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मंगलवार, 25 सितंबर 2018

2017 की ऑफबीट फिल्में

इस वर्ष कई ऐसी फिल्में आईं, जिसने कमाई और स्टार इमेज के बूते चलने वाले सिनेमा को एक सार्थक बदलाव की तरफ मोड़ा

वर्ष 2017 बॉलीवुड के लिए बदलावों से भरा रहा। जहां एक तरह इस साल कई बड़े स्टार्स की फिल्में फ्लॉप हुईं, वहीं छोटे बजट की फिल्मों ने कमाल कर दिया। माइंडलेस सिनेमा के साथ इस वर्ष कई ऐसी जबरदस्त कंटेंट वाली फिल्में आईं जिन्होंने 2017 को यादगार वर्ष बना दिया।
इन्हीं फिल्मों से राजकुमार राव जैसे टैलेंटेड स्टार्स भी उभरकर आए। इन फिल्मों ने नॉन कॉमर्शियल फिल्मों को लेकर दर्शक को भी सोचने पर मजबूर कर दिया। इसके साथ ही बॉलीवुड में ऐसी फिल्मों को नया नजरिया देने के साथ-साथ नया ट्रेंड भी स्थापित किया। इस ट्रेंड में बॉलीवुड के कमर्शियल फिल्मों के सुपरस्टार एक्टर अक्षय कुमार भी जुड़ते दिखे। छोटे बजट से तैयार की गई इन फिल्मों ने 2017 में वो कर दिखाया जिसमें बॉलीवुड के कई सुपरस्टार्स फेल हो गए।

टॉयलेट:एक प्रेम कथा                                                                                                                                                                                   हममें से कइयों के लिए घर में टॉयलेट होना भले कोई बड़ी बात न लगती हो, लेकिन यह एक बड़ा मुद्दा है। आज भी हमारे देश में 58% भारतीय खुले में शौच के आदी हैं और यकीन मानिए वे ऐसा कर के खुश नहीं हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत मिशन से प्रेरित निर्देशक श्री नारायण सिंह ने इस फिल्म के जरिए समाज को एक आईना दिखाने की कोशिश की गई है। अक्षय कुमार और भूमि पेडनेकर अभिनीत इस फिल्म के जरिए दिखाया गया है कि कैसे आज भी देश के कई हिस्सों में महिलाओं के साथ असंवेदनशील तरीके से पेश आया जाता है। खेतों और खुले में जाकर शौच करने की हमारी पुरानी आदत पर व्यंग्य करते हुए यह फिल्म बड़े ही दिलचस्प ढंग से फिल्माई गई है।

शुभ मंगल सावधान
एक तमिल फिल्म की रीमेक इस फिल्म में शुभ मंगल सावधान ने दर्शकों को खूब प्रभावित किया। पहली बार किसी फिल्म ने यौनिकता को लेकर मन:स्थितियों के बारे में बात की गई, जिसे आयुष्मान खुराना और भूमि पेडनेकर ने बखूबी निभाया।

तुम्हारी सुलु
सुरेश त्रिवेणी की इस फिल्म में एक एंबीशियस हाउस वाइफ की कहानी दिखाई गई है। इस फिल्म के साथ विद्या बालन ने एक बार महिला कथानकों वाली फिल्मों के जोर को बॉलीवुड में बढ़ाया।

करीब-करीब सिंगल
इरफान खान और मलयालम एक्ट्रेस पार्वती की इस फिल्म ने आज के समय में रियलिस्टिक रोमांस को बखूबी दिखाया गया है। यह नई युवा सोच को जाहिर करने वाली एक प्रायोगिक फिल्म रही।

न्यूटन
राजकुमार राव की यह फिल्म अपनी तरह की अलग फिल्म थी। नक्सलग्रस्त एक आदिवासी गांव में पहली बार वोटिंग पर बनी यह फिल्म बेहद दिलचस्प तरीके से कई पहलुओं को छूती है।

मुक्ति भवन
यह इस साल की एक बेहद शानदार फिल्म रही। जिंदगी की उलझनों, मौत तक के सफर को लेकर बात करती यह फिल्म समीक्षकों द्वारा भी खासी सराही गई।

कड़वी हवा
यह एक ऐसी कड़वी सच्चाई वाली फिल्म है, जो देखने में कड़वी है, लेकिन एक बहुत बड़ा सच है। ये फिल्म गरीबी और सूखे को लेकर ऐसे मुद्दों को उठाती है, जो वक्त की जरूरत है।

ए डेथ इन गंज
यह फिल्म बेशक इस साल की बेस्ट फिल्मों में से एक है। मनुष्य की सोच पर सवाल उठाती इस फिल्म से अभिनेत्री कोंकणा सेन ने बेहद शानदार तरीके से फिल्म निर्देशक के तौर पर अफनी पारी की शुरुआत की है।

ट्रैप्ड
यह राजकुमार राव की एक और शानदार फिल्म है। एक खाली बिल्डिंग के फ्लैट में फंसे लड़के पर आधारित इस थ्रिलर फिल्म को देखने के बाद आप भी अपनी जिंदगी की परेशानियों को देखने का नजरिया बदल देंगे।



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