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शनिवार, 15 दिसंबर 2018

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अंतरिक्ष की तकनीक से कैसे बदली रोजमर्रा की जिंदगी!

9 सप्ताह पहले
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने एक इंटरैक्टिव वेबसाइट लॉन्च की है। इस साइट के जरिए यूजर जान सकेंगे कि कैसे अंतरिक्ष के क्षेत्र में काम करने वाली एजेंसी ने लोगों के जीवन को बदला। रोजमर्रा के जीवन में काम आनेवाली चीजें जैसे वॉटर प्यूरिफायर और सेल्फी कैमरा को बेहतर बनाने में अंतरिक्ष तकनीक ने मदद की। ऐसे कई और रोचक तथ्य इस वेबसाइट पर बहुत सरल तरीके से समझाया गया है।  वेबसाइट में दिखाए गए कुछ बाय-प्रॉडक्ट ऐसे कमर्शल उत्पाद हैं, जिनमें नासा की तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। ऐसी तकनीक जो मुख्य रूप से अंतरिक्ष  के अध्ययन और उसे खंगालने के लिए बनाए गए थे, उनका इस्तेमाल मानव जीवन को सरल बनाने के लिए किया गया। ‘नासा...
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नासा ने बनाया स्पेशल तकिया

9 सप्ताह पहले
नासा ने एक स्पेशल तकिया बनाया है, जो गहरी नींद लाने में मदद करता है। साथ ही, पसीना भी सोखता है। नासा ने यह तकिया खास तौर पर अंतरिक्ष यात्रियों को अलग-अलग तापमान में होने वाले नुकसान से बचाने के लिए बनाया है। इसकी कीमत 99 डॉलर (7100 रुपए) से शुरू होती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह तकिया दो तरह का है। पहली कैटेगरी में हिब्र नाम का तकिया है, जिसकी कीमत 99 डॉलर (7100 रुपए) रखी गई है। इस तकिए में पसीना सोखने वाली फोम का इस्तेमाल किया गया है। वहीं, दूसरी कैटेगरी में जीक नाम का तकिया आता है। 200 डॉलर (करीब 14 हजार रुपए) वाले इस तकिए में स्लीप सेंसर, स्पीकर और वाइब्रेटर दिया गया है, जो तेज खर्राटे लेने पर यूजर को धीरे से जगा देता...
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कभी चांद पर रहते थे एलियन!

15 सप्ताह पहले
क्या चांद पर कभी एलियनों का बसेरा हुआ करता था? वैज्ञानिकों के हालिया दावे को मानें तो ऐसा ही लगता है। उनका कहना है कि संभवतः उल्का पिंडों के ब्लास्ट के कारण एलियनों के रहने के अनुकूल वातावरण पैदा हुआ। जब यह हुआ, तब का वातावरण संभवतः आज की तुलना ज्यादा रहने योग्य रहा होगा।  ग्रहों पर शोध करने वाले दो वरिष्ठ वैज्ञानिकों के मुताबिक, संभवतः चांद पर चार अरब साल पहले जीवन जीने योग्य माहौल था। शोधकर्ताओं का दावा है कि यह स्थिति संभवतः 3.5 अरब साल पहले ज्वालामुखी विस्फोट के कारण भी पैदा हुई होगी। उस वक्त चांद से बड़ी मात्रा में गर्म गैस रिस रही थी। जिस गैस के कारण सतह पर पानी तैयार हुआ।  वॉशिंगटन स्टेट यूनिव...
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सूरज को छूने चला नासा का अंतरिक्षयान

15 सप्ताह पहले
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने सूरज पर अपना पहला मिशन 'पार्कर सोलर प्रोब' रवाना कर दिया है। एक गाड़ी के आकार का यह अंतरक्षियान सूरज की सतह के सबसे करीब 40 लाख मील की दूरी से गुजरेगा। इससे पहले किसी भी अंतरिक्षयान ने इतना ताप और इतनी रोशनी का सामना नहीं किया है। इस मिशन का उद्देश्य यह जानना है कि किस तरह ऊर्जा और गर्मी सूरज के चारों ओर घेरा बनाकर रखती है।  इससे पहले पार्कर सोलर प्रोब को लॉन्च करना था, लेकिन तकनीकी खामी की वजह से लॉन्चिंग को टाल दिया था। केप केनेवरल स्थित प्रक्षेपण स्थल से डेल्टा-4 रॉकेट के जरिए इस यान को अंतरिक्ष रवाना किया गया। यह यान अगले 7 सालों में सूरज के 7 चक्कर लगाएगा। धरती और सूरज के ...
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निजी संग्रह की होगी नीलामी

18 सप्ताह पहले
नील आर्मस्ट्रांग का निजी संग्रह इस साल के अंत में और 2019 में श्रृखंलाबद्ध नीलामी में बेचा जाएगा। नील ऑर्मस्ट्रांग चंद्रमा पर पैर रखने वाले पहले व्यक्ति थे। नीलामी की वस्तुओं में ऑर्मस्ट्रांग के ऐतिहासिक 20 जुलाई 1969 में चंद्रमा पर उतरने व निजी जीवन से जुड़ी कई यादगार चीजें शामिल हैं। टेक्सास स्थित नीलामी कंपनी हेरिटेज ऑक्शंस के अनुसार, इसमें 1903 के राइट ब्रदर्स के विमान के पंख व प्रोफेलर शामिल हैं, जिसे अंतरिक्ष यात्री अपने साथ चंद्रमा पर ले गए थे। इसमें मिशन की शुरुआत, उतरने व लौटने के यादगार अपोलो 11 रॉबिन मेडल व रजत पदक व अन्य यादगार चीजें भी शामिल हैं। हेरिटेज ऑक्शंस नीलामी की प्रक्रिया को संभालेगी। आर्मस्ट्...
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धरती के नीचे दबा है हीरे का बड़ा खजाना

18 सप्ताह पहले
वैज्ञानिकों ने धरती के नीचे हीरे के बड़े भंडार का पता लगाया है। मैसाच्युसट्स इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी के शोधकर्ताओं के मुताबिक, धरती के नीचे 10 खरब से हजार गुना ज्यादा हीरा दबा हुआ है। हालांकि, इसे निकाला नहीं जा सकता है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह हीरा धरती की सतह से करीब 90 से 150 मील (145 से 240 किलोमीटर) अंदर है। अभी तक कोई इंसान इतनी गहराई तक नहीं पहुंच पाया हैऔर न ही इतनी गहरी खुदाई की जा सकी है।  एमआईटी के डिपार्टमेंट ऑफ अर्थ, ऐटमॉसफरिक एंड प्लैनेटरी साइंसेज में रिसर्च साइंटिस्ट उलरिक फॉल कहते हैं, 'हम इस हीरे को बाहर नहीं ला सकते, लेकिन फिर भी यह इतना ज्यादा है, जिसके बारे में हमने पहले कभी सोचा भी नहीं ह...
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रोबोट 'सोफिया' को भाया भारत

20 सप्ताह पहले
इंसान की शक्ल वाली रोबोट मशीन 'सोफिया' ने जब भारत का दीदार किया तो उसमें जीवंत भावना का संचार हुआ। रोबोट सोफिया ने भारत को रंगीन, विविधताओं से पूर्ण और खूबसूरत बताया। हांगकांग की कंपनी हैनसन रोबोटिक्स ने इस मानव मशीन का विकास किया है। सोफिया अभिनेत्री आड्रे हेपबर्न की प्रतिकृति है। इसकी मानवीय शक्ल-सूरत और व्यवहार अन्य रोबोट से जुदा है और इसी खासियत के लिए यह चर्चित भी है।  मानव मशीन सोफिया में कृत्रिम बुद्धिमता (आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस),विजुअल डाटा प्रोसेसिंग और फेशियल रिकॉगनिशन का इस्तेमाल किया गया है। इसकी पहचानने की शक्ति अद्भुत है। यहां सातवें फोरएवर र्माक फोरम में सोफिया को लाया गया है। कमाल की बात तो यह...
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स्वचालित गाड़ियों से बचेंगे अरबों

20 सप्ताह पहले
स्वचालित गाड़ियां अरबों यूरो बचा सकती हैं और इससे भविष्य में सीओ 2 उत्सर्जन में कटौती हो सकती हैं। सिएशन ऑफ जर्मन चैंबर्स ऑफ इंडस्ट्री एंड कॉमर्स (डीआईएचके) द्वारा किए गए एक अध्ययन में इस बात का खुलासा हुआ है।  डीआईएचके विशेषज्ञों ने अध्ययन में कहा कि स्वचालित गाड़ियों की मदद से हर साल लगभग 8.3 अरब यूरो की बचत होगी और 62 लाख टन सीओ 2 उत्सर्जन कम होगा। जर्मन समाचार पत्र 'बिल्ड एम सोनंटैग' ने अध्ययन का हवाला देते हुए कहा कि स्वचालित गाड़ियां समय बचाने और सुरक्षा में वृद्धि कर ईंधन की खपत व परिचालन लागत को कम करेंगी। इसका औसत ड्राइविंग समय में ही 20 प्रतिशत की कमी होने की उम्मीद है, जिससे प्रतिवर्ष लगभग 4.1 अरब ...
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सामने आईं नवजात ग्रह की तस्वीरें

22 सप्ताह पहले
हाल ही में पहली बार वैज्ञानिकों के हाथ किसी नए ग्रह की रचना से जुड़ी तस्वीरें लगी हैं। इन तस्वीरों में यह ग्रह, गैस और धूल से घिरे पीडीएस70 नाम के सितारे के अंदर से गुजरता नजर आ रहा है। बताया जाता है कि इसकी पृथ्वी से दूरी लगभग 370 प्रकाश वर्ष है। इन तस्वीरों को यूरोपियन सदर्न ऑब्जर्वेटरी के काफी बड़े टेलिस्कोप से खींचा गया है।  वृहस्पति से भी काफी बड़ा है और इसकी दूरी अपने सितारे से उतनी ही है जितनी दूरी पर सूर्य से यूरेनस (वरुण) ग्रह स्थित है। इसके अलावा पता लगा है कि यहां के सतह का तापमान लगभग 1000 डिग्री सेल्सियस है और इसका वातावरण काफी बादलों से घिरा हुआ है। इस बारे में मीडिया से हुई बातचीत में जर्मनी की प्रसिद्...
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धरती से दूर जा रहा है चांद

24 सप्ताह पहले
चंद्रमा के पृथ्वी से दूर जाने के कारण हमारे ग्रह पर दिन लंबे होते जा रहे हैं। एक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि 1.4 अरब साल पहले धरती पर एक दिन महज 18 घंटे का होता था। पत्रिका प्रोसिडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज में प्रकाशित यह अध्ययन चंद्रमा से हमारे ग्रह के रिश्ते के गहरे इतिहास को पुन: स्थापित करता है। इसमें पाया गया कि 1.4 अरब साल पहले चंद्रमा पृथ्वी के ज्यादा करीब था और उसने पृथ्वी के अपनी धुरी के चारों ओर घूमने के तरीके को बदला। अमेरिका में विस्कॉन्सिन - मैडिसन विश्वविद्यालय के प्रफेसर स्टीफन मेयर्स ने कहा कि जैसे-जैसे चंद्रमा दूर जा रहा है तो धरती एक स्पिनिंग फिगर स्केटर की तरह व्यवहार कर रही है जो अपनी बाह...
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अंतरिक्ष यात्रियों ने किया स्पेसवॉक

26 सप्ताह पहले
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के दो फ्लाइट इंजिनियरों ने अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन से बाहर इस साल का पांचवां स्पेसवॉक पूरा किया। नासा के हवाले से बताया गया है कि ड्रयू फ्यूस्टेल और रिकी ऑर्नोल्ड ने अमेरिकी पूर्वी समयानुसार रात 2 बजकर 10 मिनट पर अपना स्पेसवॉक पूरा किया, जो 6 घंटे और 31 मिनट में पूरा हुआ। दोनों ऐस्ट्रोनॉट्स ने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन से बाहर निकलकर मरम्मत और अपग्रेडेशन का काम पूरा किया। इस दौरान स्टेशन के कूलिंग सिस्टम हार्डवेयर को अपग्रेड किया गया और नए संचार उपकरण लगाए गए। नासा ने इस स्पेसवॉक का लाइव टेलिकॉस्ट भी किया। बता दें कि आईएसएस पर 1998 से लेकर अब तक यह 210वां स्पेसवॉक था। नासा के मुत...
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मार्स की दिशा में छोटे सैटेलाइट्स

26 सप्ताह पहले
नासा के इनसाइट मार्स लैंडर की निगरानी के लिए विकसित दुनिया के पहले छोटे उपग्रह सफलतापूर्वक लाल ग्रह की तरफ बढ़ गए हैं। नासा की तरफ से जारी एक बयान में कहा गया है कि क्यूबसैट्स मार्को - ए और मार्को - बी पिछले एक सप्ताह से अपनी प्रणोदन प्रणाली (प्रोपल्शन सिस्टम) का इस्तेमाल कर रहे हैं। वे मंगल की दिशा प्राप्त करने के लिए इस प्रणाली का उपयोग कर रहे हैं। इस प्रक्रिया को प्रक्षेप पथ सुधार अभ्यास (ट्रैजेक्टरी करेक्शन मनूवर) कहा जाता है।  यह अंतरिक्ष यान को प्रक्षेपण के बाद मंगल ग्रह की तरफ अपने पथ की दिशा में सुधार की अनुमति देता है। दोनों क्यूब सैट ने इस अभ्यास को सफलतापूर्वक पूरा किया। इन दोनों छोटे उपग्रहों को इनसाइट लै...


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