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बुधवार, 19 दिसंबर 2018

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ऑस्कर वाइल्ड - झूठी नैतिकता की धज्जियां उड़ाने वाला लेखक

2 सप्ताह पहले
कई बार लोग जब आपके चरित्र के बारे में टिप्पणी करते तो कह जाते हैं कि तुम लॉर्ड हेनरी की तरह हो। हमेशा गलत ही बोलते हो, पर कभी गलत करते नहीं। दरअसल, हेनरी ऑस्कर वाइल्ड की किताब का एक पात्र है। खासतौर पर एक युवा होते दिमाग के लिए ऑस्कर वाइल्ड से अच्छी खुराक नहीं हो सकती। हेनरी तो ऑस्कर वाइल्ड के एकमात्र उपन्यास ‘द पिक्चर ऑफ डोरियन ग्रे’ का एक पात्र है। ऑस्कर ने कहा था कि दुनिया उनको हेनरी समझती है, वो खुद को बेसिल की तरह देखते हैं पर वो खुद डोरियन ग्रे बनना चाहते हैं। पर मैं इनमें से कोई नहीं था। मैं हमेशा ऑस्कर वाइल्ड बनना चाहता था जो समाज की किसी भी चीज पर सवाल कर सकता है।
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एजरा पाउंड - कविता का नया तर्क और विमर्श

4 सप्ताह पहले
उत्तर आधुनिकता का विचार और इससे जुड़ी शब्दावली तो 20वीं सदी के आखिरी दशक में प्रचलन में आई। इसी दौर में उत्तर आधुनिक विमर्श ने भी वैश्विक जोर पकड़ा। पर इससे पहले जिन साहित्यकारों की आलोचना और उनके विचारों को लेकर आधुनिकता से आगे की शब्दावली इस्तेमाल की गई, उनमें प्रसिद्ध कवि एजरा पाउंड का नाम अहम है। एजरा पाउंड प्रवासी अमेरिकी कवि और आलोचक थे। उनके विचार और साहित्य को लेकर जहां एक तरफ काफी विवाद उभरा, वहीं उन्होंने दुनिया के सामने ऐसे क्रांतिकारी विचार रखे, जिन्हें अति आधुनिक माना गया। अंग्रेजी साहित्य परंपरा और इतिहास में एजरा एक नए वैचारिक उभार के कवि थे। उनकी इसी खासियत ने आज भी साहित्य प्रेमियों के साथ आलोचकों की दुनिया में ...
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वर्जीनिया वुल्फ - नारीवादी संघर्ष की अक्षर धुरी

5 सप्ताह पहले
वर्जीनिया वुल्फ अपने बेहतरीन उपन्यासों और निबंधों के लिए जानी जाती हैं। उन्हें औरतों के लिए साहित्य की दुनिया में जगह बनाने के लिए जाना जाता है। जहां उनकी रचनाएं अब भी प्रासंगिक बनी हुई हैं, वहीं उनके कई उपन्यासों पर बेहतरीन फिल्में भी बन चुकी हैं। वर्जीनिया वुल्फ का जन्म 25 जनवरी, 1882 को लंदन के केन्सिंगटन में हुआ था। उनका नाम पूरा एडेलीन वर्जीनिया स्टेफन है। उनके माता-पिता प्रतिष्ठित लोग थे। उनकी परवरिश भी साहित्यिक माहौल में हुई थी। वह काफी कम उम्र से ही लिखने लगी थीं। 1895 में उनकी मां का निधन हुआ, जिसके बाद वह मानसिक रूप से टूट गईं। 1904 में उनके पिता का निधन हो गया। यह भी वह बर्दाश्त नहीं कर पाईं। लेकिन इसी सा...
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डीएम ने बेटे को आंगनबाड़ी भेजा

5 सप्ताह पहले
प्रशासन का कार्य सेवा का तो है ही, पर उससे भी ज्यादा यह कार्य सेवा के दायित्व को एक अनुशासित पद्धति में बदलने का है। उसी अनुशासन को बहाल करने की मिसाल कायम की है एक आईएएस दंपति ने। अक्सर यह बात सामने आती रहती है कि अगर सरकारी अध्यापक और अधिकारी अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में भेजने लग जाएं तो इन स्कूलों की हालत अपने आप सुधर जाएगी। कुछ इसी सोच के साथ इस आईएएस दंपति ने अपने बच्चे को किसी महंगे प्ले ग्रुप स्कूल में भेजने के बजाय सरकार द्वारा संचालित आंगनबाड़ी में पढ़ने भेजा। स्वाभाविक है कि अब आंगनबाड़ी केंद्र भी सजग रहेगा और वहां किसी भी बच्चे को कोई परेशानी नहीं हो पाएगी।   हमारे देश में सरकारी स्कूलों की हालत किसी ...
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करुणा और संघर्ष की अक्षर दुनिया

7 सप्ताह पहले
बीसवीं सदी को भले महिला लेखन की सदी न कहा जाए, पर इन सौ सालों में महिला संवेदना की दुनिया ने सबसे प्रगतिशील व क्रांतिकारी रूप से अपने को प्रस्तुत किया। खासतौर पर सदी के उत्तरार्ध आते-आते कई ऐसी महिला साहित्यकारों ने अपनी तरफ दुनिया का ध्यान खींचा, जो अपने परिवेश और देशकाल को लेकर सर्वथा नए विचारसूत्र के साथ साहित्य सृजन के क्षेत्र में उतरीं।  ऐसी ही महान आधुनिक महिला साहित्यकारों में एक बड़ा नाम है नादीन गोर्डिमर। करुणा और सृजन साहित्य के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार प्राप्त नादीन की पहचान एक कथाकार के तौर पर है, जिसने स्त्री सं...
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चीन में योग सिखा रहा है यूपी के बुंदेलखंड का मौड़ा

7 सप्ताह पहले
'करत करत अभ्यास के जड़ मति होत सुजान, रसिरि आवत जात है, सिल पर होत निशान' रहीम ने भले ही यह दोहा दशकों पहले लिखा हो, मगर बुंदेलखंड के 'मौड़ा' (लड़का) सोहन सिंह पर एकदम सटीक बैठता है, क्योंकि उन्होंने पढ़ाई तो की है कंप्यूटर की, मगर अभ्यास ने उन्हें चीन में 'योगगुरु' के तौर पर पहचान दिलाई है।  सोहन सिंह मूलरूप से बुंदेलखंड के ललितपुर जिले के विरधा विकास खंड के बरखेड़ा गांव के रहने वाले हैं, किसी दौर में उनके लिए दो वक्त की रोटी का इंतजाम आसान नहीं था। उन्होंने कंप्यूटर की पढ़ाई की और इंदौर फिर थाईलैंड में जाकर नौकरी की। उनके जीवन में योग रचा-बसा था और वे नया कुछ करना चाहते थे । सोहन सिंह...
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विलियम वर्ड्सवर्थ - प्रकृति और सौंदर्य का क्लासिक कवि

9 सप्ताह पहले
विलियम शेक्सपीयर की ख्याति के कारण अंग्रेजी साहित्य में रहस्य और शोक का प्रभाव काफी बढ़ा। कई आलोचकों की यह भी राय है कि विश्व साहित्य में अगर ट्रेजडी की बात आएगी, तो बाजी अंग्रेजी साहित्य मार ले जाएगा और इसका बहुत बड़ा श्रेय शेक्सपीयर को जाएगा। पर इस छवि को जिन साहित्यकारों ने अपने श्रेष्ठ लेखन के बल पर बदला, उनमें विलियम वर्ड्सवर्थ का नाम प्रमुखता से लिया जाएगा। वर्ड्सवर्थ मूलत: कवि थे। उन्होंने अंग्रेजी साहित्य को रोमांस की वह उड़ान दी, जिसमें बिंब से लेकर भाषा तक को लेकर एक नया सम्मोहन था। यही कारण है कि आज भी उन्हें अंग्रेजी साहित्य में रोमांस का सबसे बड़ा कवि माना जाता है। वे रोमांस को एक क्लासिक ऊंचाई देने में सफल रहे। उनक...
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छोटी उम्र से गरीब बच्चों को पढ़ा रहे बाबर

9 सप्ताह पहले
पश्चिम बंगाल के एक छोटे से शहर में स्कूल जाते समय अपनी ही उम्र के बच्चों को कूड़ा-करकट बीनते देख नौ वर्षीय बाबर अली के मन में उनके लिए कुछ करने का विचार आया।  बाबर इस बात से दुखी था कि उसके ये मित्र गरीबी के कारण स्कूल नहीं जाते थे और पढ़ाई से महरूम थे। इसीलिए उसने अपनी पढ़ाई का कुछ हिस्सा उनके साथ साझा करने का फैसला लिया। मतलब, बाबर अली ने खुद उन गरीब बच्चों को पढ़ाने का बीड़ा उठाया।  कोलकाता से 200 किलोमीटर दूर मुर्शिदाबाद जिले के बेलडांगा शहर के एक सरकारी स्कूल में पांचवीं कक्षा का छात्र बाबर अली ने अपने घर के पीछे के आंगन में गरीब बच्चों को पढ़ाना शुरू किया। उस समय उनके बाल मन की एक ख्वाहिश थी कि भारत के हर बच...
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भारत की पहली लिपिबद्ध यात्रा

10 सप्ताह पहले
ईसा से बहुत पहले ही भारत की सभ्यता, संस्कृति, कला, धर्म, नीति आदि की ख्याति विदेशों में फैल चुकी थी। विभिन्न देशों से शिक्षार्थी, शोधार्थी ज्ञान प्राप्त करने की इच्छा से दुर्गम यात्राएं करके भारत आते थे। इसी क्रम में चौथी शताब्दी में चीन से फाहियान नाम का एक बौद्ध भिक्षु भारत आया था। फाहियान का हमारे लिए अत्यधिक महत्व इसलिए है क्योंकि वह पहला विदेशी यात्री था, जिसने अपनी भारत यात्रा का वर्णन लिपिबद्ध किया। चीन में बौद्ध धर्म चीनी साहित्य के अनुसार ईसा से भी 67 वर्ष पूर्व चीन सम्राट मिंगटो ने एक स्वप्न देखा था कि उसके महल के ऊपर कोई...
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जिसने बिखरे चीन को जोड़ा

15 सप्ताह पहले
दुनिया की सबसे पुरानी सभ्यताओं में से एक का दम भरने वाले चीन ने दुनिया को कई महान दार्शनिक भी दिए हैं। चीन के शानदोंग प्रदेश में ईसा मसीह के जन्म से करीब 550 वर्ष पहले एक बच्चा पैदा हुआ, जो आगे चलकर कन्फ्यूशियस के नाम से जाना गया और महान दार्शनिक बना। आज दुनिया उनकी गिनती सबसे महान विचारकों में करती है। कन्फ्यूशियस सिर्फ दार्शनिक ही नहीं, बल्कि एक राजनीतिज्ञ और महान शिक्षक भी थे। उनका उद्भव चीन में स्प्रिंग ऑफ ऑटम पीरियड, जिसे झगड़ते राज्यों का काल कहा जाता है, के वक्त हुआ। अपने कार्यों और सिद्धांतों की वजह से एक अलग पहचान रखने वाले कन्फ्यूशियस के विचार आज भी लोगों की जिंदगी को प्रभावित कर रहे हैं। उनके बौद्धिक, सामाजिक और राजनी...
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ट्री ग्रैबर के जरिए महिला सशक्तीकरण

15 सप्ताह पहले
नारियल और केरल की पहचान एक-दूसरे से जुड़ी है। आज भी भारत में सबसे अच्छा नारियल केरल के तटीय इलाकों का ही माना जाता है। केरल के साथ पूरे दक्षिण भारतीय खानपान में नारियल का विशेष स्थान हैं। केरल सहित दूसरे दक्षिण भारतीय तटीय राज्यों में आप किसी घर में जाएं या रेस्त्रां में, आपको हर जगह नारियल के बने कई व्यंजन मिलेंगे। यहां के लोग खाने के अलावा नारियल का केश तेल के तौर पर भी इस्तेमाल पारंपरिक तरीके से करते हैं। पूजा-पाठ में तो खैर नारियल का इस्तेमाल केरलवासी तो क्या पूरे देश के लोग पारंपरिक तौर पर करते रहे हैं।  नारियल तोड़ने का पारंपरिक तरीका
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नोबेल महिला वैज्ञानिक का संघर्ष

16 सप्ताह पहले
मेरी क्यूरी पोलिश मूल की एक विश्व विख्यात वैज्ञानिक हैं। उन्होंने बहुत कठिन हालात से गुजरकर अपना यह मुकाम हासिल किया है। रेडियोधर्मी तत्वों की खोज में उनका अमूल्य योगदान रहा है। मेरी ने अपना सारा जीवन इन खतरनाक तत्वों पर अनुसंधान करने में बिताया। दुर्भाग्य से इन्हीं तत्वों से निकली किरणों ने उनकी जान भी ली। अपनी अनुसंधान सामग्री से विकिरण निकलने के कारण उन्हें अप्लास्टिक एनीमिया हो गया और उनकी मौत हो गई। तब दुनिया रेडिएशन के खतरे से हम अनजान थी।  अभावग्रस्त बचपन मेरी क्यूरी का जन्म 7 नवंबर, 1867 में पोलैंड के वारसा शहर में हुआ...


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