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शुक्रवार, 22 मार्च 2019

सुरक्षित सीवर सफाई का सुलभ ‘होप’

स्वच्छता और सामाजिक सुधार संस्था सुलभ इंटरनेशनल ने विश्व शौचालय दिवस के मौके पर सीवर क्लीनिंग मशीन पेश की, इस मशीन की मदद से अब मैन्युअल सीवर सफाई के खतरों से तो बचा ही जा सकेगा, साथ ही इसके द्वारा उनकी गहराई तक सफाई भी की जा सकेगी

विश्व शौचालय दिवस के दिन सीवर लाइन की मैन्युअल सफाई करने वाले सफाईकर्मियों को सुलभ ने शानदार तोहफा दिया। सुलभ द्वारा प्रस्तुत की गई ‘होप’ नामक मशीन वह उम्मीद की रोशनी है, जिससे उनकी अनमोल जान को अब कोई खतरा नहीं होगा। सीवर की मैन्युअल सफाई के दौरान सफाईकर्मियों को अक्सर कई बड़े खतरों से जूझना पड़ता है, इसीलिए इसे दुनिया का सबसे खतरनाक और घृणित काम भी माना जाता है। लेकिन अच्छी खबर ये है कि अब इन खतरों से न सिर्फ बचा जा सकता है, बल्कि बरसात के दिनों में नगरों और महानगरों में जल जमाव की समस्या से भी निपटा जा सकता है। विश्व शौचालय दिवस के मौके पर स्वच्छता और सामाजिक सुधार संस्था सुलभ इंटरनेशनल ने सीवर क्लीनिंग मशीन पेश की है। इस मशीन का उद्घाटन दिल्ली प्रदेश के बीजेपी अध्यक्ष मनोज तिवारी और राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग के मनहर वालजीभाई जाला के साथ दिल्ली के तीनो नगरनिगमों के अध्यक्षों और सुलभ संस्थापक डॉ. पाठक ने नई दिल्ली के कंस्टीट्यूशन क्लब के मावलंकर सभागार में किया। शंख ध्वनि, नारियल और अलवर-टोंक की पुनर्वासित स्कैवेंजर्स महिलाओं के मंत्रोच्चार के बीच इस मशीन का शुभारम्भ हुआ और लोगों में इस बात की उम्मीद जगी कि अब सीवर की मैन्युअल सफाई से छुटकारा मिल सकेगा और सफाईकर्मियों को कोई खतरा नहीं होगा। साथ ही इस मौके पर ‘सीवर श्रमिकों की मौत को रोकने के लिए सफाईकर्मियों के लिए सुरक्षा उपाय’ विषय पर एक संगोष्ठी का भी आयोजन किया गया जिसमें राजीव गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय, अरुणाचल प्रदेश के उप-कुलपति प्रो. साकेत कुशवाहा, प्रो. जॉनी मैक, स्टेनफोर्ड विश्वविद्यालय, अमेरिका, नीलांशु भूषण बसु, मुख्य इंजीनियर, कोलकाता म्युनिसिपल कॉरपोरेशन, के.जी.नाथ, अध्यक्ष, विज्ञान और तकनीक, सुलभ इंटरनेशनल आदि लोग भी उपस्थित थे।

सीवर सफाई के दौरान मौतों पर लगेगी लगाम
सरकारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2017 की शुरुआत से सीवर या सेप्टिक टैंक की सफाई करते समय हर पांच दिनों में एक सफाईकर्मी की मृत्यु हुई है। मैगसेसे पुरस्कार विजेता बेजवाडा विल्सन का सफाई कर्मचारी आंदोलन उन लोगों के आंकड़े जुटा रहा है जो गए तो थे सीवर की सफाई करने और केवल लाश बनकर बाहर निकले। साल 2010 से अब तक 356 ऐसी मौतें हो चुकी हैं, यानी 44 हर साल। वहीं विभिन्न स्रोतों से प्राप्त जानकारी के अनुसार पिछले तीन वर्षों में सीवर लाइनों की सफाई के दौरान 1300 से ज्यादा सफाई कर्मचारियों की मौत हुई है। अब सुलभ द्वारा पेश इस मशीन से अब ऐसी मौतों को रोका जा सकेगा। 

चट्ट देनी मार देली गंदगी को तमाचा: मनोज तिवारी
इस मौके पर उपस्थित दिल्ली प्रदेश बीजेपी के अध्यक्ष मनोज तिवारी ने इस दिन को एेतिहासिक बताते हुए कहा कि सुलभ द्वारा इस मशीन से महानगरों की बड़ी-बड़ी सीवर लाइन की सफाई में कोई समस्या नहीं आएगी और हमारे कर्मचारियों की अनमोल जान को भी कोई खतरा नहीं रहेगा। उन्होंने डॉ. पाठक की तारीफ करते हुए कहा कि कोई दूसरा डॉ. पाठक नहीं बन सकता। डॉ. पाठक के काम को हमारे प्रधानमंत्री से लेकर पूरी दुनिया तक ने सराहा है। 2.5 करोड़ की आबादी वाली दिल्ली की विशाल सीवर लाइन को साफ करने में कई मजदूरों की जान गई है। लेकिन उनकी जान बचाना सरकारों की जिम्मेदारी है। कई बार मशीन से लेकर इक्विपमेंट लाने तक की सलाह दी गई। लेकिन इस सबको हकीकत में पाठक जी ने उतारा है। तिवारी ने कहा कि मैंने जब मशीन का उद्घाटन किया तब मैंने करीब से इस मशीन को देखा कि 90 फीट लंबी रॉड के एक छोर पर कैमरा लगा है, जब यह रॉड सीवर लाइन में उतारी जाएगी तो अंदर की हर गतिविधि की जानकारी बाहर कंप्यूटर स्क्रीन पर मिलेगी। इस तरह की मशीन से सच में हम सफाईकर्मियों की जान बचा सकते हैं। यह सरकार की भी जिम्मेदारी है कि उसे यह पता हो कि जो व्यक्ति सीवर साफ करने के लिए अंदर जा रहा है, उसके पास सभी तकनीकी उपकरण हैं या नहीं।
मनोज तिवारी ने कार्यक्रम में मौजूद दिल्ली के तीनों नगरनिगमों के अध्यक्षों से कहा कि वे जल्द से जल्द अपने निगम के लिए इस मशीन को खरीदें। साथ ही तिवारी ने सुलभ सीवर क्लीनिंग मशीन व्हीकल को सीवर सफाई के लिए निगम में शामिल करने के लिए भी कहा। तिवारी ने कहा कि सीवर किसी भी विभाग के पास हो, लेकिन इसमें जहरीली गैसों से होने वाली मौतों को लेकर हम कब तक एक-दूसरे को कोसते रहेंगे। मनोज तिवारी ने कार्यक्रम में अपना मशहूर गाना ‘चट्ट देनी मार देली खींच के तमाचा, हीही हंस देनी रींकिया के पापा’ भी सुनाया। उन्होंने अपने इस गाने को गंदगी के ऊपर गाते हुए सुनाया, ‘चट्ट देनी मार देनी गंदगी को तमाचा’।

मशीन से सीवर सफाई में क्रांतिकारी बदलाव आएगा: डॉ. विन्देश्वर पाठक
सुलभ स्वच्छता और सामाजिक सुधार आंदोलन के संस्थापक डॉ. विन्देश्वर पाठक ने कहा कि विश्व शौचालय दिवस के इस मौके पर सीवर सफाई की यह मशीन बड़ा क्रांतिकारी बदलाव लाएगी। इस मशीन से सीवर लाइन की मैन्युअल सफाई की समस्या से छुटकारा मिलेगा। सीवर की सफाई के लिए मशीन आयात करने के बारे में उन्होंने बताया कि अक्टूबर माह में वह और पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद यादव पटना से साथ ही दिल्ली आ रहे थे। यात्रा के दौरान शरद जी ने सीवर सफाई के दौरान होने वाली मौतों पर अपनी चिंता व्यक्त की और कहा कि अगर हो सके तो आप कुछ ऐसा करें, जिससे सीवर की सफाई के दौरान कर्मियों की होने वाली मौतों पर लगाम लग सके। तभी मेरे मन में यह विचार आया। अक्टूबर में शरद यादव जी से बात हुई और नवंबर माह में हमने यह मशीन चीन से मंगवाई। सिर्फ 25 दिनों के अंदर 43 लाख रुपए की लागत से सीवर की सफाई के लिए यह मशीन मंगवाई गई। अब सफाई के दौरान किसी कर्मी को सेप्टिक टैंक में नहीं उतरना पड़ेगा। अगर सीवर लाइन में किसी कर्मी जाना पड़ा तो उसे सभी उपकरणों के साथ भेजा जाएगा। डॉ. पाठक ने कहा कि यदि सिविक संस्थाओं को जरूरत हो तो इस मशीन को मैकेनिकल सफाई के लिए भी लगाया जाएगा। एक महीने के अंदर आई इस मशीन से निश्चित तौर पर बदलाव की इबारत लिखी जाएगी। पाठक ने कहा कि हमें लागत की ओर नहीं, बल्कि उस काम के महत्व की ओर ध्यान देना होगा। उन्होंने कहा कि सुलभ सीवर क्लीनिंग मशीन के जरिए आसानी से अंदर कितनी गंदगी है और गैस की मात्रा के बारे में पता चल सकेगा। इसके उपयोग से हमारे सफाई कर्मचारियों को अपनी जान जोखिम में डालकर सीवर में नहीं जाना पड़ेगा और वह अब अपना काम आसानी से कर सकेंगे।

सुलभ आंदोलन महिला सशक्तीकरण का प्रतीक : डॉ. विन्देश्वर पाठक
डॉ. पाठक ने बताया कि जब हमने 50 साल पहले काम शुरू किया था तब शौचालय को लेकर कोई चर्चा भी करना पसंद नहीं करता था, शौचालय की बात तब बहुत ही घृणित मानी जाती थी। लेकिन आज लोग बहुत ही शान से शौचालय की बात करते हैं और इसका पूरा श्रेय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को जाता है, उन्होंने शौचालय को इज्जत दिलाई है। सुलभ के टू-पिट-पोर-फ्लश शौचालय के आविष्कार के बिना देश मैला ढोने से मुक्त नहीं हो पाता। 
डॉ. पाठक ने इस मौके पर कहा कि सुलभ का सामाजिक सुधार आंदोलन महिला सशक्तीकरण का बहुत बड़ा उदाहरण है। सुलभ ने महिलाओं को मैला ढोने से मुक्ति दिलाकर आर्थिक आजादी भी दिलाई है और उनके लिए ट्रेनिंग सेंटर खोले हैं। पाठक ने पुनर्वासित स्कैवेंजर उषा शर्मा का उदहारण देते हुए बताया कि जो 2003 तक कभी मैला ढोती थीं, उनको जब 2015 में स्वच्छता के क्षेत्र में पुरस्कार मिला तो वह पीएम के साथ फोटो खिंचवाने के लिए पीरामल जैसे बड़े बिजनेसमैन से भी बात करने में नहीं झिझकीं। मेरे लिए यह महिला सशक्तीकरण के तौर पर बहुत बड़ा दृश्य था। डॉ. पाठक ने एक बार फिर से जोर देकर कहा कि सामाजिक बदलाव के लिए हमने धर्म की तरह ही जाति बदलने पर बल दिया, जिसके बहुत ही बेहतर परिणाम मिले हैं। 

सफाईकर्मियों के लिए सामाजिक बदलाव लाना होगा: मनहर वालजीभाई जाला
इस मौके पर मौजूद राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग के अध्यक्ष मनहर वालजीभाई जाला ने कहा कि सुलभ का स्वच्छता और शौचालय के क्षेत्र में योगदान तो पूरी दुनिया जानती है। लेकिन अब सीवर की सफाई के लिए मशीन लाकर सुलभ ने क्रांतिकारी परिवर्तन की नींव रख दी है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी खुद अपना शौचालय साफ करते थे और अपनी पत्नी कस्तूरबा से भी शौचालय साफ करने के लिए कहते थे। जब कस्तूरबा ने मना किया तो गांधी ने कहा कि हम साथ तभी रहेंगे जब तुम भी शौचालय साफ करोगी। इससे पता चलता है कि गांधी ने शौचालय को किस हद तक महत्त्व दिया था। लेकिन पाठक जी का काम आसान नहीं था, उन्होंने खुद मैला अपने ​िसर पर ढोया है। पाठक जी के बहुत से महान कामों  में एक और महान काम भी जुड़ गया जो उन्होंने ये मशीन लाकर किया है। इससे सफाई के दौरान होनी वाली मौतों पर रोक लगाई जा सकेगी। अभी तक, अगर पिछले दो साल के आंकड़ों को ही देखें तो देश में सफाई के दौरान हर पांच दिन में एक सफाईकर्मी की मौत हो जाती है। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा, यह बदलाव बहुत ही सराहनीय है।
जाला ने कहा कि सफाई कर्मचारियों के लिए सामाजिक बदलाव सबसे जरूरी है। सफाई कर्मचारी सामाजिक और आर्थिक रूप से आगे बढ़ें, इसके लिए हम सभी को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस मशीन के 
आने के बाद अब सीवर में मौतें नहीं होंगी। 
जाला ने कहा कि मशीन आने से मैन्युअल सफाई पर रोक लगेगी, लेकिन जो लोग मैन्युअल सफाई करते थे उनको अब काम नहीं मिलेगा। इसीलिए यह जरूरी है कि मशीन आने के बाद भी मशीन के साथ जितने लोगों की जरूरत हो, यह काम भी उन्हीं को मिले जो मैन्युअल सफाई करते थे। इससे उनका रोजगार नहीं छिनेगा।

मशीन से सीवर में होने वाली मौतों का शत-प्रतिशत उन्मूलन: अनिल खेतान
पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स के पूर्व अध्यक्ष अनिल खेतान ने इस मौके पर कहा कि डॉ. पाठक ने 1968 में अपने दो-पिट मॉडल का आविष्कार किया था। आज 19 नवंबर, 2018 को उन्होंने ऐसी मशीन का उद्घाटन किया है जिसको यदि हर जगह पूरी क्षमता के साथ उपयोग में लाया जाए तो सीवर में होने वाली मौतों का शत-प्रतिशत उन्मूलन किया जा सकता है। हमारे वे भाई-बहन जो मैन्युअल स्कैवेंजर्स हैं, उन्हें इस मशीन की मदद से बचाया जा सकता है।
मैंने डॉ. पाठक को एक पत्र लिखा था और उन्होंने इसका जवाब भी दिया। फिर हमने अपने पत्रों को एक साथ मिलाते हुए प्रधानमंत्री, नितिन गडकरी और अर्जुन राम मेघवाल को लिखा। अनिल खेतान ने अपने पत्र और डॉ. पाठक के विचार को एक पत्र के माध्यम से प्रस्तुत किया और पढ़कर सुनाया।

दिल्ली के तीनों नगरनिगम लाएंगे ‘होप’ मशीन
कार्यक्रम में मौजूद तीनों नगरनिगमों के महापौरों ने इस बात पर सहमति जताई कि जल्द से जल्द सीवर सफाई के लिए ‘होप’ जैसी मशीनों को निगम खरीदेगा और सुलभ की इस मशीन को भी निगम में शामिल किया जाएगा। सफाई के लिए जरूरी आधुनिक मशीनों को जल्द से जल्द खरीदने के बारे में महापौरों ने सहमति दी। साथ ही स्वच्छता फंड के जरिए भी मशीनों की खरीद को संभव बनाने के लिए कहा।   

बिपिन बिहारी सिंह, महापौर, पूर्वी दिल्ली निगम 
इस मौके पर पूर्वी दिल्ली नगरनिगम के महापौर बिपिन बिहारी सिंह ने कहा कि हमारे स्वच्छता अभियान की पहले खूब खिल्ली उड़ाई गई, लेकिन हमने किसी की परवाह नहीं की और आज 90 फीसदी से अधिक स्वच्छता का काम हो चुका है। पूरे भारत में 95 फीसदी से अधिक घरों में शौचालय बन चुके हैं। इस महान काम में सुलभ संस्था का भी बहुत बड़ा योगदान है। हम तीनों महापौर स्वच्छ भारत के पैसे से इन मशीनों को खरीदेंगे। डॉ. पाठक ने हमें सिखाया है कि हमें अपने लिए नहीं, बल्कि दूसरों के लिए जीना है।

नरेन्द्र चावला, महापौर, दक्षिणी दिल्ली निगम
इस मौके पर दक्षिण दिल्ली नगरनिगम के महापौर भाजपा पार्षद नरेन्द्र चावला ने कहा कि पिछले साढ़े चार सालों में स्वच्छता के क्षेत्र में पीएम मोदी ने जो काम किए हैं, उसके लिए उन्हें खड़े होकर सम्मान देना चाहिए। मोदी जी ने भारत के हर घर में शौचालय देने की बात कही थी और अपने इस वादे को उन्होंने निभाया है। लेकिन उनके इस काम में हर भारतवासी का योगदान है, क्योंकि बिना भागीदारी के कुछ भी संभव नहीं होता है। इस सबके लिए आपका साथ जरूरी था, आगे भी आपका साथ हमें चाहिए। नरेन्द्र चावला ने बताया कि हम निगम के स्कूलों में बच्चों को शिक्षा दे रहे हैं कि कैसे साफ-सफाई रखें और शौचालय का सही तरीके से कैसे इस्तेमाल करें। साथ ही निगम स्वच्छता को लेकर बच्चों और शिक्षकों को पुरस्कार भी दे रहा है। सबसे स्वच्छ स्कूल के लिए शिक्षकों को पुरस्कार दिया जा रहा है। चावला ने वादा करने की जगह ‘वचन’ देकर कहा कि खुले में शौच से मुक्ति और स्वच्छता को लेकर जो कुछ भी जरूरी होगा, वह सब कुछ हम करेंगे। चावला ने दिल्ली सरकार से भी पैसा देने का आग्रह करते हुए कहा कि दिल्ली सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी है कि वह हर तरीके से निगम की मदद करे और पैसे मुहैया कराए।

आदेश गुप्ता, महापौर, उत्तरी दिल्ली नगरनिगम 
इस मौके पर उत्तरी दिल्ली नगरनिगम के महापौर आदेश गुप्ता ने कहा कि डॉ. पाठक आजाद हिन्दुस्तान में स्वच्छता परिवर्तन के प्रवर्तक हैं। मेरे घर में भी बना शौचालय पाठक जी की वजह से है। सुलभ शौचालय बनने के बाद से ही मैला ढोने की कुप्रथा खत्म होने की ओर बढ़ी। हमने सार्वजनिक शौचालय और सार्वजनिक सुविधाओं के क्षेत्र में बहुत काम किया है। हम 1800 सार्वजनिक सुविधाघर बनवा रहे हैं, जहां 5 हजार पुरुषों और 5 हजार महिलाओं के लिए सुविधाएं होंगी। पाठक जी ने हमें हौसला दिया है और इन्हीं हौसलों से हमें उड़ान मिली है। हम प्रधानमंत्री के नारे ‘जहां सोच, वहां शौचालय’ पर बहुत तेजी से काम कर रहे हैं और लोगों को ओडीएफ के लिए जागरूक कर रहे हैं। देश की आजादी के बाद जितना काम 70 सालों में हुआ था, उससे ज्यादा काम स्वच्छता के साथ-साथ हर क्षेत्र में पिछले सिर्फ साढ़े चार सालों में हुआ है। गुप्ता ने कहा कि इस नई तकनीक की मदद से सफाईकर्मियों की जान बचाने के साथ-साथ सफाई व्यवस्था को आसानी से और दुरुस्त करना भी अब संभव होगा।

विश्वविद्यालय में शुरू होगा ‘सैनिटेशन कोर्स’: प्रो. साकेत कुशवाहा
इस मौके पर उपस्थित राजीव गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय, अरुणाचल प्रदेश के उप-कुलपति प्रो. साकेत कुशवाहा ने कहा कि डॉ. पाठक के रूप में दुनिया जीवंत गांधी देख रही है। पाठक जी का जज्बा गांधी के अंग्रेजों से लोहा लेने वाले जज्बे जैसा है। शायद इसीलिए सिर्फ 25 दिनों के अंदर ही डॉ. पाठक इस मशीन को चीन से भारत ले आए। पाठक जी ने कई काम किए हैं और कुछ काम तो इतने अद्भुत हैं कि वे सिर्फ पाठक जी ही कर सकते थे, जैसे धर्म की तरह जाति बदलने का काम।
साकेत कुशवाहा ने सफाई कर्मचारियों के बच्चों को विशेष प्राथमिकता देने का सुझाव और आग्रह किया। उन्होंने कहा कि हम कुछ वक्त पहले तक स्वच्छता और शौचालय को लेकर बहुत छोटी सोच रखते थे, अगर हम खुद को विश्व गुरु कहते हैं तो इन सबसे जरूरी चीजों के लिए हमारी सोच इतनी संकीर्ण कैसे हो सकती है। प्रो. कुशवाहा ने भरोसा देते हुए कहा कि आने वाले 29 नवंबर से वह अपने विश्वविद्यालय में ‘स्वच्छता संबंधी पाठ्यक्रम’ शुरू कर देंगे। कुशवाहा ने कहा कि सुलभ के साथ जुड़कर वह खुद को सम्मानित महसूस करते हैं। डॉ. पाठक की यात्रा में हम सभी की भागीदारी की जरूरत है।

शहरीकरण + बढ़ती हुई वर्षा = संकट!: डॉ. नीलांशु भूषण बसु
इस अवसर पर कोलकाता नगरनिगम के प्रधान मुख्य अभियंता डॉ. नीलांशु भूषण बसु ने डॉ. विन्देश्वर पाठक, प्रोफेसर के. जे. नाथ और स्वंय की 'कोलकाता की एक समस्या और सफलता की कहानी' विषय पर एक विस्तृत स्लाइड शो प्रस्तुत किया। इस स्लाइड शो में उन्होंने शहरीकरण को कई समस्यायों की जड़ माना। विशाल शहरों के विशाल जनसमूह की वजह से अंततः अपशिष्ट का ढेर खड़ा हो जाता है। उन्होंने प्रमुखता से एक नकारात्मक फार्मूला रखते हुए कहा - शहरीकरण + बढ़ती हुई वर्षा = संकट! उन्होंने दिल्ली, मुंबई, सूरत, कोलकाता जैसे शहरों और तमिलनाडु राज्य के कुछ हिस्सों की बीच तुलना की। इसके बाद उन्होंने कोलकाता की जल निकासी प्रणाली, सीवर, श्रमिकों और कानूनों की प्रासंगिकता, कोलकाता के वर्तमान परिदृश्य और त्रासदियों को दिखाया। साथ ही उन्होंने प्रस्तावित ट्रीटमेंट यानी उपचार बताए और कोलकाता नगरनिगम द्वारा किए गए सीवर लाइनिंग परियोजनाओं के माध्यम से पानी के संकट को हल करने सहित कोलकाता के सीवरों की सफलता की कहानियों के बारे में बताया।

विदेशी अतिथियों ने भी ली तकनीक की झलक 
गांधी की झलक डॉ. पाठक में: डिकोबे बेन मार्टिन

दक्षिण अफ्रीका से आए सांसद और सार्वजनिक उद्यम उपमंत्री, डिकोबे बेन मार्टिन ने कहा कि डॉ. पाठक और सुलभ इंटरनेशनल और उनके सहयोगियों की सराहना करते हैं। सफाईकर्मियों के मानवाधिकारों और उनकी गरिमा को लेकर डॉ. पाठक की धारणा बहुत ही मजबूत है। डॉ. पाठक के काम से महात्मा गांधी का अहसास होता है। इसमें कोई शक नहीं कि डॉ. पाठक गांधी के सपनों को पूरा करने के लिए अथक प्रयास कर रहे हैं। जिस तरह गांधी ने बिना किसी हिंसा के शांतिपूर्ण तरीके से 2 करोड़ से अधिक अस्पृश्यों को मुक्त करने और उनके मानव अधिकारों को बहाल करने की बात की थी, डॉ. पाठक ने उस अस्पृश्यता को समाप्त करने का बीड़ा उठाया और उसमें सफल रहे। सीवर श्रमिकों की मौत को रोकने के लिए सीवरों की सफाई के दौरान डॉ. पाठक ने जो सुरक्षा उपाय सुझाए हैं, वह बहुत ही बेहतर हैं।

सफाईकर्मियों के लिए यह काम अमेरिका के ‘नागरिक अधिकार आंदोलन’ की तरह
अमेरिका के स्टेनफोर्ड विश्वविद्यालय से आए प्रो. जॉनी मैक ने गांधी का जिक्र करते हुए कहा कि सफाईकर्मियों की परेशानी को उनसे बेहतर कोई नहीं समझ सका। गांधी ने विचार और रास्ते दोनों हमें दिए हैं। कार्यक्रम की थीम पर ‘सीवर श्रमिकों की मौत को रोकने के लिए सफाईकर्मियों के लिए सुरक्षा उपाय’  सीधे तौर पर आज के वक्त के लिए प्रासंगिक है और मार्टिन लूथर किंग जूनियर के ‘नागरिक अधिकार आंदोलन’ की तरह ही है। मार्टिन लूथर ने भी सफाईकर्मियों का समर्थन करते हुए और उनके अधिकारों के लिए लड़ते हुए अपना जीवन अर्पित कर दिया। इसीलिए सुलभ के इस काम और अमेरिका में नागरिक अधिकारों और मानवाधिकारों के काम के बीच एक अतुलनीय संबंध है।

सुलभ तकनीक ने दक्षिण अफ्रीका में बदले हालात
दक्षिण अफ्रीका से आईं कम्युनिटी सेंटर फॉर जस्टिस एंड डेवलपमेंट की निदेशक डॉ. बुसिवाना विनी मार्टिन्स ने इस मौके पर कहा ‘मैं उसी जगह से आई हूं जहां महात्मा गांधी को ट्रेन से बाहर फेंक दिया गया था।’ मार्टिन्स सुलभ दक्षिण अफ्रीका के माध्यम से सुलभ इंटरनेशनल से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने कहा कि डॉ. पाठक ने दक्षिण अफ्रीका में भी अपने स्वच्छता कार्यक्रम को बढ़ाने का फैसला लिया है। हम दक्षिण अफ्रीका में अपनी तकनीक साझा करने के लिए डॉ. पाठक को धन्यवाद करते हैं। सुलभ का कार्यक्रम दक्षिण अफ्रीका के ग्रामीण विद्यालय में शुरू हुआ, जहां शौचालय बहुत ही खराब हालत में थे। लेकिन अब डॉ. पाठक की वजह से स्थिति सुधर रही है। विश्व शौचालय दिवस के इस शुभ मौके पर सभी गणमान्य अथितियों को सुलभ परंपरा के अनुसार शॉल और पुष्प देकर सम्मानित किया गया। साथ ही उन्हें सुलभ के टू-पिट-पोर-फ्लश शौचालय का मॉडल भी भेंट किया गया। 
वहीं स्कूली छात्रों ने खुले में शौच जाने से होने वाले दुष्परिणामों पर आधारित नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया। इस मौके पर सुलभ स्कूल, आईआईटी, मैत्रेयी कॉलेज, लेडी श्रीराम कॉलेज व अन्य स्कूलों की तरफ से भी स्टॉल लगाए गए। इन स्टालों में कई तरह की तकनीक के साथ शौचालय के इस्तेमाल पर खास जोर देते हुए लोगों को जागरूक करने की कोशिश की गई।



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