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सोमवार, 11 दिसंबर 2017

निगम का लाभकारी पोर्टल

उत्तरी दिल्ली नगर निगम ने एक लाभकारी पोर्टल के शुरूआत की घोषणा की है।

नई दिल्लीः उत्तरी दिल्ली नगर निगम ने एक लाभकारी पोर्टल के शुरूआत की घोषणा की है। इस पोर्टल से संपत्तिकर, म्यूटेशन, नाम परिर्वतन, संपत्ति का विवरण, निगम की योजनाओं में छूट और भुगतान जैसे कई अहम जानकारी मिलेगी। निगम आयुक्त प्रवीण गुप्ता ने यह जानकारी दी। इस पोर्टल का नाम दिया गया है-संवादनात्मक (इंटरेक्टिव) पोर्टल। उत्तरी दिल्ली नगर निगम के आयुक्त प्रवीण गुप्ता ने इसे निगम की महत्वाकांक्षी परियोजना बताते हुए कहा कि उत्तरी दिल्ली नगर निगम के संपत्तिकर के लिए एक इंटरैक्टीव पोर्टल शीघ्र ही प्रारंभ हो जाएगी। संपत्तिकरदाताओं की सुविधा को ध्यान में रखकर इसे विकसित किया गया है। 

उन्होंने कहा कि इस पोर्टल पर डिजिटलाइजेशन के कारण घर बैठे कई सुविधाएं सरलता से प्राप्त हो सकेंगी। इस पोर्टल के प्रारंभ होने से नागरिकों को यूपिक नंबर, आधार नंबर, नाम व पता अथवा यूपिक कार्ड पर मौजूद क्यू आर कोड के स्कैन के द्वारा लागिन कर कई सुविधाएं मिलेगी। इस पोर्टल पर उनकी संपत्ति का विवरण के साथ नागरिक अपने बकाया संपत्तिकर की गणना वतर्मान रेट, उपलब्ध कोई योजना अथवा छूट के अनुसार का पता भी कर सकेंगे। इसमें 2004-2005 से अब तक के संपत्तिकर के भुगतान का विवरण मिलेगा। संपत्ति के म्यूटेशन नाम परिर्वतन का निवेदन भी पोर्टल के माध्यम से किया जा सकेगा। यूपीक सर्वेक्षण के बाद की नई संपत्तियों के संपत्तिकर दायरे में समावेश की सुविधा। संपत्ति के गलत व झूठे विवरण की शिकायत भी पोर्टल के द्वारा की जा सकेगी। संपत्तिकरदाताओं को इसके माध्यम से विभिन्न योजनाओं व समय-समय पर दिए जाने वाली छूट की जानकारी एसएमएस या ईमेल के माध्यम से उपलब्ध होगी। 

गुप्ता ने बताया कि इस पोर्टल के माध्यम से निगम द्वारा संपत्तिकर संबंधी सभी जानकारी को संपत्ति क्षेत्र, कॉलोनी, वार्ड, क्षेत्र, श्रेणी व उपयोगिता के मुताबिक अलग-अलग संग्रहित कर रखा जा सकेगा। उन्होंने कहा कि इस पोर्टल के द्वारा आवासीय, व्यवसायिक व संस्थागत संपत्तियों के विवरण, आंकड़ो को भी अलग किया जा सकेगा।  आयुक्त ने बताया कि संपत्तिकर दाता इस पोर्टल के माध्यम से म्यूटेशन, संपत्ति के नामांतरण के लिए भी संपत्ति का विवरण देकर आवेदन कर सकते है। उस संपत्ति के विरूद्व सभी बकाया संपत्तिकर के भुगतान के पश्चात जो कि पोर्टल पर अपने आप ही उद्वत होगाए संपत्ति के ई म्यूटेशन- नामांतरण की प्रक्रिया प्रारंभ होकर निश्चित अवधि में संपूर्ण कर ली जाएगी। जिसका प्रमाणपत्र ईमेल अथवा पोस्ट के जरिए भेज दिया जाएगा। यह पूरी प्रक्रिया बिना मानव हस्तक्षेप के संभव होगी। उन्होंने बताया कि निगम द्वारा डिजिटाईजेशन, ई गर्वेंनेस व राजस्व में बढ़ौत्तरी के लिए उठाए गए कदमों में एक महत्वपूर्ण कदम है। 

उन्होंने कहा कि इससे न सिर्फ राजस्व में वृद्वि होगी अपितु निगम के अंतर्गत आने वाले सभी संपत्तियों के रिकार्डए सुविधाओं को निर्धारित समय में प्रदान करने के साथ ही पारर्दशिता में भी वृद्वि होगी। उत्तरी दिल्ली नगर निगम का उद्देश्य आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होना और सुशासन की स्थापना करना है। यह योजना निगम के डिजिटाइजेशन योजना का एक मुख्य भाग है जिसके अंतर्गत सभी संपत्ति का रिकोर्ड इलेर्क्टनिक माध्यम से रखना व सभी रिकार्डों को डिजिटल कर ऑनलाइन सिस्टम व यूपिक डाटा से जोड़ना है। गुप्ता ने बताया कि अब तक 531389 संपत्तियों के विवरण व रिकॉर्ड को स्कैन कर लिया गया है, जिनमें से 138221 संपत्तियां मिलान के लिए भेजी जा चुकी है और उनमें से 122614 संपत्ति का मिलान कर उन्हें समाहित किया जा चुका है। गुप्ता ने बताया कि उपरोक्त कारणों से उत्तरी दिल्ली नगर निगम द्वारा संपत्तिकर संग्रह में भी महत्वपूर्ण वृद्वि दर्ज की गई है 2016-17 में 613 करोड़ रूपए संपत्तिकर संग्रह हुआ है जबकि 2015-16 में यह आंकड़ा 371 करोड़ रूपए था। उन्होंने बताया कि यह वृद्वि निगम द्वारा उठाए गए संपत्ति के डिजिटाइजेशन व यूपीक प्रणाली का परिणाम है। 

उन्होंने बताया कि यह योजना निगम के संपत्तिकर संग्रहण को और बढ़ाने में लाभदायक होगी। निगमायुक्त ने बताया कि यूपीक प्रणाली जो कि वर्ष 2014 में प्रारंभ की गई जिसके अंतर्गत जीपीएस आधारित माध्यम से घर-घर जा कर संपत्ति का सर्वेक्षण कर प्रत्येक संपत्ति को अनूठा नंबर दिया जाता है। अब तक 619581 संपत्ति को सर्वे किया जा चुका है जिसमें से 251373 संपत्ति को जीएसडीएल के द्वारा सत्यापित भी किया जा चुका है और 114200 यूनिट यूपीक पैकेज वितरण के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि विज्ञापन विभाग के राजस्व में भी इस वर्ष काफी वृद्वि दर्ज की गई है। जहां 2015-16 में विभाग का राजस्व 1697 करोड़ रूपए था वो अपने निर्धारित लक्ष्य 3622 करोड रूपए से 2016-17 में बढ़कर 4109 करोड़ रूपए हो गया है। नई क्लस्टर नीति के कारण इसमें यह बढ़ोत्तरी हुई है। यह नीति गत वर्ष से प्रारंभ हुई है। राजस्व में अन्य लाभकारी योजनाओं के मद में भी वृद्वि हुई है। लाभकारी योजना कोष में 2012-13 में 3891 करोड़ रूपए की आय हुई थी जो 2016-17 में बढ़कर 60 करोड़ हो गई जो कि 50 करोड़ के निर्धारित लक्ष्य से काफी अधिक है। विज्ञापन विभाग के राजस्व में भी 2016-17 में काफी वृद्वि हुई है इस वर्ष 419 करोड़ रूपए की आय हुई है जो कि वर्ष 2012-13 में 1442 करोड़ रूपए था। यह बढ़ोत्तरी निर्धारित लक्ष्य 3622 करोड़ से काफी अधिक है।



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