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बुधवार, 19 दिसंबर 2018

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पर्यावरण बचाने में जुटी ‘सफाई सेना’

5 सप्ताह पहले
आधुनिक और द्रुत विकास की होड़ ने लोगों के साथ देश के जीवन में चाहे लाख उपलब्धियां जोड़ दी हों, पर इसने बेहिसाब कूड़े के रूप में जो संकट खड़ा किया है वह आज पर्यावरण के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। अच्छी बात यह है कि बगैर किसी सरकारी प्रोत्साहन के स्वप्रेरणा से इस संकट से निपटने का संकल्प कुछ लोगों ने लिया है। ऐसा ही एक नाम है जयप्रकाश चौधरी। 1994 तक कचरे के ढेर से चीजें ढूंढने और उन्हें बेचकर गुजारा करने वाले जयप्रकाश चौधरी उर्फ संटू आज करीब 170 लोगों को रोजगार दे रहे हैं। कूड़े के ढेर से अपनी किस्मत चमकाने वाले जयप्रकाश महीने में 11 लाख रुपए कमा रहे हैं।
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गांधी के शौचालय से फ्लश टॉयलेट तक

9 सप्ताह पहले
अगले वर्ष गांधी जी के जन्म के 150 साल हो जाएंगे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2019 तक देश के सभी घरों में शौचालय बन जाने का लक्ष्य रखा है। आज देश के सभी स्कूलों में शौचालय बन गया है और घरों में बनाए जा रहे है। देश खुले में शौच से मुक्त होने जा रहा है, लेकिन एक समय वह भी था जब खुले में शौच को हम विवश थे। आइए 50 साल पहले की स्थिति से आपको रूबरू कराते हैं। सुलभ का स्थापना वर्ष और मेरे जन्म का वर्ष एक ही है। अगले दो साल में हम दोनों 50 के हो जाएंगे। मेरी नजर में व्यक्ति के अंदर चेतना शायद तब से जागृत हो जाती है जब वह खुद से खाने और शौच के लिए जाने लगता है। मैंने रसोई घर में जाकर खुद से खाना कब शुरू किया यह तो याद नहीं, लेकिन...
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समाज में स्वच्छ भारत मिशन की क्रांतिकारी भूमिका

10 सप्ताह पहले
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का गहरा विश्वास था कि स्वच्छता, ईश्वरीयता के आगे है और भारत के लोगों की बेहतरी के लिए राष्ट्रीय प्रगति का मार्ग भी है। वे कहते थे कि हम अशुद्ध शरीर के साथ भगवान का आशीर्वाद प्राप्त नहीं कर सकते हैं और न ही अशुद्ध मन से भगवान को पाया जा सकता है। बापू को  श्रद्धांजलि देने के लिए उनके कदमों पर चलना होगा और स्वच्छता के मंत्र का पालन करना होगा। महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती समारोह की शुरूआत करने के लिए, पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय द्वारा आयोजित महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय स्वच्छता सम्मलेन (एमजीआईएससी) का उद्घाटन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा दिल्ली में किया गया। संयोग से यह स्वच्छ भारत मिशन की भी चौथी...
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स्वच्छता और सत्याग्रह

11 सप्ताह पहले
महात्मा गांधी जी ने आजादी हासिल करने के अपने अहिंसक आंदोलन की समूची अवधि के दौरान स्वच्छता के अपने संदेश को जीवंत बनाए रखा। नोआखाली नरसंहार के बाद अहिंसा के अपने विचार और व्यवहार की अग्निपरीक्षा की घड़ी में गांधी जी ने अपने इस संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का कोई अवसर नहीं गंवाया कि स्वच्छता और अहिंसा एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।    एक दिन नोआखाली के गड़बड़ी वाले इलाकों में अपने शांति अभियान के दौरान उन्होंने पाया कि कच्ची सड़क पर कूड़ा और गंदगी इसलिए फैला दी गई है, ताकि वह हिंसाग्रस्त इलाके के लोगों तक शांति का संदेश न पहुंचा पाएं। गांधी जी इससे जरा भी विचलित नहीं हुए और उन्होंने इसे उस कार्य करने का एक सुनहरा अवस...
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स्वच्छता का नया समाजशास्त्र

11 सप्ताह पहले
नब्बे के दशक में भारत को 21वीं सदी में जाने की बात खूब होती थी। ये बातें जहां संसद के बाहर-भीतर राजनीतिक लाइन के साथ कही जाती थी, वहीं आर्थिक-सामाजिक स्तर पर भी भावी भारत से जुड़े सरोकारों और चुनौतियों को लेकर विमर्श चलता था। पर किसी ने कभी सोचा भी होगा कि 21वीं सदी के दूसरे दशक तक पहुंचकर स्वच्छता देश का प्राइम एजेंडा बन जाएगा। इस बदलाव के पीछे बड़ा संघर्ष है। आज देश में स्वच्छता को लेकर जो विभिन्न अभियान चलाए जा रहे हैं, उसमें जिस संस्था और व्यक्ति का नाम सबसे पहले जेहन में आता है, वह है सुलभ इंटरनेशनल और इस संस्था के प्रणेता डॉ. विन्देश्वर पाठक। दुनिया आज डॉ. पाठक को ‘टॉयलेट मैन’ के रूप में जानती है। उन्होंने एक त...
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शौचालय और साफ पानी का लक्ष्य

15 सप्ताह पहले
आइवरी कोस्ट (कोटे डी आइवर) में स्वच्छता और जल गुणवत्ता के संबंध में अधिकतर परेशानियों के लिए 2007 में समाप्त हुए गृह युद्ध को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। इस संघर्ष ने, देश में महत्वपूर्ण जल आपूर्ति बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया। उसके बाद संघर्ष पुनर्निर्माण ने इस व्यवस्था के रखरखाव और उन्नत जल व स्वच्छता प्रणालियों की मरम्मत की ओर कोई ध्यान नहीं दिया। आइवरी कोस्ट में 80 लाख से अधिक लोगों को पर्याप्त स्वच्छता सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं, जिससे पानी से संबंधित बीमारियों का खतरा बढ़ा दिया है। 40 लाख से अधिक लोगों की सुरक्षित पेयजल तक पहुंच नहीं है। जबकि ग्रामीण इलाकों में ये संख्या और बड़ी हो जाती है, जहां 46 प्रतिशत ग्रामीण आब...
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गरीबी और अस्वच्छता से साझा संघर्ष

16 सप्ताह पहले
माली अफ्रीका में पूरी तरह थल से घिरा हुआ एक देश है। माली की एक पहचान यह भी है कि विश्व के सबसे अधिक गरीब परिवारों वाले इस देश में स्वच्छता का ग्राफ असंतोषजनक है। उन्नत शौचालयों और शुद्ध पेयजल की उपलब्धता के मामले में माली की स्थिति अच्छी नहीं है। स्वच्छता और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से अलग माली की एक सांस्कृतिक पहचान भी है। यहां की पारंपरिक लोककला और संगीत की काफी चर्चा होती है। यहां आज भी कई कमाल के संगीतकार भी रहते हैं। इतिहास, संविधान और सत्ता कभी ट्रांस-सहारा व्यापार पर नियंत्रण रखने वाले तीन साम्राज्यों घाना, माली (जिससे माली...
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अरबी पगड़ी पर स्वच्छता की कलगी

18 सप्ताह पहले
आधुनिकता के साथ संपन्नता और परंपरा के साथ रूढ़िग्रस्त जड़ता, ग्लोब पर ऐसी विलक्षणता वाले किसी देश का चयन करना होगा, तो जिस देश का नाम सबसे पहले जेहन में आएगा, वह है सउदी अरब। सउदी अरब मध्यपूर्व में स्थित एक सुन्नी मुस्लिम देश है। यह एक इस्लामी राजतंत्र है, जिसकी स्थापना 1750 के आसपास सउद द्वारा की गई थी। यहां की धरती रेतीली है तथा जलवायु उष्णकटिबंधीय मरुस्थल। सउदी अरब विश्व के अग्रणी तेल निर्यातक देशों में गिना जाता है। सउदी अरब की एक बड़ी खासियत यह भी है कि यहां इस्लाम के प्रवर्तक मुहम्मद साहब का जन्म हुआ था और यहां इस्लाम के दो सबसे पवित्र स्थल मक्का और मदीना हैं।
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अभाव के बीच स्वच्छता की ललक

19 सप्ताह पहले
अफ्रीकी देश बुर्किना फासो में स्वच्छता, स्वास्थ्य और जलापूर्ति की स्थिति में चर्चा करने से पहले यह जान लेना जरूरी है कि यह एक अत्यंत ही अभावग्रस्त देश है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार मामलों के प्रमुख मार्क लॉकुक ने हाल में कहा है कि पश्चिम अफ्रीका के सहेल क्षेत्र के छह देशों के करीब 60 लाख लोगों को भोजन के लाले पड़े हैं और 16 करोड़ बच्चों पर गंभीर कुपोषण का खतरा मंडरा रहा है। वर्ष 2012 के बाद से संकट इस स्तर पर नहीं पहुंचा था और आने वाले समय में और गंभीर स्थिति का सामना करना पड़ सकता है। मार्क के मुताबिक बुर्किना फासो, चाड, माली, मॉरिटानिया, नाइजर और सेनेगल के हालात हाल के महीनों में तेजी से बिगड़े हैं। इस स्थिति में दानदाता...
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स्वच्छता के लिए सुलभ का बहुआयामी योगदान

19 सप्ताह पहले
सुलभ इंटरनेशनल सोशल सर्विस आर्गेनाइजेशन की मदद से सिक्किम के 28 उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों की छात्राओं को सैनिटरी नैपकिन प्रदान करने की पहल ‘गरिमा’ का उद्घाटन साल 2016 में किया गया था। सिक्किम के लिए यह गर्व का विषय है कि इस कार्यक्रम का पहला चरण उल्लेखनीय रूप से सफल रहा। दरअसल, सिक्किम, भारत का पहला राज्य है, जहां स्कूली छात्राओं को सैनिटरी नैपकिन प्रदान करने की परियोजना को गंभीरता से लिया गया और इसके कार्यान्वयन को लेकर बड़े स्तर पर काम किया जा रहा है। ‘गरिमा परियोजना’ का दूसरा चरण, मानव संसाधन विकास मंत्री आरबी सुब्बा और सुलभ संस्थापक डॉ. विन्देश्वर पाठक द्वारा लांच किया गया।  सिक्कि...
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पर्यटन और स्वच्छता का आदर्श

20 सप्ताह पहले
इटली की खूबसूरती सिर्फ साधरण पर्यटकों को तो रास आती ही है, दुनिया भर के लेखकों और कवियों को भी यहां रहकर सृजनात्मक कार्य करना खूब रास आता है। अंग्रेजी के प्रसिद्ध नाटककर शेक्सपियर ने अपने कई नाटकों को यहां की खूबसूरती बयां की है। यहां के विंटेज हवेलियों से लेकर आईलैंड तक पूरी दुनिया में मशहूर हैं। यहां सबसे ज्यादा यूनेस्को का वर्ल्ड हेरिटेज साइट हैं। इसकी संख्या 50 से ज्यादा है। इटली में करीब 2800 वर्षों से शराब बन रही है और इस लिहाज से मधुपान करने वालों के लिए इटली एक खासा परिचित और पसंदीदा नाम है।  इटली का इतिहास ईसा पूर्व नौवीं शताब्दी से आरंभ होता है। इसी समय वर्तमान इटली के केंद्रीय भाग में इतालवी जनजातियों के अ...
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सुंदरता और स्वच्छता की द्वीपमाला

21 सप्ताह पहले
सेशेल्स, हिंद महासागर में स्थित 115 द्वीपों वाला देश है। यह अफ्रीकी मुख्यभूमि से लगभग 1500 किलोमीटर दूर पूर्व दिशा में और मेडागास्कर के उत्तर-पूर्व में स्थित है। इसके पश्चिम में जंजीबार, दक्षिण में मॉरीशस और रीयूनियन, दक्षिण-पश्चिम में कोमोरोस और मयॉट और उत्तर-पूर्व में मालदीव का सुवाडिवेस स्थित है। सेशेल्स में अफ्रीकी महाद्वीप के किसी भी अन्य देश के मुकाबले सबसे कम आबादी है। प्राकृतिक सुंदरता दुनिया टूरिस्ट मैप पर सेशेल्स एक आकर्षक डेस्टिनेशन माना जाता है। खासतौर पर यह वैसे लोगों के घूमने-फिरने के लिए आदर्श है, जो किफायती खर्च में...


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