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बुधवार, 26 सितंबर 2018

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जिसने बिखरे चीन को जोड़ा

3 सप्ताह पहले
दुनिया की सबसे पुरानी सभ्यताओं में से एक का दम भरने वाले चीन ने दुनिया को कई महान दार्शनिक भी दिए हैं। चीन के शानदोंग प्रदेश में ईसा मसीह के जन्म से करीब 550 वर्ष पहले एक बच्चा पैदा हुआ, जो आगे चलकर कन्फ्यूशियस के नाम से जाना गया और महान दार्शनिक बना। आज दुनिया उनकी गिनती सबसे महान विचारकों में करती है। कन्फ्यूशियस सिर्फ दार्शनिक ही नहीं, बल्कि एक राजनीतिज्ञ और महान शिक्षक भी थे। उनका उद्भव चीन में स्प्रिंग ऑफ ऑटम पीरियड, जिसे झगड़ते राज्यों का काल कहा जाता है, के वक्त हुआ। अपने कार्यों और सिद्धांतों की वजह से एक अलग पहचान रखने वाले कन्फ्यूशियस के विचार आज भी लोगों की जिंदगी को प्रभावित कर रहे हैं। उनके बौद्धिक, सामाजिक और राजनी...
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ट्री ग्रैबर के जरिए महिला सशक्तीकरण

3 सप्ताह पहले
नारियल और केरल की पहचान एक-दूसरे से जुड़ी है। आज भी भारत में सबसे अच्छा नारियल केरल के तटीय इलाकों का ही माना जाता है। केरल के साथ पूरे दक्षिण भारतीय खानपान में नारियल का विशेष स्थान हैं। केरल सहित दूसरे दक्षिण भारतीय तटीय राज्यों में आप किसी घर में जाएं या रेस्त्रां में, आपको हर जगह नारियल के बने कई व्यंजन मिलेंगे। यहां के लोग खाने के अलावा नारियल का केश तेल के तौर पर भी इस्तेमाल पारंपरिक तरीके से करते हैं। पूजा-पाठ में तो खैर नारियल का इस्तेमाल केरलवासी तो क्या पूरे देश के लोग पारंपरिक तौर पर करते रहे हैं।  नारियल तोड़ने का पारंपरिक तरीका
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नोबेल महिला वैज्ञानिक का संघर्ष

4 सप्ताह पहले
मेरी क्यूरी पोलिश मूल की एक विश्व विख्यात वैज्ञानिक हैं। उन्होंने बहुत कठिन हालात से गुजरकर अपना यह मुकाम हासिल किया है। रेडियोधर्मी तत्वों की खोज में उनका अमूल्य योगदान रहा है। मेरी ने अपना सारा जीवन इन खतरनाक तत्वों पर अनुसंधान करने में बिताया। दुर्भाग्य से इन्हीं तत्वों से निकली किरणों ने उनकी जान भी ली। अपनी अनुसंधान सामग्री से विकिरण निकलने के कारण उन्हें अप्लास्टिक एनीमिया हो गया और उनकी मौत हो गई। तब दुनिया रेडिएशन के खतरे से हम अनजान थी।  अभावग्रस्त बचपन मेरी क्यूरी का जन्म 7 नवंबर, 1867 में पोलैंड के वारसा शहर में हुआ...
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अशक्तों की शक्ति

6 सप्ताह पहले
मालविका अय्यर जब महज 13 साल की थीं, तभी 2002 में अचानक हथगोला फटने से उसकी बाहें उड़ गईं। उस समय वह अपने माता-पिता के साथ राजस्थान के बीकानेर में रहती थीं। इस घटना में उनके पैरों में भी पक्षाघात हो गया था। मगर, जिस घटना में उनकी मौत भी हो सकती थी, उसी घटना से जिंदगी जीने का उनका नजरिया बदल गया। हालांकि उस सदमे से उबरने में उन्हें कई साल लग गए, लेकिन उन्होंने न सिर्फ अपनी जिंदगी को दोबारा वापस पटरी पर लौटाया, बल्कि वह अन्य अशक्तों की जिंदगी में बदलाव लाने में जुट गईं। चेन्नई की इस 29 वर्षीय सामाजिक कार्यकर्ता ने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति से अपनी विकलांगता के सदमे पर विजय पा ली। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने इसी साल मार्च में उन्हें...
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लेखकों की रोल मॉडल

6 सप्ताह पहले
लेखन में नए रचनात्मक प्रयोग आपको एक उद्यमी की तरह सफल ही नहीं बल्कि मालामाल भी कर सकते हैं। हमारे दौर में इसकी सबसे बड़ी उदाहरण हैं ब्रिटिश लेखिका जेके रोलिंग। ‘हैरी पॉटर’ सीरीज की लेखिका रोलिंग को वर्ष 2012 में ब्रिटेन की सबसे प्रभावशाली व्यक्तित्व घोषित किया गया था। उनकी सफलता की कहानी किसी परीकथा सरीखी लगती है। जब उनके दिमाग में हैरी पॉटर का विचार आया तब वह जिंदगी से बहुत ही हताश थीं और हाल ही में उनका तलाक हुआ था। उनका बैंक अकाउंट खाली हो चुका था। वर्ष 1997 में पहली हैरी पॉटर किताब के लिए उन्हें 2250 अमेरिकन डॉलर मिले थे, लेकिन इस सीरीज की अगली छह किताबों के लिए उन्हें एक बिलियन अमेरिकी डॉलर की संपत्ति मिली। वह अ...
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रंग और रेखा का जादू

7 सप्ताह पहले
लिओनार्दो दा विंची कला से आगे प्रबुद्ध जगत का एक ऐसा नाम है, जिसको लेकर आकर्षण और जिज्ञासा आज भी लोगों के मन में पहले की तरह है। 15वीं सदी का यह महान चित्रकार एक साथ कई विधाओं में महारत रखता था। विंची मूर्तिकार, वास्तुशिल्पी और संगीतज्ञ तो थे ही, कुशल यांत्रिक, अभियंता और वैज्ञानिक भी थे। उनकी सबसे मशहूर पेंटिंग ‘मोनालिसा’ तो मानो कला जगत के लिए पहला अध्याय ही है। इसी तरह उनके बनाए चित्र ‘लास्ट सपर’ को कैसे भूला जा सकता है, जिस पर आज भी कई वैज्ञानिक और कलाकार शोध कर रहे हैं,  इस पर कई फिल्में भी बनी है। ‘आविष्कार...
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समानता के लिए लोकतंत्र का मंत्र

8 सप्ताह पहले
अमेरिका को ‘गृह युद्ध’ के बड़े संकट  से उबारने और दासता खत्म करने वाले अब्राहम लिंकन का जीवन संघर्ष और सफलता का एक ऐसा आख्यान है, जिससे दुनिया आज भी प्रेरणा लेती है। एक गरीब परिवार में जन्म लेने वाले लिंकन कैसे अमेरिका के राष्ट्रपति के पद तक पहुंच गए, यह कहानी बेहद रोचक है। दिलचस्प है कि राष्ट्रपति बनने से पूर्व वे दो बार सीनेट के चुनाव में असफल भी हुए थे। पर लिंकन ने कभी हार नहीं मानी। उन्हें गिरकर संभलना आता था। लिंकन कहते थे, ‘जब मैं कुछ अच्छा करता हूं तो अच्छा अनुभव करता हूं और जब बुरा करता हूं तो बुरा अनुभव करता हूं। यही मेरा मजहब है।’ ‘थैंक्स गिविंग डे’ को राष्ट्रीय पर्व के रूप में ...
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सीमोन द बोउवार - स्त्री संघर्ष का घोषणापत्र

9 सप्ताह पहले
19वीं शती के उत्तरार्ध आते-आते दुनिया में विचार से लेकर शासन तंत्र तक बहुत कुछ बदलने लगे। यह बदलाव इसीलिए भी अहम था, क्योंकि इससे पहले दुनिया जहां एक तरफ दो-दो विश्वयुद्धों की विभिषिका झेल चुकी थी, वहीं साम्राज्यवादी दौर की दासता ने जिस तरह दुनिया भर में मानवीय अस्मिता के साथ खिलवाड़ देखा, उसका प्रतिख्यान भी जरूरी था। राष्ट्र के साथ व्यक्ति और विचार की स्वाधीनता के इस दौर में कई ऐसे कार्य हुए जिससे विमर्श के कई सूत्र विकसित हुए। इस लिहाज से एक बड़ा नाम है महान विचारक और लेखिका सीमोन द बोउवार का।  ‘द सेकेंड सेक्स’ स...
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जीवट संघर्ष का शिलालेख

10 सप्ताह पहले
महात्मा गांधी ने रंगभेद के खिलाफ अगर अपना संघर्ष दक्षिण अफ्रीका में शुरू किया, तो नेल्सन मंडेला ने उसी जमीन पर गांधी की विरासत को आगे बढ़ाया। भारत का जितना गहरा रिश्ता दक्षिण अफ्रीका से है, उतना ही नेल्सन मंडेला से भी। भारत का सबसे बड़ा सम्मान ‘भारत रत्न’ पाने वाले नेल्सन मंडेला भारतीय उप महाद्वीप के बाहर के पहले शख्स बने। उन्हें 1990 में यह सम्मान दिया गया। हालांकि इससे पहले पाकिस्तान के खान अब्दुल गफ्फार खान को भी यह सम्मान दिया जा चुका था, लेकिन सरहदी गांधी का जन्म अविभाजित भारत में हुआ था। मदर टेरेसा को भी इस सम्मान से नवाजा गया, लेकिन मदर टेरेसा के पास भी भारत की नागरिकता थी। रंगभेद के खिलाफ आवाज उठाने वा...
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अल्बर्ट आइंस्टीन - विज्ञान का मान, शांति का ज्ञान

11 सप्ताह पहले
बड़ी खोज के साथ बड़े वैज्ञानिक के तौर पर तो दुनिया में कई महान प्रतिभाओं को ऐतिहासिक प्रसिद्धि हासिल है, पर अल्बर्ट आइंस्टीन की प्रसिद्धि और सफलता इससे भी आगे तक जाती है। उन्होंने जहां अपने जीवन में एक असामान्य बचपन से असाधारण वैज्ञानिक प्रतिभा तक की यात्रा पूरी की, वहीं उन्होंने विज्ञान के विध्वंसकारी रूप को लेकर बड़ी चिंता भी व्यक्त की। उनकी इस चिंता ने ही उन्हें महात्मा गांधी और उनके अहिंसा के सिद्धांत का मुरीद बना दिया था।  गांधीजी के साथ तो आइंस्टीन की भेंट नहीं हो सकी, पर 14 जुलाई 1930 को बर्लिन में उनकी मुलाकात भारत के महान साहित्यकार गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर से अवश्य हुई थी। पश्चिम की तार्किक विचारधारा क...
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रीवा कक्कड़ - ‘डॉग इज माइ लाइफ’

12 सप्ताह पहले
रीवा कक्कड़ सुलभ इंटरनेशनल सोशल सर्विस ऑर्गनाइजेशन में हमारी सहकर्मी हैं। फेसबुक पर भी हम एक-दूसरे से परिचित हैं। फेसबुक पर रीवा का स्टेटस यह बताता है कि रीवा पेट लवर्स हैं। खासकर कुत्तों से उन्हें बेहद लगाव है। आत्मीयता के स्तर तक। उनकी शायद ही कोई तस्वीर डॉग के बिना हो। उनके मोबाइल के फोटो गैलरी में एक फोल्डर ‘माइ लाइफ’ के नाम से है, जिसमें रीवा और उनकी गली के कुत्तों के अलावा और कोई नहीं है। इस फोल्डर में करीब एक हजार फोटो हैं, जिसे रीवा चाह कर भी डिलीट नहीं कर पातीं। दिल्ली के तिलक नगर बस स्टैंड से संतगढ़ तक जहां रीवा रहती हैं, वहां की गलियों और सड़कों तक के सभी कुत्ते शाम 7 बजे से मानो रीवा का इंतजार करते हैं और...
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मैक्सिम गोर्की - ‘प्रजा का सच्चा पुत्र’

12 सप्ताह पहले
एक लेखक का कद सिर्फ उसके लेखन की लोकप्रियता से तय नहीं होता, बल्कि समय प्रवाह के बीच वह विचार और मानवता के बीच जिस सेतु का निर्माण करता है, वह उसके लेखन और चिंतन की सशक्तता और ऐतिहासिकता की सबसे बड़ी कसौटी है। इस दृष्टि से मौक्सिम गोर्की दुनिया के उन कुछ गिने-चुने साहित्यकारों में शामिल हैं, जिन्होंने साहित्य को रचना के साथ हस्तक्षेप और कल्पना के साथ वैचारिक चिंतन की मिसाल बनाया। गोर्की को ‘समाजवादी यथार्थवाद’ के प्रवर्तक के रूप में जाना जाता है। लियो टॉल्सटाय ने उन्हें ‘प्रजा का सच्चा पुत्र’ कहकर संबोधित किया है।  बदल...


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