sulabh swatchh bharat

शुक्रवार, 18 अगस्त 2017

cyclist-structured-history-in-america

श्रीनिवास गोकुलनाथ - साइकिलिस्ट ने अमेरिका में रचा इतिहास

एक सप्ताह पहले
महाराष्ट्र के दो साइकिलिस्ट ने ‘रेस अक्रॉस अमेरिका’ जीतकर इतिहास बना दिया है। नागपुर के साइकिलिस्ट अमित समर्थ ने 5,000 किमी इस लंबी साइकिल रेस को 11 दिन, 21 घंटों और 11 मिनट में पूरा कर लिया। अमित ने यह सफलता सोलो कैटेगरी में हासिल की है। इसी रेस में नासिक के श्रीनिवास गोकुलनाथ ने 18-39 वर्ष के आयुवर्ग के तहत सोलो कैटेगरी में यह दूरी 11 दिन, 12 घंटों और 45 मिनट में पूरी की। वैसे यह श्रीनिवास का दूसरा प्रयास था, जबकि अमित ने पहली ही बार में रेस पूरी कर सफलता दर्ज की। इस समय के साथ श्रीनिवास ने 7वां और अमित ने 8वां स्थान हासिल किया।  36 वर्षीय अमित समर्थ पेशे से एमबीबीएस डाक्टर हैं और उन्होंने पब्लिक हेल्थ ...
uk-teenagers-earned-$ 56,000-from-school-bathrooms

नाथन: किशोरों का कारनामा

2 सप्ताह पहले
नाथन और उनकी टीम 15 साल की उम्र से ही कार्य कर रही हैं। इसके लिए उन्होंने अपने स्कूल के बाथरुम का उपयोग किया था। वे दूसरे स्कूलों में चॉकलेट, मिठाई और फिजी पेय बेचने के लिए अपने स्कूल के बाथरूम का इस्तेमाल किया करते थे। इससे उन्होंने करीब 1,200 डॉलर प्रति सप्ताह कमाई करना शुरू कर दिया था। इससे वह आनंद ही नहीं लेते थे, बल्कि उन्हें इससे अपने जीवन शैली को बनाने की प्रेरणा मिलती थी। नाथन ने बताया कि उन्होंने एक करोड़पति से पैसे कमाने का तरीका सीखा है, जो एक विकास कार्यक्रम का हिस्सा थे। इस बात ने उनको अपने स्कूल में आने वाले छात्रों को मिठाई खरीदने और बेचने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने अपने साथ अन्य लड़कों को भी जोड़ा। उन्होंने स्नैपचैट के माध्यम से अपने ऑर्डर बनाए और फिर ब्रेक...
massive-flood-Lakhimpur-2-sister

साहस की सहेलियां

3 सप्ताह पहले
असम में बाढ़ से जान-माल की काफी क्षति हुई है। इस बीच, वहां दो साहसी युवा सहेलियों ने जान पर खेलकर 30 लोगों को डूबने से बचाया है। ये दो सहेलियां हैं- पिंकी गोगोई और पूजा गोगोई। दरअसल, ऊपरी असम के लखीमपुर जिले के हातीलुंग गांव में स्थिति एक दिन सुबह तब अचानक काफी गंभीर हो गई, जब स्थानीय डैम से काफी पानी छोड़ा गया। नतीजतन, गांव सहित पूरे इलाके में भयंकर बाढ़ आ गई। ऐसे में कई लोग तेज बहाव के बीच फंस गए। उनकी स्थिति ऐसी थी कि वे अपने बचाव के लिए कुछ नहीं कर सकते थे। बाकी लोगों के पास भी खुद को अपने जरूरी सामान को बचाने के लिए कुछ लम्हों का ही समय था। पिंकी और पूजा बचपन से हाथ से बनी बांस का नाव चलाने का शौक रखती थीं। उस दिन जब गांव में बाढ़ आई तो उन्होंने इसी नाव की मदद से 30 ग्रामीणों को ड...
ravinder-k-bansal-campaign-for-cancer-hospital

रविन्दर के. बंसल: कैंसर अस्पताल के ‌लिए मुहिम

4 सप्ताह पहले
विश्वभर में उड़ान भर कर ‌परिक्रमा करना सदा से बेहद साहस का काम हो सकता है। लेकिन सामाजिक कल्याण यानी परोपकार के लिए भी ऐसी यात्राएं की जा सकती हैं। इन दिनों कई आयुवर्ग के समूह सड़कों, आकाश मार्ग और मोटरसाइकिलों पर सवार होकर परोपकार के कार्य करते मिल जाते हैं। इसी क्रम में 68 साल के भारतीय अमेरिकी रविन्दर के. बंसल भी हैं। न्यूयॉर्क के भारतीय समुदाय से जुड़े बंसल अवकाश प्राप्त इंजी‌नियर और उद्यमी हैं। रविन्दर के. बंसल ने नेक कार्य के लिए 18 देशों के 34 हवाई अड्डे का इस्तेमाल करने हुए अकेले ही उड़ान भरी और हरियाणा के अंबाला में कैंसर अस्पताल के ‌लिए उन्होंने 4.83 करोड़ रुपए जुटाए। उनका जन्म अंबाला में हुआ है। अकेले 20 हजार ‌मील की उड़ान भरने के पीछे उनका एकमात्र उद्देश...
mahesh-muralidhar-bhagwat-tireless-war-with-human-trafficking

महेश मुरलीधर भागवत - मानव तस्करी से अथक जंग

5 सप्ताह पहले
मानव तस्करी से लड़ने के अपने अथक प्रयासों के लिए वरिष्ठ भारतीय पुलिस अधिकारी महेश मुरलीधर भागवत को अमेरिका के प्रतिष्ठित ट्रैफिकिंग इन पर्संस (टीआईपी) रिपोर्ट हीरोज सम्मान दिया गया है। दिलचस्प है कि भागवत को अमेरिका की प्रथम महिला मेलानिया ट्रंप के हाथों यह सम्मान दिया गया। यह प्रतिष्ठित सम्मान अमेरिकी विदेश मंत्रालय के तहत मानव तस्करी की रोकथाम के लिए काम रहे विभाग द्वारा हर साल दिया जाता है। इसके तहत मानव तस्करी के खिलाफ काम कर रही गैरसरकारी संस्थाओं से जुड़े कार्यकर्ताओं, पुलिस अधिकारी सहित विभिन्न विभागीय अधिकारियों को सम्मानित किया जाता है। भागवत पिछले 13 साल से मानव तस्करी रोकने के लिए विभिन्न मोर्चों पर उल्लेखनीय कार्य कर...
purvi-vyas-women-role-model-of-biotic-agriculture

पूर्वी जोशी - जैविक खेती की मह‌िला रोल मॉडल

6 सप्ताह पहले
भारत में कृषि कार्यों से महिलाएं पारंपरिक तौर पर जुड़ी रही हैं। नए दौर में फर्क यह आया है कि अब इस क्षेत्र में उनके उद्यम को पहचान मिलने लगी है। महिला सशक्तीकरण के लिहाज से यह बड़ी बात है। ऐसी ही एक महिला हैं पूर्वी व्यास। ऑस्ट्रेलिया की वेस्टर्न सिडनी यूनिवर्सिटी से पर्यावरण प्रबंधन में स्नातक करने वाली पूर्वी व्यास की जिंदगी उनके एक फैसले ने पूरी तरह बदल दी। अब वह पूरी तरह से जैविक किसान बन चुकी हैं। वह अगली पीढ़ी के किसानों और युवाओं को सिखा रही हैं कि किस तरह खेती करके भी अच्छी जिंदगी बिताई जा सकती है। 1999 में अपना पोस्ट ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद पूर्वी ऑस्ट्रेलिया से लौटकर भारत आ गईं। उन्होंने कुछ गैर सरकारी संगठनों के सा...
first-indian-woman-neeru-chadha-selected-itlos-member

नीरू चड्ढा - आईएलओएस पहुंची पहली भारतीय महिला

7 सप्ताह पहले
भारतीय महिलाओं की सबलता और सफलता आज पूरी दुनिया में देखी जा सकती है। उन्होंने हर क्षेत्र में अपने उद्यम और प्रतिबद्धता को साबित किया है। ऐसी ही उपलब्धि हासिल करने वालों में नीरू चड्ढा का नाम जुड़ गया है। संयुक्त राष्ट्र में भारत को एक बड़ी उपलब्धि हासिल कराते हुए अंतरराष्ट्रीय लॉ एक्सपर्ट नीरू चड्ढा को इंटरनेशनल ट्रिब्यूकनल फॉर द लॉ ऑफ द सी (आईएलओएस) की पहली भारतीय महिला सदस्य के रूप में चुना गया है। संयुक्त राष्ट्र की यह न्यायिक इकाई समुद्र से जुड़े कानूनों पर फैसला करती है। वह 21 सदस्यीय अदालत में स्थान पाने वाली पहली भारतीय महिला न्यायाधीश हैं। नीरू चड्ढा प्रख्यात वकील हैं और विदेश मंत्रालय की चीफ लीगल एडवाइजर बनने वाली पहली ...
kartikeya-thiam-sundaram-developed-computer-booklet-for-poors

कार्तिकेय थियम सुंदरम - डिजिटल साक्षरता

8 सप्ताह पहले
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से चलाए गए डिजिटल इंडिया कार्यक्रम से प्रेरित होकर 16 वर्षीय कार्तिकेय थियम सुंदरम ने वंचितों के लिए कंप्यूटर की एक सरल और व्यापक पुस्तिका विकसित की है। कार्तिकेय इसके माध्यम से गरीब और वंचितों की मदद करना चाहता थे, इसीलिए उन्होंने हिंदी और अंग्रेजी दोनों में इसके पाठ्यक्रम और सामग्री को स्वतंत्र रूप से डिजाइन किया।  बता दें कि कार्तिकेय जीडी  गोयनका वर्ल्ड स्कूल, सोहना के छात्र हैं। कार्तिकेय को उत्सव फाउंडेशन ने उनके इस प्रयास के लिए समर्थन दिया, जहां उन्होंने सर्दियों की छुट्टियों के दौरान वंचित बच्चों और वयस्कों के लिए कंप्यूटर साक्षरता पर काम किया। सिर्फ 30 दिनों में ही कार्...
prince-mehra-developed-bird-ambulance

प्रिंस की बर्ड एंबुलेंस

9 सप्ताह पहले
पक्षियों से प्यार तो सभी करते हैं, पर उनकी सेहत के लिए शायद ही कोई फिक्र करता है। चंडीगढ़ के साइन बोर्ड बनाने वाले पेंटर प्रिंस मेहरा को इसी बात ने प्रेरित किया और आखिरकार उन्होंने देश की पहली बर्ड एंबुलेंस बना डाली। प्रिंस घायल पक्षियों को दूर-दूर तक ढ़ूंढता  है और फिर अपने बनाए एंबुलेंस में उनका इलाज करता है। उनकी बर्ड एंबुलेंस एक तरह का ई-बाइक है। इससे पहले वह कई साल तक घायल परिंदों की देखभाल के लिए साइकल को ही बर्ड एंबुलेंस के तौर पर इस्तेमाल कर रहा था। उनकी यह मुहिम दुनिया के सामने आई तो एक बैंक ने उन्हें वैन डोनेट करने की कोशिश की। प्रिंस ने वैन के पैट्रोल से फैलने वाले प्रदूषण से चिंतित होकर इसे लेने से मना कर दिया तो ...
indian-origin-indrani-das-won-junior-nobel

इंद्राणी दास- भारतीय मूल की बेटी को जूनियर नोबेल 

10 सप्ताह पहले
  भारतीय मूल की 17 वर्षीय अमेरिकी छात्रा इंद्राणी दास को इस साल के रीजेनेरोन साइंस टैलेंट सर्च पुरस्कार से नवाजा गया है। इसे साइंस का जून‌ियर नोबेल कहा जाता है। यह पुरस्कार अमेरिका में हाई स्कूल के विज्ञान और गणित के छात्रों की प्रतियोगिता के विजेता को दिया जाता है। इंद्राणी को न्यूरोलॉजी के क्षेत्र में उनके प्रोजेक्ट के लिए यह पुस्कार द‌िया गया है। इंद्राणी के प्रोजेक्ट में मानव मस्तिष्क में चोट लगने के बाद होने वाले नुकसान का इलाज करने का नया तरीका बताया गया है। वह बताती हैं उन्हें तो यकीन ही नहीं हो रहा है कि उन्हें जूनियर नोबेल पुरस्कार मिला है। उनके ही शब्दों में, ‘जब यह पुरस्कार मुझे मिला तो मुझे तो बहुत अचंभा हुआ था, मुझे तो अब भी यकीन नहीं होता। म...
ips-officers-ravi-krishna-adopted-criminals-village

रवि कृष्ण - सेवा की खाकी

11 सप्ताह पहले
खाकी वर्दी से जुड़ी छवि आमतौर पर धौंस-पट्टी या डर की मानी जाती है। पर कई ऐसे पुलिस अफसर भी हैं, जिन्होंने सुरक्षा के संकल्प के साथ जन सेवा का भी अहम कार्य किया है। रवि कृष्ण ऐसे ही एक आईपीएस अधिकारी हैं, जिन्हें देखकर लोगों को डर नहीं लगता, बल्कि सेवा और सहयोग की प्रेरणा मिलती है। इन दिनों वे आंध्र प्रदेश के रायलसीमा मंडल में आने वाले कुरनूल जिले में तैनात हैं। उन्होंने वहां एक ऐसे गांव को गोद ले रखा है, जो अपनी अपराध गाथाओं के लिए कुख्यात रहा है। यह गांव है कपाटराला, जहां कुछ समय पहले तक दिन-दहाड़े लोगों की हत्या हो जाना आम बात थी। दिलचस्प है कि इस गांव के 21 लोग अब भी उम्रकैद की सजा काट रहे हैं। अब रवि कृष्ण ने जरायम की इस धरती ...
Lhakpa-Sherpa-Breaks-World-Record-to-Climb-Everest-Eighth-Time

लखपा शेरपा - आठवीं बार एवरेस्ट फतह

12 सप्ताह पहले
नेपाल की लखपा शेरपा माउंट एवरेस्ट पर सबसे ज़्यादा बार चढ़ने वाली महिला बन गई हैं। 44 वर्षीया लखपा ने आठवीं बार एवरेस्ट की चोटी पर कदम रख नया कीर्तिमान बनाया। इसी दिन भारत के भी छह पर्वतारोही एवरेस्ट पर पहुंचे। ये इस वर्ष एवरेस्ट पर जानेवाला पहला जत्था है। इस साल नेपाल की ओर से लगभग 750 पर्वतारोही एवरेस्ट पर जाने की कोशिश कर रहे हैं। लखपा ने वर्ष 2000 में पहली बार माउंट एवरेस्ट फतह किया था। नेपाल में जन्मी लखपा शेरपा अमेरिका में रहती हैं, जहां वो तीन बच्चों का अपना परिवार संभालती हैं। उन्होंने पिछले साल कहा था, ‘मैं अमरीका में बहुत मेहनत करती हूं, ये आसान नहीं है, मगर मैं अपने बच्चों को पढ़ाना चाहती हूं, मैं उनके लिए मेहनत ...


Bringing smiles to every face hindi ad copy %281%29

ऑडियो