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रविवार, 25 फ़रवरी 2018

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मुमताज जहां देहलवी बन गईं मधुबाला

4 दिन पहले
मधुबाला का नाम हिंदी सिनेमा की उन अभिनेत्रियों में शामिल है, जो पूरी तरह सिनेमा के रंग में रंग गईं और अपना पूरा जीवन इसी के नाम कर दिया। उन्हें अभिनय के साथ-साथ अभुद्त सुंदरता के लिए भी जाना जाता है। उन्हें 'वीनस ऑफ इंडियन सिनेमा' और 'द ब्यूटी ऑफ ट्रेजेडी' जैसे नाम भी दिए गए।  मधुबाला का जन्म 14 फरवरी, 1933 को दिल्ली में हुआ था। इनके बचपन का नाम मुमताज जहां देहलवी था। इनके पिता का नाम अताउल्लाह और माता का नाम आयशा बेगम था। शुरुआती दिनों में इनके पिता पेशावर की एक तंबाकू फैक्ट्री में काम करते थे। वहां से नौकरी छोड़ उनके पिता दिल्ली और वहां से मुंबई चले आए, जहां मधुबाला का जन्म हुआ। वेलेंटाइन डे वाले दिन जन्मीं इस खूबसूरत अदाकारा के हर अंदाज में प्यार झलकता था...
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संघर्ष से ‘प्रीति’ ने दिलाया मुकाम

एक सप्ताह पहले
बिहार के सीतामढ़ी के बेलाम छपकौनी गांव की रहने वाली प्रीति सुमन का नाम अभिनय, गायन, और निर्देशन में अगर कोई जाना पहचाना नाम बन जाए, तो आपको आश्चर्य होगा। लेकिन आज प्रीति ने मुंबई से लेकर दिल्ली तक में विभिन्न क्षेत्रों में अपनी कला दक्षता का लोहा मनवाया है। उनका कहना है कि प्रतिभा से इन क्षेत्रों में एक मुकाम बनाने की जद्दोजहद तो करनी पड़ती है, परंतु अगर कलाकार अनवरत काम करता रहे और धैर्य रखे तो देर-सबेर उसे सफलता जरूर मिलेगी। लोकगायिका के रूप में खासकर मैथिली भाषा के गाए प्रीति के गीत खासे लोकप्रिय हुए हैं। वैसे तो प्रीति सोनी चैनल के 'महावीर हनुमान', जी टीवी पर 'अम्मा' सीरियल में अभिनय तथा डीडी बिहार पर ...
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किशोरी नेहा ने बुनी आकाशगंगा की कहानी

एक सप्ताह पहले
वह शून्य से जुड़कर समय के पार चली गई और परिणाम ‘कुछ और’ सामने आया। 15 साल की नेहा गुप्ता की लिखी पहली किताब में निकोल ग्रेस की कहानी है, जिसे उसके पिता जब उसका ग्रह विनाश के कगार पर होता है, तब उसे धरती पर भेजते हैं, जो उस ग्रह यानी ब्रिजन की एकमात्र जीवित सदस्य है, जो पड़ोसी आकाशगंगा एंड्रमेडा में एक ग्रह है। जैसा कि वह खुद को धरती पर रहने के अनुकूल ढालने की मशक्कत करती है और अपने स्कूल और ग्रह के लिए अपना योगदान देने की कोशिश करती है, यह एक बेहद होशियार लड़की की चार से 14 साल की यादगार तस्वीरों के साथ की कहानी है। निकोल के दोस्त अमांडा, सारा और आयुष उसे एक अनाधिकृत क्षेत्र की यात्रा करने में मदद करते हैं और ...
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साइकिल पर घूम रहा 'आधी आबादी' का हक

4 सप्ताह पहले
एक शख्स साइकिल पर सवार होकर महिलाओं को पुरुषों के समान अधिकार दिए जाने के प्रति जागरूकता फैलाने के मिशन पर निकला है। वह उस सोच को समझने और उसमें बदलाव की उम्मीद भरी यात्रा पर है, जो एक महिला को महज महिला होने की वजह से दोयम दर्जे की मानती है। कन्यादान और दहेज प्रथा के मुखर विरोधी यह शख्स हैं राकेश कुमार सिंह जो ‘राइडर राकेश’ के नाम से मशहूर हैं। खुद उनके शब्दों में कहें तो महिला सशक्तीकरण का सिर्फ ढोल पीटा जा रहा है, सच तो यह है कि बहुत से परिवारों में लड़कियों को पैदा ही नहीं होने दिया जा रहा। राकेश कहते हैं कि एसिड पीड़िताओं के साथ काम कर उनके दर्द और संघर्षो को करीब से समझने की घटना ने उन्हें भीतर तक झकझोर ...
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देश की पहली ट्रांसजेंडर जज

4 सप्ताह पहले
पश्चिम बंगाल की 30 वर्षीय जोइता मंडल की पहचान आज देश की पहली 'किन्नर' (ट्रांसजेंडर) न्यायाधीश के तौर पर है। जोइता का जीवन में हार न मानने का जज्बा दिखाता है कि वह अपने संघर्ष से सबक लेकर समाज को एक नई सीख दे रही हैं। वह वृद्धाश्रम के संचालन के साथ रेड लाइट इलाके में रह रहे परिवारों की जिंदगियां बदलने में लगी हैं। उनके इस सेवा और समर्पण भाव को देखते हुए पश्चिम बंगाल सरकार ने उनका सम्मान करते हुए उन्हें लोक अदालत का न्यायाधीश नामांकित किया है। वे देश की पहली 'किन्नर' न्यायाधीश हैं। मध्य प्रदेश की व्यावसायिक नगरी में ट्रेडेक्स द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने आईं जोइता किन्नर समाज तथा रेड लाइट इलाके में रह...
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राज कपूर आए सिमी ग्रेवाल के घर

5 सप्ताह पहले
सिमी ग्रेवाल उस दिन हैरान-परेशान हो गई, जब देखा कि महान फिल्मकार राज कपूर उनके घर तक चलकर आए। उन दिनों वे ‘मेरा नाम जोकर’ बनाने की तैयारी कर रहे थे। दुनिया जानती है कि राज जी की फिल्मों में बाकी जितनी खासियत हो, लेकिन वे संगीत और हीरोइनों के मामले में कोई समझौता नहीं करते थे। खासकर वे अपनी हीरोइनों को इस तरह तराशते थे कि  देखने वालों की आंखें चौंधिया जाए। सीन और संवाद के साथ उनकी ड्रेस का कांबिनेशन खुद करते थे। यह नर्गिस, वैजंतीमाला से लेकर मंदाकिनी और डिंपल कपाडिया तक देखा जा सकता है। इसके बीच में सिमी ग्रेवाल भी हैं। सिमी छोटी थीं, जब उनके दोस्त ‘आवारा हूं, गर्दिश में हूं, आसमान का तारा हूं....’ गा...
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चपल आंखों का इतिहास

5 सप्ताह पहले
श्रीदेवी की निजी जिंदगी के बारे में चाहे कितने किस्से-कहानियां हों, लेकिन यह भी सच है कि अस्सी के दशक के अंत में हिंदी सिनेमा में जब बदलाव की नई इबारत लिखी जाने लगी तो उनकी फिल्म ‘चांदनी’ ने उसमें अहम भूमिका निभाई। सत्तर के दशक में आतंक, हिंसा, ह्त्या, बलात्कार वाली फिल्मों का जो दौर शुरू हुआ, वह अस्सी के दशक पर भी काबिज होता गया। लेकिन इसी बीच ‘कयामत से कयामत तक’ और ‘चांदनी’ जैसी एक-दो फिल्में भी बनीं, जिसने अपनी सफलता से बता दिया कि नकलीपन ज्यादा दिनों तक टिका नहीं रह सकता है। इंडस्ट्री को प्रेम-कहानियों को इमोशनल अंदाज में पेश करना ही होगा। रोमांटिक फिल्मों के शहंशाह और कोमल स्पर्श से रोमां...
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251 गरीब लड़कियों का किया कन्यादान

6 सप्ताह पहले
सूरत के हीरा व्यापारी महेश सावणी ने 251 गरीब लड़कियों की शादी का जिम्मा उठाया। इनमें से 5 मुस्लिम और 1 ईसाई जोड़ा भी शामिल था। दो ऐसी लडकियां भी थीं जो एचआईवी की बीमारी से जूझ रही हैं। इन नए दंपतियों के पास गहने, घर का सामान या फर्नीचर में से एक विकल्प चुनने का मौका था। सूरत के मोटा वरच्छा इलाके में स्वामी चैतन्य विद्या संकुल में इस भव्य समारोह का आयोजन किया गया था। आज शादी करना मतलब लाखों रुपए के वारे न्यारे करना होता है। सुविधा संपन्न लोगों के लिए शादी में पैसे बहाना काफी आसान होता है, लेकिन गरीबों के लिए ये किसी मुसीबत से कम नहीं होता। इसीलिए देश के कई इलाकों में समाजसेवियों के द्वारा सामूहिक शादियां करवाई जाती हैं। हाल ही मे...
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'ग्रीन लेडी ऑफ बिहार'

6 सप्ताह पहले
अगर किसी के अंदर कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो कोई भी काम नामुमकिन नहीं है। यह केवल कहने-सुनने भर की बात नहीं, बल्कि ऐसा ही कुछ कर दिखाया है बिहार के नक्सल प्रभावित मुंगेर जिले के धरहरा प्रखंड के बंगलवा गांव की रहने वाली एक महिला जया ने। चौथी जमात तक पढ़ने वाली जया देवी आज अपने कामों की बदौलत न केवल दूसरों के लिए मिसाल बनी हैं, बल्कि लोग आज उनको पर्यावरण का पहरेदार तक मानते हैं। मुंगेर में उनकी पहचान आज ‘ग्रीन लेडी ऑफ बिहार’ की है। कम उम्र में शादी 34 वर्षीय जया देवी को बचपन से ही पढ़ाई का शौक था, लेकिन तब उनके गांव में ...
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इस्मत के कारण चमकी कल्पना

10 सप्ताह पहले
कुल 11 फिल्मों का सफर, लेकिन बेहद रंगीन, चमकीला और हां सुरीला भी। लगभग 45 साल पहले ठहर गया यह सफर। हम बात कर रहे  हैं कल्पना मोहन की।1962 में चीन से युद्ध ने भारत में हताशा और ग़ुस्से का माहौल बना दिया था, लेकिन उसी दौर में शंकर-जयकिशन के संगीत से सजी एक फिल्म 'प्रोफेसर' ने हंगामा मचा दिया। पचास साल बाद भी इस फिल्म के गीत ‘खुली पलक में झूठा गुस्सा बंद पलक में प्यार...’ भुलाया नहीं जा सका है। कल्पना का संबंध कश्मीर से था, वहीं उनका जन्म हुआ। उनके पिता अवनी मोहन स्वतंत्रता सेनानी थे। जवाहर लाल नेहरू के नजदीकी होने के साथ वो अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के सदस्य भी थे। कल्पना ने बचपन से ही शौक में कथक ...
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ऐसे चमका वर्मा मलिक का सितारा

10 सप्ताह पहले
हिंदी भाषी समाज में शादियों में दो फिल्मी गीत अनिवार्य रूप से बजते है। विदाई के समय मोहम्मद रफी का गाया गीत 'बाबुल की दुआएं लेती जा' और बारात के समय मोहम्मद रफी का ही गया गीत 'आज मेरे यार की शादी है'। पंजाबी फिल्मों में गीत लिखकर करियर शुरू करने वाला यह गीतकार एक समय में वक्त की धुंध में खो गया, क्योंकि हिंदी फिल्मों में आकाश पाने की जद्दोजहद करते करते वर्मा मलिक हताश हो चुके थे। अकसर अचानक एक घटना जीवन की धारा बदल देती है और वर्मा मलिक के साथ भी ऐसा ही हुआ। दरअसल, फिल्म 'दिल और मोहब्बत' के लिए ओपी नैयर के संगीत निर्देशन में लिखा गीत 'आंखों की तलाशी दे दे मेरे दिल की हो गई चोरी' लोकप्रिय भी...
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माला सिन्हा का डर

11 सप्ताह पहले
नेपाली मूल की हीरोइन माला सिन्हा हमेशा डर-डर कर रहती थीं। यह डर सिनेमा को अलविदा कहने और अपनी बेटी प्रतिभा के भविष्य संवारने तक बना रहा। यह डर बचपन से ही था या बाद में किसी परिस्थिति के कारण आया, इसका कहीं कोई संकेत उपलब्ध नहीं है। लेकिन उनके नजदीकी लोग कहा करते थे कि माला सिन्हा जब बड़ी अभिनेत्री बन गई थीं, तब भी अपने पिता से डर कर रहा करती थीं। स्कूल-कॉलेज के दिनों में वह बाहर बिंदास होकर रहतीं, लेकिन घर आते ही एक घरेलू लड़की बन जाती थीं। पिता का कहा उनके लिए पत्थर की लकीर की तरह था। उनकी हर बात वे मानती थीं। बचपन में उन्हें फिल्में देखने का बहुत शौक था। फिल्में बहुत देखती थीं और परदे पर देखे हुए डांस पर घर आते ही पिता की अनुपस...


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