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शुक्रवार, 22 मार्च 2019

चीन ने बनाया 'अपना चांद'!

चीन के अखबार पीपल्स डेली के अनुसार चेंगडु इलाके में स्थित एक निजी एयरोस्पेस संस्थान में अधिकारियों ने कहा कि वे साल 2020 तक पृथ्वी की कक्षा में एक चमकदार सेटेलाइट भेजने की योजना बना रहे हैं, जिससे स्ट्रीट लाइट लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी

चौदहवीं का चांद और चांदनी रात की बात हम अक्सर फिल्मी गीतों में सुनते रहते हैं। कवि, लेखक और शायर पूरे चांद के इंतजार पर अपनी रचनाएं रच गए, लेकिन अब चीन के आसमान पर हर रात पूरा चांद दिखने का दावा किया गया है।
चीनी कंपनी ने घोषणा की है कि वो एक नकली चांद को चीन के आसमान पर भेजने की योजना बना रही है, जिससे रात में चीन का आसमान चांदनी रात से गुलजार रहेगा।
चीन के अखबार पीपल्स डेली के अनुसार चेंगडु इलाके में स्थित एक निजी एयरोस्पेस संस्थान में अधिकारियों ने कहा कि वे साल 2020 तक पृथ्वी की कक्षा में एक चमकदार सेटेलाइट भेजने की योजना बना रहे हैं, जिससे स्ट्रीट लाइट लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इस खबर के सामने आते ही वैज्ञानिकों के बीच कौतुहल और संदेह दोनों तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं।
अभी तक इस योजना के बारे में बहुत अधिक जानकारियां सार्वजनिक नहीं हुई हैं और जितनी भी जानकारी सामने आई है उन पर भी कई तरह के सवाल उठाए जा रहे हैं। सबसे पहले पिछले सप्ताह पीपल्स डेली ने इस खबर को प्रकाशित किया था। इसमें उसने वु चेनफेंग का बयान प्रकाशित किया था। वु चेनफेंग चेंगडु एयरोस्पेस साइंस इंस्टीट्यूट में माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक सिस्टम रिसर्च इंस्टीट्यूट के चेयरमैन हैं।
वु ने कहा था कि इस योजना पर पिछले कुछ सालों से काम चल रहा है और अब यह अपने अंतिम चरण में है। साल 2020 तक इस सेटेलाइट को भेजने की योजना है। चाइना डेली ने वु के हवाले से लिखा है कि साल 2022 तक चीन ऐसे तीन और सेटेलाइट भेज सकता है। हालांकि किसी भी रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया है कि क्या इस योजना के पीछे सरकारी हाथ है या नहीं। चाइना डेली के अनुसार यह नकली चांद एक शीशे की तरह काम करेगा, जो सूर्य की रौशनी को प्रतिबिंबित कर धरती पर भेजेगा। यह धरती से 500 किलोमीटर की धुरी पर स्थित होगा, लगभग इतनी ही दूरी पर अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन भी स्थित है।
इसके मुकाबले धरती के असली चांद की दूरी तीन लाख 80 हजार किलोमीटर है।
रिपोर्टों में यह नहीं बताया गया है कि यह चांद दिखने में कैसा होगा, लेकिन वु के हवाले से इतना जरूर बताया गया है कि इस चांद की रौशनी 10 किलोमीटर से 80 किलोमीटर के बीच फैली होगी और यह असली चांद के मुकाबले आठ गुना अधिक रौशनी देगा। वु के अनुसार इस नकली चांद की रौशनी को नियंत्रित भी किया जा सकेगा।
चेंगडु एयरोस्पेस के अधिकारियों की मानें तो इस नकली चांद का मकसद पैसा बचाना है। यह बात सुनने में भले ही अजीब लगे, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि जितना खर्च स्ट्रीट लाइट पर आता है उसकी तुलना में यह चांद सस्ता पड़ेगा।
चाइना डेली ने वु के हवाले से लिखा है कि नकली चांद से 50 वर्ग किलोमीटर के इलाके में रौशनी करने से हर साल बिजली में आने वाले खर्च में 1.2 अरब युआन यानी 17.3 करोड़ डॉलर बचाए जा सकते हैं। इसके अलावा प्राकृतिक आपदा जैसे भूकंप या बाढ़ जैसे हालात में जब ब्लैक आउट हो जाता है, उस समय भी यह नकली चांद रौशनी दे सकता है। ग्लास्गो यूनिवर्सिटी में स्पेस सिस्टम इंजीनियरिंग के प्रवक्ता डॉक्टर मैटियो सिरिओटी ने बताया कि इस योजना को एक निवेश के तौर पर देखा जा रहा है। उन्होंने कहा, 'रात के वक़्त बिजली पर बहुत अधिक खर्च होता है। ऐसे में अगर कोई चीज़ 15 सालों तक एकमुश्त खर्चे पर मुफ्त बिजली देने लगे तो यह आने वाले वक्त में काफी सस्ता पड़ेगा।' डॉक्टर सिरिओटी मानते हैं कि वैज्ञानिक तौर पर ऐसा करना मुमकिन है।
लेकिन इसके सामने समस्या है इसकी दूरी। इस नकली चांद को चेंगडु इलाके के ऊपर ऐसी जगह स्थापित किया जाएगा, जिससे इसकी रौशनी इसी छोटे से इलाके को मिल सके। इस तरह पूरी धरती के मुकाबले यह बहुत ही कम इलाका है। इसका मतलब यह हुआ कि इसे एक स्थिर कक्षा की ज़रूरत भी होगी जो धरती से 37 हज़ार किलोमीटर दूर है। डॉक्टर सिरिओटी कहते हैं, 'सबसे बड़ी समस्या यह है कि एक ख़ास इलाक़े में रौशनी करने के लिए इस सेटेलाइट को बिलकुल निश्चित जगह पर रखना होगा।' 'अगर आप 10 किलोमीटर तक के इलाके को रौशन करना चाह रहे हैं, लेकिन आपकी दिशा में एक डिग्री के 100वें हिस्से की भी चूक हुई तो नकली चांद की रौशनी किसी दूसरे इलाके में पहुंच जाएगी।'
हार्बिन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के निदेशक कैंग वीमिन ने पीपल्स डेली से कहा है कि यह नकली चांद धुंधला सा दिखेगा और जानवरों के दैनिक कामों पर इसका असर नहीं पड़ेगा। लेकिन चीन में सोशल मीडिया पर इस चांद के बारे में चर्चाएं और चिंताएं गरम हैं। कुछ लोगों का कहना है कि इस चांद की वजह से रात को जागने वाले जानवरों पर असर पड़ेगा। वहीं कुछ लोग मानते हैं कि चीन में पहले से ही रौशनी से जुड़ा प्रदूषण है और इस चांद से इसमें वृद्धि होगी।
इंटरनेशनल डार्क स्काई एसोसिएशन में पब्लिक पॉलिसी के निदेशक जॉन बैरेनटीन ने बताया, 'इस चांद की वजह से निश्चित तौर पर रात के वक्त रौशनी बढ़ेगी जिस वजह से पहले से ही रौशनी से जुड़े प्रदूषण का सामना कर रहे चेंगडु वासियों को और तकलीफ होगी। यहां रहने वाले लोग पहले ही रात के वक्त गैरजरूरी रौशनी से परेशान हैं।' डॉक्टर सिरिओटी ने कहा कि अगर इस नकली चांद की रौशनी बहुत अधिक होगी तो इसका असर प्रकृति पर पड़ेगा और जानवर इसका शिकार बनेंगे। वे कहते हैं, 'इसके उलट अगर इसकी रौशनी बहुत ज्यादा नहीं होती है तो सवाल उठेगा कि आखिर इसे लगाने की जरूरत ही क्या है?'



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