sulabh swatchh bharat

मंगलवार, 17 अक्टूबर 2017

cleanliness-of-cleanliness

विनय कुमार - स्वच्छता का विनय

एक दिन पहले
विनय कुमार उत्तर प्रदेश के एटा जिले के एक छोटे से गांव नागला राजा से हैं। विनय ने दिव्यांग लड़कियों के लिए एक विशेष अभियान की शुरुआत की है। विनय आज विकलांग लड़कियों को माहवारी के बारे में शिक्षित करते हैं। हालांकि विनय के माता-पिता उन्हें आगे पढ़ाना चाहते थे, लेकिन उनके पास इसके लिए संसाधन नहीं थे। इसलिए विनय कक्षा 12 के बाद नोएडा चले गए, वहां उन्होंने एक कंस्ट्रक्शन मजदूर की तरह कार्य करने लगे। एक बार जब किसी अवसर पर विनय घर वापस आए तो वह अमित से मिले। अमित को पोलियो था और कानून से स्नातक था। अमित ने उन्हें उच्च शिक्षा के लिए उनकी मदद करने की पेशकश की।  इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मीडिया अध्ययन में स्नातक और विज्ञापन ...
cropped-crop

बंजर जमीन पर उम्मीद की फसल

एक सप्ताह पहले
लोगों द्वारा हमेशा से उपेक्षित वेटलैंड यानी आर्द्रभूमि को किसानों के एक समूह ने उपयोगी बन दिया है। इन किसानों के प्रयास से ही आज यह उपेक्षित भूमि मत्स्य पालन, कृषि, विद्यालय और बागवानी में बदल गया है। इसके साथ ही इन किसानों ने गरीब ग्रामीणों को रोज़गार और आजीविका के अवसर भी प्रदान किए हैं। मुल्लूपुर की एक किसान मुलकी देवी ने कहा कि मैंने कभी नहीं सोचा था कि यह जमीन मेरे जीवनकाल में उपजाऊ हो जाएगी। वहीं शत्रुघ्न महतो अपनी जमीन से आय अर्जित कर खुश हैं क्योंकि इससे पहले उन्हें कभी लाभ नहीं मिला था। मुल्की देवी और शत्रुघ्न महतो दोनों अपनी इस बंजर जमीन के बारे में अब चिंता नहीं करते हैं और यह अविश्वसनीय है कि बंजर जमीन अब उनके...
unsung-hero-sai-kaustuv-dasgupta-overcrowding

विवशता को बार-बार मात

3 सप्ताह पहले
दुनिया में कई लोग ऐसे हैं, जो अपनी छोटी सी हार को पूरे जीवन पर भारी बना लेते हैं। ऐसे लोगों के जीवन में अंधकार और निराशा के सिवाय कुछ नहीं होता है। पर कुछ ऐसे भी जीवट होते हैं जो हारकर बैठते नहीं, बल्कि नई राह और नई सफलता का सुलेख लिख जाते हैं। इसी तरह की एख शख्सियत हैं साईं कौस्तुभ दासगुप्ता। प. बंगाल के सिलीगुड़ी में जन्मे कौस्तुभ ने जीवन में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। कौस्तुभ बचपन से ही ऑटोस्यिटियो-जेनेसिस इंपर्फेक्टा नामक रोग से पीड़ित रहे। इस बीमारी में शरीर की हड्डियां इतनी कमजोर हो जाती हैं कि वे टूटने लगती हैं और यह प्रक्रिया निरंतर चलती रहती है। कौस्तुभ छह साल की उम्र में ही समझ गए थे कि वे विशेष हैं। लिहाजा, उन्होंने तय क...
Life-guard-jawan

जीवन रक्षक जवान

4 सप्ताह पहले
छत्तीसगढ़ के नक्सली प्रभावित दक्षिण बस्तर इलाके में सीआरपीएफ के जवानों ने नई मिसाल पेश की है। कटेकल्याण के टेटम गांव की एक बीमार आदिवासी महिला कोसी को जवानों ने स्ट्रेचर बना कर कई किलोमीटर दूर एंबुलेंस तक ले गए। सीआरपीएफ की एक टुकड़ी असिस्टेंट कमांडेंट देवाराम चौधरी और एसआई अमिताभ खांडेकर के नेतृत्व में सर्चिंग पर निकली थी। जवानों ने रास्ते में नयनार पटेलपारा गांव में एक महिला कोसी को दर्द से कराहते देखा। उसके परिजनों ने बताया कि कोसी बहुत बीमार है, लेकिन उसे अस्पताल ले जाने की सुविधा नहीं है, क्योंकि नक्सलियों ने रास्ता काट दिया है। एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती। बस इतना सुनना था कि वीर जवानों ने बांस का स्ट्रे...
yogeshwar-yoga-education

योगेश्वर राम मिश्र - योगेश्वर का शिक्षा योग

5 सप्ताह पहले
वाराणसी के जिस स्कूल परिसर में स्वामी विवेकानंद ने लगभग दो माह गुजारे थे, वह स्कूल कभी मॉडल स्कूल के रूप में चर्चित था, लेकिन वक्त के साथ अव्यवस्था का शिकार बन चुके इस ऐतिहासिक स्कूल को  संवारने का संकल्प वाराणसी के जिलाधिकारी योगेश्वर राम मिश्र ने लिया है। वाराणसी के अर्दली बाजार स्थित एलटी कॉलेज परिसर में स्थापित परिषदीय विद्यालय में हर शनिवार को डीएम शिक्षक की भूमिका में होते हैं।  इस सरकारी प्राथमिक विद्यालय को डीएम ने गोद लिया है और वे स्वयं प्रत्येक  शनिवार दो घंटे यहां बच्चों को पढ़ाते हैं। तमाम प्रशासनिक व्यस्तताओं के  बावजूद पिछले छह शनिवार से वे लगातार दो घंटे की क्लास लेने विद्यालय पहुंच रहे ह...
village-making-city

हिमांशु पटेल - गांव बना शहर

7 सप्ताह पहले
पुनसारी आज भारत के सबसे अच्छे गांवों में से एक है, क्योंकि इस गांव में शहर की सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं, लेकिन यह गांव हमेशा से ऐसा नहीं था। यह सब एक आदमी के प्रयास से संभव हो सका है, जिसने पिछले कुछ सालों में गांव की तस्वीर ही बदल दी। बता दें कि हिमांशु पटेल का जन्म गुजरात के साबरकांठा जिले के पुनसारी गांव में हुआ। हालांकि हिमांशु की स्कूली पढ़ाई के बाद उनका परिवार शहर चला गया था, जहां उनकी आगे की शिक्षा पूरी हुई। छुट्टियों के दौरान एक बार हिमांशु का अपने गांव आना हुआ, जहां न तो बिजली थी, न पानी और न ही कानून व्यवस्था। जबकि हिमांशु को गांव और शहर के बीच का अंतर समझ आने लगा था। उन्होंने अपनी पढ़ाई के दौरान गांवों की स्थिति ...
 raja-sethi-murali-is-friend-of-education

राजा सेठीमुरली - शिक्षा मित्र

8 सप्ताह पहले
ऑटो चालक राजा सेठीमुरली जब छोटे थे तब उनके माता-पिता उन्हें शिक्षित नहीं कर सके। क्योंकि उनके पिता शराबी थे और उन्होंने उनकी मां को अकेले सेठीमुरली की जिम्मेदारी उठाने के लिए छोड़ दिया था। वह रोज मजदूरी करके घर का खर्च चलाती थीं, जिस दिन उन्हें पैसे नहीं मिलते वह लोग भूखे सोते थे। स्कूल ना जा पाने का प्रभाव राजा के जीवन पर इतना गहरा पड़ा कि उन्होंने दूसरे बच्चों के साथ ऐसा ना होने देने की कसम खाई। वे लगभग 10 वर्षों तक अकादमिक रूप से सरकारी स्कूल के बच्चों की मदद करने के लिए अपनी छोटी सी आय का उपयोग करते रहे, लेकिन जब स्कूल बंद हो गए तो वे कोयंबंटूर के अलग अलग स्कूलों में गए और वहां के अध्यापकों से बात की।   राजा ने क...
cyclist-structured-history-in-america

श्रीनिवास गोकुलनाथ - साइकिलिस्ट ने अमेरिका में रचा इतिहास

10 सप्ताह पहले
महाराष्ट्र के दो साइकिलिस्ट ने ‘रेस अक्रॉस अमेरिका’ जीतकर इतिहास बना दिया है। नागपुर के साइकिलिस्ट अमित समर्थ ने 5,000 किमी इस लंबी साइकिल रेस को 11 दिन, 21 घंटों और 11 मिनट में पूरा कर लिया। अमित ने यह सफलता सोलो कैटेगरी में हासिल की है। इसी रेस में नासिक के श्रीनिवास गोकुलनाथ ने 18-39 वर्ष के आयुवर्ग के तहत सोलो कैटेगरी में यह दूरी 11 दिन, 12 घंटों और 45 मिनट में पूरी की। वैसे यह श्रीनिवास का दूसरा प्रयास था, जबकि अमित ने पहली ही बार में रेस पूरी कर सफलता दर्ज की। इस समय के साथ श्रीनिवास ने 7वां और अमित ने 8वां स्थान हासिल किया।  36 वर्षीय अमित समर्थ पेशे से एमबीबीएस डाक्टर हैं और उन्होंने पब्लिक हेल्थ ...
uk-teenagers-earned-$ 56,000-from-school-bathrooms

नाथन: किशोरों का कारनामा

11 सप्ताह पहले
नाथन और उनकी टीम 15 साल की उम्र से ही कार्य कर रही हैं। इसके लिए उन्होंने अपने स्कूल के बाथरुम का उपयोग किया था। वे दूसरे स्कूलों में चॉकलेट, मिठाई और फिजी पेय बेचने के लिए अपने स्कूल के बाथरूम का इस्तेमाल किया करते थे। इससे उन्होंने करीब 1,200 डॉलर प्रति सप्ताह कमाई करना शुरू कर दिया था। इससे वह आनंद ही नहीं लेते थे, बल्कि उन्हें इससे अपने जीवन शैली को बनाने की प्रेरणा मिलती थी। नाथन ने बताया कि उन्होंने एक करोड़पति से पैसे कमाने का तरीका सीखा है, जो एक विकास कार्यक्रम का हिस्सा थे। इस बात ने उनको अपने स्कूल में आने वाले छात्रों को मिठाई खरीदने और बेचने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने अपने साथ अन्य लड़कों को भी जोड़ा। उन्होंने स्नैपचैट के माध्यम से अपने ऑर्डर बनाए और फिर ब्रेक...
massive-flood-Lakhimpur-2-sister

साहस की सहेलियां

12 सप्ताह पहले
असम में बाढ़ से जान-माल की काफी क्षति हुई है। इस बीच, वहां दो साहसी युवा सहेलियों ने जान पर खेलकर 30 लोगों को डूबने से बचाया है। ये दो सहेलियां हैं- पिंकी गोगोई और पूजा गोगोई। दरअसल, ऊपरी असम के लखीमपुर जिले के हातीलुंग गांव में स्थिति एक दिन सुबह तब अचानक काफी गंभीर हो गई, जब स्थानीय डैम से काफी पानी छोड़ा गया। नतीजतन, गांव सहित पूरे इलाके में भयंकर बाढ़ आ गई। ऐसे में कई लोग तेज बहाव के बीच फंस गए। उनकी स्थिति ऐसी थी कि वे अपने बचाव के लिए कुछ नहीं कर सकते थे। बाकी लोगों के पास भी खुद को अपने जरूरी सामान को बचाने के लिए कुछ लम्हों का ही समय था। पिंकी और पूजा बचपन से हाथ से बनी बांस का नाव चलाने का शौक रखती थीं। उस दिन जब गांव में बाढ़ आई तो उन्होंने इसी नाव की मदद से 30 ग्रामीणों को ड...
ravinder-k-bansal-campaign-for-cancer-hospital

रविन्दर के. बंसल: कैंसर अस्पताल के ‌लिए मुहिम

13 सप्ताह पहले
विश्वभर में उड़ान भर कर ‌परिक्रमा करना सदा से बेहद साहस का काम हो सकता है। लेकिन सामाजिक कल्याण यानी परोपकार के लिए भी ऐसी यात्राएं की जा सकती हैं। इन दिनों कई आयुवर्ग के समूह सड़कों, आकाश मार्ग और मोटरसाइकिलों पर सवार होकर परोपकार के कार्य करते मिल जाते हैं। इसी क्रम में 68 साल के भारतीय अमेरिकी रविन्दर के. बंसल भी हैं। न्यूयॉर्क के भारतीय समुदाय से जुड़े बंसल अवकाश प्राप्त इंजी‌नियर और उद्यमी हैं। रविन्दर के. बंसल ने नेक कार्य के लिए 18 देशों के 34 हवाई अड्डे का इस्तेमाल करने हुए अकेले ही उड़ान भरी और हरियाणा के अंबाला में कैंसर अस्पताल के ‌लिए उन्होंने 4.83 करोड़ रुपए जुटाए। उनका जन्म अंबाला में हुआ है। अकेले 20 हजार ‌मील की उड़ान भरने के पीछे उनका एकमात्र उद्देश...
mahesh-muralidhar-bhagwat-tireless-war-with-human-trafficking

महेश मुरलीधर भागवत - मानव तस्करी से अथक जंग

14 सप्ताह पहले
मानव तस्करी से लड़ने के अपने अथक प्रयासों के लिए वरिष्ठ भारतीय पुलिस अधिकारी महेश मुरलीधर भागवत को अमेरिका के प्रतिष्ठित ट्रैफिकिंग इन पर्संस (टीआईपी) रिपोर्ट हीरोज सम्मान दिया गया है। दिलचस्प है कि भागवत को अमेरिका की प्रथम महिला मेलानिया ट्रंप के हाथों यह सम्मान दिया गया। यह प्रतिष्ठित सम्मान अमेरिकी विदेश मंत्रालय के तहत मानव तस्करी की रोकथाम के लिए काम रहे विभाग द्वारा हर साल दिया जाता है। इसके तहत मानव तस्करी के खिलाफ काम कर रही गैरसरकारी संस्थाओं से जुड़े कार्यकर्ताओं, पुलिस अधिकारी सहित विभिन्न विभागीय अधिकारियों को सम्मानित किया जाता है। भागवत पिछले 13 साल से मानव तस्करी रोकने के लिए विभिन्न मोर्चों पर उल्लेखनीय कार्य कर...


Bringing smiles to every face hindi ad copy %281%29

ऑडियो