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शुक्रवार, 24 नवंबर 2017

राजा सेठीमुरली - शिक्षा मित्र

11 सालों में कोयंबंटूर के ऑटो चालक ने सरकारी स्कूल के 1300 छात्रों की मदद की

ऑटो चालक राजा सेठीमुरली जब छोटे थे तब उनके माता-पिता उन्हें शिक्षित नहीं कर सके। क्योंकि उनके पिता शराबी थे और उन्होंने उनकी मां को अकेले सेठीमुरली की जिम्मेदारी उठाने के लिए छोड़ दिया था। वह रोज मजदूरी करके घर का खर्च चलाती थीं, जिस दिन उन्हें पैसे नहीं मिलते वह लोग भूखे सोते थे। स्कूल ना जा पाने का प्रभाव राजा के जीवन पर इतना गहरा पड़ा कि उन्होंने दूसरे बच्चों के साथ ऐसा ना होने देने की कसम खाई। वे लगभग 10 वर्षों तक अकादमिक रूप से सरकारी स्कूल के बच्चों की मदद करने के लिए अपनी छोटी सी आय का उपयोग करते रहे, लेकिन जब स्कूल बंद हो गए तो वे कोयंबंटूर के अलग अलग स्कूलों में गए और वहां के अध्यापकों से बात की।  
राजा ने कहा कि स्कूल के अध्यापक मेरी उन छात्रों की पहचान करने में मदद करते हैं जो गरीब परिवारों से हैं। मैं उन बच्चों के लिए स्कूल बैग, किताबें और लंच बॉक्स खरीदता हूं। राजा इसके लिए प्रत्येक बच्चे पर 1700 रुपए खर्च करते हैं, जो कि उनकी बचत के पैसे हैं। राजा कहते हैं कि हमने तीन बच्चों से शुरुआत की थी और आज मैं 32 सरकारी स्कूलों में सालाना 150 छात्रों की मदद करने में सक्षम हूं। उन्होंने कहा कि यदि छात्र 10 वीं कक्षा में अच्छा स्कोर करने में सक्षम हैं, तो वे अपने भविष्य में अच्छा प्रदर्शन कर पाएंगे। 
बता दें कि 11 वर्षों में राजा ने लगभग 1,300 छात्रों की मदद की है। जो लोग इस बारे में सुनते हैं कि वे अक्सर राजा के इस कार्य का समर्थन करते हैं। राजा ने कभी भी स्वयं के बारे में नहीं सोचा। उनका एकमात्र उद्देश्य है कि कोई भी बच्चा गरीबी की अभाव में पढ़ाई ना छोड़े। उन्होंने कहा कि देश के विकास के लिए शिक्षा, भोजन और एक अच्छा भविष्य होना चाहिए। इसके लिए सभी को अपना योगदान देना होगा। 



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