याप्त नहीं है।’

अनोखे सुलभ ग्राम का दौरा
राज्यपाल गंगा प्रसाद के साथ उनके ओएसडी मनोज संधवार और उनके अतिरिक्त सचिव आईपीएस ठाकुर थापा भी थे। डॉ. विन्देश्वर पाठक ने उनका भी पारंपरिक तरीके से स्वागत किया। मेहमानों ने पूरे सुलभ ग्राम परिसर का दौरा किया। राज्यपाल ने बहुत ही तन्मयता से ‘सुलभ स्वच्छता रथ’ को देखा। यह रथ देश के दूरदराज के इलाकों में स्वच्छता का संदेश फैलाता है। इसके आलावा उन्होंने सार्वजनिक शौचालय आधारित बायोगैस संयंत्र, स्वास्थ्य केंद्र, जल एटीएम और रसोई बायोगैस ईंधन परिचालन भी देखा।
उसके बाद मेहमानों को सुलभ पब्लिक स्कूल में ले जाया गया, जहां उनका स्वागत छात्रों ने किया। व्यावसायिक प्रशिक्षण शाखा के प्रशिक्षुओं को देखते हुए प्रसाद ने छात्रों द्वारा खुद ही सस्ते और स्वच्छ सैनेटरी नैपकिन के निर्माण और सिलाई में रुचि ली।
सुलभ शौचालय म्यूजियम के अन्दर, मेहमान यह देखकर आश्चर्यचकित रह गए कि भारत फ्लश शौचालय और सीवर सिस्टम का चैंपियन रहा है। उसके बाद मेहमानों ने सुलभ तकनीक पर आधारित टू-पिट-पोर-फ्लश शौचालय को देखा। मेहमानों का माला, शॉल और स्मृति चिन्ह के साथ पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया।



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