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शनिवार, 15 दिसंबर 2018

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स्वच्छता में आदर्श नहीं रहा रूस

एक सप्ताह पहले
सोवियत संघ के विघटन के बाद रूस की स्थिति पहले जैसे भले नहीं रही हो, पर यहां के लोग और समाज अब भी सांस्कृतिक तौर पर काफी संपन्न हैं और कई अच्छी आदतें उनके जीवन में आज भी अहम हैं। ऐसी ही एक आदत रूसी समाज में स्वच्छता को लेकर काफी पहले से है। सभ्यतागत और सांस्कृतिक विकास के आधुनिक चरण में भी रूसी शहरों और समाज में स्वच्छता को पर्याप्त महत्व मिला। पर आर्थिक और सामरिक क्षेत्र में सर्वोच्चता के आसन से हिलने के बाद रूस में खासतौर पर स्वच्छता को लेकर स्थिति काफी खराब हुई है। वैसे यह प्रभाव वहां पेयजल उपलब्धता के मामले में नगण्य मालूम पड़ता है। सीआईए द वर्ल्ड फैक्टबुक के आंकड़ा के मुताबिक रूसी शहरों में करीब 99 फीसदी आबादी तक शुद्ध पेयजल...
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स्वच्छता का मॉडल देश

3 सप्ताह पहले
एक देश अगर स्वच्छता के हर तरह के मानकों पर खुद को तकरीबन सौ फीसद खरा उतार पाने में कामयाब हो तो उस देश की व्यवस्थागत खूबियों के साथ वहां के लोगों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति को लेकर दिलचस्पी स्वाभाविक है। स्वीडन एक ऐसा ही देश है, जो आर्थिक तौर पर काफी संपन्न होने के साथ स्वच्छता की दृष्टि से दुनिया का आदर्श देश बन गया है।   स्वच्छता में अव्वल बात अकेले स्वच्छता की करें तो पूरे स्वीडन में 99 फीसद से ऊपर आबादी तक उन्नत और सुरक्षित स्वच्छता सेवाओं की पहुंच है। वहां बमुश्किल एक फीसद आबादी ऐसी है, जो असुरक्षित स्वच्छता सुविधाओं का अब ...
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स्वच्छता की चुनौती से जूझता एक संपन्न देश

4 सप्ताह पहले
ब्राजील दक्षिण अमेरिका का सबसे बड़ा देश है। क्षेत्रफल और जनसंख्या की दृष्टि से यह विश्व का पांचवां सबसे बड़ा देश है। प्रकृति से लेकर अर्थव्यवस्था तक ब्राजील दुनिया के अग्रणी देशों की कतार में तो जरूर खड़ा है, पर उसके साथ यह विडंबना भी जरूरी है कि वहां विकास और संपन्नता का सर्व-समावेशी चरित्र अभी तक उभरना बाकी है।  सेनेटेशन कवरेज  बात अकेले स्वच्छता की करें तो ब्राजील की दशा अच्छी नहीं मानी जा सकती। यहां चूंकि अमीरी-गरीबी का फर्क बहुत ज्यादा है। लिहाजा जिन समुदायों और इलाकों तक पेयजल आपूर्ति के साथ स्वच्छता संबंधी सुविधाओं क...
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सूखा-स्वच्छता के संकट से जूझता देश

6 सप्ताह पहले
नांबिया या नामीबिया, नाम कोई भी लें पर इस दक्षिण अफ्रीकी देश की पूरी दुनिया में एक ही पहचान है- रेत और गरीबी। दक्षिण-पश्चिम अफ्रीका के इस उप-सहारा देश की राजधानी विंडहॉक है, जहां थोड़ी आधुनिकता भले दिख जाए पर यह शहर भी अपने स्लम इलाकों में अपने देश की स्थिति का सच अच्छे से बयां करता है। नामीबिया अपने संविधान में पर्यावरण संरक्षण को शामिल करने वाला दुनिया का पहला देश है, पर दुर्भाग्य से सीधे पर्यावरण से ज्यादा संकट यहां पानी और स्वच्छता जैसी बुनियादी सुविधाओं को लेकर है। लिहाजा, जिन हालात में लोग रह रहे हैं, वे खासे अस्वास्थ्यकर हैं। यह संकट यहां इस कारण ज्यादा जानलेवा नहीं क्योंकि नामीबिया पृथ्वी पर सबसे कम घनी आबादी वाला देश है...
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अस्थिर पर स्वच्छता के लिए तत्पर राष्ट्र

8 सप्ताह पहले
निकारागुआ आज दुनिया के उन देशों में शामिल है, जहां राजनीतिक अस्थिरता और हिंसा के कारण काफी असामान्य स्थिति है। इस कारण इस देश में लोकतंत्र की नींव अभी उतनी गहरी नहीं हुई है। पर यह भी दिलचस्प है कि इस सबका वहां की स्वच्छता की स्थिति पर ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ा है। सीईए वर्ल्ड फैक्टबुक के आंकड़े बताते हैं कि यह देश जल और स्वच्छता के मामले में अपने समकक्ष कई देशों से काफी आगे है।  जल एवं स्वच्छता निकारागुआ की शहरी आबादी का 76 फीसदी से ज्यादा हिस्सा उन्नत और सुरक्षित स्वच्छता सेवाओं का लाभ उठा रहा है, तो वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में ...
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अब जैविक शौचालय की तकनीक

43 सप्ताह पहले
गंदे और बदबूदार सार्वजनिक शौचालयों से निजात दिलाने के लिए जापान की एक गैर सरकारी संस्था ने जैविक शौचालय विकसित करने में सफलता हासिल की है। ये खास किस्म के शौचालय गंधरहित तो है ही, साथ ही पर्यावरण के लिए भी सुरक्षित हैं। संस्था द्वारा विकसित किए गए जैविक शौचालय ऐसे सूक्ष्म कीटाणुओं को सक्रिय करते हैं, जो मल इत्यादि को सड़ने में मदद करते हैं। इस प्रक्रिया के तहत मल सड़ने के बाद केवल नाइट्रोजन गैस और पानी ही शेष बचते हैं, जिसके बाद पानी को पुनःचक्रित (री-साइकिल) कर शौचालयों में इस्तेमाल किया जा सकता है। संस्था ने जापान की सबसे ऊंची पर्वत चोटी ‘माउंट फूजी’ पर इन शैचालयों को स्थापित किया है। गौरतलब है कि गर्मियों में यहां आ...
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फ्लश की आवाज पर पानी का पता नहीं

43 सप्ताह पहले
मीडिया सेंटर से वापस मैं कमरे में आया। नागर तैयार हो रहे थे। उनके बाद मैं भी नहाने घुस गया। बाथरूम बहुत ही शानदार था। सबसे आश्चर्य की बात थी कि कमोड अत्याधुनिक था। देखने में तो यह एकदम साधारण था मगर यह वास्तव में कंप्यूटराइज्ड था। आज सुबह भी और कल भी जल्दी-जल्दी में इस तरफ ध्यान नहीं दिया था। कमोड पर तरह तरह के रंग-िबरंगे बटन लगे थे, जिनमें जापानी में कुछ लिखा था। यह एेसा लग रहा था जैसे कोई कंट्रोल पैनल हो। इन बटनों को देखकर मेरे मन में जिज्ञासा हुई कि आखिर इनका मतलब क्या है। एक बटन दबाया तो फ्लश हो गया मगर पानी नहीं निकला। पूरे बाथरूम में जोर-जोर से फ्लश की आवाज आ रही थी पर पानी का कहीं पता नहीं था। मैं घबरा गया कि कहीं मैंने क...
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192 टोल प्लाजा पर शुरू हुई शौचालय सुविधा

44 सप्ताह पहले
नई दिल्लीः  भारत सरकार के कार्यक्रम स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण अपने 372 टोल प्लाजाओं में सड़क के दोनों ओर अलग-अलग महिला और पुरुष शौचालय उपलब्ध करा रहा है और इन स्थानों पर गंदगी दूर करने के लिए कचड़े के डब्बों और होर्डिगों पर स्वच्छता संदेश लगाया जा रहा है। प्राधिकरण ने स्वच्छ भारत मिशन के अंतिम वर्ष में सभी टोल प्लाजा में शौचालय सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा है। इस संबंध में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय प्रगति पर नजर रखे हुए हैं।
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कचरापुर से सफाईपुर

44 सप्ताह पहले
नई दिल्ली:   मुस्लिम आबादी बहुल इलाका हजरत निजामुद्दीन सूफी संत हजरत निजामुद्दीन औलिया की पवित्र दरगाह के लिए दुनियाभर में मशहूर है, लेकिन यहां स्थित मलिन बस्ती के पास कचरे का अंबार लगने के कारण इसे बाहर से आनेवाले लोग कचरापुर कहने लगे थे। लेकिन बच्चों के प्रयास से इलाके में ऐसा जादुई बदलाव आया कि कचरापुर की पहचान अब सफाईपुर से होने लगी है।  इस जादुई बदलाव के बारे में बस्ती में रहने वाली 10 वर्षीय चांदनी कहती है कि कचरापुर के नाम से इलाक...
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खुले में शौच को रोकेगा गुड मॉर्निंग दस्ता

82 सप्ताह पहले
मुंबई: महाराष्ट्र सरकार ने समूचे राज्य में खुले में शौच पर लगाम लगाने और ऐसा करने वाले लोगों की मानसिकता में बदलाव लाने के लिए दस्ते बनाने का निर्णय लिया है। एक सरकारी संकल्प (जीआर) में इन ‘गुड मॉर्निंग’ टीमों से कहा गया है कि वे न सिर्फ उन इलाकों में निगरानी करें जहां यह चलन अब भी चल रहा है, बल्कि यह भी देखें कि क्या लोगों की पहुंच शौचालयों तक है या नहीं।  इसमें कहा गया है कि इन टीमों में स्थानीय निकाय, स्वयं सहायता समूह, गैर सरकारी संगठन, छात्रों के प्रतिनिधि और क्षेत्र में स्वच्छता को लेकर काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हो...
Mangalsutra-Sold-for-Toilets

शौचालय के लिए बेच दिया मंगलसूत्र

84 सप्ताह पहले
गोरखपुर में भटहट क्षेत्र के बूढ़ाडीह गांव की सविता देवी आम लोगों के लिए एक प्रेरणा बन गई हैं। उन्होंने उन लोगों को स्वच्छता की राह दिखाई है, जो पैसे की कमी का हवाला देकर शौचालय का निर्माण नहीं करवाते हैं। सविता देवी ने शौचालय बनाने के लिए अपना मंगलसूत्र बेचकर एक मिसाल पेश की है। बिहार के पटना जिले की सविता देवी की शादी बूढ़ाडीह निवासी दिव्यांग वीरेंद्र मौर्या से हुई। शादी के बाद गांव आने पर शौचालय का नहीं  होना उन्हें अखरता था। आखिरकार उन्होंने मंगलसूत्र बेचकर शौचालय बनाने का फैसला किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान से प्रेरणा लेकर शौचालय बनाने वाली सविता देवी पहली महिला नहीं हैं। ऐसी कई महिलाएं और भी हैं...
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स्वच्छता के साथ रहेगी ‘मां’

84 सप्ताह पहले
स्वच्छता और शौचालय के प्रति जागरुकता फैलाने के लिए पूरे देश में तरह तरह के दिलचस्प तरीके अपनाए जा रहे हैं। कहीं सामूहिक उपवास का आयोजन किया रहा है तो कहीं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं और कहीं फिल्मी पोस्टरों और उनके संवादों का सहारा लिया जा रहा है। नैनीताल नगर पालिका ने फिल्म दीवार के पोस्टर और उसके संवाद के साथ एक दिलचस्प पोस्टर जारी किया है, जो इन दिनों काफी चर्चा में है।  पोस्टर में ‘दीवार’ फिल्म के तीनों पात्र, अमिताभ बच्चन, शशि कपूर और निरूपा रॉय नजर आ रहे हैं। इस फिल्म का एक मशहूर डायलॉग है, जो आज भी हर किसी की जुबान पर है ‘मेरे पास मां है’। ‘दीवार’ फिल्म के इसी स...


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