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बुधवार, 15 अगस्त 2018

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शकीला शेख - संघर्ष की कला

एक दिन पहले
महिलाएं आज किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। अपनी मेहनत और स्मार्टनेस के कारण वह हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर रही हैं। ऐसी ही एक कहानी है आर्टिस्ट शकीला शेख की, जिन्होंने अपनी गृहस्थ भूमिका से हटकर अपनी एक अलग पहचान बनाई है।  शकीला कोलकाता से 30 किमी दूर स्थित एक गांव में रहती थीं। आम महिलाओं के तरह वह भी अपने परिवार को खाना बनाकर देती थीं और घर का काम करती थीं। मगर एक दिन अचानक शकीला ने अपना गृहस्थ जीवन छोड़ दिया। बाद में कला के क्षेत्र में लगातार संघर्ष करते हुए उसने एक मशहूर और कामयाब आर्स्टिस के रूप में अपनी पहचान बनाई।  शकीला जब बहुत छोटी थीं, जब उनके पिता उन्हें छोड़ कर चले गए थे। पिता के जाने क...
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तिलक शाह मेहता - बड़ों पर भारी बच्चे का बिजनेस आइडिया

एक सप्ताह पहले
तिलक अभी 8वीं कक्षा में पढ़ते हैं और उसकी उम्र महज 13 वर्ष है। उसने एक टेक-स्टार्टअप की शुरुआत की है, जो मुंबई के लोकप्रिय डब्बावाला नेटवर्क का इस्तेमाल करते हुए, बेहद कम दामों पर बाक़ी सामानों की डिलिवरी की सुविधा भी सुनिश्चित करता है। तिलक ने ‘पेपर्स एंड पार्सल्स’ नाम से इस स्टार्टअप की शुरूआत की है। तिलक अपने स्टार्टअप के माध्यम से मुंबई के अंदर 4-8 घंटों के भीतर सामान की डिलिवरी की सुविधा दे रहा है। तिलक के पिता लंबे समय से लॉजिस्टिक के बिजनेस से जुड़े हुए हैं और उन्होंने अपने बेटे का पूरा साथ दिया। एक बार तिलक अपने ही रिश्तेदार के घर पर अपनी किताबें भूल गया था। उसको घर आकर जब यह बात ध्यान आई, तब उसका मन हुआ कि क...
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यशस्वी - क्रिकेट का नया यश

3 सप्ताह पहले
श्री लंका दौरे पर जा रही भारत की अंडर-19 टीम में उत्तर प्रदेश के भदोही के यशस्वी जगह बनाने में सफल हुए हैं। मुंबई के आजाद मैदान पर गोल-गप्पे की दुकान पर काम करने वाले यशस्वी को वनडे टीम में जगह मिली है। इस युवा प्रतिभाशाली खिलाड़ी के कोच ज्वाला सिंह बताते हैं कि यशस्वी के अंदर क्रिकेट की एक दीवानगी है। वह पैसे के लिए नहीं नाम के लिए खेलना चहता है।  यशस्वी के लगन और उपलब्धि पर उसका परिवार खुश है। सुरियावां नगर में पेंट की दुकान चलाने वाले उसके पिता भूपेंद्र जायसवाल उर्फ गुड्डन ने बताया कि क्रिकेट यशस्वी के जिंदगी का सपना था। उसने कहा था कि बूट पॉलिश करना पड़ेगा तो भी करुंगा, लेकिन एक दिन अच्छा क्रिकेटर बन कर दिखाऊंगा।&n...
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राजाराम - कमाल के मास्टरजी

3 सप्ताह पहले
कर्नाटक के उडूपि जिले के बाराली गांव में बच्चों में शिक्षा में दिलचस्पी बनाए रखने और बच्चे स्कूल आना न छोड़ें, इसके लिए प्राथमिक स्कूल के शिक्षक राजाराम स्कूल बस के ड्राइवर की भी जिम्मेदारी खुद ही निभा रहे हैं। हर सुबह राजाराम जल्दी उठकर घर से निकलते हैं और बस के चार चक्कर लगाकर बच्चों को उनके घरों से लाते हैं। स्कूल में राजाराम को मिलाकर सिर्फ तीन शिक्षक हैं। राजाराम ने बताया कि ज्यादा दूरी होने के चलते कई छात्रों ने स्कूल आना छोड़ दिया था। इसके बाद उन्होंने पूर्व छात्रों की मदद से बस खरीदी। राजाराम का कहना है कि बस से स्कूल आने के कारण अब स्कूल में छात्रों की संख्या भी बढ़ गई है। पिछले साल बाराली गांव के आसपास के बच्चों ने स्क...
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अनोद कुमार - स्वच्छता का जुनून

4 सप्ताह पहले
कहते है इरादे नेक हो तो कोई काम असंभव नहीं है। बस किसी काम को करने का जुनून होना चाहिए। ऐसा ही एक मामला सामने आया है झारखंड के पलामू जिले में, जहां एक दिव्यांग को शौचालय बनाने का ऐसा भूत चढ़ा कि अपनी आजीविका के साधन को बेचकर उसने शौचालय का निर्माण करवा डाला। आज पूरे देश में स्वच्छ भारत मिशन के तहत घर-घर शौचालय बनाने को लेकर सरकार ने लक्ष्य रखा है। अधिकारी से लेकर पंचायत प्रतिनिधि तक शौचालय निर्माण को लेकर लोगों को जागरूक करने में लगे हैं। लेकिन झारखंड में चैनपुर प्रखंड के बसरीया खुर्द गांव का रहने वाले दिव्यांग अनोद कुमार सिंह ने वह कर दिखाया, जो काफी प्रेरक और प्रशंसनीय है। गरीब अनोद ने शौचालय का निर्माण अपनी पालतू बकरी बेचकर ज...
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असलम खान - मदद की खाकी

5 सप्ताह पहले
भारत-पाक बॉर्डर पर स्थित जम्मू-कश्मीर के एक गांव से दिल्ली पुलिस की डीसीपी असलम खान का एक खास रिश्ता है। देश के अंतिम छोर पर बसे इस गांव के एक परिवार का मदद कर उन्होंने इंसानियत की एक मिसाल कायम की है। इस परिवार को असलम खान अपनी सैलरी से हर महीने पैसे भेजती हैं। इतना ही नहीं, वह इस परिवार से हमेशा बातचीत कर हालचाल भी जाना करती हैं। दिल्ली पुलिस के डीसीपी (नॉर्थ वेस्ट) असलम खान इस परिवार को हर महीने अपनी सैलरी का एक हिस्सा भेजकर मदद करती हैं। इसी साल जनवरी में परिवार के एक मात्र कर्ताधर्ता की हत्या हो गई थी। परिवार पर दो जून की रोटी की आफत आ गई थी। परिवार का कहना है कि हम डर गए थे, लेकिन इन्होंने हमारी मदद करनी शुरू कर दी। हम मैड...
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सृष्टि जैन और अंकित क्वात्रा - भूख मिटाने की अनूठी पहल

6 सप्ताह पहले
हमारे देश में हर रोज न जाने कितना खाना बर्बाद होता है। होटलों, रेस्टोरेंट, शादी-पार्टी यहां तक कि घरों में बचा हुआ खाना फेंक दिया जाता है। वहीं इसी देश का एक दूसरा चेहरा यह भी है कि न जाने कितने ऐसे लोग हैं, जो हर रोज भूखे सोते हैं। दिल्ली में ऐसा ही एक एनजीओ है जिसका नाम है- फीडिंग इंडिया। इसका काम है रोजाना भूखों का पेट भरना। सृष्टि जैन और अंकित क्वात्रा फीडिंग इंडिया के संस्थापक हैं। फीडिंग इंडिया की शुरुआत 2014 में हुई थी।  सृष्टि बताती हैं, ‘मैं और मेरे सहयोगी अंकित एक शादी समारोह में गए थे। वहां हमने देखा कि बहुत सा खाना बर्बाद हो रहा है। उन दिनों हम लोग एक कंपनी में काम करते थे। इतना खाना बर्बाद होता हुआ...
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दिव्या रावत - मशरुम गर्ल

7 सप्ताह पहले
महिला किसान की बात करने पर लोगों के जेहन में अभी तक सिर्फ महिला मजदूरों की तस्वीर आती थी, लेकिन कुछ महिलाएं सफल किसान बनकर इस भ्रम को तोड़ रही हैं। उत्तराखंड की दिव्या रावत मशरूम की खेती से सालाना एक करोड़ से ज्यादा की कमाई करती हैं, उनकी बदौलत पहाड़ों की हजारों महिलाओं को रोजागार भी मिला है। दिव्या के सराहनीय प्रयासों के लिए पिछले वर्ष राष्ट्रपति ने इन्हें नारी शक्ति अवार्ड से सम्मानित किया था। दिव्या ने अपनी मेहनत और लगन से असंभव काम को संभव कर दिखाया। पांच वर्ष की इनकी मेहनत से पलायन करने वाले लोगों की संख्या यहां कम हो रही है। दिव्या कई राज्यों के रिसर्च सेंटर से सीखकर मशरुम की खेती यहां की हजारों महिलाओं को सिखा रही हैं।&nb...
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खुद बना ली 3 दिन में 2 किमी सड़क

8 सप्ताह पहले
बिहार के बांका जिले के 3 गांवों के 2,000 से ज्यादा लोगों की फरियाद जब सरकार ने नहीं सुनी तो महिलाओं ने खुद सड़क बनाने की ठानी। कड़ी धूप में महिलाओं ने अपने दम पर सिर्फ 3 दिनों में 2 किलोमीटर से ज्यादा लंबी सड़क का निर्माण कर लिया। उन्हें पुरुषों का भी समर्थन मिला। इस गांव में आजादी के बाद से कभी सड़क नहीं बनी थी।  बांका जिले के नीमा, जोरारपुर और दुर्गापुर के लोग सड़क न होने से कई वर्षों से परेशान थे। कई लोगों की मौत तो सिर्फ इसीलिए हो गई, क्योंकि सड़क न होने के कारण वे लोग समय से अस्पताल नहीं पहुंच सके। नीमा की रेखा देवी ने बताया कि उनके लोगों का दर्द तब और बढ़ जाता था जब बारिश में रास्ता दलदल में बदल जाता। रेखा ने क...
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अभय श्री - अभय होने की शिक्षा

9 सप्ताह पहले
34 साल के अभय यूं तो बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षक हैं लेकिन उनका परिचय इससे कहीं अधिक है। अभय लंबे वक्त से दिव्यांग बच्चों के लिए काम कर रहे हैं और विकलांगता की चारों विधाओं से ग्रस्त बच्चों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का काम कर रहे हैं। उनका मानना है कि हर बच्चा खास होता है, दिव्यांगता किसी भी बच्चे की प्रतिभा को जरा भी कम नहीं कर सकती।  अभय बीते कई वर्षों से ऐसे बच्चों को कई तरह से प्रशिक्षित करते हैं। वे उनकी पढ़ाई-लिखाई के अलावा उनकी प्रतिभा को निखारते हैं। एक सरकारी शोध बताता है कि हमारे देश में ज्यादातर दिव्यांग बच्चे पांचवीं से आठवीं के दौरान पढ़ाई छोड़ देते हैं। क्योंकि वे शारिरिक दिक्कतों के चलते मन से ट...
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गगनदीप सिंह - गगन तक ऊंची इंसानियत

10 सप्ताह पहले
आज जब धर्म के नाम पर लोग एक-दूसरे को मरने-मारने पर उतारू हो जाते हैं, एक पुलिस सब-इंस्पेक्टर ने इंसानियत की ऐसी मिसाल पेश की कि वो रातों-रात सोशल मीडिया पर हीरो बन गया। यह कहानी गगनदीप सिंह की है, जो पुलिस सब इंस्पेक्टर हैं और उनकी तैनाती उत्तराखंड के रामनगर में है। जिस दिन भीड़ मुस्लिम लड़के को मारने पर उतारू थे, उस दिन सब-इंस्पेक्टर गगनदीप सिंह की ड्यूटी कोसी नदी के किनारे बने गरजिया देवी मंदिर के बाहर थी। यहीं भीड़ एक मुस्लिम लड़के को हिंदू लड़की के साथ देखकर भड़क गई थी और मुस्लिम लड़के को मारने पर उतारू हो गई। उस वक्त सब-इंस्पेक्टर गगनदीप सिंह उस लड़के की मदद के लिए आगे आए। उन्होंने मुस्लिम लड़के को अपने आगोश में ले लिया और ...
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अभिषेक राठौड़ - स्वच्छता का अभिषेक

11 सप्ताह पहले
राष्ट्रीय स्वच्छता सर्वेक्षण में नैनीताल कैंट को जनता के फीड बैक पर सर्वश्रेष्ठ स्वच्छता का पुरस्कार मिलने से कैंट की जनता बेहद उत्साहित है। एक स्वर से सभी ने इसका श्रेय कैंट के बेहद ऊर्जावान, परिश्रमी और सतत नवीन प्रयोगों में लगे रहने वाले सीईओ अभिषेक राठौड़ को दिया है। कैंट क्षेत्र में बीते दो वर्षों में तमाम क्षेत्रों में बेहतरीन कार्य हुए हैं, जिनमें स्वच्छता और सौंदर्यीकरण प्रमुख है। यह सभी कार्य कैंट के नवनियुक्त सीईओ अभिषेक राठौड़ की पहल,परिकल्पना और लगन का ही परिणाम हैं। कैंट में इस अवधि में जगह-जगह मोबाइल टॉयलेट स्थापित किए गए। कई स्थानों पर पार्किंग विकसित की गईं, जिससे नगर में बड़े वाहनों की पार्किंग के अभाव की...


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