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बुधवार, 18 अक्टूबर 2017

अमेजन रीफ का संकट

तेल का जरूरत से अधिक भंडार उपलब्ध होने के बावजूद कार्बन उत्सर्जन को बढ़ाने वाला एक और तेल खनन हमारे पर्यावरण के लिए बेहद खतरनाक है। अमेजन रीफ का पूरा संकट इसी तेल खनन से जुड़ा है

वैश्विक तापमान को दो डिग्री तक कम करने की दुनिया भर की कोशिशों पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रवैये से पानी फिरता नजर आ रहा है। वैसे इस मुद्दे पर और भी कई खतरे हैं, जिनसे समय रहते निपटने की जरूरत है। अगर ऐसा नहीं हुआ तो पर्यावरण के संकट से निपट पाना पूरी दुनिया के लिए मुश्किल हो जाएगा। पर्यावरण पर मंडरा रहे इन्हीं खतरों में से एक है अमेजन रीफ का संकट।

दुनिया को बीस फीसदी ताजा पानी देने वाली अमेजन नदी के मुहाने पर 9,500 वर्ग किमी क्षेत्र में मूल्यवान अमेजन रीफ का फैलाव है। अमेजन की चट्टानें अमेजन के बहुत गंदी मिट्टी और गाद में सराबोर, तलछट से भरे पानी में स्थित हैं और असामान्य रसायन-संश्लेषण का एक उत्पाद है। जहां एक तरफ रीफ शृंखलाओं में प्रकाश संश्लेषण के द्वारा अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं का भरण प्रचलित है, वहीं रसायन-संश्लेषण के फलस्वरूप जन्मे अमेजन रीफ ने वैज्ञानिकों एवं विशेषज्ञों को अपनी ओर खासा आकर्षित किया है।

जैव-विविधता वाला क्षेत्र

अमेजन रीफ की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह एक विशिष्ट जैव-विविधता वाले इलाके में स्थित है। फिलहाल कई वैज्ञानिक इस क्षेत्र में अध्ययन कर रहे हैं  और उम्मीद है कि अभी और भी कई प्रजातियां यहां पर खोज निकाली जाएंगी। रीफ प्राकृतिक रूप से कार्बन सिंक का भी काम करता है। अमेजन रीफ के साथ खास बात है कि यह दुनिया के सबसे बड़े मैंग्रोव जंगल से घिरा हुआ है, जो बड़ा कार्बन सिंक करने का जरिया है, लेकिन आज  इस अमेजन रीफ पर तेल खनन की वजह से खतरा पैदा हो गया है। साफ है कि रीफ पर किसी भी तरह का खतरा धरती पर कार्बन उत्सर्जन को कम करने के प्रयासों के लिए झटका साबित होगा।

ब्राजील सरकार के आंकड़े बताते हैं कि तेल कंपनियों ने इस इलाके से 14 बिलियन बैरल तेल निकालने का अनुमान लगाया है। अब अगर इस तेल की खपत से पैदा होने वाले कार्बन उत्सर्जन को भी जोड़ा जाए तो साफ है कि धरती पर कार्बन उत्सर्जन में और बढ़ोत्तरी होगी और इससे जलवायु परिवर्तन का खतरा बढ़ जाएगा। गौरतलब है कि अमेजन रीफ के इलाके में मछुआरे ऐसी मछलियों को देखते थे जो सिर्फ रीफ क्षेत्र में ही पाए जाते हैं। 

2012 से चल रहा शोध

वैज्ञानिकों ने लगभग 2012 में इस रीफ के बारे में शोध शुरू किया और 2016 में इसे आधिकारिक रूप से दुनिया को बताया गया। 2017 में पहली बार ग्रीनपीस ने इस रीफ की तस्वीर और वीडियो बनाने में सफलता हासिल की। अभी भी बहुत सारे शोधकर्ता इस रीफ का अध्ययन कर ही रहे हैं। वैज्ञानिकों का अध्ययन तो एक तरफ जारी है, लेकिन दूसरी तरफ खतरनाक यह है कि इस इलाके पर लंबे समय से तेल कंपनियों की निगाहें टिकी हैं।  

समुद्र तल के अस्थिर होने की वजह से रीफ इलाके में  भूस्खलन होता है। आखिरी बार ड्रिल करने जो जहाज इस इलाके में पहुंचा, वह भी बह गया। बावजूद सबके ब्राजील सरकार खनन के लिए यह इलाका तेल कंपनियों को देने का फैसला करने वाली है। इसके लिए पर्यावरण संबंधी जरूरी मंजूरी भी 2013 में ले ली गई है। लेकिन यह मंजूरी तब ली गई थी जब तक अमेजन चट्टानों को खोजा नहीं गया था। इसीलिए मंजूरी देते वक्त अमेजन रीफ पर होने वाले कुप्रभावों पर विचार ही नहीं किया गया था। अब जब यह रीफ दुनिया के सामने आ चुका है, तो जरूरी है कि पहले के पर्यावरण संबंधी आकलन करने के बाद  मंजूरी को खत्म करके फिर से फैसला लिया जाए।

वैसे भी यह देखा गया है कि जहां भी तेल खनन होता है वहां तेल के लीक होने की संभावना भी काफी होती है। ऐसे में एक महत्वपूर्ण जंगल के पास तेल खनन की इजाजत देने का मतलब होगा कि पूरे जंगल को खतरे में डालना। इस इलाके में तेल खनन की इजाजत से जंगल और रीफ के आसपास रह रहे स्थानीय लोगों के लिए भी मुश्किलों का दौर शुरू होगा, जिनकी आजीविका जंगल पर निर्भर है। 

कोरल रीफ की समुद्र के नीचे अपनी जैव-विविधता होती है। जलवायु परिवर्तन में इन चट्टानों की बड़ी भूमिका है। वजह यह है कि वातावरण और समुद्र के बीच गैसों का आदान-प्रदान होता है, जिनमें मुख्य कॉर्बन डाइऑक्साइड और ऑक्सीजन हैं। समुद्र ऑक्सीजन का उत्सर्जन करता है और कार्बन डाइऑक्साइड को सोखता है। इस लिहाज से भी अमेजन रीफ को बचाए रखना बेहद जरूरी है। 

जीवाश्म ईंधन

पूरी दुनिया में जीवाश्म ईंधन का इस्तेमाल औद्योगिक विकास के लिए बहुतायत में किया जाता है। नतीजे में कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन भी उसी बड़ी मात्रा में होता है। समुद्र में एसिड की मात्रा का लगातार बढ़ना इसी वजह से होता है। समुद्र में बढ़ने वाले एसिड कोरल सिस्टम को क्षतिग्रस्त करते हैं। इन्हीं सब खतरों को भांपते हुए पूरी दुनिया में अमेजन रीफ को बचाने का अभियान शुरू किया जा रहा है। ग्रीनपीस द्वारा जारी अभियान को पूरी दुनिया से दस लाख लोगों ने अब तक अपना समर्थन दिया है। अपनी प्रकृति और दुनिया को बचाने के साथ उसे बेहतर बनाने की लड़ाई पूरी दुनिया में शुरू हो चुकी है। इस अभियान में हॉलीवुड की मशहूर फिल्म ‘द टाइटैनिक’ के हीरो लियोनार्ड डी कैपेरियो जैसे बड़े अभिनेता भी जुड़ चुके हैं।

बात करें भारत की तो पेरिस समझौते के बाद से ही उसे पर्यावरण संकट से जूझने में एक नेता के रूप में देखा जा रहा है। खुद भारत में अब तक 6 हजार से ज्यादा लोग इस अभियान के समर्थन में आगे आ गए हैं। आज पूरी दुनिया में जीवाश्म ईंधन की खपत को कम करने की कोशिश हो रही है और तेल का पर्याप्त भंडार भी मौजूद है। ऐसे में  कार्बन उत्सर्जन को बढ़ाने वाला एक और तेल खनन की जरूरत फिलहाल नहीं है, जो पर्यावरण के लिए खतरनाक साबित हो। अमेजन रीफ न सिर्फ अपने आसपास, बल्कि पूरी दुनिया में पर्यावरण को बचाए रखने, कार्बन उत्सर्जन को कम करने में सहायक है। इसीलिए इसे बचाया जाना जरूरी है। यह  वैश्विक तापमान को 1.5 सेल्सियस डिग्री से आगे नहीं बढ़ने देने में भी सहायक है। इसीलिए जरूरी है कि तेल कंपनियों द्वारा राजनीतिक व आर्थिक सत्ता पर कब्जा करने की कोशिशों पर विराम लगाया जाए। अगर हमें अपनी आने वाली पीढ़ी को सुरक्षित भविष्य देना है तो अमेजन रीफ को बचाना ही होगा तथा जीवाश्म इंधनों के इस्तेमाल के खात्मे की ओर बढ़ना होगा। 



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