sulabh swatchh bharat

शनिवार, 24 फ़रवरी 2018

divyang-mukunda-make-toilet-in-her-house

दिव्यांग मुकुंदा का जज्बा

46 सप्ताह पहले
स्वच्छ भारत मिशन देश में अब एक आंदोलन की शक्ल ले चुका है। शहरों से लेकर सुदूर गांव-कस्बों तक से हर दिन ऐसी मिसालें सामने आ रही हैं, जिसमें अभाव और प्रतिकूलता के बावजूद लोगों ने खुले में शौच से मुक्ति के प्रति अपना पक्का इरादा दिखाया है। ऐसी ही एक मिसाल सामने आई है राजस्थान के उदयपुर जिले से। यहां के गरनाला कोटड़ ग्राम पंचायत की दिव्यांग महिला मुकुंदा ने शारीरिक और आर्थिक प्रतिकूलता के बावजूद घर में शौचालय बनवाकर एक प्रेरक उदाहरण पेश किया। गौरतलब है कि मुकुंदा दोनों पैरों से असमर्थ हैं। स्थानीय प्रशासन की तरफ से लोगों को शौचालय निर्माण के लिए जागरूक करने के लिए जब घर-घर संपर्क अभियान चलाया जा रहा था तो पंचायत समिति के सदस्यों के साथ स्थानीय अधिकारियों का समूह मुकुंदा के घर भी ...
gautam-support-to-hungry-and-poor-peoples-in-hyderabad

भूखों और बेघरों का सहारा

47 सप्ताह पहले
एक तरफ  जहां दुनिया दो वक्त की रोटी की जुगत में लगी रहती है, वहीं एक शख्सियत ऐसी भी है, जो अपनी नौकरी छोड़ बेघरों की भूख की सुध ले रहा है। कॉर्पोरेट कंपनी में काम कर चुके गौतम कुमार अब बेघरों के लिए भोजन की व्यवस्था सुनिश्चित करने में लगे हैं। हैदराबाद के रहने वाले गौतम का काम मध्यरात्रि में शुरू होता है। वे अपनी टीम के साथियों के साथ शादी और पार्टी स्थलों के आसपास गश्त लगाते हैं और वहां से बचे भोजन और अन्य सामान को शहर के गरीबों में वितरित करते हैं। गौतम को एक्सपीडिया समेत कई कंपनियों में काम करने और पूरे देश में घूमने का अनुभव है। लगभग पांच साल पहले गौतम ने ऐसी खुशनुमा नौकरी को अलविदा कहकर एक एनजीओ खोलने का फैसला किया। गौतम कहते हैं, 'मैं मानवता की सेवा करना चाहता ...
young-women-sarpanch-close-gambling-game-in-rolasar-rajsthan

बहादुरी की परमेश्वरी

47 सप्ताह पहले
राजस्थान में तोलासार ग्राम पंचायत के गांव रोलासर की युवा सरपंच ने युवाओं को बुरी लत से ही दूर नहीं किया, बल्कि उन्हें सही रास्ते पर भी ले आईं। यह काम कर उन्होंने पूरे क्षेत्र में मिसाल कायम की है। इस परमेश्वरी गोदरा ने गांव में ताश और जुआ खेलने वालों की लत छुड़ाकर कई लोगों के घरों को उजडऩे से बचा लिया। अब इस गांव के लोग जुए पर ध्यान ना देकर काम पर ध्यान देते हैं। बीए-बीएड कर चुकी परमेश्वरी गोदरा किसान किशनलाल गोदरा की बेटी हैं। मात्र 24 साल की उम्र में सरपंच बनने वाली गोदरा ने गांव के लोगों के लिए मिसाल कायम की है। पहले गांव के ज्यादातर युवा दिनभर चौपाल और गुवाड़ में ताश खेलते रहते थे। खेलने के साथ ही साथ ये लोग हर दूसरे दिन लड़ाई-झगड़ा भी करते रहते थे, जिससे पूरे गांव का माह...
ias-anupama-fight-against-adulteration-in-kerala

मिलावट के खिलाफ अनुपम जंग

50 सप्ताह पहले
अगर ठान लिया जाए तो देश से भ्रष्टाचार की बीमारी को दूर किया जा सकता है। कुछ ऐसा ही केरल की अनुपमा ने महज 15 महीने में कर दिखाया। भ्रष्टाचार को खत्म करके ईमानदारी से काम करने की कवायद देश के प्रधानमंत्री मोदी तब से कर रहे हैं, जब से उनकी केंद्र में सरकार बनी है। इसी कवायद को केरल की आईएएस ऑफिसर टी वी अनुपमा आगे बढ़ा रही हैं। अनुपमा ने कार्यभार संभालते ही ऐसा कमाल कर दिखाया कि महज 15 महीने में केरल के मिलावटखोर उनके नाम से थर-थर कांपने लगे। बता दें कि यह एक संयोग ही है कि जब केंद्र में मोदी की सरकार बनी, तो उसी दौरान केरल में आईएएस अनुपमा को फूड सेफ्टी कमिश्नर बनाया गया। उसके बाद कार्यभार संभालते ही अनुपमा ने मिलावटखोरों पर नकेल कसने के लिए एक अभियान की शुरुआत की।...
ayyappa-masagi-is-india-water-doctor

अयप्पा मासगी- बिन पानी सब सून

51 सप्ताह पहले
जल ही जीवन है ऐसा हम किताबों और अपने बड़े बुजुर्गों से बचपन से सुनते आ रहे हैं। इसके साथ ही देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी अपनी एक जनसभा के दौरान जनता को संबोधित करते हुए पानी को प्रकृति का दिया हुआ प्रसाद बताया था, लेकिन जब जीवन का अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाये तो क्या कहा सकता हैं। पिछले दिनों केंद्र सरकार को यूपी के बुंदेलखंड और महाराष्ट्र के लातूर में पानी ट्रेन से भेजना पड़ा था। वहीँ कुछ भविष्यवक्ता बताते हैं कि आने वाले समय में यह समस्या और बढ़ने वाली है, लेकिन इस समस्या से निजात दिलाने के लिए अयप्पा मासगी ने एक नेक कदम उठाया है। इन्हें कहते हैं वाटर डॉक्टर अयप्पा मासगी के नाम से आप लोग भले ही परिचित न हों लेकिन...
7c303625-3639-410a-976c-ff1b73cfa059

बसंत साहू - हौसले का बसंत

53 सप्ताह पहले
'खुदी को कर बुलंद इतना कि हर तकदीर से पहले खुदा बंदे से पूछे बता तेरी रज़ा क्या है।’ यह वाक्य पूरी तरह से चरितार्थ हो रहा है बसंत साहू पर। शरीर का 90 फीसदी हिस्सा काम नहीं करता है। फिर भी अपने जोश-जज्बे और बुलंद इरादे के दम पर एक नई मिसाल पेश कर रहे हैं - बसंत। छत्तीसगढ़ के धामतरी में रहने वाले बसंत के हाथ-पैर में जान न के बराबर है, लेकिन जब हिम्मत और जोश के साथ वह कूची उठाकर कैनवस पर रंग बिखेरते हैं तो तस्वीरें खुद ब खुद बोल उठती हैं। अपनी रंगहीन दुनिया में न केवल उन्होंने हौसले और उम्मीदों के रंग भरे हैं, बल्कि दूसरों के जीवन को भी रंगीन कर रहे हैं।
40661259-c353-462e-b8ee-82ca69960701

निकोलस ग्रे और मेरी - पानी देसी बचा रहे विदेशी

53 सप्ताह पहले
पानी की कीमत प्यास से तय होती है। पानी में तैरने वाले गांवों के लिए यह सहज उपलब्ध है, इसीलिए पानी की कीमत इनके लिए बहुत ज्यादा नहीं है, लेकिन रेतीले राजस्थान में पानी की कीमत क्या है? यह सवाल पूछना ही बेमानी है, जहां एक-एक बूंद के लिए लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में अगर कोई अपना जीवन राजस्थान की प्यास बुझााने में लगा दे तो उसे यहां के लोग क्या कहेंगे और मानेंगे, इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। राजस्थान की प्यास को ब्रिटेन के रहने वाले निकोलस ग्रे और उनकी पत्नी मेरी ने तीस साल पहले अपनी प्यास बना लिया और फिर यह जोड़ा प्यास बुझाने के काम...
b1ff3be8-42d8-4953-89f1-a861f9c06a48

विजयलक्ष्मी शर्मा - बाल विवाह पर विजय

54 सप्ताह पहले
  अगर इरादें मजबूत हो तो बड़ी सी बड़ी परेशानियां भी घुटने टेकने को मजबूर हो जाती है। कुछ इसी बात को चरितार्थ कर रही हैं राजस्थान के एक छोटे से गांव की विजयलक्ष्मी शर्मा। जिस गांव में हर घर में बाल विवाह होता हो, बाल विवाह जहां के रीति रिवाज में वर्षों से शुमार है। वहां पर इस कुप्रथा के खिलाफ आवाज़ बुलंद करना किसी चुनौती से कम नहीं था, लेकिन विजयलक्ष्मी ने न केवल खुद की बाल विवाह पर रोक लगवाई, बल्कि गांव की कई लड़कियों के लिए भी मददगार बनकर आगे आई है।
d94b83c6-fe8b-4e28-aac7-faedfb2f4ec3

संदीप पांडेय - बापू के सपने का संदीप

55 सप्ताह पहले
पेशे से आईआईटी के प्राध्यापक और फिर आईएस अफसर बनने की तमन्ना रखने वाला एक युवा  हरदोई में अपने गांव से लखनऊ में अपने घर लौटकर आया। सफर में काफी थक जाने के बाद उसने अपनी मां से अपने लिए और अपने एक दलित साथी के लिए चाय बनाने की अपील की। उसकी मां ने उसके दलित साथी के लिए चाय तो बनाई पर उसे अलग कप में चाय दी गई। इस घटना ने उस युवक के मन पर इस बात की गहरी छाप छोड़ी कि जातिवादी और मध्यकालीन मानसिकता के कारण समाज के कुछ लोगों के प्रति आज भी भेदभाव बरता जाता है। असल में वह युवक शुरू से थोड़ा विद्र्रोही स्वभाव का था। दलितों और महिलाओं के उत्पीडऩ को लेकर उनके मन में गुस्सा बहुत पहले से था। उसने यह तय भी कर लिया था कि आगे चलकर वह समाज...
a10463d9-73a0-40ca-b23b-75ae079571d7

डॉ. सुधीर शुक्ल चिट्ठी से बनी सड़क

56 सप्ताह पहले
आपकी एक जागरूक पहल कैसे एक बड़ी कामयाबी बनती है, इसकी मिसाल पेश की है ओमान में रहने वाले डॉ. सुधीर शुक्ल ने। सतना जिले की जिस जर्जर सड़क के लिए गांव वाले दस सालों से संघर्षरत थे, वो सड़क अब डॉ. सुधीर शुक्ल के प्रयासों से बननी शुरू हो गई है। डॉ. शुक्ल ओमान से छुट्टियां मनाने थोड़े दिन के लिए अपने गांव आए हुए थे, यहां जब उन्होंने यहां की जर्जर सड़क की वजह से ग्रामवासियों को होने वाली परेशानियों को देखा तो उन्हें बेहद तकलीफ हुई। उन्होंने पीएमओ को एक चिट्ठी लिखी और ग्रामवासियों की तकलीफों से अवगत कराया। पीएमओ ने कुछ ही दिनों में पक्की सड़क की मंजूरी दे दी। डॉ. शुक्ल अपने इस प्रशंसनीय कदम की वजह से पूरे गांव की नज़र में हीरो बन गए।
03008ad2-3b95-4322-b10a-fdcc1b53b35d

नइशुते डउलो एक नगा सपना

58 सप्ताह पहले
बढ़ती बेरोज़गारी से परेशान होकर नगालैंड से अपना घर और शहर छोड़ कर रोज़गार की तलाश में जाने की तैयारी कर रहे करीब 15 हजार युवाओं को नइशुते डउलो न सिर्फ उन्हें विस्थापित होने से बचाया, बल्कि उनके लिए रोज़गार के अवसर भी उपलब्ध करवाए। नइशुते एक सफल जीवन जी रहे थे। वह बैपटिस्ट कॉलेज, कोहिमा में अर्थशास्त्र के व्याख्याता थे। लेकिन राज्य के युवाओं को बेहतर जीवन उपलब्ध कराने और उन्हें मुख्यधारा से जोडऩे के लिए उन्होंने अपनी यह नौकरी छोड़ दी। 2000 में नौकरी छोडऩे के बाद उन्होंने आंत्रप्रेन्योर एसोशिएट्स की स्थापना नगालैंड के युवाओं के कौशल को विकसित करने और काम के...
87336217-1ba0-433a-9a9b-540f14af479f

लेफ्टिनेंट कर्नल आर.एस. जमवाल - बहादुर पर्वतारोही

58 सप्ताह पहले
पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने कहा था, 'ऊंचाई तक जाने के लिए शक्ति की आवश्यकता होती है, भले ही वह ऊंचाई एवरेस्ट की हो या आपके कैरियर की।’ लेफ्टिनेंट कर्नल रणवीर सिंह जाट रेजिमेंट से हैं। वह अब तक एक या दो नहीं, बल्कि तीन बार एवरेस्ट पर चढ़ चुके हैं। वह विश्व की सबसे ऊंचे शिखर 8848 पर चढ़ चुके हैं। यह कारनामा वे मई 2012 और मई 2013 में कर चुके हैं। पिछले साल वह एक बार फिर इंडियन आर्मी के 14 सदस्यों के साथ इस ऊंची चोटी पर चढऩे में कामयाब हुए। जमवाल जम्मू-कश्मीर के सांबा के एक छोटे-से गांव बधोरी से ताल्लुक रखते हैं। पहले उन्होंने आर्मी के डों...


Bringing smiles to every face hindi ad copy %281%29

ऑडियो