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गुरुवार, 24 मई 2018

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कजाकिस्तान में 70 साल बाद दिखेंगे जंगली बाघ

34 सप्ताह पहले
कजाकिस्तान में करीब 70 साल बाद जंगली बाघ फिर नजर आएंगे। कुछ समय पहले ये विलुप्त हो गए थे। 'द गार्जियन' की रिपोर्ट के अनुसार, विश्व वन्यजीव कोष (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) की ओर से मिले समर्थन के तहत काम करने वाली परियोजना के अनुसार, इली-बलखश क्षेत्र में इन जंगली बाघों को फिर देखा जाएगा।  इस परियोजना में एक नए प्राकृतिक रिजर्व क्षेत्र विकसित करने और वन को पूर्वावस्था में लाने की योजना भी शामिल है। यह वनक्षेत्र पशुओं का ऐतिहासिक पनाहगाह रहा है। अगर यह परियोजना सफल रही, तो कजाकिस्तान वनक्षेत्र मं  जंगली बाघों को वापस लाने में सफलता हासिल करने वाला ऐसा पहला देश बन जाएगा।  शिकार और आवासीय क्षेत्र प्रभावित ...
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आकाशगंगा में मिला बड़ा ब्लैक होल

35 सप्ताह पहले
आकाशगंगा के केंद्र के पास एक बड़ा सा ब्लैक होल पाया गया है। हमारे सूर्य से लगभग एक लाख गुना बड़ा यह ब्लैक होल एक जहरीली गैस के बादल से घिरा हुआ पाया गया है। यदि इसकी पुष्टि हो जाती है तो यह आकाशगंगा में पाया जाने वाला दूसरा सबसे बड़ा ब्लैक होल होगा। इससे बड़ा ब्लैकहोल सैगीटेरियस ए है, जो कि तारामंडल के बिल्कुल केंद्र में स्थित है। जापान की कीओ यूनिवर्सिटी के अंतरिक्षयात्री चिली में अल्मा टेलीस्कोप का इस्तेमाल करके गैसों के एक बादल का अध्ययन कर रहे थे और उसकी गैसों की गति को समझने का प्रयास कर रहे थे। उन्होंने पाया कि दीर्घवृत्ताकार बादल के अणु बेहद तीव्र गुरूत्वीय बलों द्वारा खींचे जा रहे थे। यह बादल आकाशगंगा के केंद्र से...
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अंटार्कटिका की गर्म गुफाओं में नए जीव जगत की उम्मीद

35 सप्ताह पहले
वैज्ञानिकों का मनना है कि अंटार्कटिका ग्लेशियरों के भीतर गर्म गुफाओं में जीव जन्तुओं और वनस्पतिओं की रहस्मयी दुनिया हो सकती है। ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी (एएनयू) की ओर से किए गए अध्ययन में पाया गया कि अंटार्कटिका के रोस द्वीप में सक्रिय ज्वालामुखी माउंट इरेबस के इर्द गिर्द के क्षेत्र में झरनों के बहाव ने बड़ी गुफा का जाल बना दिया है। शोधकर्ताओं ने कहा कि इन गुफाओं से मिले मृदा के नमूनों के अध्ययन से इसमें शैवाल, मॉस और छोटे जन्तुओं के अंश पाए गए। एएनयू फेनर स्कूल ऑफ इंन्वॉयरमेंट एंड सोसाइटी के सी फ्रासर ने कहा, ‘गुफाएं अंदर बेहद गर्म हो सकती हैं। कुछ गुफाओं में तापमान 25 डिग्री सेल्सियस तक भी हो सकता है। आप वहां टी शर्...
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मंगल ग्रह के पास भी होगी शनि जैसी रिंग

37 सप्ताह पहले
मंगल ग्रह का सबसे बड़ा उपग्रह फोबोस धीरे-धीरे ग्रह की ओर बढ़ रहा है और 10 से 20 लाख वर्षो में यह ग्रह के काफी करीब पहुंच जाएगा। ग्रह के करीब पहुंचने पर यह शनि, बृहस्पति, यूरेनस और नेप्च्यून की तरह मंगल के चारों तरफ एक छल्ले का रूप अख्तियार कर लेगा। कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के भारतीय मूल के वैज्ञानिक तुषार मित्तल और बेंजामिन ब्लैक के अनुसार इस अध्ययन का मकसद यह जानना था कि कोई चंद्रमा जब अपने ग्रह के करीब जाता है तो क्या होता है। ब्लैक ने बताया कि पृथ्वी का उपग्रह (चंद्रमा) हर साल कुछ सेंटीमीटर पृथ्वी से दूर जा रहा है, वहीं फोबोस हर साल मंगल की ओर बढ़ रहा है। ऐसे में संभावना है कि या तो फोबोस मंगल से टकरा जाने या टूटकर बिख...
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पृथ्वी जैसे ग्रह की तलाश में रुकावट

39 सप्ताह पहले
विशाल आकाशगंगा में छिपे हुए तारों के कारण उस तारामंडल के दूसरे ग्रह अपने वास्तविक आकार से छोटे दिखते हैं, जिसके कारण पृथ्वी के समान ग्रह ढूंढने के लिए चलाए जा रहे अभियान एवं शोध प्रभावित होते हैं। शोधकर्ताओं ने यह खुलासा अपने हालिया अध्ययन में किया है। पृथ्वी जैसे ग्रह का पता लगाने में ग्रहों का घनत्व एक अहम कारक होता है। कम घनत्व होने से वैज्ञानिक यह संकेत पाते हैं कि ग्रह गैसों से भरा है, जैसे बृहस्पति। वहीं घनत्व अधिक होने का मतलब है कि ग्रह पृथ्वी जैसा चट्टानी है। लेकिन नए अध्ययन के मुताबिक, कुछ ग्रह पूर्व अनुमान से कम घनत्व के पाए गए, और ऐसा उस तारामंडल में विद्यमान एक दूसरे छिपे हुए तारों की...
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अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पहुंचे 3 अंतरिक्ष यात्री

40 सप्ताह पहले
रूस की अंतरिक्ष एजेंसी ‘रॉसकॉसमोस’ द्वारा जारी फुटेज में सोयूज यान नासा के अंतरिक्ष यात्री रेंडी ब्रेसनिक, रूसी अंतरिक्ष यात्री सर्गेई रियाजैस्की और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के पाओलो नेस्पोली को काजिकिस्तान के बैकॉनुर कॉस्मोड्रोम से धुंधले आसमान में ले जाता दिख रहा है। अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी ‘नासा’ के अनुसार छह घंटे बाद पृथ्वी के चार चक्कर लगा कर सोयूज अंतरिक्ष स्टेशन पहुंचा। तीनों अंतरिक्ष यात्रियों के आगमन से अप्रैल के बाद आईएसएस में पहली बार छह लोग मौजूद हैं।  
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नुकसानदायक एंटीबायटिक्स

42 सप्ताह पहले
एंटीबायटिक का इस्तेमाल विभिन्न प्रकार के बैक्टीरिया संक्रमण से सुरक्षा और उनसे होने वाले रोगों को दूर करने में किया जाता है, लेकिन एक अध्ययन में चेतावनी दी गई है कि यह एक स्वस्थ वातावरण के लिए जरूरी रोगाणुओं को नुकसान भी पहुंचा सकते हैं। इस शोध के अनुसार, यह महत्वपूर्ण रूप से पूरे विश्व के लोगों के जीवन पर असर डाल सकते हैं। जब लोग एंटीबायटिक दवाइयां लेते हैं, तो शरीर में दवाओं के केवल एक हिस्से का मेटाबॉलिज्म होता है, बाकी बाहर निकल जाता है।  चूंकि अपशिष्ट जल उपचार संयंत्र को एंटीबायटिक या अन्य दवा संयुग्मों को पूरी तरह से हटाने के लिए डिजाइन नहीं किए जाते हैं, इसीलिए इनमें से कई यौगिक प्राकृतिक प्रणालियों तक पहुंच जाते हैं जहां वे 'अच्छे' रोगाणुओं...
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कनाडा @ 150 वर्ष

43 सप्ताह पहले
क्षेत्रफल के नजरिए से रूस के बाद दुनिया के दूसरे सबसे बड़े देश कनाडा ने अपनी स्थापना के 150 वर्ष पूरे कर लिए हैं। कनाडा समृद्ध देश तो है ही, साथ ही काफी खूबसूरत और शांतिप्रिय भी है। यहां एक ओर लाखों मील में फैला बर्फीला संसार है तो दूसरी ओर हैं लंबे-चौड़े समुद्री तट। बीच में कहीं हरे-भरे घास के मैदान हैं तो कहीं सदाबहार जंगल, मरुस्थल, लंबी-चौड़ी नदियां और झीलें भी हैं। कुल मिलाकर कनाडा ऐसा समृद्ध, खूबसूरत और शांतिप्रिय देश है जहां आप बार-बार जाना पसंद करेंगे। ध्यान रखने लायक यह है कि कनाडा जाकर ही आप विश्व के सबसे बड़े जलप्रपात नियाग्रा के अद्भुत, अलौकिक और विकराल रूप को देख पाएंगे। भारत से कनाडा का एक खास रिश्ता है। कनाडा में पंजाब की झलक साफ दिखती है। भारत और कनाडा का यह रि...
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अंटार्कटिका से टूटा सबसे बड़ा हिमखंड

43 सप्ताह पहले
विश्व के दक्षिण में स्थित ध्रुव पर ​स्थित अंटार्कटिका से भारत की राजधानी दिल्ली के आकार से भी चार गुना बड़ा हिमखंड टूट गया है, जो अपने साथ तबाही का मंजर लेकर आ रहा है। वैज्ञानिकों ने कहा कि करीब एक खरब टन का हिमशैल (अब तक के दर्ज आंकड़ो में सबसे बड़ा) कई महीनों के पूर्वानुमान के बाद अंटार्कटिका से टूटकर अलग हो गया है। अब दक्षिणी ध्रुव के आसपास जहाजों के लिए ये गंभीर खतरा बन सकता है। लार्सन सी बर्फ की चट्टान में से 5,800 वर्ग किलोमीटर का हिस्सा अलग हो जाने से इसका आकार 12 फीसदी से ज्यादा घट गया है और अंटार्कटिका का परिदृश्य हमेशा के लिए बदल चुका है। बताया जा रहा है कि इसका असर भारत के अंडमान-निकोबार और सुंदरबन डेल्टा पर भी पड़ सकता है। अंटार्कटिका में हमेशा...
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फ्रेंच गुयाना से हुआ भारत का संचार उपग्रह लांच

45 सप्ताह पहले
भारत का आधुनिकतम संचार उपग्रह जीसेट-17 को एरियन स्पेस के एक भारी रॉकेट के जरिए सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया गया। यह प्रक्षेपण फ्रेंच गुयाना के कौओरू से किया गया। लगभग 3477 किलोग्राम के वजन वाले जीसेट-17 में संचार संबंधी विभिन्न सेवाएं देने के लिए नॉर्मल सी-बैंड, एक्सटेंडेड सी-बैंड और एस-बैंड वाले पेलोड हैं। कॉम्पलेक्स नंबर 3 से उड़ान भरी इसमें मौसम संबंधी आंकड़ो के प्रसारण वाला यंत्र भी है और उपग्रह की मदद से खोज एवं बचाव सेवाएं उपलब्ध करवाने वाला यंत्र भी। अब तक ये सेवाएं इनसेट उपग्रह उपलब्ध करवा रहे थे। यूरोपीय प्रक्षेपक एरियन स्पेस फ्लाइट वीए 238 ने कौओरू के एरियन लांच कॉम्पलेक्स नंबर 3 से उड़ान भरी। कौओरू दक्षिण अमेरिका के पूर्वोत्तर तट पर स्थित एक ...
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लू के थपेड़ों से झुलसेगी दुनिया

47 सप्ताह पहले
जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वॉर्मिंग के कारण इंसान के भविष्य पर दिनोदिन और गहरे सवाल खड़े होते जा रहे हैं। विश्व की तीन-चौथाई आबादी को जल्द ही भयानक लू के थपेड़ों का सामना करना पड़ सकता है। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि अगर इतनी बड़ी मात्रा में ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन जारी रहता है, तो हम में से कई लोगों को अपने जीते-जी ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ेगा। 1980 से लेकर अब तक दुनिया के 1,900 अलग-अलग हिस्सों में बड़ी संख्या में लोग लोग गर्मी और उमस के कारण मारे गए हैं। 2010 में मॉस्को में 10,800 लोगों की गर्मी के कारण मौत हुई। 2003 में पेरिस में करीब 4,900 लोग गर्मी और उमस के कारण मारे गए। 1995 में शिकागो में गर्मी और उमस ने लगभग 7...
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सौर मंडल के बाहर मिले धरती जैसे 10 नए ग्रह

47 सप्ताह पहले
स्पेस एजेंसी नासा ने सौर मंडल के बाहर 219 नए ग्रहों को खोज निकाला है। फिलहाल यही संभावना है कि ये सभी खगोलीय पिंड ग्रह ही हैं। इनमें से 10 ऐसे भी ग्रह हैं, जो बिल्कुल धरती की तरह हैं। इन दसों ग्रहों की परिस्थितियां भी धरती जैसी होने की उम्मीद जताई जा रही है। जिस तरह पृथ्वी अपने सौर मंडल में सूर्य के न ज्यादा पास है और न ज्यादा दूर, ऐसी ही स्थिति इन ग्रहों की भी है। सूर्य से बहुत दूर होने से ग्रह पर तापमान बहुत ज्यादा होता है, वहीं सूर्य के बहुत पास होने पर वहां बहुत ठंड होती है जिसकी वजह से पानी के तरल रूप में मौजूद होने की संभावना खत्म हो जाती है। पानी की मौजूदगी के कारण इन ग्रहों में जीवन मौजूद होने की मजबूत संभावना नजर...


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