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शुक्रवार, 24 नवंबर 2017

बंजर जमीन पर उम्मीद की फसल

मुजफ्फरपुर जिले के किसानों ने चौर की बंजर जमीन को उपजाऊ बनाया

लोगों द्वारा हमेशा से उपेक्षित वेटलैंड यानी आर्द्रभूमि को किसानों के एक समूह ने उपयोगी बन दिया है। इन किसानों के प्रयास से ही आज यह उपेक्षित भूमि मत्स्य पालन, कृषि, विद्यालय और बागवानी में बदल गया है। इसके साथ ही इन किसानों ने गरीब ग्रामीणों को रोज़गार और आजीविका के अवसर भी प्रदान किए हैं।
मुल्लूपुर की एक किसान मुलकी देवी ने कहा कि मैंने कभी नहीं सोचा था कि यह जमीन मेरे जीवनकाल में उपजाऊ हो जाएगी। वहीं शत्रुघ्न महतो अपनी जमीन से आय अर्जित कर खुश हैं क्योंकि इससे पहले उन्हें कभी लाभ नहीं मिला था। मुल्की देवी और शत्रुघ्न महतो दोनों अपनी इस बंजर जमीन के बारे में अब चिंता नहीं करते हैं और यह अविश्वसनीय है कि बंजर जमीन अब उनके आय का स्रोत बन गई है।
बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के मुल्लूपुर में 87 एकड़ जमीन निचले झीलों की है, जिसे स्थानीय तौर पर "चौर" के रूप में जाना जाता है। बाढ़ प्रभावित होने के कारण और इस जमीन के उपजाऊ न होने की वजह से इसे पहले बेकार माना जाता था। किसानों के एक समूह ने इस जमीन के परिदृश्य को ही बदल दिया है और इसे कई लोगों के लिए आय और आजीविका के स्रोत के रूप में परिवर्तित कर दिया है।
मुल्लूपुर में रहने वाले राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के पूर्व उपाध्यक्ष गोपालजी त्रिवेदी ने पूसा में कृषक को कृषि उद्देश्यों के लिए बंजर भूमि का उपयोग करने के लिए आश्वस्त किया। गोपालजी कहते हैं कि मैंने किसानों को मुल्लूपुर के निकट कोरलाहा चौर को बदलने के लिए प्रेरित किया। शुरुआत में लोगों ने अनिच्छा जाहिर की, लेकिन निरंतर प्रयास से वह लोग इस मुहिम में शामिल हो गए और दशकों से बंजर पड़ी इस जमीन का कायाकल्प कर दिया। 
किसानों के समूह ने पशु चिकित्सा, कृषि, मत्स्य पालन और बागवानी विशेषज्ञों से परामर्श किया ताकि एकीकृत खेती में नवीनतम तकनीक और विकास का इस्तेमाल किया जा सके। गोपालजी ने कहा कि हमारा ध्यान मत्स्य पालन पर है, क्योंकि यह आर्द्रभूमि के लिए सबसे उपयुक्त होता है। हमने विकास योजना में एक मुर्गी, एक बकरी खेत और एक डेयरी इकाई को एकीकृत किया है। 



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