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गुरुवार, 24 मई 2018

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लिंडसे बर्न्स- रंजन घोष - चंदनक्यारी की फिरंगी मेम

2 दिन पहले
23 साल की उम्र में इंग्लैंड से दुनिया देखने की चाह में निकलीं लिंडसे बर्न्स भारत आईं और यहीं की होकर रह गईं। झारखंड में बोकारो जिले के सबसे पिछड़े प्रखंड की कम पढ़ी-लिखी महिलाओं के साथ महिला बैंक व अस्पताल के सफल संचालन का उनका प्रयोग अद्भुत है। नतीजतन आज चास व चंदनक्यारी में 500 महिला मंडल, महिलाओं के बैंक व महिला स्वास्थ्य केंद्रों का सफल संचालन हो रहा है। बड़ी बात यह कि इन सबके पदाधिकारी और कर्ताधर्ता गांव की महिलाएं ही हैं। बैंक  का सालाना टर्नओवर लगभग सवा दो करोड़ है। बैंक से महिलाओं के बीच लगभग 70 लाख का कर्ज भी बांटा जा चुका है।  लिंडसे की पहल से खुले अस्पताल में 25 रुपए में इलाज की सुविधा तो मिलती ही है।...
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श्रीनाथ - वाई-फाई का श्रीनाथ

एक सप्ताह पहले
इंटरनेट का सही मौके पर सही इस्तेमाल जिंदगी बदल सकता है। इसकी एक बानगी केरल के एर्नाकुलम रेलवे स्टेशन पर दिखी। यहां स्टेशन पर मिलने वाली फ्री वाई-फाई ने एक कुली के सरकारी नौकरी पाने के ख्वाब को पंख लगा दिए और अब वह केरल लोकसेवा आयोग की लिखित परीक्षा पास कर चुके हैं। श्रीनाथ अगर आयोग के इंटरव्यू में पास हो जाते हैं तो उन्हें भू-राजस्व विभाग में ग्राम सहायक का पद मिल सकता है। केरल के ही मुन्नार के रहने वाले श्रीनाथ पिछले पांच साल से एर्नाकुलम रेलवे स्टेशन पर कुली के रूप में काम कर रहे हैं।  मुन्नार के इस सबसे बड़े रेलवे स्टेशन पर कुली के रूप में काम करके किसी तरह रोजी-रोटी चलाने वाले श्रीनाथ ने अपने लक्ष्य को पाने के लि...
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चंदन कुमार माइती - बाल तस्करी के खिलाफ एक शिक्षक का संघर्ष

2 सप्ताह पहले
दक्षिण 24 परगना पश्चिम बंगाल के उन जिलों में शामिल है, जो एक खास लेकिन शर्मनाक वजह से चर्चित है। यहां मानव तस्करी के काले कारोबार को धड़ल्ले से अंजाम दिया जाता है। यहां के बच्चों, उसमें भी विशेषकर लड़कियों को उत्तर भारतीय राज्यों में बेच दिया जाता है, जहां अधेड़ों के साथ उनकी शाद कर दी जाती है। इसी जिले में स्थित है कृष्णचंद्रपुर हाई स्कूल, जिसके प्रधानाचार्य चंदन कुमार माइती ने इस समस्या से निपटने को लेकर कई साहसिक पहल की है।  माइती बताते हैं कि उन्हें एक बार किसी गुमनाम व्यक्ति का पत्र मिला, जिसमें लिखा था कि मेरे स्कूल में पढ़ने वाली दसवीं कक्षा की एक छात्रा की किसी सरकारी योजना से प्राप्त सहायता राशि की मदद से शा...
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रक्त संकट के खिलाफ किरण

3 सप्ताह पहले
भारत में हर साल 12,000 से भी ज्यादा लोग खून की कमी के चलते अपनी जान गंवा देते हैं जबकि 6,00,000 यूनिट खून ब्लड बैंक और अस्पतालों के बीच तालमेल न होने के कारण बर्बाद हो जाता है। इस अंतर को खत्म करने और लोगों को रक्तदान के बारे में जागरूक करने के लिए 33 साल के किरण वर्मा निकल पड़े हैं एक लंबे सफर पर। ‘सिंप्ली ब्लड’ के संस्थापक किरण ने इसी साल 26 जनवरी से अपना सफर श्रीनगर की लाल चौक से शुरू किया। श्रीनगर से चलकर अब तक वे 6000 किलोमीटर का सफर पैदल तय कर चुके हैं। वे अब तक उदयपुर, वडोदरा, चेन्नै और बेंगलुरु की यात्रा कर चुके हैं। इन दिनों वे केरल में हैं।  उनका लक्ष्य ज्यादा से ज्यादा लोगों को रक्तदान के लिए ब...
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बेसहारा लोगों की फिक्र- राकेश बाबू

4 सप्ताह पहले
आजकल लोग एकल परिवार के प्रभाव में आकर अपने मां-बाप से दूर होते जा रहे हैं। जबकि उस उम्र में उन्हें सबसे ज्यादा लोगों के साथ की जरूरत होती है। इस स्थिति को देखते हुए इवेंट मैनेजर से सामुदायिक डॉक्टर बने हैदराबाद के राकेश बाबू ने सड़क पर पड़े बीमार बुजर्गों की मदद करने की ठानी है। उन्होंने पहले एक छोटा सा क्लिनिक खोला, लेकिन आज अलवाल, वारंगल और एलर में स्थित तीन शाखाओं के साथ एक पूर्ण विकसित बेसहारा लोगों का घर है। राकेश बाबू खुशी से बताते हैं कि जल्द ही पूरे राज्य के हर जिले में ऐसे ही घर खोले जाएंगे। जॉर्ज राकेश बाबू ने मार्च 2011 में अपने सह-संस्थापक सुनीता जॉर्ज और यसुकला के साथ मिलकर औपचारिक तौर पर 'गुड स्मार्टियन ...
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अशफाक - अमन के लिए शहादत

5 सप्ताह पहले
17 वर्ष के अशफाक से कोई पूछता कि बड़े होकर क्या बनोगे, तो वह कहता- मौलवी। अशफाक सोचता था कि एक दिन मस्जिद की मीनार से उसकी आवाज गूंजेगी। उसक यह सपना अब अधूरा रहेगा। हाल में आई तेज आंधी में उसके मदरसे की मीनार टूटकर नीचे गिर गई और वह उसके नीचे दबकर मर गया। पर मरने से पहले उसने 20 बच्चों की जान बचाई। जिनकी उसने जान बचाई, वो ताउम्र उसको याद रखेंगे। अशफाक हमेशा उनके हीरो रहेंगे।  हरियाणा के मेवात में एक बमबाहेरी गांव है। यहीं के मदरसे की यह घटना है। उस दिन शाम के वक्त अशफाक कुरान पढ़ने मदरसा पहुंचा। इसी दौरान तेज आंधी-तूफान आया। इतनी तेज कि एक मीनार हिलने लगी। अशफाक की नजर उस पर गई। उसने चिल्लाकर औरों को बताया। बच्चे बाहर भागने लगे, लेकिन अशफाक नहीं...
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बाघोपुर की युवा टोली

7 सप्ताह पहले
हम सुधरेंगे तो जग सुधरेगा, गांधी जी की इस सीख ने बिहार के एक गांव के युवाओं को स्वच्छता का ऐसा पाठ पढ़ाया कि आज उनके द्वारा किए गए कार्यों की मिसालें दी जा रही हैं। बिहार में समस्तीपुर स्थित बाघोपुर गांव के युवाओं ने बापू के आदर्शों पर चलते हुए अपने गांव-मोहल्लों को स्वच्छ बनाने का बीड़ा उठा लिया है। स्वच्छ भारत मिशन अभियान को गति देते हुए यहां के युवाओं की टोली सुबह-सुबह हाथों में झाड़ू लिए गली, सड़क व अपने आसपास पड़ी गंदगी व कचरे को साफ करने की मुहिम में जुट जाते हैं। गांव के युवा साप्ताहिक दिनचर्या के मुताबिक अलग-अलग टोली बनाकर नियमित तरीके से गांव की साफ-सफाई अभियान में लगे हुए हैं। धीरे-धीरे इनका सफाई अभियान कार्य का क्षेत्...
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शहनाज खान - सेवा की डॉक्टर

8 सप्ताह पहले
कभी कन्या भ्रूण हत्या के लिए बदनाम रहे राजस्थान में अब बेटियों ने सारी दुनिया के सामने अपने सशक्तिकरण की एक अनोखी मिसाल पेश की है। भरतपुर जिले की एक ग्रामीण बेटी ने एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने के बाद अब गांव की बच्चियों को भी उनके सपने पूरा करने में मदद करने का कार्य शुरू किया है। भरतपुर की इस बेटी का नाम शहनाज खान है, जो राज्य की सबसे युवा महिला सरपंच चुनी गई हैं। पेशे से डॉक्टर शहनाज ने अब गांव की सेवा करने और बेटियों को उनकी शिक्षा में मदद करने का संकल्प लिया है, जिसके कारण उनके परिवार और क्षेत्र के लोग उनकी सराहना कर रहे हैं। 24 साल की शहनाज पेशे से डॉक्टर हैं और उन्होंने इसी साल एमबीबीएस की फाइनल परीक्षा दी है। बतौर ...
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वर्णाली डेका - असम की स्वच्छाग्रही

9 सप्ताह पहले
न  अधिकारों का ज्ञान और न ही अपने विकास को लेकर सजगता। घूंघट की ओट के बीच चौका-चूल्हा और रूढ़िवादी परंपराएं ही उनके लिए जीवन थी। लेकिन समय बदला और महिलाओं के प्रति समाज की सोच भी बदली। असम निवासी वर्णाली डेका ने ऐसा ही मुकाम हासिल किया। उन्होंने महिलाओं को स्वच्छता के प्रति जागरूक किया और उनकी सोच बदली। उत्तर प्रदेश में एटा के मारहरा ब्लॉक के गांवों में महिलाएं बस चूल्हा-चौका तक सीमित थीं, उनको न तो स्वच्छता की जानकारी थी और न ही अपने हक की। तभी वहां असम की मूल निवासी वर्णाली डेका उम्मीद की किरण बनकर आईं। उन्होंने स्वच्छ भारत मिशन से जुड़कर महिलाओं को स्वच्छता के साथ अधिकारों का ज्ञान कराया। यहां के गांव अचलपुर के से...
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के. मोहम्मद वाई. सफीरुल्ला - अफसर की हरित पहल

10 सप्ताह पहले
के. मोहम्मद वाई. सफीरुल्ला केरल के सबसे ज्यादा व्यस्त जिलों में से एक एर्नाकुलम के जिलाधिकारी हैं। वे ‘हरित केरलम मिशन’ के तहत पूरे एर्नाकुलम को हरा-भरा बनाना चाहते हैं। इस मिशन के तहत तीन कामों को पूरा करना होता है— उचित कचरा प्रबंधन को प्रोत्साहन, नदियों-तालाबों व धाराओं को पुनर्जीवन और जैविक खेती को बढ़ावा। कचरा प्रबंधन पर और ज्यादा काम करने के लिए केरल में एक स्थानीय सरकारी विभाग भी बनाया गया है, जिसे ‘सुचित्रा मिशन’ कहा जाता है। सफीरुल्ला बताते हैं कि इस जिले में ग्रीन मैरिज यानी हरित विवाह को भी प्रमोट किया जाता है। इसमें ये तय किया जाता है कि किसी भी शादी में एक व्यक्ति 150 ग्राम से ज्यादा प्...
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एच. महनकली - स्वच्छता के लिए अन्न- त्याग

11 सप्ताह पहले
स्वच्छता कैसे जीवन की शपथ की तरह है, इसकी नई मिसाल कर्नाटक में बेल्लारी की आठवीं कक्षा की एक छात्रा ने पेश की है। उसने अपने घर में शौचालय बनवाने की जिद के चलते खाना-पीना छोड़ तक दिया। नतीजा ग्राम पंचायत और सरकारी अधिकारियों ने दो दिन बाद ही उसके घर के सामने शौचालय बनवा दिया। मामला बेल्लारी जिले के तलूर गांव का है, जिसके बाद यह छात्रा पूरे गांव की आदर्श बन चुकी है। 13 साल की एच. महनकली ने ग्राम पंचायत के जागरुकता अभियान में शौचालय के महत्व के बारे में सुना था, तबसे उसने अपने घर में शौचालय निर्माण कराने की ठान ली। छात्रा गांव में ही एक सरकारी स्कूल में पढ़ती है। उसके परिवार को 2015-16 में शौचालय देने की बात कही गई थी, लेकिन...
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करण गोयल - दूध बचाने वाला कलश

12 सप्ताह पहले
मेरठ निवासी करण गोयल और उसके दोस्तों ने मिलकर एक ऐसा डिवाइस तैयार किया है, जिससे भगवान को अर्पित किया जाने वाला दूध बर्बाद होने से बच सकता हैं। इन पांच दोस्तों ने अपनी इस तकनीक की मदद से महाशिवरात्रि पर करीब 100 लीटर दूध बर्बाद होने से बचा लिया हैं। करण का कहना है कि वह हमेशा से शिव मंदिर जाने में हिचकता था। उससे वहां होने वाली दूध की बर्बादी देखी नहीं जाती थी। इसी बात की चर्चा उसने अपने चार दोस्तों से की। फिर सभी ने मिलकर एक दिलचस्प डिवाइस तैयार किया। उन्होंने अपने डिवाइस को टेस्ट करने के लिए मेरठ के एक मंदिर को चुना। यह डिवाइस एक खास प्रकार से बनाया गया धातु का कलश है। जिससे इसमें स्टोर होने वाला दूध फटे या खराब न हो। इ...


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