sulabh swatchh bharat

शनिवार, 25 मई 2019

creating-better-tomorrow-for-children

बच्चों के लिए बेहतर कल का निर्माण

31 सप्ताह पहले
‘कोई भी संगठन अपने इकोसिस्टम के लिए बेहतर काम और बेहतर जीवन के बिना अस्तित्व में नहीं हो सकता है’ - इन शब्दों को अपने दिमाग में रखते हुए और इसी दृष्टि के साथ आगे बढ़ते हुए, केयरवर्क्स फाउंडेशन (सीडब्ल्यूएफ) हमेशा समाज के लिए सबसे बेहतर कार्य के साथ आगे बढ़ने का प्रयास कर रहा है। कुछ भी देना सिर्फ दान नहीं है। यह एक बड़ा अंतर पैदा करने जैसा है। शिक्षा और स्वास्थ्य उस अंतर को लाने का सबसे बेहतर तरीका है। विकास के इन दो स्तंभों पर ध्यान देकर, सीडब्ल्यूएफ का लक्ष्य एक स्वस्थ और शिक्षित कार्यबल का निर्माण करना है और इस प्रकार समाज में हाशिए पर रह रहे वर्गों के लिए एक स्थायी आजीविका प्रदान करता है। 43 सरकारी स्कूलों क...
vandanas-passion-created-women-of-the-riot-hit-area-swamand

वंदना के जुनून ने दंगाग्रस्त क्षेत्र की महिलाओं को बनाया हुनरमंद

68 सप्ताह पहले
चंपानगर की रहने वाली 41 वर्षीय महिला वंदना झा अपनी मुस्लिम महिला मित्रों (सहयोगियों) नगमा खानम और सोनी खानम के साथ मिलकर अब तक सैकड़ों महिलाओं और लड़कियों को हुनरमंद बना चुकी है। ये महिलाएं न केवल अब आर्थिक रूप से सबल हुई हैं बल्कि कई तो महिलाओं को रोजगाार भी उपलब्ध करा रही हैं। भागलपुर से पांच किलोमीटर दूर चंपानगर क्षेत्र प्रारंभ से ही बुनकर बहुल इलाका रहा है परंतु यहां गरीबी और अशिक्षा बनी हुई है। दंगे के बाद जहां लोगों के सपने बिखर गए थे, वहीं क्षेत्र की रहने वाली वंदना झा ने 'मदद फाउंडेशन' के नाम की संस्था प्रारंभ की और महिला सशक्तीकरण के अभियान प्रारंभ कर महिलाओं को स्वावलंबी बनाने का बीड़ा उठाया। वंदना आईएएनएस से कहती हैं, "जब समाजसेवा करने का फैसला किया तब...
georges-vision-of-opening-the-eyes-of-the-mind-of-society

अद्भुत मिसाल : समाज के मन की आंखें खोलने में जुटे दृष्टिबाधित जॉर्ज

68 सप्ताह पहले
भारत की शीर्ष विज्ञापन कंपनियों ओगिल्वी एंड मैथर और एडवर्टाजिंग एंड सेल्स प्रमोशन कंपनी के साथ करीब 10 वर्ष के सफल करियर के बाद वह अब एक सामाजिक उद्यमी, एक प्रेरक वक्ता और एक कम्युनिकेटर हैं। उन्होंने दृष्टिबाधित लोगों के लिए समाज के प्रचलित नजरिए में बदलाव लाने के लिए ही काम नहीं किया, बल्कि 'वर्ल्ड ब्लाइंड क्रिकेट काउंसिल' के संस्थापक अध्यक्ष के रूप में 1998 में उन्होंने नेत्रहीनों को खुद पर भरोसा करने के लिए प्रेरित करने और उनके सपनों को उड़ान देने के लिए पहले नेत्रहीन क्रिकेट विश्व कप का आयोजन भी किया। जॉर्ज की जिंदगी को एक नया अर्थ मिला, क्योंकि उनके माता-पिता ने उनकी अक्षमता को उनकी क्षमताओं से ज्यादा बड़ा नहीं समझा। उन्होंने जॉर्ज को नेत्रहीन बच्चों क...
kanyashree-fighters-fights-for-girls-children-rights

लड़कियों के अधिकारों के लिए लड़ती हैं 'कन्याश्री फाइटर्स'

101 सप्ताह पहले
नीली सलवार-कमीज और सफेद दुपट्टे में लिपटी ये लड़कियां आपको सामान्य छात्राएं लग रही होंगी लेकिन दरअसल ऐसा है नहीं। ये 32 लड़कियां 'कन्याश्री फाइटर' हैं, जो बच्चियों के अधिकारों के लिए लड़ती हैं। जब भी इनको किसी नाबालिग की जबरन शादी की खबर मिलती है तो फाइटर्स का यह दस्ता तुरत सक्रिय हो जाता है और ऐसी शादियों सब कुछ करता है। पिछले 5 महीनों में इन्होंने पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद के हरिहरपारा ब्लॉक में इस दस्ते ने ऐसी 24 शादियां रुकवाई हैं। हरिहरपारा के ब्लॉक डेवलपमेंट अधिकारी  पूर्णेंदु सान्याल बताते हैं कि कन्याश्री फाइटर्स हमारा गर्व हैं। बाल-विवाह रोकने के लिए वे एक कठिन लड़ाई लड़ रही हैं। लड़कियों की शिक्षा...
NGO-Helps-to-Implement-Water-Treatment-Plants-in-Delhi

वाटर ट्रीटमेंट प्लांट

106 सप्ताह पहले
नई दिल्लीः दिल्ली के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में गैर सरकारी संगठन चाइल्ड सरवाइवल इंडिया संगठन की मदद से बवाना और नरेला स्थित जेजे कॉलोनी में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के लग जाने से यहां की तस्वीर बदल गई है। लोगों को पानी की कमी की समस्या से छुटकारा मिला है। साथ ही स्वच्छ पानी के मिलने से पेट संबंधी बीमारियों में कमी भी आई है। स्थानीय महिलाओं को रोजगार भी मिला है।  चाइल्ड सरवाइवल इंडिया से लंबे समय से जुड़ी रचना शर्मा के मुताबिक वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाने का प्रमुख उद्देश्य था कि लोगों को स्वच्छ जल मुहैया कराया जा सके। साथ ही इसके संचालन की जिम्मेदार...
 Sewadham-Ashram-Help-to-Physically-Challenged-People-in-Ujjain

सुधीर भाई का सेवाधाम

108 सप्ताह पहले
डॉ. विन्देश्वर पाठक 4 अप्रैल, 2017 को जब सेवाधाम आश्रम पहुंचे तो वहां का अनुभव उनके हृदय और आत्मा को झकझोर गया। उन्होंने वहां एक अद्भुत दुनिया देखी। वह दुनिया थी मानवता की सेवा की। उन्होंने देखा कि सेवाधाम आश्रम के संस्थापक और निदेशक सुधीर भाई गोयल 28 वर्षों से बहुत प्रेम और करुणा के साथ विकलांगों, बुजुर्र्गों, मानसिक रूप से बीमार लोगों, असहाय बच्चों और अशक्त महिलाओं की सेवा कर रहे हैं। डॉ. पाठक को लगा कि मानवता की इससे अच्छी सेवा नहीं हो सकती। सेवाधाम आश्रम सेवाधा...
 Jaya-Prayas-Help-Foundation-for-Poor-Childrens-in-Delhi

ममता की छांव में शिक्षा के फूल

109 सप्ताह पहले
64 साल की उम्र में जया बत्रा ने समाज सेवा का ऐसा संकल्प लिया है जिसे देख आस-पास के लोग चकित हैं। बत्रा कहती हैं कि उनकी जिंदगी के बचे सारे दिन उन झुग्गी झोपड़ी के बच्चे-बच्चियों को समर्पित हैं, जिसे शायद हमारे समाज ने मूलभूत सुविधाओं से वंचित रखा है। वे पार्क  में बच्चों को पढ़ाती ही नहीं हैं, बल्कि इस बात से चिंतित रहती हैं कि कहीं उन बच्चों को समाज में खुद को हीन भावना से ग्रसित न होना पड़े। इसे दूर करने के लिए वे अपने कुछ मित्रों और परिचितों की आर्थिक  मदद से पूरा करने की कोशिश करती है। दिल्ली से सटे इंदिरापुरम के अवंतीबाई पार्क उर्फ हाथी पार्क उनकी कर्मस्थली के रूप में इन दिनों लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। ...
ngo-akshaya-patra-against-hunger-in-all-over-india

भूख के खिलाफ 'अक्षय पात्र'

113 सप्ताह पहले
कोलकाता के पास मायापुर गांव। प्रभुपाद वहां एक मंदिर के उद्घाटन के लिए आए थे। दोपहर का समय था, भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद अपने कमरे की खिड़की से बाहर देख रहे थे। उनके साथ कुछ लोग भी बैठकर बातचीत कर रहे थे। तभी बाहर कुछ शोर हुआ। कुछ बच्चे चीख-चिल्ला रहे थे और कुत्ते भौंक रहे थे। प्रभुपाद ने खिड़की से झांक कर देखा, कुछ बच्चे एक कुत्तों के झुंड से भोज के बाद वहां फेंके गए जूठन के लिए लड़ रहे थे। दरअसल, मंदिर के उद्घाटन के बाद वहां भोज हुआ था और बच्चे और कुत्ते प्लेटों में पड़े जूठे खाने के लिए लड़ रहे थे। इस घटना ने प्रभुपाद के कोमल मन को झकझोर दिया। उन्होंने वहां बैठे लोगों को बुला...
ngo-self-against-globalization

वैश्वीकरण के खिलाफ 'अपने आप'

113 सप्ताह पहले
'एक दुनिया जहां इंसानों की खरीद-फरोख्त न होती हो' इस लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए 'अपने आप' लगातार काम कर रही है। पिछले दो दशकों से मानव तस्करी और वेश्यावृत्ति के खिलाफ काम करने वाली रुचिरा गुप्ता की यह संस्था कई मायनों में अहम है। संस्था के तमाम विचार ही बहुत कुछ सोचने-विचारने को मजबूर करते हैं। देह के व्यापार को मात्र एक समस्या समझकर समाधान के प्रयास करना बेमानी है। जब तक इसके तमाम सामाजिक कारणों पर चर्चा नहींं होगी, तब तक किसी सही समाधान पर नहींं पहुंचा जा सकता। आंकड़े गवा...
ngo-goonj-to-help-poor-peoples-in-india

कपड़े की गूंज

113 सप्ताह पहले
'इंसान ठंड से नहींं मरता, बल्कि कपड़े की कमी से मरता है। गैर सरकारी संगठन 'गूंज' का यह वाक्य शायद सब कुछ बताने को काफी है। शीत लहर की चपेट में कितने ही लोगों की हर साल जान जाती है, और खबर होती है 'ठंड ने ली इतनों की जान', लेकिन तथ्य यह है कि जान ठंड से नहींं जाती, बल्कि ठंड में जरूरत लायक कपड़े न होने की वजह से जाती है, अभाव से जाती है। अब जहां तक बात है गरीब तबके में कपड़ों के अभाव की...
education-ngo-pratham-helps-poor-kids-in-mumbai

शिक्षा का प्रथम सर्ग

113 सप्ताह पहले
'प्रथम' की शुरुआत वर्ष 1995 में म्युनिसिपल कॉरपोरेशन ऑफ ग्रेटर मुंबई, यूनिसेफ और कुछ वरिष्ठ नागरिकों की साझी पहल से हुई। इसे एक चैरिटेबल ट्रस्ट के तौर पर शुरू किया गया। 'प्रथम' को शुरू करने के पीछे मकसद था - मुंबई में स्लम और गरीब इलाकों में रहने वाले बच्चों तक तालीमी पहुंच को मुमकिन और आसान बनाना। आज यह संस्था आकार और कामकाज-दोनों ही लिहाज से काफी बड़ी हो चुकी है। अपने जन्म के दो दशक के भीतर इस संस्था ने ...
womens-are-half-of-the-world-to-empowerment

'सेवा' की आधी दुनिया

113 सप्ताह पहले
बात वर्ष 1990 के आसपास की होगी। बिहार के भागलपुर में 'सेवा' का एक केंद्र चलता है। इस केंद्र से जुड़ी महिलाएं वहीं चल रहे गांधी शांति प्रतिष्ठान के केंद्र से भी जुड़ी हैं। लिहाजा, जब वहां लोगों को पता चला कि इला भट्ट आने वाली हैं, तो उन्हें देखने और मिलने वालों की अच्छी-खासी भीड़ जमा हो गई। यही पहली मुलाकात थी मेरी इला बहन से। तब उन्हें ज्यादा नहींं जानता था, पर जब उन्हें वहां सुना-देखा तो उनके साधारण से व्यक्तित्व में भरी असाधारण ऊर्जा और प्रेरणा से प्रभावित हुए बिना नहींं रह सका। उन्होंने तब हम लोगों से बातचीत के बीच कहा था कि महिलाएं समय और समाज का इंजन हैं, इन्हें सवारी डिब्बों की तरह हम ढोएंगे तो हम हर लिहाज से पिछड़ जाएंगे। इससे जुड़...


Bringing smiles to every face hindi ad copy %281%29

ऑडियो