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शुक्रवार, 24 नवंबर 2017

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डॉ. सुधीर शुक्ल चिट्ठी से बनी सड़क

43 सप्ताह पहले
आपकी एक जागरूक पहल कैसे एक बड़ी कामयाबी बनती है, इसकी मिसाल पेश की है ओमान में रहने वाले डॉ. सुधीर शुक्ल ने। सतना जिले की जिस जर्जर सड़क के लिए गांव वाले दस सालों से संघर्षरत थे, वो सड़क अब डॉ. सुधीर शुक्ल के प्रयासों से बननी शुरू हो गई है। डॉ. शुक्ल ओमान से छुट्टियां मनाने थोड़े दिन के लिए अपने गांव आए हुए थे, यहां जब उन्होंने यहां की जर्जर सड़क की वजह से ग्रामवासियों को होने वाली परेशानियों को देखा तो उन्हें बेहद तकलीफ हुई। उन्होंने पीएमओ को एक चिट्ठी लिखी और ग्रामवासियों की तकलीफों से अवगत कराया। पीएमओ ने कुछ ही दिनों में पक्की सड़क की मंजूरी दे दी। डॉ. शुक्ल अपने इस प्रशंसनीय कदम की वजह से पूरे गांव की नज़र में हीरो बन गए।
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नइशुते डउलो एक नगा सपना

44 सप्ताह पहले
बढ़ती बेरोज़गारी से परेशान होकर नगालैंड से अपना घर और शहर छोड़ कर रोज़गार की तलाश में जाने की तैयारी कर रहे करीब 15 हजार युवाओं को नइशुते डउलो न सिर्फ उन्हें विस्थापित होने से बचाया, बल्कि उनके लिए रोज़गार के अवसर भी उपलब्ध करवाए। नइशुते एक सफल जीवन जी रहे थे। वह बैपटिस्ट कॉलेज, कोहिमा में अर्थशास्त्र के व्याख्याता थे। लेकिन राज्य के युवाओं को बेहतर जीवन उपलब्ध कराने और उन्हें मुख्यधारा से जोडऩे के लिए उन्होंने अपनी यह नौकरी छोड़ दी। 2000 में नौकरी छोडऩे के बाद उन्होंने आंत्रप्रेन्योर एसोशिएट्स की स्थापना नगालैंड के युवाओं के कौशल को विकसित करने और काम के...
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लेफ्टिनेंट कर्नल आर.एस. जमवाल - बहादुर पर्वतारोही

45 सप्ताह पहले
पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने कहा था, 'ऊंचाई तक जाने के लिए शक्ति की आवश्यकता होती है, भले ही वह ऊंचाई एवरेस्ट की हो या आपके कैरियर की।’ लेफ्टिनेंट कर्नल रणवीर सिंह जाट रेजिमेंट से हैं। वह अब तक एक या दो नहीं, बल्कि तीन बार एवरेस्ट पर चढ़ चुके हैं। वह विश्व की सबसे ऊंचे शिखर 8848 पर चढ़ चुके हैं। यह कारनामा वे मई 2012 और मई 2013 में कर चुके हैं। पिछले साल वह एक बार फिर इंडियन आर्मी के 14 सदस्यों के साथ इस ऊंची चोटी पर चढऩे में कामयाब हुए। जमवाल जम्मू-कश्मीर के सांबा के एक छोटे-से गांव बधोरी से ताल्लुक रखते हैं। पहले उन्होंने आर्मी के डों...
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संध्या और सरित - इस 'आविष्कार को सलाम’

46 सप्ताह पहले
पालमपुर के सघन हरे-भरे पहाड़ों के बीच 12 वर्षीय अंजली लकड़ी और रबर से अपना स्केटबोर्ड बना रही है। कुछ ही दूरी पर लड़कों के एक समूह के साथ संध्या गुप्ता कागज का हवाई जहाज उड़ा रही हैं। वह इस माध्यम से बच्चों को व्यावहारिक तरीके से वायु-गति-विज्ञान का सिद्धांत पढ़ा रही हैं। वहीं एक बड़े हॉल में सरित शर्मा बल्ब, स्विच और प्रतिरोधकों के सहारे सर्किट बनाने का प्रयास कर रही लड़कियों के एक समूह को देख रहे हैं। 'आविष्कार' की यह पहल बेहद दिलचस्प है। जिसके सहारे बच्चे विज्ञान और गणित के कठिन पाठ को आसानी से समझ जाते हैं। 'आविष्कार' की शुरुआत संध्या और सरित ने किया। दोनों अमेरिका की आईओडब्ल्यूए स्टेट यूनिवर्सिटी से पीएचडी कर ...
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जल, जमीन के जैविक पहरुए

51 सप्ताह पहले
उम्र के जिस पड़ाव पर लोग आराम करना चाहते हैं, अपनों के साथ समय बिताना चाहते हैं और सुकून पसंद करते हैं, ऐसी उम्र में 53 वर्षीय सुनीत साल्वे ने जमा-जमाया व्यवसाय छोड़कर जैविक या प्राकृतिक खेती के लिए अपनी जिंदगी समर्पित की और जल, जमीन, जीवन के संरक्षक बन गए।   महाराष्ट्र के थाणे जिले में फर्नीचर का अच्छा-खासा बिजनेस करने वाले सुनीत 50 वर्ष के हुए तो वे अगले 10-15 साल कुछ नया और अलग करना चाहते थे। उन्हें प्रकृति अपनी ओर खींच रही थी।


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