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बुधवार, 20 सितंबर 2017

संताली सृजन की जेवर जोबा 

जोबा मुर्मू पिछले डेढ़ दशक से भी लंबे समय से लगातार साहित्य सृजन में जुटी हैं

संथाली की चर्चित लेखिका जोबा मुर्मू को उनके लघु कहानी संग्रह 'ओलोन बहा’ (अलंकार पुष्प) के लिए साहित्य अकादमी का बाल साहित्य पुरस्कार-2017 देने की घोषणा की गई है। जोबा प्राथमिक स्कूल में शिक्षिका हैं। वह कानून में स्नातक के साथ संताली और हिंदी भाषा साहित्य में स्नातकोत्तर हैं। वह ऑल इंडिया संताली राइटर्स एसोसिएसन की सदस्य होने के साथ जाहेरथान कमेटी की कार्यकारी सदस्य भी हैं। उन्होंने कई संताली पुस्तकें लिखीं हैं, जिनमें बहा उमुल (2009), बेवरा (2010), ओलोन बहा (2014), प्रेमचंद की सरस कहानियों का संताली अनुवाद (2014) और रवींद्रनाथ टैगोर रचित 'गीतांजलि का संताली अनुवाद (2015) शामिल हैं।

उनकी महिलाओं पर आधारित कहानी पुस्तक ‘तिरला’  जल्द ही प्रकाशित होने वाली है। झरखंड में जमशेदपुर जिलांतर्गत करनडीह (दुखुटोला) की निवासी जोबा समाजसेवी व साहित्यकार सीआर माझी की बेटी और साहित्यकार पीतांबर हांसदा की पत्नी हैं। जोबा से पहले उनके पति उन खास दंपत्तियों में शामिल हो गए हैं, जिन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला है। दिलचस्प है कि पांच साल पहले पीतांबर हांसदा को भी संथाली में बाल साहित्य के लिए ही यह पुरस्कार मिला था। 

जोबा बताती हैं कि उन्हें उनके पिताजी सीआर मांझी से प्रेरणा मिली। वह हमेशा अपने पिताजी को साहित्य का सृजन कार्यों में व्यस्त रहते देखती रही हैं। इस तरह उनके अंदर भी यह प्रेरणा जगी कि उन्हें भी साहित्य सृजन करना चाहिए। शादी के बाद जोबा को पति पीतांबर हांसदा ने भी साहित्य लेखन के लिए खूब प्रोत्साहित किया। जोबा मुर्मू पिछले डेढ़ दशक से भी लंबे समय से लगातार  साहित्य सृजन में जुटी हैं। 



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