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शनिवार, 21 अक्टूबर 2017

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मधुबनी पेंटिंग का कमाल अब रेलवे स्टेशन पर

4 दिन पहले
मधुबनी पेंटिंग की पहचान देश ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में है। लोक चित्रकला का ऐसा सुंदर रूप दुनिया में और कहीं शायद ही देखने को मिले। भारतीय रेलवे और नागरिक विमानन मंत्रालय की तरफ से काफी पहले से मधुबनी पेंटिंग को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। इसी सिलसिले में रेलवे की तरफ से मधुबनी स्टेशन को यहां की विख्यात पेंटिंग से सज्जित करने का एख नया अभियान चल रहा है। लिहाजा, अगर आप बिहार के मधुबनी रेलवे स्टेशन पर आने वाले हैं, तो आपको यहां का नजारा बदला-बदला सा नजर आने वाला है। लोक चित्रकारी के लिए विख्यात मधुबनी का रेलवे स्टेशन आपको न केवल मधुबनी पेंटिंग के लिए आकर्षित करेगा, बल्कि इन पेंटिंग के जरिए आप इस क्षेत्र की पुरानी कहानियों और स्थ...
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पीड़ित मानवता को समर्पित सेवा का मंदिर

एक सप्ताह पहले
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2015 के अंतिम अपने 'मन की बात'  संबोधन में शारीरिक रूप से अक्षम लोगों को ‘दिव्यांग’ नाम दिया। उन्होंने कहा कि  शारीरिक रूप से अक्षम के लिए 'दिव्यांग' शब्द का इस्तेमाल किया जाना चाहिए, क्योंकि उनके पास एक अतिरिक्त शक्ति होती है। तब से ऐसे लोगों को दिव्यांग कहा जाने लगा,  लेकिन इस नए नाम के बाद सवाल उठा कि क्या इससे उनकी समस्याओं का अंत हो जाएगा?  इससे कोई इनकार नहीं कर सकता कि शारीरिक अक्षमता भारत क्या, दुनिया के लिए एक चुनौती की तरह है। एक अच्छी बात यह भी है कि पोलियो पर नियंत्रण के बाद उम्मीद की गई है कि भारत में दिव्यांगों की संख्या में कम...
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गोवा में साहित्योत्सव

2 सप्ताह पहले
सुरेश नीरव जी की अध्यक्षता में अखिल भारतीय सर्वभाषा-संस्कृति-समन्वय-समिति एवं गोवा विश्वविद्यालय के हिंदी-विभाग के संयुक्त तत्त्वावधान में 8 और 9 सितंबर, 2017 को ‘गोवा-साहित्योत्सव’ का आयोजन हुआ। 8 सितंबर, 2017 को गोवा विश्वविद्यालय के सम्मेलन सभागार में त्रिसत्रीय कार्यक्रम के अंतर्गत प्रथम सत्रा का विषय ‘वैश्विक संदर्भ में हिंदी: संभावनाएं एवं चुनौतियां’ था। इस सत्र में प्रमुख वक्ता थे-डॉ. अशोक विठोबा बाचुलकर, महाराष्ट्र, प्रो. वृषाली मांद्रेकर,गोवा विश्वविद्यालय, आचार्य श्याम स्नेही, गुरुग्राम और शोध-छात्रा चंदन कुमार, दिल्ली। सभी विद्वानों ने विषय से संबंधित समस्याओं एवं समाधान पर श्रोताओं के स...
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विभिन्न रंगों में दिखने वाली मां दुर्गा

3 सप्ताह पहले
बंगाल में दुर्गा पूजा का अर्थ रचनात्मकता को श्रेष्ठता के साथ प्रस्तुत करना है। इसीलिए शहर भर में लगे विभिन्न समुदाय के पूजा पंडालों ने इसकी बढ़िया तैयारी भी कर रखी है, तो कुछ आयोजकों ने इसे पंरपराओं से अलग एक बिंदु बना दिया है।  भवानीपुर 75 पल्ली शहर के केंद्र में लंदन जैसा सेट तैयार किया गया है। इस पंडाल के गेट को लंदन के बिग बेन की तरह तैयार किया गया है और जिस मंच पर देवताओं को सजाया जाना है, उसके पास लंदन ब्रिज और वेस्टमिंस्टर बनाया गया है। पंडाल के अंत में पंडाल हॉपर बनाया गया है। इसके साथ ही स्ट्रीट लाइट को लंदन की सड़कों के समान लगाया गया है।  बीमन साहा कहते हैं कि पुराने कलकत्ता में कुछ जगहें ऐसी ह...
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रोजगार का जरिया बांस की साइकिल

4 सप्ताह पहले
सरकार की तरफ से इन दिनों स्टार्ट अप को लेकर कई सारे पहल हो रहे हैं। कमाल की बात है देश में नवाचार की प्रवृति शहरों से ज्यादा गांवों में देखी जाती है। यह अलग बात है कि बावजूद इस प्रवृति के गांवों से शहरों की ओर रोजगार के लिए पलायन जारी है। ऐसे में महाराष्ट्र का एक युवक ऐसा है, जो गांव में रहने वाले ग्रामीणों को रोजगार के साथ हुनर भी सिखा रहा है। हम बात कर रहे हैं वायुसेना से सेवानिवृत्त शशिशेखर पाठक की। शशिशेखर बताते हैं, ‘एयरफोर्स में पायलट के पद पर काम करते थे। 10 साल देश की सेवा करने के बाद रिटायरमेंट ले लिया। रिटायरमेंट के बाद कुछ करने की चाह शुरू से ही थी। मैंने पुणे के दक्षिण में कुछ जमीन खरीदी थी। जहां जमीन खर...
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हिंदी और मध्य वर्ग का विकास

5 सप्ताह पहले
समय निकल जाता है, पर बातें रह जाती हैं। वे बातें मानव पुरखों के पुराने अनुभव जीवन के नए-नए मोड़ों पर अक्सर बड़े काम की होती हैं। उदाहरण के लिए, भारत देश की समस्त राष्ट्रभाषाओं के इतिहास पर तनिक ध्यान दिया जाए। हमारी प्रायः सभी भाषाएं किसी न किसी एक राष्ट्रीयता के शासन-तंत्र से बंध कर उसकी भाषा के प्रभाव या आतंक में रही हैं। हजारों वर्ष पहले देववाणी संस्कृत ने ऊपर से नीचे तक, चारों खूंट भारत में अपनी दिग्विजय का झंडा गाड़ा था। फिर अभी हजार साल पहले उसकी बहन फारसी सिंहासन पर आई। फिर कुछ सौ बरसों बाद सात समुंद्र पार की अंग्रेजी रानी हमारे घर में अपने नाम के डंके बजवाने लगी। यही नहीं, संस्कृत के साथ कहीं-कहीं समर्थ, जनपदों की बोलिया...
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सैर के लिए सैलसौर से बेहतर क्या

6 सप्ताह पहले
गर्मी के दिनों में लोग अक्सर ठंडे इलाकों की सैर पर जाना पसंद करते हैं। शिमला, नैनीताल, मसूरी जैसे इलाकों के बारे में तो लोगों ने बहुत सुन रखा है, पर कुछ ऐसे भी इलाके हैं जिनके नाम भले अनसुने हैं, पर वे निहायत ही खूबसूरत हिल स्टेशन हैं। अगर आपको सर्द अहसास के बीच दिमाग और दिल का सुकून भी चाहिए तो एक बार जरूर उत्तराखंड के सैलसौर का रूख कीजिए। सैलसौर उत्तराखंड का एक छोटा सा हिल स्टेशन है, यह पर्यटकों के बीच अभी ज्यादा लोकप्रिय नहीं है, पर अगर आप यहां आते हैं तो फिर आपकी खुशी का ठिकाना नहीं रहेगा। सैलसौर एक ऐसी जगह है,जहां आने वाले पर्यटक रूक कर यहां की खूबसूरती को निहार सकते हैं। यहां देखने की कई सारी ऐसी जगहें हैं, जो मन को प्रफुल...
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गौशाला के लिए ‘दासी’ का महादान

7 सप्ताह पहले
हैसियत से नीयत बड़ी होती है। इस सीख को समय-समय पर लोगों ने साबित किया है। अच्छी बात यह भी है कि हर दौर में ऐसे उदाहरण से समय और समाज को नैतिकता और उदात्तता का यह पाठ कुछ लोगों ने अपने जीवन-कर्म से पढ़ाया है। हाल में मथुरा में ऐसी ही एक मिसाल कायम की है, मंदिर के द्वार पर जूते चप्पल की रखवाली करने वाली एक वृद्ध महिला ने। उन्होंने लाखों रूपए भगवान की सेवा में दान कर दिए। भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में डूबी हुई यह वृद्ध महिला इन दिनों भगवान बांके बिहारी की नगरी वृंदावन में चर्चा का विषय बनी हुई है। इस महिला ने एक-दो नहीं पूरे 61 लाख रुपए दान करते हुए अपने आराध्य की सेवा में गौशाला और आश्रम में लगा दिए है।  कान्हा की नगरी ...
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खादी का सॉफ्ट पावर

8 सप्ताह पहले
देश में युवाओं के बीच खादी को लोकप्रिय बनाने के लिए टेक्सटाइल इंडस्ट्री हर प्यास कर रही है। इससे खादी अब युवाओं की पसंद में शामिल हो गई है और खादी पहने का फैशन चल गया है। खादी का फैशन अब हिंदुस्तान तक ही सीमित नहीं रह गया है, विदेशों में भी खादी की डिमांड बढ़ रही है।  इसके साथ ही दुनिया के पटल पर भारत की बढ़ती सॉफ्ट पॉवर को जोरदार बूस्टर देने की सरकार ने एक और महत्वाकांक्षी योजना बनाई है। इसके तहत खादी को इंटरनेशनल ब्रांड के रूप में प्रमोट किया जाएगा। दुनियाभर में पहले खादी प्रदर्शनियां लगाई जाएंगी और बाद में खादी आउटलेट्स और दुकानें खोली जाएंगी। इससे पहले सरकार ने योग का दुनियाभर में जोर-शोर से प्रसार कर मुल्क की सॉफ...
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पधारो म्हारे देस..!

9 सप्ताह पहले
फाहियान-ह्वेनसांग से लेकर कई ऐसे ऐतिहासिक पर्यटक हुए, जिन्हें भारत भ्रमण अभिभूत कर गया। मार्क ट्वेन ने तो भारत के बारे में यहां तक लिखा, ‘एक ऐसी जगह जिसे सभी लोग देखना चाहते हैं और एक बार इसके दर्शन कर लेने के बाद, भले ही उन्होंने इसकी केवल झलक भर देखी हो, दुनिया की तमाम छवियों को इस एक झलक पर न्योछावर करने को तैयार हो जाते हैं।’ भारत के पर्यटन विकास के लिए ‘अतुल्य भारत’ का संदेश दिया गया है। इन दो शब्दों को सुनते हुए अनेक अनोखे चित्र उभरते हैं, जिनमें उत्तर में हिमालय की हिम मंडित चोटियों से लेकर पश्चिम में फैला विशाल मरुस्थल, पूर्व की अनोखी वनस्पतियां, गर्म जलवायु के वर्षावन, मनोहर झीलें, रमणीक समुद्र त...
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...तो एक भारतीय के नाम पर होता एवरेस्ट का नाम

10 सप्ताह पहले
दुनिया की सबसे ऊंची पर्वत चोटी माउंट एवरेस्ट के साथ मानवीय साहस के कई दिलचस्प दास्तान जुड़े हैं। एक समय एवरेस्ट तक पहुंचना मौत से खेलने के बराबर था, पर अब पर्वतारोहण के वैज्ञानिक प्रशिक्षण और बढ़े दुस्साहस के साथ एवरेस्ट विजय जहां सामान्य बात होता जा रहा है, वहीं इससे जुड़े नए-नए कारनामे लगातार दर्ज होते जा रहे हैं। तारीखी तौर पर देखें इस साल 29 मई को माउंट एवरेस्ट फतह के 64 साल पूरे हो गए। इसी दिन 1953 में एडमंड हिलेरी व तेंजिंग नॉर्गे ने पहली बार 8848 मीटर (29002 फीट) ऊंचे एवरेस्ट पर चढ़ाई की थी। महालंगूर रेंज में स्थित इस चोटी को मापने से लेकर इसके नामकरण की कहानी बेहद रोचक है। इसकी तह तक जाएं तो पता चलता है कि अगर अंग्रेजों ने...
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तीन वर्षों में पकड़ी गई हजारों करोड़ की अघोषित आय

11 सप्ताह पहले
केंद्र की कमान संभालने के बाद देश के प्रधानमंत्री का यह संकल्प सबको याद है,‘न खाऊंगा, न खाने दूंगा।’ तीन वर्षों से सरकार इसी संकल्प के सहारे भ्रष्टाचारमुक्त देश बनाने की दिशा में कार्य कर रही है। इस संकल्प को पूरा करने में आयकर विभाग पूरी तरह सक्रिय है। बेनामी संपत्ति के मामले में देश भर में कार्रवाई जारी है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को जानकारी दी है कि उसने सघन खोज, जब्ती और छापे में करीब 71,941 करोड़ रुपए की ‘अघोषित आय’ का पता लगाया है। वित्त मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट में दायर हलफनामे में बताया है कि बीते तीन सालों के दौरान विभाग ने 2 हजार से ज्यादा कंपनियों पर छापे मारे गए, जिसमें 36,051 करोड़ रुपए से अधिक की अघोषित आय का पता चला। इसके अतिरिक्त...


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