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शनिवार, 24 फ़रवरी 2018

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पूर्वी जोशी - जैविक खेती की मह‌िला रोल मॉडल

34 सप्ताह पहले
भारत में कृषि कार्यों से महिलाएं पारंपरिक तौर पर जुड़ी रही हैं। नए दौर में फर्क यह आया है कि अब इस क्षेत्र में उनके उद्यम को पहचान मिलने लगी है। महिला सशक्तीकरण के लिहाज से यह बड़ी बात है। ऐसी ही एक महिला हैं पूर्वी व्यास। ऑस्ट्रेलिया की वेस्टर्न सिडनी यूनिवर्सिटी से पर्यावरण प्रबंधन में स्नातक करने वाली पूर्वी व्यास की जिंदगी उनके एक फैसले ने पूरी तरह बदल दी। अब वह पूरी तरह से जैविक किसान बन चुकी हैं। वह अगली पीढ़ी के किसानों और युवाओं को सिखा रही हैं कि किस तरह खेती करके भी अच्छी जिंदगी बिताई जा सकती है। 1999 में अपना पोस्ट ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद पूर्वी ऑस्ट्रेलिया से लौटकर भारत आ गईं। उन्होंने कुछ गैर सरकारी संगठनों के सा...
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नीरू चड्ढा - आईएलओएस पहुंची पहली भारतीय महिला

35 सप्ताह पहले
भारतीय महिलाओं की सबलता और सफलता आज पूरी दुनिया में देखी जा सकती है। उन्होंने हर क्षेत्र में अपने उद्यम और प्रतिबद्धता को साबित किया है। ऐसी ही उपलब्धि हासिल करने वालों में नीरू चड्ढा का नाम जुड़ गया है। संयुक्त राष्ट्र में भारत को एक बड़ी उपलब्धि हासिल कराते हुए अंतरराष्ट्रीय लॉ एक्सपर्ट नीरू चड्ढा को इंटरनेशनल ट्रिब्यूकनल फॉर द लॉ ऑफ द सी (आईएलओएस) की पहली भारतीय महिला सदस्य के रूप में चुना गया है। संयुक्त राष्ट्र की यह न्यायिक इकाई समुद्र से जुड़े कानूनों पर फैसला करती है। वह 21 सदस्यीय अदालत में स्थान पाने वाली पहली भारतीय महिला न्यायाधीश हैं। नीरू चड्ढा प्रख्यात वकील हैं और विदेश मंत्रालय की चीफ लीगल एडवाइजर बनने वाली पहली ...
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कार्तिकेय थियम सुंदरम - डिजिटल साक्षरता

35 सप्ताह पहले
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से चलाए गए डिजिटल इंडिया कार्यक्रम से प्रेरित होकर 16 वर्षीय कार्तिकेय थियम सुंदरम ने वंचितों के लिए कंप्यूटर की एक सरल और व्यापक पुस्तिका विकसित की है। कार्तिकेय इसके माध्यम से गरीब और वंचितों की मदद करना चाहता थे, इसीलिए उन्होंने हिंदी और अंग्रेजी दोनों में इसके पाठ्यक्रम और सामग्री को स्वतंत्र रूप से डिजाइन किया।  बता दें कि कार्तिकेय जीडी  गोयनका वर्ल्ड स्कूल, सोहना के छात्र हैं। कार्तिकेय को उत्सव फाउंडेशन ने उनके इस प्रयास के लिए समर्थन दिया, जहां उन्होंने सर्दियों की छुट्टियों के दौरान वंचित बच्चों और वयस्कों के लिए कंप्यूटर साक्षरता पर काम किया। सिर्फ 30 दिनों में ही कार्...
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प्रिंस की बर्ड एंबुलेंस

36 सप्ताह पहले
पक्षियों से प्यार तो सभी करते हैं, पर उनकी सेहत के लिए शायद ही कोई फिक्र करता है। चंडीगढ़ के साइन बोर्ड बनाने वाले पेंटर प्रिंस मेहरा को इसी बात ने प्रेरित किया और आखिरकार उन्होंने देश की पहली बर्ड एंबुलेंस बना डाली। प्रिंस घायल पक्षियों को दूर-दूर तक ढ़ूंढता  है और फिर अपने बनाए एंबुलेंस में उनका इलाज करता है। उनकी बर्ड एंबुलेंस एक तरह का ई-बाइक है। इससे पहले वह कई साल तक घायल परिंदों की देखभाल के लिए साइकल को ही बर्ड एंबुलेंस के तौर पर इस्तेमाल कर रहा था। उनकी यह मुहिम दुनिया के सामने आई तो एक बैंक ने उन्हें वैन डोनेट करने की कोशिश की। प्रिंस ने वैन के पैट्रोल से फैलने वाले प्रदूषण से चिंतित होकर इसे लेने से मना कर दिया तो ...
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इंद्राणी दास- भारतीय मूल की बेटी को जूनियर नोबेल 

37 सप्ताह पहले
  भारतीय मूल की 17 वर्षीय अमेरिकी छात्रा इंद्राणी दास को इस साल के रीजेनेरोन साइंस टैलेंट सर्च पुरस्कार से नवाजा गया है। इसे साइंस का जून‌ियर नोबेल कहा जाता है। यह पुरस्कार अमेरिका में हाई स्कूल के विज्ञान और गणित के छात्रों की प्रतियोगिता के विजेता को दिया जाता है। इंद्राणी को न्यूरोलॉजी के क्षेत्र में उनके प्रोजेक्ट के लिए यह पुस्कार द‌िया गया है। इंद्राणी के प्रोजेक्ट में मानव मस्तिष्क में चोट लगने के बाद होने वाले नुकसान का इलाज करने का नया तरीका बताया गया है। वह बताती हैं उन्हें तो यकीन ही नहीं हो रहा है कि उन्हें जूनियर नोबेल पुरस्कार मिला है। उनके ही शब्दों में, ‘जब यह पुरस्कार मुझे मिला तो मुझे तो बहुत अचंभा हुआ था, मुझे तो अब भी यकीन नहीं होता। म...
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रवि कृष्ण - सेवा की खाकी

38 सप्ताह पहले
खाकी वर्दी से जुड़ी छवि आमतौर पर धौंस-पट्टी या डर की मानी जाती है। पर कई ऐसे पुलिस अफसर भी हैं, जिन्होंने सुरक्षा के संकल्प के साथ जन सेवा का भी अहम कार्य किया है। रवि कृष्ण ऐसे ही एक आईपीएस अधिकारी हैं, जिन्हें देखकर लोगों को डर नहीं लगता, बल्कि सेवा और सहयोग की प्रेरणा मिलती है। इन दिनों वे आंध्र प्रदेश के रायलसीमा मंडल में आने वाले कुरनूल जिले में तैनात हैं। उन्होंने वहां एक ऐसे गांव को गोद ले रखा है, जो अपनी अपराध गाथाओं के लिए कुख्यात रहा है। यह गांव है कपाटराला, जहां कुछ समय पहले तक दिन-दहाड़े लोगों की हत्या हो जाना आम बात थी। दिलचस्प है कि इस गांव के 21 लोग अब भी उम्रकैद की सजा काट रहे हैं। अब रवि कृष्ण ने जरायम की इस धरती ...
Lhakpa-Sherpa-Breaks-World-Record-to-Climb-Everest-Eighth-Time

लखपा शेरपा - आठवीं बार एवरेस्ट फतह

39 सप्ताह पहले
नेपाल की लखपा शेरपा माउंट एवरेस्ट पर सबसे ज़्यादा बार चढ़ने वाली महिला बन गई हैं। 44 वर्षीया लखपा ने आठवीं बार एवरेस्ट की चोटी पर कदम रख नया कीर्तिमान बनाया। इसी दिन भारत के भी छह पर्वतारोही एवरेस्ट पर पहुंचे। ये इस वर्ष एवरेस्ट पर जानेवाला पहला जत्था है। इस साल नेपाल की ओर से लगभग 750 पर्वतारोही एवरेस्ट पर जाने की कोशिश कर रहे हैं। लखपा ने वर्ष 2000 में पहली बार माउंट एवरेस्ट फतह किया था। नेपाल में जन्मी लखपा शेरपा अमेरिका में रहती हैं, जहां वो तीन बच्चों का अपना परिवार संभालती हैं। उन्होंने पिछले साल कहा था, ‘मैं अमरीका में बहुत मेहनत करती हूं, ये आसान नहीं है, मगर मैं अपने बच्चों को पढ़ाना चाहती हूं, मैं उनके लिए मेहनत ...
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होनोली - सबसे बड़े चर्च की महिला वास्तुकार

40 सप्ताह पहले
नगालैंड में बनाया गया है एशिया का सबसे बड़ा सुमी बैप्टिस्ट चर्च। इस आलीशान चर्च को बनाने का सबसे पहला ख्याल आज से तेरह साल पहले आर्किटेक्ट होनोली को आया, जो खुद भी नगालैंड की रहनेवाली हैं। इस चर्च को बनाने में लगभग 36 करोड़ रुपए का खर्च आया, जो चर्च के सदस्यों से प्राप्त दान और मौजूदा फंड से जुटाया गया। वास्तुकार होनोली ने बताया कि चर्च में 8000 लोगों के बैठने की आरामदेह व्यवस्था है। यही नहीं, चर्च में दूल्हा–दूल्हन के लिए ड्रेसिंग रूम, पूल, कैफेटेरिया, कांफ्रेंस रूम्स आदि बनाए गए हैं। चर्च का निर्माण 5 मई, 2007 को शुरू हुआ था। इसे बनने में लगभग 10 साल का वक्त लगा। चर्च समुद्र तल से 1864.9 मीटर की ऊंचाई पर है। चर्च बनाने क...
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डॉ. उदय मोदी - मुंबई का ‘श्रवण कुमार’

41 सप्ताह पहले
डॉ. उदय मोदी ने अपनी पूरी जिंदगी बुजुर्गों के नाम कर दी है। वे मुंबई के भायंदर में ‘श्रवण टिफिन सेवा’ नाम से बुजुर्गों को मुफ्त भोजन उपलब्ध कराते हैं। उनकी इस टिफिन सेवा से करीब 200 वरिष्ठ नागरिकों को मुफ्त भोजन दिया जा रहा है। वे जिस पवित्र और निस्वार्थ भाव से बुजुर्गों की सेवा में जुटे हैं, उस कारण लोग उन्हें ‘मुंबई का श्रवण कुमार’ तक कहने लगे हैं। डॉ. उदय बताते हैं कि उनकी इस तरह की सेवा की शुरुआत उनके अस्पताल के पास एक वृद्ध दंपति के लिए खाना पकाने से हुई थी, जो खुद के लिए खाना बनाने में असमर्थ थे। कुछ दिनों तक इस दंपति को भोजन उपलब्ध कराने के बाद, उनकी पत्नी ने उन्हें इसी तरह के और लोगों का पता लगाने...
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प्रफुल्ल को ‘ग्रीन नोबेल’

42 सप्ताह पहले
ओडिशा के अवैध खनन विरोधी कार्यकर्ता प्रफुल्ल सामंतारा प्रतिष्ठित गोल्डमैन पर्यावरण पुरस्कार- 2017 से सम्मानित हुए हैं। इस पुरस्कार को 'ग्रीन नोबेल' के तौर पर भी जाना जाता है। भारत स्थित ओडिशा प्रांत के खनन विरोधी कार्यकर्ता प्रफुल्ल प्रतिष्ठित गोल्डमैन पर्यावरण पुरस्कार 2017 विजेताओं में से एक हैं। प्रफुल्ल के साथ 5 अन्य विजेताओं को भी यह पुरस्कार दिया गया। गोल्डमैन पर्यावरण पुरस्कार हर साल मानव सभ्यता वाले छह इलाकों-एशिया, अफ्रीका, यूरोप, उत्तरी अमेरिका, दक्षिण व मध्य अमेरिका और द्वीप व द्वीपीय देशों में काम रहे सामाजिक कार्यकर्ताओं को दिया जाता है। प्रत्येक विजेता को पुरस्कार राशि के रूप में 175,000 अमेरिकी डॉलर मिलते ...
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स्वच्छता का परिमल

43 सप्ताह पहले
बुजुर्गियत थकान की निशानी नहीं है, अगर आप ऐसा नहीं मानते तो आपको पश्चिम बंगाल के जाधवपुर में रहने वाले परिमल धर से मिलना चाहिए। जाधवपुर की विद्यासागर कॉलोनी में रहने वाले धर ने अकेले अपने बूते अपने इलाके के पर्यावरण को स्वच्छ रखने का बीड़ा उठाया है। धर ने अपनी कॉलोनी में एक बीघे से ज्यादा बड़े क्षेत्र में फैले तालाब को अकेले ही साफ कर दिया। यह तालाब स्वाधीनता के पूर्व का है। पर देखरेख के अभाव में पिछले दो दशकों से यह तालाब लगातार गंदा होता जा रहा था। स्थानीय लोग यहां कूड़ा फेंकते थे। कई बार मरे हुए जानवरों को भी यहां फेंका जाता था। गंदे हो चुके इस तालाब से यहां प्रदूषण का स्तर भी काफी बढ़ गया था। लोग बदबू और मच्छरों से परेशान रह...
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जरूरतमंदों के ओमकार

44 सप्ताह पहले
जिंदगी की जरूरतों को पूरी करने के लिए ट्रैफिक  सिग्नल पर जद्दोजहद करने वाले स्ट्रीट वेंडर की राह आसान नहीं। सर्दी, गर्मी, बरसात में मौसम की परवाह किए बगैर दिन भर भूखे-प्यासे रहकर कुछ पैसे कमा पाते हैं। कई बार तो दिन भर की मेहनत की बाद भी आमदनी सिफर। आमतौर पर भूखे-गरीबों की मदद करने वाले तो कई लोग दिख जाते हैं, लेकिन ट्रैफिक सिग्नल के इन जरूरतमंदों की तरफ शायद ही कोई ध्यान देता है। लेकिन दिल्ली में एक  ऐसा शख्स है जो इन जरूरतमंदों के भूख-प्यास को दूर करने की पहल कर रहा है। इंसानियत के रक्षक  इस शख्स का नाम है ओमकारनाथ कथारिया। ऐसा नहीं है कि ये कोई बिजनेस टाइकून या काफी अमीर हैं, लेकिन इनका दिल काफी अमीर है। पेशे स...


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