sulabh swatchh bharat

शुक्रवार, 24 नवंबर 2017

विनय कुमार - स्वच्छता का विनय

यूपी के इस युवक ने दिव्यांग लड़कियों को जागरुक करने के लिए चलाया अभियान

विनय कुमार उत्तर प्रदेश के एटा जिले के एक छोटे से गांव नागला राजा से हैं। विनय ने दिव्यांग लड़कियों के लिए एक विशेष अभियान की शुरुआत की है। विनय आज विकलांग लड़कियों को माहवारी के बारे में शिक्षित करते हैं। हालांकि विनय के माता-पिता उन्हें आगे पढ़ाना चाहते थे, लेकिन उनके पास इसके लिए संसाधन नहीं थे। इसलिए विनय कक्षा 12 के बाद नोएडा चले गए, वहां उन्होंने एक कंस्ट्रक्शन मजदूर की तरह कार्य करने लगे। एक बार जब किसी अवसर पर विनय घर वापस आए तो वह अमित से मिले। अमित को पोलियो था और कानून से स्नातक था। अमित ने उन्हें उच्च शिक्षा के लिए उनकी मदद करने की पेशकश की। 
इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मीडिया अध्ययन में स्नातक और विज्ञापन व जनसंपर्क में स्नातकोत्तर डिप्लोमा प्राप्त करने के बाद  विनय को सूचना और जनसंपर्क विभाग में नौकरी मिल गई, लेकिन अलग-अलग तरीके से लोगों की सहायता करने वाले विनय को किस्मत एक अलग रास्ते पर ले आई। 2016 में विनय ने अपनी सरकारी नौकरी छोड़ दी। विनय विकलांग बच्चों के साथ एक नाटक करना चाहता था। उनकी यह तलाश उन्हें एक विशेष विद्यालय उम्मीद मुंबारा तक ले गई। मुंबारा में एक बड़ी मुस्लिम आबादी रहती है और वहीं उम्मीद के संस्थापक परवेज को अपने घरों से बाहर निकलने वाली लड़कियों को ढूंढना मुश्किल काम था। लेकिन एक तभी एक घटना ने विनय के शिक्षण मॉड्यूल को ही बदल दिया। इस घटना में एक महिला अपनी दिव्यांग बेटी के गर्भाशय को हटवा दिया था, ताकि उनकी बेटी को माहवारी के दौरान होने वाली दिक्कतों का सामना ना करना पड़े और उसे छेड़छाड़ की घटना से बचाया जा सके। यह सब विनय के लिए चौंकाने वाला था। इसके लिए उन्होंने शुमा बानिक और विजयेता पांडे से बात की, जो सूरत में माहवारी के खिलाफ ‘हैप्पी पीरियड’ अभियान के तहत काम कर रहीं थीं। 
विनय कहते हैं कि पहले तो लड़कियां बहुत ज्यादा शर्माती थीं, उन्हें हम वीडियो के माध्यम से माहवारी में कैसे खुद को स्वच्छ और स्वस्थ रखें सिखाने का कार्य किया। लड़कियों के साथ-साथ उनकी मां को भी हमने इसके बारे में सिखाना शुरू किया। हमने इसके लिए कार्यशालाओं का भी आयोजन किया। विनय कहते हैं कि कार्यशाला हमारे लिए एक बड़ी सफलता थी, जहां कई मांओं ने कबूल किया कि कैसे वे अपनी और उनकी बेटियों की मासिक धर्म के प्रति स्वास्थ्य की उपेक्षा कर रहे हैं। उनमें से ज्यादातर मासिक धर्म के बारे में अनजान थे और इसके संबंध में कई सवाल थे। 



Bringing smiles to every face hindi ad copy %281%29

ऑडियो