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शुक्रवार, 20 अक्टूबर 2017

फ्रेंच गुयाना से हुआ भारत का संचार उपग्रह लांच

भारत का आधुनिकतम संचार उपग्रह जीसेट-17 को एरियनस्पेस के एक भारी रॉकेट के जरिए सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया गया

भारत का आधुनिकतम संचार उपग्रह जीसेट-17 को एरियन स्पेस के एक भारी रॉकेट के जरिए सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया गया। यह प्रक्षेपण फ्रेंच गुयाना के कौओरू से किया गया। लगभग 3477 किलोग्राम के वजन वाले जीसेट-17 में संचार संबंधी विभिन्न सेवाएं देने के लिए नॉर्मल सी-बैंड, एक्सटेंडेड सी-बैंड और एस-बैंड वाले पेलोड हैं।

कॉम्पलेक्स नंबर 3 से उड़ान भरी
इसमें मौसम संबंधी आंकड़ो के प्रसारण वाला यंत्र भी है और उपग्रह की मदद से खोज एवं बचाव सेवाएं उपलब्ध करवाने वाला यंत्र भी। अब तक ये सेवाएं इनसेट उपग्रह उपलब्ध करवा रहे थे। यूरोपीय प्रक्षेपक एरियन स्पेस फ्लाइट वीए 238 ने कौओरू के एरियन लांच कॉम्पलेक्स नंबर 3 से उड़ान भरी। कौओरू दक्षिण अमेरिका के पूर्वोत्तर तट पर स्थित एक फ्रांसीसी क्षेत्र है।

निर्धारित समय से कुछ देरी हुई
इस उड़ान में निर्धारित समय से कुछ मिनट की देरी हुई। भारतीय समयानुसार इसे रात दो बजकर 29 मिनट पर उड़ान भरनी थी। लगभग 41 मिनट की निर्बाध उड़ान में जीसेट-17 को कक्षा में प्रवेश करवाने से कुछ ही समय पहले उसके सहयात्री हेलास सेट 3-इनमारसेट एस ईएएन को कक्षा में प्रवेश कराया गया।
उपग्रह के सफल प्रक्षेपण की घोषणा करते हुए एरियनस्पेस के सीईओ स्टीफन इस्राइल ने ट्वीट किया, 'जीसेट-17 अपने एरियन 5 प्रक्षेपक वीए 238 से सफलतापूर्वक अलग हुआ। इसकी पुष्टि हो गई।' मिशन के बाद इसरो के मुख्यालय से की गई घोषणा में कहा गया, 'फ्रेंच गुयाना के कोऔरू से एरियन-5 वीए-238 के जरिए जीसेट-17 का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया गया।' 
जीसेट-17 इसरो के हालिया 17 दूरसंचार उपग्रहों के समूह को मजबूत करेगा। इसे भूस्थैतिक स्थानांतरण कक्षा में प्रक्षेपित किया गया है। यह इस महीने इसरो द्वारा प्रक्षेपित तीसरा उपग्रह है। इससे पहले जीएसएलवी मार्क 3 और पीएसएलवी सी-38 का प्रक्षेपण श्रीहरिकोटा से किया गया था। अपने भारी उपग्रहों के प्रक्षेपण के लिए एरियन-5 रॉकेट पर निर्भर करने वाला इसरो इस काम के लिए जीएसएलवी मार्क 3 विकसित कर रहा है। मिशन कंट्रोल सेंटर से इस प्रक्षेपण को देखने वाले विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र के निदेशक डॉ. के सिवान ने इस मिशन को एकदम सटीक बताते हुए एरियन स्पेस का धन्यवाद किया।
इस अभियान को इसरो के लिए एक विशेष अभियान बताते हुए सिवान ने कहा, 'जीसेट-17 इसरो और भारत के लिए समय की जरूरत है, क्योंकि यह दो पुराने उपग्रहों की सेवा में निरंतरता प्रदान करता है। इसके अलावा यह हमारी ट्रांसपांडर क्षमता बढ़ाता है और हमारी पहुंच को मोबाइल उपग्रह सेवाओं के साथ-साथ अंटार्कटिक क्षेत्रों तक विस्तार देता है।' 
हेलास सेट (अरब सेट समूह का सदस्य) एक प्रमुख उपग्रह संचालक है और यूरोप, पश्चिम एशिया और दक्षिण अफ्रीका में सेवाएं देता है। इनमार सेट वैश्विक मोबाइल उपग्रह संचार सेवाओं का प्रमुख प्रदाता है। रॉकेट के साथ गए पेलोडों का कुल वजन लगभग 10,177 किलो है।
जीसेट-17 इसरो का ऐसा 21वां उपग्रह है, जिसे एरियन सपेस द्वारा प्रक्षेपित किया गया। इसका जीवनकाल लगभग 15 साल है। भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी ने कहा कि कक्षा में प्रवेश कराए जाने के बाद इसरो के हासन स्थित मास्टर कंट्रोल फेसिलिटी ने जीसेट-17 का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया।



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