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शनिवार, 21 अक्टूबर 2017

देश में दौड़ी सोलर ट्रेन

ट्रेन की छत पर लगे सोलर पैनल से 300 वॉट बिजली बनेगी और कोच में लगा बैटरी बैंक चार्ज होगा

भारत अब उन देशों की सूची में शामिल हो गया है, जहां रेलवे के परिचालन में सौर ऊर्जा की मदद ली जा रही है। भारतीय रेलवे की सोलर पॉवर सिस्टम की तकनीक पर आधारित पहली ट्रेन को रेलमंत्री सुरेश प्रभु ने हरी झंडी दिखाई। इसे तकनीकी रूप से स्पेशल डीईएमयू (डीजल-इलेक्ट्रिक मल्टीपल यूनिट) ट्रेन कहा जा रहा है। इस ट्रेन में कुल 10 कोच (8 पैसेंजर और 2 मोटर) हैं। ट्रेन के 8 कोच की छतों पर 16 सोलर पैनल लगे हैं। सूरज की रोशनी से इस ट्रेन की छत पर लगे सोलर पैनल से 300 वॉट बिजली बनेगी और कोच में लगा बैटरी बैंक चार्ज होगा। इसी से ट्रेन की सभी लाइट, पंखे और इंफॉर्मेशन सिस्टम संचालित होगा। रेलवे का कहना है कि यह ट्रेन हर साल 21 हजार लीटर डीजल की बचत करेगी। रेलवे का कहना है कि अगले 6 महीने में ऐसे 24 कोच और मिल जाएंगे। इस मौके पर रेलमंत्री सुरेश प्रभु ने कहा, ‘इंडियन रेलवे को इको-फ्रेंडली बनाने के लिए यह एक लंबी छलांग है। हम एनर्जी के गैर-परंपरागत तरीकों को बढ़ावा दे रहे हैं।’ आमतौर पर डीईएमयू ट्रेन मल्टीपल यूनिट ट्रेन होती है, जिसे इंजन से जरिए बिजली मिलती है। इसके लिए इंजन में अलग से डीजल जनरेटर लगाना पड़ता है, लेकिन अब इसकी जरूरत नहीं होगी।

 रेलवे द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक डीईएमयू ट्रेन दिल्ली डिवीजन के आसपास के शहरों में चलेगी। अभी इस ट्रेन के लिए रूट और किराया तय नहीं किया गया है। रेलवे अधिकारियों ने मीडिया को जानकारी दी कि 1600 हॉर्स पॉवर ताकत वाली यह ट्रेन चेन्नई की कोच फैक्ट्री में तैयार की गई है, जबकि इंडियन रेलवेज ऑर्गेनाइजेशन ऑफ अल्टरनेटिव फ्यूल (आईआरओओएएफ) ने इसके लिए सोलर पैनल तैयार किए हैं और इन्हें कोच की छतों पर लगाया गया है। रेलवे का दावा है कि इस ट्रेन में लगे सोलर सिस्टम की लाइफ अगले 25 सालों तक है। इस दौरान यह न केवल पर्यावरण को बचाने में सहायक होगी, बल्कि लाखों रुपए के डीजल की बचत भी होगी। ट्रेन को तैयार करने में 13.54 करोड़ का खर्च आया है। एक पैसेंजर कोच की लागत करीब एक करोड़ रुपए आई है। 

ट्रेन में रेलवे ने आधुनिक सुविधाओं को देने का प्रयास किया है। इसके सभी कोच में बायो-टॉयलेट, वॉटर रिसाइकिलिंग, वेस्ट डिस्पोजल, बायो-फ्यूल और विंड एनर्जी के इस्तेमाल का भी इंतजाम है। ट्रेन के एक कोच में 89 लोग सफर कर सकते हैं। सोलर पॉवर सिस्टम को मजबूती देने के लिए इसमें स्मार्ट इन्वर्टर लगे हैं, जो ज्यादा बिजली पैदा करने में मददगार साबित होंगे। साथ ही इसका बैटरी बैंक रात के वक्त कोच का पूरा इलेक्ट्रीसिटी लोड उठा सकेगा। रेलवे का कहना है कि यह ट्रेन एक बार फुल चार्ज होने पर दो दिनों तक चल सकती है यानी सूरज यदि दो दिनों तक न भी निकले तो भी इस ट्रेन की सेवा पर कोई असर नहीं पड़ेगा।  (एजेंसी)



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