sulabh swatchh bharat

रविवार, 16 जून 2019

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सशक्त महिला, सशक्त परिवार

118 सप्ताह पहले
आरती अरुण गणाचार्य पेशे से पत्रकार थीं और एक अखबार के लिए काम करती थीं। अपनी कहानी की खोज में उन्हें अलग-अलग लोगों से मिलना होता था। मिलने-जुलने वालों में समाज के हर वर्ग के लोग शामिल थे। आरती कहती हैं, 'हर इंसान की, हर परिवार की अपनी कहानी और अपनी परेशानियां होती हैं, लेकिन एक चीज जो हर परिवार में एक जैसी थी, वो थी परिवार की महिलाएं। परेशानी चाह...
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मोस्लेमा बीबी - दिव्यांग बच्चों की अम्मा

121 सप्ताह पहले
पश्चिम बंगाल के मलांचा इलाके की मोस्लेमा बीबी का मानना है कि अगर हम अपने बच्चों की जरूरतों को पूरा नहीं कर पाएं तो कम से कम उनकी खुशियों को सुनिश्चित करना चाहिए, जो उनकी किसी भी जरूरत से बड़ी होती हैं। इसी यकीन पर कायम रहते हुए उन्होंने बच्चों के बधिरपन के दिनों को जिया और एक सम्मानजनक जिंदगी जीने के मुकाम तय किए। कोलकाता से लगभग 60 किलोमीटर की दूरी पर बसा इलाका मलांचा बंगाल के उन इलाकों में से है जहां अधिकतर लड़कियां शिक्षा से महरूम हैं या फिर कम पढ़ी-लिखी हैं। इन्हीं में से एक हैं - मोस्लेमा बीबी। शादी के तुरंत बाद उन्होंने एक बच्चे को जन्म दिया और उसके कुछ...
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सबसे सुंदर परिवार

121 सप्ताह पहले
नोएडा के एक घर 'बाल कुटीर’ के पूजा घर में आरती चल रही थी और मैं 60 बच्चों के साथ उस आरती में शामिल हुई। बच्चों की आंखें आरती की लौ से दमक रही थीं। यह नोएडा का सबसे बड़ा परिवार है। इस परिवार में कुल  60 सदस्य हैं और यह घर है उन बच्चों का जो अनाथ हैं, जिनकी किसी को जरूरत नहीं। इस परिवार की मुखिया हैं इन सब की मां अंजना राज गोपाल।   पहला बच्चा रजत अंजना एक पत्रकार थीं। करीब 26 साल पहले अंजना शाम को अपने दफ्तर से लौट रहीं थीं। तभी आईटो...


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