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गुरुवार, 14 दिसंबर 2017

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समीर सिंह - शहीदों के समीर

2 दिन पहले
अपने लिए तो सभी जीते हैं, लेकिन कोई भी व्यक्ति दूसरों के बारे में नहीं सोचता है। खासकर उनके लिए जो सीमा पर निस्वार्थ भाव से देश की सुरक्षा करते हैं और अपनी जान भारत माता की सेवा में गवां देते हैं। लेकिन आज भी कुछ लोग हैं जो इनके लिए सोचते हैं और कुछ भी करने के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं। इन्हीं में से हैं अल्ट्रा मैराथन के धावक समीर सिंह, जो शहीदों के परिवार के लिए 15 हजार किलो मीटर की दौड़ में हिस्सा लेंगे, ताकि इन परिवारों के लिए सहायता राशि जुटा सकें। बता दें कि यह दौड़ सरकार की एक पहल का हिस्सा है। इस पर समीर ने कहा कि उन्हें भारत सरकार की पहल पर भारत के वीर के तहत दौड़ में शामिल होने का निमंत्रण मिला है। यह एक व...
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रेहान कामालोवा - ऊर्जा की बेटी

एक सप्ताह पहले
जब आप हवा से ऊर्जा पैदा कर सकते हैं तो फिर वर्षा के पानी से क्यों नहीं? अपने पिता के इस सवाल से अजरबैजान की 15 वर्षीय लड़की रेहान कामालोवा इस कदर प्रेरित हुई कि उन्होंने इसे हकीकत रूप देने के लिए कंपनी खोल दी। वह हैदराबाद में आयोजित आठवें वैश्विक उद्यमिता सम्मेलन (जीईएस) में हिस्सा लेने वाली सबसे कम उम्र की महिला उद्यमी थी। इस सम्मेलन का थीम 'वूमेन फ‌र्स्ट, प्रॉस्पेरिटी फॉर ऑल' था। नौवीं की छात्रा रेहान उन तीन उद्यमियों में हैं जिनका जिक्र इवांका ट्रंप ने जीईएस के उद्घाटन सत्र में अपने संबोधन में किया था। इवांका ने कहा, 'रेहान महज 15 साल की हैं, लेकिन उनकी कम उम्र बारिश के पानी से ऊर्जा पैदा करने के लिए कंपनी खो...
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स्वच्छता के दूत

2 सप्ताह पहले
हास्य अभिनेता बने स्वच्छ भारत के ब्रांड एंबेसडर ‘भाभी जी घर पर हैं’ सीरियल में डैडू का किरदार निभाने वाले वरिष्ठ हास्य अभिनेता डॉ. राकेश बेदी भी अब स्वच्छ भारत अभियान का ब्रांड एंबेसडर बन गए हैं। अभिनेता राकेश बेदी को चंडीगढ़ नगर निगम कमिश्नर जितेंद्र यादव ने एंबेसडर बनाने का प्रमाण पत्र सौंपा है। इससे पहले नगर निगम स्वर्गीय हास्य कलाकार जसपाल भट्टी की पत्नी सविता भट्टी को भी ब्रांड एंबेसडर बना चुका है। डॉ. राकेश बेदी का ऑडियो भी स्वच्छ भारत मिशन के तहत जागरूक करने के लिए रिकार्ड किया गया है। बेदी ने शहरवासियों से सड़क...
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पोय्यामोझी - ईमानदार पोर्टर

3 सप्ताह पहले
इस कलयुग में जहां पैसों के लिए लोग कुछ भी करने को तैयार हैं। वहीं आज भी कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो अपनी ईमानदारी से सबको चकित कर रहे हैं। जी हां, हम बात कर रहे हैं चेन्नई के थंबरम रेलवे स्टेशन पर कार्य करने वाले एक पोर्टर की, जिसने 5 लाख रुपयों से भरे बैग को वापस कर दिया। बता दें कि पोय्यामोझी नाम के पोर्टर पिछले 15 सालों से थंबरम रेलवे स्टेशन पर कार्यरत हैं। उन्होंने अपनी ईमानदारी दिखाते हुए एक यात्री के 5 लाख रुपए से भरे बैग को वापस कर दिया। यह घटना 1 नवंबर की है, जब इस ईमानदार पोर्टर ने रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म संख्या 5 पर एक लावारिस बैग को देखा था। स्टेशन पर लावारिस बैग मिलने के कुछ ही देर पहले इस प्लेटफार्म से सलेम-चेन...
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मेजर देवेंद्र पाल सिंह - करगिल का हीरो बना ब्लेड रनर

5 सप्ताह पहले
करगिल युद्ध में मेजर देवेंद्र पाल सिंह दुश्मनों से लड़ते हुए बुरी तरह से घायल हो चुके थे। एक तोप का गोला उनके नजदीक आ फटा। उन्हें नजदीकी फौजी अस्पताल लाया गया, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। लेकिन 25 वर्ष का वह नौजवान सैनिक मरने को तैयार नहीं था। जब उन्हें नजदीकी मुर्दाघर ले जाया गया तो एक अन्य चिकित्सक ने देखा कि अभी तक उनकी सांसे चल रही है। उन्हें बचाने के लिए उनका एक पैर भी काटना पड़ा। मेजर की इच्छाशक्ति और मजबूत इरादों से उनकी जान तो बच गई लेकिन उन्हें अब एक नया जीवन जीना सीखना था। अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद उन्होंने बैसाखी के सहारे चलना शुरू कर दिया। कुछ समय बाद उनके कृत्रिम पैर लगा दिया गया। देवेंद्र हर रोज सुबह तीन ...
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अलाहिया वंजारा - अपना शौक भूल बचाई बच्चे की जान

6 सप्ताह पहले
मुंबई में माहिम स्थित बॉम्बे स्कॉटिश स्कूल की 13 वर्षीय छात्रा अलाहिया वंजारा ने दो साल के नन्हे बच्चे को फेफड़े के कैंसर से बचाने के लिए करीब डेढ़ लाख रुपए जमा किए। पिछले महीने ही अलाहिया की मां ने उसे वीर पवार के बारे में बताया। वीर का घर अलाहिया के घर के पास ही था। नन्हे वीर को अपनी कैंसर की बीमारी से उबरने के लिए कम से कम चार लाख रुपए की तत्काल जरूरत थी। वीर के माता-पिता की जो हैसियत थी, उसमें इतनी बड़ी रकम का इतनी जल्दी इंतजाम हो जाना आसान बात नहीं थी। यह सब जानने के बाद अलाहिया काफी भावुक हुई और उसने वीर को बचाने के लिए खुद पैसे जमा करने की ठान ली। उसने सबसे पहले अपने पसंदीदा बॉलीवुड स्टार बॉलीवुड स्टार वरुण धवन की कंपनी क...
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विनय कुमार - स्वच्छता का विनय

8 सप्ताह पहले
विनय कुमार उत्तर प्रदेश के एटा जिले के एक छोटे से गांव नागला राजा से हैं। विनय ने दिव्यांग लड़कियों के लिए एक विशेष अभियान की शुरुआत की है। विनय आज विकलांग लड़कियों को माहवारी के बारे में शिक्षित करते हैं। हालांकि विनय के माता-पिता उन्हें आगे पढ़ाना चाहते थे, लेकिन उनके पास इसके लिए संसाधन नहीं थे। इसलिए विनय कक्षा 12 के बाद नोएडा चले गए, वहां उन्होंने एक कंस्ट्रक्शन मजदूर की तरह कार्य करने लगे। एक बार जब किसी अवसर पर विनय घर वापस आए तो वह अमित से मिले। अमित को पोलियो था और कानून से स्नातक था। अमित ने उन्हें उच्च शिक्षा के लिए उनकी मदद करने की पेशकश की।  इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मीडिया अध्ययन में स्नातक और विज्ञापन ...
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बंजर जमीन पर उम्मीद की फसल

9 सप्ताह पहले
लोगों द्वारा हमेशा से उपेक्षित वेटलैंड यानी आर्द्रभूमि को किसानों के एक समूह ने उपयोगी बन दिया है। इन किसानों के प्रयास से ही आज यह उपेक्षित भूमि मत्स्य पालन, कृषि, विद्यालय और बागवानी में बदल गया है। इसके साथ ही इन किसानों ने गरीब ग्रामीणों को रोज़गार और आजीविका के अवसर भी प्रदान किए हैं। मुल्लूपुर की एक किसान मुलकी देवी ने कहा कि मैंने कभी नहीं सोचा था कि यह जमीन मेरे जीवनकाल में उपजाऊ हो जाएगी। वहीं शत्रुघ्न महतो अपनी जमीन से आय अर्जित कर खुश हैं क्योंकि इससे पहले उन्हें कभी लाभ नहीं मिला था। मुल्की देवी और शत्रुघ्न महतो दोनों अपनी इस बंजर जमीन के बारे में अब चिंता नहीं करते हैं और यह अविश्वसनीय है कि बंजर जमीन अब उनके...
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विवशता को बार-बार मात

11 सप्ताह पहले
दुनिया में कई लोग ऐसे हैं, जो अपनी छोटी सी हार को पूरे जीवन पर भारी बना लेते हैं। ऐसे लोगों के जीवन में अंधकार और निराशा के सिवाय कुछ नहीं होता है। पर कुछ ऐसे भी जीवट होते हैं जो हारकर बैठते नहीं, बल्कि नई राह और नई सफलता का सुलेख लिख जाते हैं। इसी तरह की एख शख्सियत हैं साईं कौस्तुभ दासगुप्ता। प. बंगाल के सिलीगुड़ी में जन्मे कौस्तुभ ने जीवन में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। कौस्तुभ बचपन से ही ऑटोस्यिटियो-जेनेसिस इंपर्फेक्टा नामक रोग से पीड़ित रहे। इस बीमारी में शरीर की हड्डियां इतनी कमजोर हो जाती हैं कि वे टूटने लगती हैं और यह प्रक्रिया निरंतर चलती रहती है। कौस्तुभ छह साल की उम्र में ही समझ गए थे कि वे विशेष हैं। लिहाजा, उन्होंने तय क...
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जीवन रक्षक जवान

12 सप्ताह पहले
छत्तीसगढ़ के नक्सली प्रभावित दक्षिण बस्तर इलाके में सीआरपीएफ के जवानों ने नई मिसाल पेश की है। कटेकल्याण के टेटम गांव की एक बीमार आदिवासी महिला कोसी को जवानों ने स्ट्रेचर बना कर कई किलोमीटर दूर एंबुलेंस तक ले गए। सीआरपीएफ की एक टुकड़ी असिस्टेंट कमांडेंट देवाराम चौधरी और एसआई अमिताभ खांडेकर के नेतृत्व में सर्चिंग पर निकली थी। जवानों ने रास्ते में नयनार पटेलपारा गांव में एक महिला कोसी को दर्द से कराहते देखा। उसके परिजनों ने बताया कि कोसी बहुत बीमार है, लेकिन उसे अस्पताल ले जाने की सुविधा नहीं है, क्योंकि नक्सलियों ने रास्ता काट दिया है। एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती। बस इतना सुनना था कि वीर जवानों ने बांस का स्ट्रे...
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योगेश्वर राम मिश्र - योगेश्वर का शिक्षा योग

13 सप्ताह पहले
वाराणसी के जिस स्कूल परिसर में स्वामी विवेकानंद ने लगभग दो माह गुजारे थे, वह स्कूल कभी मॉडल स्कूल के रूप में चर्चित था, लेकिन वक्त के साथ अव्यवस्था का शिकार बन चुके इस ऐतिहासिक स्कूल को  संवारने का संकल्प वाराणसी के जिलाधिकारी योगेश्वर राम मिश्र ने लिया है। वाराणसी के अर्दली बाजार स्थित एलटी कॉलेज परिसर में स्थापित परिषदीय विद्यालय में हर शनिवार को डीएम शिक्षक की भूमिका में होते हैं।  इस सरकारी प्राथमिक विद्यालय को डीएम ने गोद लिया है और वे स्वयं प्रत्येक  शनिवार दो घंटे यहां बच्चों को पढ़ाते हैं। तमाम प्रशासनिक व्यस्तताओं के  बावजूद पिछले छह शनिवार से वे लगातार दो घंटे की क्लास लेने विद्यालय पहुंच रहे ह...
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हिमांशु पटेल - गांव बना शहर

15 सप्ताह पहले
पुनसारी आज भारत के सबसे अच्छे गांवों में से एक है, क्योंकि इस गांव में शहर की सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं, लेकिन यह गांव हमेशा से ऐसा नहीं था। यह सब एक आदमी के प्रयास से संभव हो सका है, जिसने पिछले कुछ सालों में गांव की तस्वीर ही बदल दी। बता दें कि हिमांशु पटेल का जन्म गुजरात के साबरकांठा जिले के पुनसारी गांव में हुआ। हालांकि हिमांशु की स्कूली पढ़ाई के बाद उनका परिवार शहर चला गया था, जहां उनकी आगे की शिक्षा पूरी हुई। छुट्टियों के दौरान एक बार हिमांशु का अपने गांव आना हुआ, जहां न तो बिजली थी, न पानी और न ही कानून व्यवस्था। जबकि हिमांशु को गांव और शहर के बीच का अंतर समझ आने लगा था। उन्होंने अपनी पढ़ाई के दौरान गांवों की स्थिति ...


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