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गुरुवार, 24 अगस्त 2017

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वैज्ञानिकों ने खोजा सबसे बड़ा डायनासोर

13 घंटे पहले
वैज्ञानिकों को एक नए शोध में डायनासोर की एक नई प्रजाति का पता चला है। यह प्रजाति डायनासॉर्स की अबतक की सभी ज्ञात प्रजातियों में सबसे बड़ी थी। ये इतने विशालकाय हुआ करते थे कि टायरनोसॉरस रेक्स भी इनके सामने बौने लगते थे। 76 टन वजनी ये डायनासोर शाकाहारी थे और किसी अंतरिक्षयान की तरह भारी-भरकम हुआ करते थे। इनकी औसत लंबाई करीब 122 फुट थी। इस शोध में शामिल शोधकर्ताओं का कहना है कि इतने विशाल आकार के बावजूद ये डायनासोर बिल्कुल भी डरावने नहीं थे। इस डायनासोर का जीवाश्म साल 2012 में दक्षिणी अर्जेंटीना में मिला था। जिन शोधकर्ताओं ने इस जीवाश्म का परीक्षण कर इसके काल का पता लगाया, उनका कहना है कि लंबी गर्दन वाला यह डायनासोर टाइटनॉसॉ...
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सोलर पावर से चलने वाला स्कूल

13 घंटे पहले
अत्यधिक इस्तेमाल के कारण तेजी से देश में ऊर्जा के परंपरागत स्रोत कम हो रहे हैं। इस कारण देश में अक्षय ऊर्जा में दिलचस्पी बढ़ने लगी है। दिल्ली, कोच्चि और हैदराबाद समेत देश के बड़े एयरपोर्ट्स ने भी आंशिक या पूर्ण रूप से सौर ऊर्जा को अपना लिया है। कई शैक्षणिक संस्थान भी सौर ऊर्जा को अपनाने लगे हैं। पुडुचेरी के बाद बेंगलुरु के एक इंटरनेशनल स्कूल ने 'जीरो कार्बन फुटप्रिंट' बिल्डिंग की मिसाल कायम की है। जीरो एनर्जी बिल्डिंग वैसी बिल्डिंग होती है, जिसमें ऊर्जा के परंपरागत स्रोत का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं होता है बल्कि उसमें  अक्षय ऊर्जा के स्रोत पर जोर दिया जाता है।  बेंगलुरु के इस स्कूल का नाम कनैडियन इंटरनेशनल ...
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देश का पहला मानवरहित टैंक बनकर तैयार

13 घंटे पहले
डिफेंस रिसर्च ऐंड डिवेलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (डीआडीओ) ने एक मानवरहित, रिमोट से संचालित होनेवाला टैंक तैयार किया है। इस टैंक के तीन तरह के मॉडल्स विकसित किए गए हैं- सर्विलांस, बारूदी सुरंग खोजने वाला और जिन इलाकों में न्यूक्लियर और जैविक हमलों का अंदेशा है, वहां गश्ती लगाने के लिए। इस टैंक का नाम मंत्रा रखा गया है। इस टैंक को कॉम्बैट वीइकल्स रिसर्च ऐंड डिवेलपमेंट इस्टैबलिशमेंट (सीवीआरडीई) ने इसे बनाया है और सेना के लिए इसका परीक्षण किया है, लेकिन पैरामिलिटरी फोर्स ने इस टैंक का नक्सल प्रभावित इलाकों में इस्तेमाल करने की रुचि जाहिर की है। हालांकि, उन्होंने इसमें कुछ बदलावों की बात भी कही है।  बख्तरबंद टैंक की तरह डि...
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टेक्सटाइल इंडस्ट्री का कायाकल्प

5 दिन पहले
नरेंद्र मोदी सरकार की कड़ी मेहनत का असर टेक्सटाइल इंडस्ट्री में दिखने लगा है। पिछले दो सालों में इस उद्योग में निवेशकों का रुझान बढ़ा है। आंकड़े बताते हैं कि 2015-16 में जहां केवल 230.13 मिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश हुआ। वहीं दूसरे वित्तीय वर्ष 2016-17 में निवेश का आंकड़ा लगभग तीन गुणा हो गया है। चालू वित्तीय वर्ष के मात्र दो महीने में ही इस इंडस्ट्री में निवेश का आंकड़ा 21.41 मिलियन अमेरिकी डॉलर है।  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सकारात्मक सोच और एग्रेसिव एप्रोच के कारण विगत तीन साल में टेक्सटाइल इंडस्ट्री को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने मार्केटिंग के लिए 849 कार्यक्रम आयोजित किए। इन कार्यक्रमों के परिणाम अब सा...
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देश में ऊर्जा परिवर्तन के संकेत

5 दिन पहले
दुनिया को आतंकवाद और जलवायु परिवर्तन से सबसे अधिक खतरा है। अगर वे इसकी चिंता करते हैं तो उनका एक्शन भी इन समस्याओं के निराकरण के लिए होता है। इसीलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  आतंकवाद के विरुद्ध विश्व के देशों को सतर्क करने में एक तरफ सफल हुए, तो दूसरी तरफ पर्यावरण रक्षा को लेकर भी वे बड़ी लकीर खींच रहे हैं। केंद्र सरकार के प्रयासों से ही भारत में कोयला खपत वृद्धि में कमी आई है, जो कि भारत का पेरिस समझौते के प्रति पीएम मोदी की संजीदगी को दिखाता है। कोयले की कम हो रही मांग ग्रीनपीस की एक रिपोर्ट के मुताबिक अब भारत में कोयला खपत...
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इस दिन के कई अफसाने

5 दिन पहले
महात्मा गांधी महात्मा गांधी आजादी के दिन दिल्ली से हजारों किलोमीटर दूर बंगाल के नोआखली में थे, जहां उन्होंने हिंदुओं और मुसलमानों के बीच सांप्रदायिक हिंसा को रोकने के लिए अनशन भी किया। गौरतलब है कि जब तय हो गया कि भारत 15 अगस्त को आजाद होगा तो जवाहर लाल नेहरु और सरदार वल्लभ भाई पटेल ने महात्मा गांधी को पत्र भेजा। इस पत्र में लिखा था, ‘15 अगस्त हमारा पहला स्वाधीनता दिवस होगा। आप राष्ट्रपिता हैं। इसमें शामिल हो अपना आशीर्वाद दें।’ गांधी ने इस खत का जवाब भिजवाया, जिसमें उन्हो...
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विज्ञान का ‘टर्निंग प्वाइंट’

3 सप्ताह पहले
  गिरिश कर्नाड और उनके साथ प्रो. यशपाल। एक ख्यातिलब्ध अभिनेता तो दूसरा  जाना-माना वैज्ञानिक। पर ये दोनों साझे तौर पर नब्बे के दशक के युवाओं की स्मृति में इस तरह बस गए कि उन्हें वे अपने रोल मॉडल की तरह देखने लगे। दरअसल, हम बात कर रहे हैं दूरदर्शन पर लंबे समय तक प्रसारित होने वाले कार्यक्रम ‘टर्निंग प्वाइंट’ की। यह कार्यक्रम देश में टीवी के विकास और प्रचलन के उस दौर की भी याद दिलाता है, जब दूरदर्शन श्याम-श्वेत से धीरे-धीरे रंगीन हो रहा था। इस कार्यक्रम के प्रस्तोता तो थे गिरिश कर्नाड पर इसमें एक विशेषज्ञ के तौर पर प्रो. यशपाल शामिल होते थे। 30 मिनट के इस कार्यक्रम में विज्ञान और गणित की कई समस्याओं और समीकरणों को वे दिलचस्प तरीके से बताते-समझाते थे। नब्बे ...
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गरीब बेटियों की ‘साइकल वाली दीदी’

3 सप्ताह पहले
बिहार की राजधानी पटना से लगे दानापुर और फुलवारी शरीफ में 50 किशोरी शिक्षा केंद्रों में मुसहरों की करीब 1500 बेटियां रह रही हैं। उन्हें हर उन चीजों की जानकारी दी जा रही है, जो उनकी जिंदगी को बेहतर बनाने में सहायक है। रीता, मोना, सोना, रूबी, महिसी, देवी सब एक साथ पढ़ रही हैं और अपना सुनहरा भविष्य बना रही हैं। यहां उनकी सेहत के लिए उनकी खुराख पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है। अगर आप जानना चाहते हैं कि इतनी बड़ी रचनात्मक पहल के पीछे कौन है, तो आपको सुधा वर्गीज के बारे में जानना होगा और उन्हें जानने का मतलब है, वंचित बच्चों की उस दुनिया में पहुंचना, जिसे सुधा ने उजाले की एक नई दुनिया में तब्दील कर दिया है। बच्चों के लिए वह साइकल वाली दीदी है। साइकल वाली दीदी अपने बच्चों को इतना प्यार करती हैं...
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भारतीय भाल पर चमकता तिलक

5 सप्ताह पहले
भारतीय स्वाधीनता संघर्ष ने देश को सिर्फ फिरंगी दासता से आजादी नहीं दिलाई, बल्कि राष्ट्र निर्माण और राष्ट्र चरित्र की बुनियाद भी मजबूत की। जिन लाल-बाल-पाल की तिकड़ी का जिक्र स्वाधीनता संघर्ष में काफी प्रमुखता से होता है, उसकी खासियत यही थी कि वे स्वाधीनता के साथ देश को सांस्कृतिक तौर पर भी समृद्ध करने के प्रण के साथ आंदोलनरत थे। इस तिकड़ी में शामिल हैं-लाला लाजपत राय, बालगंगाधर तिलक और विपिनचंद्र पाल। ये तीनों महापुरुष देश में स्वराज और संस्कृति का साझा किस तरह विकसित कर रहे थे, इसकी ही मिसाल है कि लोकमान्य तिलक ने जहां गणेश उत्सव को राष्ट्रीयता का पर्व बना दिया, वहीं विपिनचन्द्र पाल ने दुर्गा पूजा और लाला लाजपत ने श्री रामलीला के जरिए देश में सांस्कृतिक एकता के सूत्र मजबूत किए। इन तीनो...
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सिंगापुर की असम में कौशल विकास केंद्र में रुचि

5 सप्ताह पहले
असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल की सिंगापुर के वरिष्ठ रक्षा और विदेश मंत्री डॉ. मलिकी उस्मान से मुलाकात हुई है। दिल्ली डायलॉग सम्मेलन में दिल्ली आने पर हुई मुलाकात के दौरान भारत में सिंगापुर के उच्चायुक्त लिम थुआन कुआन भी उपस्थित थे। दोनों पक्षों ने आपसी हितों को लेकर कई विषयों पर गंभीर चर्चा की। अधिकारियों का कहना है कि 30 मिनट चली बैठक में मुख्यमंत्री ने असम और सिंगापुर के बीच कारोबार और आर्थिक गतिविधियों ने नए अवसरों को तलाशने पर बल दिया। डॉ. मलिकी उस्मान ने इस पर सकारात्मक उत्तर दिया। उन्होंने कहा कि वे 18 से 21 जुलाई  को दौरा करने वाले हैं। आवश्यक क्षेत्रों में सहयोग का पता लगाने का प्रयास होगा। डॉ. उस्मान ने जानकारी दी कि उनके दौरे का उद्देश्य युवाओं की कुशल का प्रशिक्षण...
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शहनाई वाला गांव

5 सप्ताह पहले
शहनाई का नाम लेते ही उस्ताद बिस्मिल्ला खां का ध्यान आता है और बनारस के साथ उनके रिश्तों की बातें भी जेहन में उभरने लगती हैं। पर कमाल की बात है कि उत्तर प्रदेश में ही एक गांव है, जहां के बिस्मिल्ला खां तो नहीं हैं, पर इस गांव की पहचान आज भी शहनाई वाले गांव के तौर पर होती है। दुखद बस यह है कि पहचान का यह गाढ़ापन नए दौर के बदलावों के बीच अपनी शिनाख्त बचाने का संघर्ष कर रहा है। यह गांव है कानपुर का मंझावान गांव। अगर आप मंझावान गांव की गलियों में घूम रहे हैं तो आपको शहनाई के सुरीले स्वर आज भी सुनाई पड़ेंगे। यह भी कि अगर आप इस गांव में घूम रहे हैं तो फिर एक जगह खड़े होकर शहनाई वादन सुनने की आवश्यकता नहीं हैं। आप चलते रहिए, तकरीबन हर घर से आपको शहनाई की स्वर लहरी सुनाई पड़ेगी। ऐसा इसीलिए है कि इ...
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देश का पहला जियोग्राफिकल इंफॉर्मेशन वाला गांव

6 सप्ताह पहले
कुछ दिन पहले उत्तर प्रदेश का गोंडा शहर देश के गंदे शहरों की फेहरिस्त में सबसे ऊपर था, वहीं उत्तर प्रदेश के सबसे पिछड़े जिलों में गिना जाने वाला सिद्धार्थनगर जिले का हसुड़ी गांव मिसाल बन गया है। यह गांव देश का पहला जियोग्राफिकल इंफॉर्मेशन वाला गांव बन गया है। सिद्धार्थनगर जिला मुख्यालय से लगभग 80 किलोमीटर दूर भनवापुर ब्लाॅक का हसुड़ी औसानपुर का यह गांव इन दिनों चर्चा का विषय है। इस गांव के एक-एक मकान और उसके लोगों का डेटा वेबसाइट पर उपलब्ध है। यही नहीं, गांव का पूरा मैप अलग से तैयार करवाया गया है। नेपाल सीमा से लगे इस गांव का अपना डिजिटो मैप और वेबसाइट है। गांव के तालाब, गोचर भूमि, कृषि योग्य जमीन, नहर, सड़कें और घर किसका है जैसी ...


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