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बुधवार, 13 दिसंबर 2017

रीमा लागू - बहुत याद आएंगी हिंदी फिल्मों की ‘आधुनिक मां’

रीमा लागू हिंदी फिल्मों की न सिर्फ ‘आधुनिक मां’ थीं, बल्कि उन्होंने मां के अभिनय और किरदार को सफेद साड़ी और रोते-बिसूरते संघर्ष से आगे का रास्ता दिखाया और साथ ही इसके आगे मां के किरदार को कई शेड में दिखाने का विकल्प भी उन्होंने फिल्मकारों के आगे खोला

फिल्मी परदे पर मां का किरदार निभाने वाली अभिनेत्रियों में खासी पसंद की जाने वाली रीमा लागू का 17 मई को हृदयाघात से निधन हो गया। आमतौर पर बॉलीवुड में मां सफेद साड़ी में दिखाई जाती है, जो आंसू और परेशानी के बीच गरीबी और भ्रष्टाचार के साथ संघर्ष करती है। मां के इस सिनेमाई अवतार को जिन अभिनेत्रियों ने पहचान और लोकप्रियता प्रदान की, उनमें सुलोचना, निरूपा राय और राखी सर्वप्रमुख हैं। 
दरअसल, हम मां को लेकर जिस संवेदना से सबसे पहले और सबसे ज्यादा भरते हैं, उसमें भी मां की तस्वीर कुछ इसी अंदाज में जेहन में उभरती है। पर महेश मांजरेकर की फिल्म ‘वास्तव’ ने मां की इस सिनेमाई छवि को काफी हद तक तोड़ा। इस फिल्म में मां ही अपने गैंगेस्टर बेटे को गोली मारने के लिए आगे बढ़ती है। इस भूमिका को निभाया था रीमा लागू ने। इस किरदार को निभाने के लिए रीमा ने सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री का फिल्मफेयर पुरस्कार भी जीता। दिलचस्प है कि इस तरह की चुनौतीपूर्ण भूमिका को निभाने का साहस रीमा ने यह जानने के बावजूद निभाया कि फिल्म में उनके बेटे का रोल निभाने वाले संजय दत्त से वह उम्र में महज दो साल बड़ी थीं। अपने एक साक्षात्कार में रीमा ने बताया भी है कि इस फिल्म में जब उन्हें अपने बेटे को मारने का अभिनय करना था तो वह काफी नर्वस थीं। नतीजा यह कि अभिनय के दौरान जब संजय दत्त ने उनके हाथ में पिस्टल थमाया, तो वह कांप रही थीं। 
कहने की जरूरत नहीं कि बॉलीवुड में मां के किरदार की चली आ रही लंबी लीक को रीमा ने अपने इस नए और दमदार अभिनय से न सिर्फ तोड़ा, बल्कि इसके आगे मां के किरदार को कई शेड में दिखाने का विकल्प भी उन्होंने फिल्मकारों के आगे खोला। इस तरह कह सकते हैं कि रीमा लागू हिंदी फिल्मों की आधुनिक मां थीं और उन्होंने मां के अभिनय और किरदार को सफेद साड़ी और रोते-बिसूरते संघर्ष से आगे का रास्ता दिखाया।  
21 जून 1958 को मुंबई में जन्मी रीमा की अभिनय यात्रा करीब चार दशक लंबी रही। उनकी मां मंदाकिनी भदभदे भी अभिनेत्री थीं और अपने नाटक ‘लेकुर उदंड जाहली’ के कारण उनका मराठी रंगमंच की दुनिया में बड़ा नाम था। रीमा ने अपनी अभिनय यात्रा पुणे में स्कूली छात्रा के तौर पर की थी। बाद में उन्हें मराठी नाटकों और फिल्मों में अभिनय के प्रस्ताव मिलने लगे। वैसे जिस तरह के अभिनय से उन्हें अपनी पहचान मिली, वह था बच्चों को समझने वाली, उससे संवाद करने वाली एक मध्यवय की आधुनिक मां का किरदार। रीमा ने मां के इस नए किरदार को एक तरफ जहां फिल्मों से लेकर टीवी तक मान्यता दिलाई, वहीं उन्होंने कई बड़े सितारों की मां की भूमिका निभाने का यश भी पाया। 
रीमा लागू तब महज 30 साल की ही थीं, जब उन्हें मंसूर खान की फिल्म ‘कयामत से कयामत तक’ में जूही चावला की मां का रोल करने का मौका मिला। दिलचस्प है कि तब जूही रीमा से महज दस साल छोटी थीं। इस फिल्म से रीमा पहली बार चर्चा में आईं। इस तरह से एक मिथ भी टूटा और उम्र में कुछ साल छोटे अभिनेताओं की मां का रोल निभाने की चुनौती रीमा ने स्वीकार की। संजय दत्त, शाहरुख खान से गोविंदा और माधुरी दीक्षित तक हिंदी सिनेमा के कई नामचीन सितारों की मां का किरदार रीमा लागू ने निभाया। वह जिस एक और फिल्म में अपने दमदार अभिनय के लिए याद की जाती रहेंगी, वह है ‘हम आपके हैं कौन’। इस फिल्म में रीमा ने अनुपम खेर की पत्नी और माधुरी दीक्षित और रेणुका शहाने की मां की भूमिका निभाई थी। 
अलबत्ता जिस सितारे की ऑन स्क्रीन मां के रूप में उन्हें सर्वाधिक लोकप्रियता मिली वे सलमान खान हैं। उन्होंने कम से कम 11 फिल्मों में सलमान की मां की भूमिका निभाई। फिल्मों में मां के दमदार अभिनय के लिए उन्हें चार बार फिल्मफेयर पुरस्कार मिला था। रीमा ने टीवी धारावाहिकों ‘खानदान’, ‘दो और दो पांच’ और ‘श्रीमान श्रीमती’ में भी अपने अभिनय से काफी लोकप्रियता हासिल की थी। 

 



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