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शुक्रवार, 22 मार्च 2019

26 सालों से बेसहारों को खिला रहे हैं खाना

गुरमीत सिंह अपनी कमाई का 10 प्रतिशत मरीजों को खाना खिलाने में लगा देते हैं। वे कहते हैं कि अपने हाथों से गरीबों को खाना खिलाने से मुझे बहुत अच्छा लगता है

किसी भूखे को खाना खिलाना और प्यासे को पानी पिलाना दुनिया में सबसे बड़ा धर्म और पुण्य का काम माना गया है।

पटना के चिरायतंद इलाके में रेडीमेड कपड़ों की एक दुकान चलाने वाले गुरमीत सिंह ऐसा ही धर्म पिछले 26 साल से निभाते आ रहे हैं।

वह ऐसे मरीजों को खाना खिलाते हैं जिनके परिवारों ने उन्हें अकेला छोड़ दिया है।

गुरमीत पटना मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में खुद ही जाकर मरीजों को अपने हाथों से खाना खिलाते हैं।

गुरमीत सिंह अपनी कमाई का 10 प्रतिशत मरीजों को खाना खिलाने में लगा देते हैं। वे कहते हैं कि अपने हाथों से गरीबों को खाना खिलाने से मुझे बहुत अच्छा लगता है और संतुष्टि मिलती है।

समाज की इस निःस्वार्थ सेवा के लिए साल 2016 में यूके-स्थित एक सिख संगठन ‘द सिख डायरेक्टरी’ ने गुरमीत को ‘वर्ल्ड सिख अवॉर्ड’ से भी सम्मानित किया था।
 



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