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मंगलवार, 22 अगस्त 2017

गंगा को लेकर एनजीटी का आदेश

एनजीटी ने पर्यावरण, जल संसाधन मंत्रालय को गंगा में ई-प्रवाह के स्तर के बारे में बताने को कहा

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने  केंद्र्र से यह स्पष्ट करने को कहा कि गंगा नदी में निर्बाध जल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए उसमें न्यूनतम पर्यावरण प्रवाह क्या होना चाहिए।

शीर्ष पर्यावरण नियामक ने यह भी कहा कि जब तक पानी को अत्यधिक निकाले जाने और उच्च प्रदूषकों को उसमें बहा दिए जाने पर नियंत्रण नहीं लगाया जाता, तब तक गंगा को पूर्णरूपेण उसके असली रूप में वापस नहीं लाया जा सकेगा। ई-प्रवाह का संबंध मानवीय जीविका के अलावा ताजा पानी तथा संबंधित पारिस्थिति की बनाए रखने के लिए जरूरी जल प्रवाह की मात्रा, समय एवं गुणवत्ता से होता है। एनजीटी अध्यक्ष स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने पर्यावरण मंत्रालय, जल संसाधन मंत्रालय और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नदी में बनाए रखने जाने वाले ई प्रवाह पर पूर्ण सूचना देने को कहा। पीठ ने अधिकरण को उनसे हरिद्वार से उन्नाव तक के 543 किलोमीटर के हिस्से में भूजल निष्कर्षण के बारे में अवगत कराने को कहा। उसने यह भी पूछा कि विभिन्न नहरों में भेजे जा रहे पानी को क्या नियंत्रित किया जाना चाहिए ताकि नदी में न्यूनतम प्रवाह के रख-रखाव में मदद मिले



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