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मंगलवार, 22 अगस्त 2017

सूखे राजस्थान में पानी-पानी

बीते साल राजस्थान में शुरू किए गए 'मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान' की सफलता से वहां बरसों से सूखे कुओं-बावड़ियों में भरा पानी

 

राजस्थान बीते कुछ दशकों से लगातार सूखे की मार झेल रहा है। इससे वहां का कृषि जीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ। वैसे मरूप्रदेश कहे जाने वाले इस राज्य में इस तरह की स्थितियां हमेशा से रही, ऐसा नहीं है। पर्यावरणविद अनुपम मिश्र ने अपनी किताब ‘राजस्थान की रजत बूंदें’ में राजस्थान की कई ऐसी परंपराओं का जिक्र किया है, जिससे जाहिर होता है कि वहां के लोग जल संरक्षण के महत्व और अमल से लंबे समय से अवगत रहे हैं। गांवों में वर्षा का पानी बहकर बाहर जाने के बजाय गांवों के ही निवासियों, पशुओं और खेतों के काम आए। इसी सोच के साथ 27 जनवरी 2016 से राजस्थान सरकार ने 'मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान' योजना शुरू की, जिसके सकारात्मक नतीजे अब सामने आ रहे हैं। 

हाल ही में जयपुर के एक गांव कांट में जलग्रहण विकास एवं भू-संरक्षण विकास विभाग द्वारा निर्मित एनीकट में दो दिनों में हुई मॉनसून पूर्व की बारिश से काफी मात्रा में पानी जमा हो गया। बरसात से एनीकट में पानी भराव से क्षेत्र के निवासियों के चेहरे खिल गए हैं। इस अभियान के दूसरे चरण के तहत प्रदेश के 4200 गांवों और 66 शहरों तथा कस्बों में जल संरक्षण के करीब एक लाख 35 हजार योजनाओं पर अमल होना है। ये काम तय समयावधि में पूरे हों, इसके लिए हर महीने का रोडमैप तैयार किया गया है। अभियान के दूसरे चरण में पौधरोपण कार्यक्रम के तहत जल संरचनाओं के साथ एक करोड़ पौधे लगाए जाएंगे। दरअसल, राजस्थान ऐसा राज्य है, जहां पानी की कमी है और पड़ोसी राज्यों से मिलने वाला पानी अपर्याप्त है। बारिश के पानी की हर बूंद को सहेजकर गांवों को जल आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ाना मुख्यमंत्री द्वारा शुरू किए गए अभियान का मूल उद्देश्य है।

राजस्थान में मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान के पहले चरण के बाद भूजल स्तर में काफी सुधार हुआ है। इस अभियान से 25 ब्लॉक में भूजल का स्तर ऊपर आया है, वहीं कुल 50 ब्लॉक में भूजल सुरक्षित स्तर तक आ पहुंचा है। इस योजना के अंतर्गत पेयजल का स्तर बढ़ाने के साथ-साथ राज्य के तालाबों के चारों और पेड़-पौधे भी लगाए जा रहे हैं। अभी तक 28 लाख पौधे लगाए जा चुके हैं और एक करोड़ और पौधे लगाए जाएंगे। 

पहले चरण की 94 हजार से अधिक जल संरचनाओं में से 95 प्रतिशत पानी से लबालब भर गईं। इन जल संरचनाओं में वर्षाकाल के दौरान 11 हजार 170 मिलियन क्यूबिक फीट पानी का संग्रहण हुआ, जिससे करीब 41 लाख लोग और 45 लाख पशु लाभान्वित हुए। साथ ही करीब 28 लाख पौधे लगाए गए, जिनमें से अधिकतर आज भी हरे-भरे हैं। संभवतः यह पहला मौका था कि किसी सरकारी अभियान में 53 करोड़ रुपए की राशि जन सहयोग से प्राप्त हुई। पहला चरण पूरा होने के बाद कई इलाकों में 15 फीट तक भूजल स्तर बढ़ गया, जिससे उन कुओं और बावड़ियों में भी पानी आ गया, जो बरसों से सूखे थे।

गैर-मरुस्थलीय 23 जिलों के उन क्षेत्रों में जलस्तर बढ़ा है जो इस अभियान के प्रथम चरण का हिस्सा रहे। कई जगहों पर पुराने कुंओं में पानी आया है। मांडलगढ़ में तो 265 सूखे कुओं में फिर से पानी आ गया है। अभियान के प्रथम चरण की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिन ग्रामीण क्षेत्रों में यह अभियान चलाया गया, वहां टैंकरों के माध्यम से पेयजल आपूर्ति में करीब 57 प्रतिशत की कमी आई है। 2016 की गर्मियों में जिन गांवों में 1,551 टैंकर्स से जलापूर्ति की गई, इस बार गर्मी के मौसम में उन गांवों में सिर्फ 674 टैंकर्स की ही जरूरत पड़ी।

अभियान के दूसरे चरण के तहत प्रदेश के 4200 गांवों और 66 शहरों तथा कस्बों में जल संरक्षण के करीब एक लाख 35 हजार काम होंगे। ये काम तय समयावधि में पूरे हों, इसके लिए हर महीने का रोडमैप तैयार किया गया है। पहले चरण में इस साल 27 जनवरी से यह अभियान 3529 गांवों में चलाया गया था। इसकी सफलता के बाद अब अभियान के दूसरे चरण में शहरी क्षेत्रों को भी शामिल किया गया है।

अपने कदम से उत्साहित मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे लगातार इस प्रयास में लगी है कि राजस्थान में जलक्रांति लाने वाला यह अभियान जनक्रांति भी बने। इस दिशा में उन्होंने स्वयं पहल करते हुए अभियान के दूसरे चरण के लिए अपना एक माह का वेतन देने की घोषणा की। उनकी इस पहल के बाद राज्य मंत्रिपरिषद के सदस्यों और संसदीय सचिवों ने भी अपना एक माह का वेतन देने की घोषणा की है। 



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