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रविवार, 16 दिसंबर 2018

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कुंभ के लिए 800 विशेष ट्रेनें

एक सप्ताह पहले
कुंभ स्नान करने वाले श्रद्धालुओं के लिए अच्छी खबर यह है कि इस मेले के लिए युद्धस्तर पर तैयारियां कर रहा रेलवे  800 कुंभ स्पेशल ट्रेन चलाएगा। अधिकारियों ने अनुसार मेला के दौरान उत्तर मध्य रेलवे द्वारा 622, पूर्वोत्तर रेलवे द्वारा 110 व उत्तर रेलवे द्वारा 68 ट्रेनों को चलाने की तैयारी है। मेले के लिए इलाहाबाद, प्रयाग घाट, इलाहाबाद सिटी, नैनी, इलाहाबाद छिवकी और सुबेदारगंज स्टेशनों पर विशेष तैयारियां की जा रही हैं।  मेले के लिए ये ट्रेनें तीन महीनों तक चलाई जाएंगी, इन विशेष गाड़ियों पर मेले के थीम स्लोगन के साथ तस्वीरें भी लगाई जाएंगी। साथ ही ट्रेन के कोच पर 'कुंभ चलो' नारे के साथ नागा साधुओं की तस्वीरें भी ...
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जब जेआरडी टाटा ने साफ किया टॉयलेट

एक सप्ताह पहले
जेआरडी टाटा भारत के सबसे बड़े बिजनेस घरानों में से एक टाटा ग्रुप के पूर्व अध्यक्ष थे। उन्होंने भारत को पहली एयरलाइंस सुविधा मुहैया कराते हुए साल 1932 में टाटा एयरलाइंस की शुरुआत की जो आगे चलकर एयर इंडिया में तब्दील हो गई। लेकिन इतने बड़े उद्यमी होने के बाद भी जन-कल्याण के आम छोटे-छोटे कामों को करने में उन्होंने खूब रूचि दिखाई और सबके लिए प्रेरणा बने। उन्होंने एक बार एयरलाइन के गंदे काउंटर को अपने हाथों से साफ किया था, इतना ही नहीं उन्होंने एक और मौके पर एयरक्राफ्ट के गंदे टॉयलेट तक को खुद ही साफ कर दिया था।     इस बात की जानकारी शशांक शाह की लिखी किताब ‘द टाटा ग्रुप: फ्राम टॉर्चबेयरर्स टू ट्रैलब्लेजर्स&rsquo...
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कॉन्टैक्ट लेंस से 20 हजार किलो कूड़ा

9 सप्ताह पहले
भागदौड़ की इस दुनिया में हर चीज अब डिस्पोजेबल बनने लगी है यानी एक-दो बार इस्तेमाल किया और फिर फेंक दिया, फिर चाहे चाय कॉफी के कप हों या फिर सफाई के लिए इस्तेमाल होने वाले दस्ताने। यही हाल कॉन्टैक्ट लेंस का भी है। एक ही लेंस को बार- बार इस्तेमाल करने की जगह अब लोग डिस्पोजेबल लेंस लगाना अमेरिका में लोग बेहतर समझते हैं। जाहिर है कि इनका रखरखाव नहीं करना पड़ता है। इनकी सफाई पर ध्यान नहीं देना पड़ता है। अगर लगाते हुए ये हाथों से फिसल जाएं, तो ढूंढने की भी जरूरत नहीं। क्योंकि ये पानी में घुल जाते हैं, इसीलिए वॉशबेसिन में बस पानी चला देना ही काफी होता है। एक बार इस्तेमाल करने के बाद जब इन्हें बदलने की बारी आती है, तब भी लोग यही करते हैं। ...
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दुनिया का सबसे बड़ा समुद्री सफाई अभियान शुरू

9 सप्ताह पहले
समुद्र में प्लास्टिक और प्रदूषण के खतरे को कम करने के लिए दुनियाभर में कई प्रयोग हो रहे हैं। समंदर को साफ करने और प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए विश्व का सबसे बड़ा 'ओशन क्लीनअप' अभियान लॉन्च किया गया है। इस अभियान की शुरुआत करनेवाले हैं मूल रूप से डच बोयान स्लाट। संस्था की शुरुआत उन्होंने 18 साल की उम्र में की थी। बोयान बताते हैं कि 8 साल पहले वह जब 16 साल के थे तब उन्होंने से ग्रीस की यात्रा की थी। उन्होंने कहा, ग्रीस जाने के रास्ते में मुझे मछलियों से ज्यादा तो प्लास्टिक पानी में नजर आ रहा था और यह मेरे लिए बहुत दुखद था। पिछले 8 साल से मैं इस पर काम कर रहा हूं कि समुद्र से अधिक से अधिक प्लास्टिक कैसे निकाला जा सके। 
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नंबर है स्टेबल तो उतर सकता है चश्मा

9 सप्ताह पहले
चश्मा पहनते-पहनते आप उब गए हों, तो आपके लिए यह एक अच्छी खबर है। सेंटर फॉर साइट के चीफ डॉक्टर महिपाल सचदेव का कहना है लेजिक और स्माइल ऐसी तकनीक है जो चश्मे उतारने में काफी कारगर साबित हो रही है। यह तकनीक इस्तेमाल तभी होती है जब मरीज के आंखों का नंबर स्टेबल यानी स्थिर हो जाता है और उसकी उम्र कम से कम 20 साल हो। डॉक्टर कुछ टेस्ट के बाद इस तकनीक का इस्तेमाल करने की अनुमति देते हैं।  डॉक्टर सचदेव ने कहा कि लेजिक 25 साल पुरानी तकनीक है, जो पूरे विश्व में इस्तेमाल हो रही है। 98 पर्सेंट मरीज इससे खुश होते हैं। यह दो प्रकार का होता है। एक ब्लेड वाला जिस पर 45 हजार का खर्च होता है और दूसरा ब्लेड फ्री वाला जिस पर 70 से 80 हजार ...
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गांधी जी का अस्थि कलश

11 सप्ताह पहले
हिंदू धर्म के अनुसार किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसके मृत शरीर को जलाने का रिवाज है। दाह-संस्कार के बाद उसकी बची हुई अस्थियां चिता स्थान से लेकर नदियों में विसर्जित कर दी जाती हैं। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की अस्थियां और राख भी कई कलशों में भरकर देश-दुनिया की कई नदियों में विसर्जित की गई थीं। साथ ही देश-विदेश में रहने वाले उनके कई अनुयायियों को भी ये कलश भेजे गए थे ताकि वे अपने हाथों से इसे नदियों में विसर्जित कर सकें।  भारत के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी मथुरा के राजकीय संग्रहालय में महात्मा गांधी का एक अस्थि कलश आज भी सुरक्षित रखा हुआ है। महात्मा गांधी की अस्थियां मथुरा में यमुना नदी के विश्राम घ...
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बापू के पत्र की नीलामी

11 सप्ताह पहले
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी द्वारा लिखा गया एक पत्र हाल ही में 6358 डॉलर में नीलाम हुआ है। गुजराती भाषा में लिखे गए इस पत्र पर कोई तारीख नहीं है। अमेरिका के आरआर ऑक्शन के अनुसार गांधी ने यह पत्र यशवंत प्रसाद नाम के व्यक्ति को संबोधित करते हुए लिखा है। महात्मा गांधी ने पत्र में लिखा है, ‘हमें मिलों से जो उम्मीद थी, वही हुआ है। यद्दपि आप जो कहते हैं वह सही है, सब कुछ करघे पर निर्भर करता है।’ गांधी ने इस पत्र में चरखे के महत्व पर बहुत जोर दिया है। गौरतलब है कि आजादी की लड़ाई में गांधी ने चरखे को आर्थिक आजादी के प्रतीक के तौर पर अपनाया था। भारत की आजादी के लिए लड़े गए स्वतंत्रता संग्राम में गांधी विदेशी वस्तुओं...
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स्मार्ट गांव में अशक्तों का सशक्तीकरण

14 सप्ताह पहले
गांव में अशक्तों को अपने पैरों पर खड़े होने लायक बनाने के मकसद से न सिर्फ उनकी शारीरिक विकृतियों को दूर करने के लिए उनकी सर्जरी के साथ-साथ अन्य उपचार नि:शुल्क किया जा रहा है, बल्कि उन्हें रोजगार के साधन भी मुहैया करवाए जा रहे हैं। इसके लिए उन्हें कंप्यूटर और मोबाइल की मरम्मत से लेकर सिलाई-कटाई का भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है।  गांव में स्थित नारायण सेवा संस्थान के परिसर में अत्याधुनिक उपकरण से सुसज्जित अस्पताल, अनाथालय, स्मार्ट स्कूल, कौशल प्रशिक्षण संस्थान और पुनर्वास, भौतिक चिकित्सा व प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र भी हैं। इस गांव को स्मार्ट गांव का खिताब मिला है, क्योंकि ग्रामवासियों के लिए इस परिसर के भीतर एटीएम मशीन, इं...
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आठ वर्ष पहले बिहार पहुंचा अखबार

14 सप्ताह पहले
बिहार के सीतामढ़ी और शिवहर से प्रकाशित ‘खबर लहरिया’ इन दिनों न केवल महिलाओं में, बल्कि पुरुषों में भी काफी लोकप्रिय है। यहां भी इसका न केवल संपादकीय विभाग खुद महिला संभालती हैं, बल्कि इसकी बिक्री की जिम्मेदारी भी महिलाओं के हाथ में है। इस अखबार की सह-संपादक लक्ष्मी शर्मा बताती हैं कि जब उन्होंने आठवीं कक्षा पास की थी, तभी उनका विवाह हो गया। पति और जेठ का सहयोग मिला और आज वह स्नातक पास होकर महिलाओं के लिए कुछ कर पा रही है। प्रारंभ में ई-मेल करने को एक अजूबा कार्य समझने वाली लक्ष्मी आज फर्राटे से अपने कंप्यूटर पर उंगलियां चलाती है। शिवहर के तरियाणी क्षेत्र की रहने वाली लक्ष्मी बताती है कि ‘खबर लहरिया&rsquo...
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महिला सशक्तीकरण का निर्भीक अखबार

15 सप्ताह पहले
‘खबर लहरिया’, यह आज न सिर्फ एक ऐसे अखबार का नाम है, जिसे महिलाएं निकालती हैं, बल्कि आज यह पूरे देश में महिला सशक्तीकरण के एक अभियान का नाम है। सबसे पहले वर्ष 2008 में बुंदेलखंड के एक छोटे-से गांव से वहां की जागरूक महिलाओं ने ‘खबर लहरिया’ नामक टैब्लॉयड साइज का अखबार निकाला। इस अखबार को जब वर्ष 2009 में यूनेस्को से ‘किंग सेन्जोंग’ अवॉर्ड मिला, तो इसकी चर्चा देश में ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हुई।   ‘खबर लहरिया’ की पत्रकार ग्रामीण परिवेश तथा ग्रामीण जन के प्रति भारतीय जनमान...
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छऊ नृत्य की माहिर नर्तकी

33 सप्ताह पहले
ओडिशा में अपने प्रवास के दौरान इलियाना मयूरभंजी छऊ के प्रति भी आकर्षित हुईं। छऊ भारत का एक आदिवासी नृत्य है जो पश्चिम बंगाल, ओडिशा और झारखंड राज्यों मे काफी लोकप्रिय है। इस आदिवासी नृत्य-कला के मुख्य रूप से तीन प्रकार हैं– सेरैकेल्लै (झारखंड) छऊ, मयूरभंजी (अडिशा) छऊ और पुरुलिया (पश्चिम बंगाल) छऊ। ओडिसी शास्त्रीय नृत्य में पारंगत होने के बाद इलियाना ने मयूरभंजी छऊ में दक्षता हासिल करने की कोशिश शुरू की। उन्होंने गुरु हरि नायक से मयूरभंजी छऊ नृत्य सीखा और भुवेनश्वर के संगीत महाविद्यालय से आचार्य की उपाधि भी हासिल की।  बड़ी बात यह भी है कि इलियाना ने न सिर्फ ओडिसी शास्त्रीय नृत्य और छऊ नृत्य सीखा, बल्कि ओडिसी रहन-स...
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आत्मा में ईश्वर का वास

33 सप्ताह पहले
  यह सुंदर कहानी एक साधक की है जिसने भगवान की खोज में हर जगह यात्रा की ताकि वह उस दिव्य स्रोत, दिव्य शांति और दिव्य सच को पा सके। अंत में काफी वर्षों की तलाश करने के बाद और भगवान को अपने करीबा ना पाकर, उसने हार मान ली। जंगल में एक पेड़ के नीचे बैठकर वह जोर-जोर से रोने लगा और कहने लगा, ‘हे भगवान! आप मुझसे इतनी दूर कैसे हो सकते हैं? मैं आपके बिना मर रहा हूं। मैंने आपको कहां-कहां नहीं तलाशा लेकिन आप मुझे कहीं नहीं मिले। मैं अब इस पेड़ के नीचे तब तक बैठा रहूंगा जब तक मेरी सांसें मेरा शरीर नहीं छोड़ देतीं, क्योंकि अब मैं आपके बिना एक दिन भी जीवित नहीं रह सकता हूं।’  आंस...


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