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शनिवार, 22 सितंबर 2018

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स्मार्ट गांव में अशक्तों का सशक्तीकरण

2 सप्ताह पहले
गांव में अशक्तों को अपने पैरों पर खड़े होने लायक बनाने के मकसद से न सिर्फ उनकी शारीरिक विकृतियों को दूर करने के लिए उनकी सर्जरी के साथ-साथ अन्य उपचार नि:शुल्क किया जा रहा है, बल्कि उन्हें रोजगार के साधन भी मुहैया करवाए जा रहे हैं। इसके लिए उन्हें कंप्यूटर और मोबाइल की मरम्मत से लेकर सिलाई-कटाई का भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है।  गांव में स्थित नारायण सेवा संस्थान के परिसर में अत्याधुनिक उपकरण से सुसज्जित अस्पताल, अनाथालय, स्मार्ट स्कूल, कौशल प्रशिक्षण संस्थान और पुनर्वास, भौतिक चिकित्सा व प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र भी हैं। इस गांव को स्मार्ट गांव का खिताब मिला है, क्योंकि ग्रामवासियों के लिए इस परिसर के भीतर एटीएम मशीन, इं...
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आठ वर्ष पहले बिहार पहुंचा अखबार

2 सप्ताह पहले
बिहार के सीतामढ़ी और शिवहर से प्रकाशित ‘खबर लहरिया’ इन दिनों न केवल महिलाओं में, बल्कि पुरुषों में भी काफी लोकप्रिय है। यहां भी इसका न केवल संपादकीय विभाग खुद महिला संभालती हैं, बल्कि इसकी बिक्री की जिम्मेदारी भी महिलाओं के हाथ में है। इस अखबार की सह-संपादक लक्ष्मी शर्मा बताती हैं कि जब उन्होंने आठवीं कक्षा पास की थी, तभी उनका विवाह हो गया। पति और जेठ का सहयोग मिला और आज वह स्नातक पास होकर महिलाओं के लिए कुछ कर पा रही है। प्रारंभ में ई-मेल करने को एक अजूबा कार्य समझने वाली लक्ष्मी आज फर्राटे से अपने कंप्यूटर पर उंगलियां चलाती है। शिवहर के तरियाणी क्षेत्र की रहने वाली लक्ष्मी बताती है कि ‘खबर लहरिया&rsquo...
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महिला सशक्तीकरण का निर्भीक अखबार

2 सप्ताह पहले
‘खबर लहरिया’, यह आज न सिर्फ एक ऐसे अखबार का नाम है, जिसे महिलाएं निकालती हैं, बल्कि आज यह पूरे देश में महिला सशक्तीकरण के एक अभियान का नाम है। सबसे पहले वर्ष 2008 में बुंदेलखंड के एक छोटे-से गांव से वहां की जागरूक महिलाओं ने ‘खबर लहरिया’ नामक टैब्लॉयड साइज का अखबार निकाला। इस अखबार को जब वर्ष 2009 में यूनेस्को से ‘किंग सेन्जोंग’ अवॉर्ड मिला, तो इसकी चर्चा देश में ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हुई।   ‘खबर लहरिया’ की पत्रकार ग्रामीण परिवेश तथा ग्रामीण जन के प्रति भारतीय जनमान...
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छऊ नृत्य की माहिर नर्तकी

21 सप्ताह पहले
ओडिशा में अपने प्रवास के दौरान इलियाना मयूरभंजी छऊ के प्रति भी आकर्षित हुईं। छऊ भारत का एक आदिवासी नृत्य है जो पश्चिम बंगाल, ओडिशा और झारखंड राज्यों मे काफी लोकप्रिय है। इस आदिवासी नृत्य-कला के मुख्य रूप से तीन प्रकार हैं– सेरैकेल्लै (झारखंड) छऊ, मयूरभंजी (अडिशा) छऊ और पुरुलिया (पश्चिम बंगाल) छऊ। ओडिसी शास्त्रीय नृत्य में पारंगत होने के बाद इलियाना ने मयूरभंजी छऊ में दक्षता हासिल करने की कोशिश शुरू की। उन्होंने गुरु हरि नायक से मयूरभंजी छऊ नृत्य सीखा और भुवेनश्वर के संगीत महाविद्यालय से आचार्य की उपाधि भी हासिल की।  बड़ी बात यह भी है कि इलियाना ने न सिर्फ ओडिसी शास्त्रीय नृत्य और छऊ नृत्य सीखा, बल्कि ओडिसी रहन-स...
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आत्मा में ईश्वर का वास

21 सप्ताह पहले
  यह सुंदर कहानी एक साधक की है जिसने भगवान की खोज में हर जगह यात्रा की ताकि वह उस दिव्य स्रोत, दिव्य शांति और दिव्य सच को पा सके। अंत में काफी वर्षों की तलाश करने के बाद और भगवान को अपने करीबा ना पाकर, उसने हार मान ली। जंगल में एक पेड़ के नीचे बैठकर वह जोर-जोर से रोने लगा और कहने लगा, ‘हे भगवान! आप मुझसे इतनी दूर कैसे हो सकते हैं? मैं आपके बिना मर रहा हूं। मैंने आपको कहां-कहां नहीं तलाशा लेकिन आप मुझे कहीं नहीं मिले। मैं अब इस पेड़ के नीचे तब तक बैठा रहूंगा जब तक मेरी सांसें मेरा शरीर नहीं छोड़ देतीं, क्योंकि अब मैं आपके बिना एक दिन भी जीवित नहीं रह सकता हूं।’  आंस...
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राष्ट्र ने अपना पहला पाठ सीखा

22 सप्ताह पहले
महात्मा गांधी के चंपारण सत्याग्रह ने एक सदी लंबी यात्रा पूरी कर ली है। चंपारण भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास का खुलासा करता है। यह आंदोलन साम्राज्यवादी उत्पीड़न के लिए लगाई गई सभी भौतिक ताकतों के खिलाफ लड़ने के लिए एक अनजान कार्य प्रणाली के बारे में जानकारी देता है। गांधी जी ने इसे सत्याग्रह के नाम से पुकारा। चंपारण सत्याग्रह के परिणाम ने राजनीतिक स्व‍तंत्रता की अवधारणा और पहुंच को पुनर्भाषित किया और पूरे ब्रिटिश-भारतीय समीकरण को एक जीवंत मोड़ पर खड़ा कर दिया। चंपारण में ब्रिटिश बागान मालिकों ने जमींदारों की भूमिका अपना ली थी और वे न केवल वार्षिक उपज का 70 प्रतिशत भूमि कर वसूल कर रहे थे, बल्कि उन्हों ने एक छोटे से ...
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चोरल फिर हुई सदानीरा

22 सप्ताह पहले
  नदियों के आश्रय में ही दुनिया भर में मानव सभ्यताएं विकसित हुई हैं, नदियों के कारण ही पूरे विश्व में न जाने कितनी संस्कृतियों और परंपराओं ने जन्म लिया है। नदी के साथ जल संरक्षण का विवेक लोगों में हजारों वर्षों तक रहा है। पर आधुनिकता की नई आंधी में यह विवेक कहीं पीछे छूट गया है। वैसे बीते कुछ दशकों में इस बारे में एक जागरूकता भी हर जगह आई है। इसीलिए एक ऐसे दौर में जब नदियों के जलहीन और प्रदूषित होने की खबरें हमारी चिंताएं बढ़ाती रहती हैं, किसी नदी को सदानीरा बनाने की खबर से बेहतर कोई खबर नहीं हो सकती, क्योंकि हम जिस दौर से गुजर रहे हैं, उस दौर में पानी की दरकार सबसे ज्यादा महसूस की जा ...
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पृथ्वी प्रकृति और गांधी

22 सप्ताह पहले
  महात्मा गांधी ने जब दुनिया को सत्य, अहिंसा और प्रेम का सबक सिखाया तो वह कहीं न कहीं अपने दौर से आगे की चुनौतियों को समझ रहे थे। उनके विचार और कार्यक्रमों में उन तमाम समस्याओं का समाधान है, जिस पर आज दुनिया के तमाम देश तो अलग-अलग स्वर में बात कर ही रहे हैं, संयुक्त राष्ट्र भी इसके लिए अपने स्तर से कई प्रयास कर रहा है। इन समस्याओं में सबसे अहम दो मुद्दे हैं- पर्यावरण और पृथ्वी की रक्षा। वैसे यहां यह जानना दिलचस्प है कि गांधी जी के लेखन या चिंतन में ‘पर्यावरण’ शब्द का प्रयोग कहीं नहीं मिलता है। वैसे हिंदी में ‘पर्यावरण’ शब्द ‘एन्वायरमेंट’ शब्द के हिंदी अनुवाद से ही ज्यादा प्रचलन में आया है। वरिष्ठ पर्यावरणविद अनुपम मिश्र कहते थे कि &lsq...
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स्वरोजगार की नई इबारत लिख रहे बच्चीराम

24 सप्ताह पहले
उत्तराखंड के हजारों गांव मानवविहीन हो चुके हैं। मूलभूत सुविधाओं की कमी और खेती में लागत न निकल पाने के कारण ग्रामीणों का शहरों की ओर पलायन जारी है। ऐसे में पौड़ी जिले के कांडई गांव निवासी 58 वर्षीय किसान बच्चीराम ढौंडियाल की पहल उम्मीद जगा रही है। बच्चीराम ने कड़ी मेहनत से अपनी बंजर भूमि को न केवल उपजाऊ बनाया, बल्कि आदर्श नर्सरी स्थापित कर स्वरोजगार की एक नई परिभाषा गढ़ी है। नजीर बना पौधालय कांडई गांव में स्थापित सरस्वती किसान पौधालय सरकारी विभागों के लिए भी एक नजीर बना हुआ है। बच्चीराम बताते हैं कि जिले के कई विभागों के अधिकारी ग्...
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दूसरी कक्षा में पढ़ाई छोड़ने वाला चला रहा स्कूल

24 सप्ताह पहले
गरीबी के कारण दूसरी कक्षा के बाद पढ़ाई ना कर पाने वाले गाजी जलालुद्दीन आज सुंदरबन इलाके में अपने तीन स्कूल चला रहे हैं, जिनमें वह गरीब बच्चों को शिक्षा देते हैं। इसके अलावा वह एक अनाथालय भी चला रहे हैं। दूसरी कक्षा में सबसे ज्यादा नंबर लाने वाले जलालुद्दीन की आर्थिक स्थिति ठीक ना होने के चलते वह आगे की पढ़ाई नहीं कर सके, शायद यही वजह है कि वह अब किसी और को पढ़ाई से दूर होते नहीं देखना चाहते हैं। पेशे से टैक्सी ड्राइवर जलालुद्दीन के स्कूल में 26 टीचर पढ़ाते हैं और 500 से ज्यादा बच्चे पढ़ाई करते हैं। गाजी खुद एक कमरे के घर में रहते हैं और अपनी कमाई को बच्चों की पढ़ाई और उनके खानपान पर खर्च करते हैं। जलालुद्दीन बताते हैं कि ...
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डायनासोर के विलुप्त होने का नया साक्ष्य

27 सप्ताह पहले
करोड़ों वर्ष पूर्व क्षुद्र ग्रह के पृथ्वी से टकराने पर दुनियाभर में ज्वालामुखी मैग्मा के फूटने के कारण धरती से डायनासोर विलुप्त हो गए होंगे। एक नए शोध में वैज्ञानिकों ने इस नई धारणा के पक्ष में साक्ष्य मिलने का दावा किया है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, छह मील चौड़ा एक क्षुद्र ग्रह करीब 6.6 करोड़ वर्ष पूर्व मैक्सिको के युकाटन प्रायद्वीप से टकराया था, जिससे धरती और समुद्र दोनों में भीषण भूकंप आया था। 'साइंस एडवांसेस' नामक पत्रिका में प्रकाशित एक अध्ययन में कहा गया है कि भूकंप के प्रभाव से पानी के नीचे भी ज्वालामुखी से उग्र रूप से मैग्मा निकला होगा, जिससे पर्यावरण पर विनाशकारी प्रभाव पड़ा होगा। मिनेसोटा विश्वविद्यालय के ...
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ऊंचे स्वर में पढ़ने से बढ़ेगी स्मृति

27 सप्ताह पहले
अगर आपका बच्चा कोई पाठ याद नहीं कर पा रहा है तो उसे ऊंचे स्वर में पढ़ने की आदत डालने को कहिए। एक अध्ययन में पता चला है कि जोर से पढ़ने से लंबी अवधि की स्मृति बढ़ती है। अध्ययन के नतीजों में सामने आया है कि बोलने और सुनने की दोहरी कार्यविधि 'उत्पादन प्रभाव' का यादाश्त पर लाभकारी असर होता है। बोलने और सुनने से शब्द जाना-पहचाना बन जाता है और इस प्रकार उसके मस्तिष्क में प्रतिधारण यानी स्मृति में बने रहने की संभावना बढ़ जाती है। कनाडा के वाटरलू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर कोलिन एम. मैकलियोड ने कहा अध्ययन में सक्रिय सहभागिता से सीखने और स्मृति के फायदे की पुष्टि होती है। उन्होंने आगे बताया जब हम सक्रिय उपाय या उत्पादन तत्व किस...


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