sulabh swatchh bharat

सोमवार, 11 दिसंबर 2017

the-history-of-the-presidency-was-alive

प्रेसीडेंसी का इतिहास हुआ जीवंत

एक सप्ताह पहले
छह साल पुरानी प्रेसीडेंसी यूनिवर्सिटी ने दुनिया भर में विश्वविद्यालयों की शानदार लीग में प्रवेश किया है और यह एशिया के पहले स्नातक महाविद्यालय के रूप में अपना 200 वां वर्षगांठ मना रहा है। इसके साथ ही संस्थान की वास्तविक पहुंच बनाने के लिए गूगल कला और संस्कृति के साथ गठजोड़ भी किया गया है। कुछ महीने पहले शुरू की गई पहल प्रेसीडेंसी की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत तक पहुंचने में ई-ट्रैवेलर्स को काफी मदद करती है। अगर कोई इसे देखता है तो यात्रियों को स्वामी विवेकानंद, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, वैज्ञानिक सत्येंद्रनाथ बोस, बंकिम चंद्र चटर्जी, प्रतिष्ठित सांख्यिकीविद् प्रशांत चंद्र महालनोबिस, सत्यजीत राय जैसे नामों के बारे में विस्मय से जानने...
new-clothes-for-clothes

कपड़े की नई उड़ान

3 सप्ताह पहले
एसोचैम तथा रिसर्जेंट ने हाल ही में अपने संयुक्त अध्ययन के आधार पर जारी की रिपोर्ट में यह बात कही है कि अगले दो वर्षों में भारतीय टेक्सटाइल उद्योग नई ऊंचाइयों को छूता हुआ 250 अरब डॉलर पर पहुंच जाएगा, जो कि वर्तमान में 150 अरब डॉलर है। इस अध्ययन से इस बात की पुष्टि होती है कि नोटबंदी के कारण जो तात्कालिक प्रभाव पड़े थे, अब यह उद्योग उससे उबर चुका है। यह तथ्य उस दूरदर्शितापूर्ण निर्णय की जीत है, जो मोदी सरकार ने देशहित में लिया था। इसके अतिरिक्त मोदी सरकार के और कई ऐसे प्रयास हैं, जिनसे भारतीय वस्त्र उद्योग को नई दिशा-दशा मिली। रोजगार में नंबर दो&nbs...
seven-hundred-year-old-script-cathy

700 साल पुरानी लिपि 'कैथी'

6 सप्ताह पहले
एक ऐसे दौर में जब भाषाएं ही एक के बाद एक प्रचलन से बाहर हो रही हैं, तो उनकी लिपियों की हालत क्या होगी, यह आसान से समझा जा सकता है। ऐसी ही एक लिपि है- कैथी। कैथी एक ऐतिहासिक लिपि है, जिसे मध्यकालीन भारत में प्रमुख रूप से उत्तर-पूर्व और उत्तर भारत में काफी बृहत रूप से प्रयोग किया जाता था। खासकर आज के उत्तर प्रदेश एवं बिहार के क्षेत्रों में इस लिपि में वैधानिक एवं प्रशासनिक कार्य किए जाने के भी प्रमाण पाए जाते हैं। पूर्ववर्ती उत्तर-पश्चिम प्रांत, मिथिला, बंगाल, उड़ीसा और अवध में। इसका प्रयोग खासकर न्यायिक, प्रशासनिक एवं निजी आंकड़ो के संग्रहण में किया जाता था।
the-weavers-are-weaving

बुनी जा रही बुनकरों की तकदीर

7 सप्ताह पहले
भारत हस्त निर्मित वस्त्रों और हस्तशिल्प के मामले में खासा समृद्ध है, जिसको लेकर उसे देश से ही नहीं, बल्कि विदेश से भी सराहना मिलती रही है और खरीदार भी इनकी ओर आकर्षित होते रहे हैं। भारत में आंध्र प्रदेश और ओडिशा की जटिलता से बुनी गई इकात साड़ी, गुजरात की पाटन पटोला, उत्तर प्रदेश की बनारसी साड़ी, मध्य प्रदेश की महीन माहेश्वरी बुनाई या तमिलनाडु की काष्ठ या पत्थर से बनी मूर्तिकारी के अलावा भी काफी कुछ मौजूद है, जिन्हें दुनिया में हथकरघा और हस्तशिल्प के मामले में अलग पहचान मिली हुई है। भारत में बुनकरों और कारीगरों को वस्त्र और हथकरघा की समृद्ध विविधता के निर्माण के लिए कड़ी मशक्कत करनी होती है। कपड़ों की बुनकरी और हस्तशिल्प क...
madhubani-painting-is-now-at-the-railway-station

मधुबनी पेंटिंग का कमाल अब रेलवे स्टेशन पर

8 सप्ताह पहले
मधुबनी पेंटिंग की पहचान देश ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में है। लोक चित्रकला का ऐसा सुंदर रूप दुनिया में और कहीं शायद ही देखने को मिले। भारतीय रेलवे और नागरिक विमानन मंत्रालय की तरफ से काफी पहले से मधुबनी पेंटिंग को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। इसी सिलसिले में रेलवे की तरफ से मधुबनी स्टेशन को यहां की विख्यात पेंटिंग से सज्जित करने का एख नया अभियान चल रहा है। लिहाजा, अगर आप बिहार के मधुबनी रेलवे स्टेशन पर आने वाले हैं, तो आपको यहां का नजारा बदला-बदला सा नजर आने वाला है। लोक चित्रकारी के लिए विख्यात मधुबनी का रेलवे स्टेशन आपको न केवल मधुबनी पेंटिंग के लिए आकर्षित करेगा, बल्कि इन पेंटिंग के जरिए आप इस क्षेत्र की पुरानी कहानियों और स्थ...
temple-of-dedicated-service-to-suffering-humanity

पीड़ित मानवता को समर्पित सेवा का मंदिर

9 सप्ताह पहले
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2015 के अंतिम अपने 'मन की बात'  संबोधन में शारीरिक रूप से अक्षम लोगों को ‘दिव्यांग’ नाम दिया। उन्होंने कहा कि  शारीरिक रूप से अक्षम के लिए 'दिव्यांग' शब्द का इस्तेमाल किया जाना चाहिए, क्योंकि उनके पास एक अतिरिक्त शक्ति होती है। तब से ऐसे लोगों को दिव्यांग कहा जाने लगा,  लेकिन इस नए नाम के बाद सवाल उठा कि क्या इससे उनकी समस्याओं का अंत हो जाएगा?  इससे कोई इनकार नहीं कर सकता कि शारीरिक अक्षमता भारत क्या, दुनिया के लिए एक चुनौती की तरह है। एक अच्छी बात यह भी है कि पोलियो पर नियंत्रण के बाद उम्मीद की गई है कि भारत में दिव्यांगों की संख्या में कम...
literature-festival-in-goa

गोवा में साहित्योत्सव

10 सप्ताह पहले
सुरेश नीरव जी की अध्यक्षता में अखिल भारतीय सर्वभाषा-संस्कृति-समन्वय-समिति एवं गोवा विश्वविद्यालय के हिंदी-विभाग के संयुक्त तत्त्वावधान में 8 और 9 सितंबर, 2017 को ‘गोवा-साहित्योत्सव’ का आयोजन हुआ। 8 सितंबर, 2017 को गोवा विश्वविद्यालय के सम्मेलन सभागार में त्रिसत्रीय कार्यक्रम के अंतर्गत प्रथम सत्रा का विषय ‘वैश्विक संदर्भ में हिंदी: संभावनाएं एवं चुनौतियां’ था। इस सत्र में प्रमुख वक्ता थे-डॉ. अशोक विठोबा बाचुलकर, महाराष्ट्र, प्रो. वृषाली मांद्रेकर,गोवा विश्वविद्यालय, आचार्य श्याम स्नेही, गुरुग्राम और शोध-छात्रा चंदन कुमार, दिल्ली। सभी विद्वानों ने विषय से संबंधित समस्याओं एवं समाधान पर श्रोताओं के स...
durga-appearing-in-different-colors

विभिन्न रंगों में दिखने वाली मां दुर्गा

11 सप्ताह पहले
बंगाल में दुर्गा पूजा का अर्थ रचनात्मकता को श्रेष्ठता के साथ प्रस्तुत करना है। इसीलिए शहर भर में लगे विभिन्न समुदाय के पूजा पंडालों ने इसकी बढ़िया तैयारी भी कर रखी है, तो कुछ आयोजकों ने इसे पंरपराओं से अलग एक बिंदु बना दिया है।  भवानीपुर 75 पल्ली शहर के केंद्र में लंदन जैसा सेट तैयार किया गया है। इस पंडाल के गेट को लंदन के बिग बेन की तरह तैयार किया गया है और जिस मंच पर देवताओं को सजाया जाना है, उसके पास लंदन ब्रिज और वेस्टमिंस्टर बनाया गया है। पंडाल के अंत में पंडाल हॉपर बनाया गया है। इसके साथ ही स्ट्रीट लाइट को लंदन की सड़कों के समान लगाया गया है।  बीमन साहा कहते हैं कि पुराने कलकत्ता में कुछ जगहें ऐसी ह...
binary-cycle-of-employment

रोजगार का जरिया बांस की साइकिल

12 सप्ताह पहले
सरकार की तरफ से इन दिनों स्टार्ट अप को लेकर कई सारे पहल हो रहे हैं। कमाल की बात है देश में नवाचार की प्रवृति शहरों से ज्यादा गांवों में देखी जाती है। यह अलग बात है कि बावजूद इस प्रवृति के गांवों से शहरों की ओर रोजगार के लिए पलायन जारी है। ऐसे में महाराष्ट्र का एक युवक ऐसा है, जो गांव में रहने वाले ग्रामीणों को रोजगार के साथ हुनर भी सिखा रहा है। हम बात कर रहे हैं वायुसेना से सेवानिवृत्त शशिशेखर पाठक की। शशिशेखर बताते हैं, ‘एयरफोर्स में पायलट के पद पर काम करते थे। 10 साल देश की सेवा करने के बाद रिटायरमेंट ले लिया। रिटायरमेंट के बाद कुछ करने की चाह शुरू से ही थी। मैंने पुणे के दक्षिण में कुछ जमीन खरीदी थी। जहां जमीन खर...
development-of-hindi-and-middle-class

हिंदी और मध्य वर्ग का विकास

12 सप्ताह पहले
समय निकल जाता है, पर बातें रह जाती हैं। वे बातें मानव पुरखों के पुराने अनुभव जीवन के नए-नए मोड़ों पर अक्सर बड़े काम की होती हैं। उदाहरण के लिए, भारत देश की समस्त राष्ट्रभाषाओं के इतिहास पर तनिक ध्यान दिया जाए। हमारी प्रायः सभी भाषाएं किसी न किसी एक राष्ट्रीयता के शासन-तंत्र से बंध कर उसकी भाषा के प्रभाव या आतंक में रही हैं। हजारों वर्ष पहले देववाणी संस्कृत ने ऊपर से नीचे तक, चारों खूंट भारत में अपनी दिग्विजय का झंडा गाड़ा था। फिर अभी हजार साल पहले उसकी बहन फारसी सिंहासन पर आई। फिर कुछ सौ बरसों बाद सात समुंद्र पार की अंग्रेजी रानी हमारे घर में अपने नाम के डंके बजवाने लगी। यही नहीं, संस्कृत के साथ कहीं-कहीं समर्थ, जनपदों की बोलिया...
salasore-better-than-touring

सैर के लिए सैलसौर से बेहतर क्या

14 सप्ताह पहले
गर्मी के दिनों में लोग अक्सर ठंडे इलाकों की सैर पर जाना पसंद करते हैं। शिमला, नैनीताल, मसूरी जैसे इलाकों के बारे में तो लोगों ने बहुत सुन रखा है, पर कुछ ऐसे भी इलाके हैं जिनके नाम भले अनसुने हैं, पर वे निहायत ही खूबसूरत हिल स्टेशन हैं। अगर आपको सर्द अहसास के बीच दिमाग और दिल का सुकून भी चाहिए तो एक बार जरूर उत्तराखंड के सैलसौर का रूख कीजिए। सैलसौर उत्तराखंड का एक छोटा सा हिल स्टेशन है, यह पर्यटकों के बीच अभी ज्यादा लोकप्रिय नहीं है, पर अगर आप यहां आते हैं तो फिर आपकी खुशी का ठिकाना नहीं रहेगा। सैलसौर एक ऐसी जगह है,जहां आने वाले पर्यटक रूक कर यहां की खूबसूरती को निहार सकते हैं। यहां देखने की कई सारी ऐसी जगहें हैं, जो मन को प्रफुल...
mahadan-of-dashi-for-gaushala

गौशाला के लिए ‘दासी’ का महादान

15 सप्ताह पहले
हैसियत से नीयत बड़ी होती है। इस सीख को समय-समय पर लोगों ने साबित किया है। अच्छी बात यह भी है कि हर दौर में ऐसे उदाहरण से समय और समाज को नैतिकता और उदात्तता का यह पाठ कुछ लोगों ने अपने जीवन-कर्म से पढ़ाया है। हाल में मथुरा में ऐसी ही एक मिसाल कायम की है, मंदिर के द्वार पर जूते चप्पल की रखवाली करने वाली एक वृद्ध महिला ने। उन्होंने लाखों रूपए भगवान की सेवा में दान कर दिए। भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में डूबी हुई यह वृद्ध महिला इन दिनों भगवान बांके बिहारी की नगरी वृंदावन में चर्चा का विषय बनी हुई है। इस महिला ने एक-दो नहीं पूरे 61 लाख रुपए दान करते हुए अपने आराध्य की सेवा में गौशाला और आश्रम में लगा दिए है।  कान्हा की नगरी ...


Bringing smiles to every face hindi ad copy %281%29

ऑडियो