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शुक्रवार, 24 नवंबर 2017

रविन्दर के. बंसल: कैंसर अस्पताल के ‌लिए मुहिम

18 देशों के 34 हवाई अड्डे से उड़ान भर कर हरियाणा में कैंसर अस्पताल के ‌लिए 4.83 करोड़ रुपए जुटाए

विश्वभर में उड़ान भर कर ‌परिक्रमा करना सदा से बेहद साहस का काम हो सकता है। लेकिन सामाजिक कल्याण यानी परोपकार के लिए भी ऐसी यात्राएं की जा सकती हैं। इन दिनों कई आयुवर्ग के समूह सड़कों, आकाश मार्ग और मोटरसाइकिलों पर सवार होकर परोपकार के कार्य करते मिल जाते हैं। इसी क्रम में 68 साल के भारतीय अमेरिकी रविन्दर के. बंसल भी हैं। न्यूयॉर्क के भारतीय समुदाय से जुड़े बंसल अवकाश प्राप्त इंजी‌नियर और उद्यमी हैं। रविन्दर के. बंसल ने नेक कार्य के लिए 18 देशों के 34 हवाई अड्डे का इस्तेमाल करने हुए अकेले ही उड़ान भरी और हरियाणा के अंबाला में कैंसर अस्पताल के ‌लिए उन्होंने 4.83 करोड़ रुपए जुटाए। उनका जन्म अंबाला में हुआ है। अकेले 20 हजार ‌मील की उड़ान भरने के पीछे उनका एकमात्र उद्देश्य है अधिक से अधिक धन जुटा लेना ताकि अपने शहर में वे रोटरी अंबाला कैंसर अस्पताल के लिए एमआरआई मशीन खरीद सकें। अमेरिकी की स्वतं‌त्रता दिवस 4 जुलाई को रविन्दर के. बंसल ने बफैलो नियाग्रा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से एक इंजन वाले सेसेना हवाई जहाज से उड़ान भरी। उनका यह पुनीत कर्म भारत में पहुंचने पर समाप्त होगा।

छह सप्ताह पहले एक उड़ान के अंतर्गत पूरी पृथ्वी की उन्होंने परिक्रमा की। इस काम में उन्हंस एक लाख डॉलर यानी 64.4 लाख रुपए खर्च करने पड़े और बदले में उन्होंने 750,000 डॉलर जुटा लिये। इस धन को बचत खाते में रखा गया जाएगा। रविन्दर ने अपनी उड़ान में इंग्लैंड, फ्रांस, इटली, यूनान, जॉर्डन, संयुक्त अरब अमीरात और ओमान की यात्रा की। इसके बाद उन्होंने भारत में कदम रखे। वे अमेरिका दौरे के क्रम में थाइलैंड, मलये‌शिया, फिलीपींस, जापान, रूस और कनाडा भी पहुंचेंगे। रोटरी अंबाला कैंसर अस्पताल के लिए एमआरआई मशीन खरीदने के लिए धन संग्रह करने के अलावा ‌रविन्दर बंसल ने यात्रा के दौरान लोगों को सीने के कैंसर को लेकर भी जागरूकता अभियान चलाएंगे।

वे अपनी पुत्रवधू और बड़े भाई की पत्नी को कैंसर से मरता देख चुके हैं। हरियाणा के कसौली में पिता ही एकमात्र निजी डॉक्टरी करते थे। उन दिनों अंबाला में उपचार बढ़िया सुविधा नहीं थी। पुत्रवधू को छाती में कैंसर का पता चला तो वे अंबाला से लेकर उसे लुधियाना पहुंचे। वहां कीमेथेरेपी करवायी। उनके यहां रोटरी अंबाला कैंसर अस्पताल में लगी एमआरआई मशीन रविन्दर बंसल की देन है।



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