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मंगलवार, 25 सितंबर 2018

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उसूलों के पक्के दत्त साहब

16 सप्ताह पहले
सुनील दत्त को पहचान भले ही एक अभिनेता के तौर पर मिली हो, लेकिन उन्हें सिर्फ एक अभिनेता के तौर पर देखना, उनकी शख्सियत के इस दूसरे सबसे बड़े आयाम को नजरअंदाज करना होगा। अब के पाकिस्तान स्थित पंजाब के झेलम जिले के खुर्द गांव में 6 जून 1929 को सुनील दत्त का जन्म हुआ था। वो वहां के एक जमींदार परिवार से थे। लेकिन बंटवारे के बाद अपनी जमीन-जायदाद छोड़ भारत आना पड़ा था। पिता का साया तो बचपन में ही उठ गया था। हिंदुस्तान की सरजमीं पर एक रिफ्यूजी की पहचान के साथ मुफलिसी में उनके जीवन का संघर्ष शुरू हुआ। पाकिस्तान से आकर उन्होंने हरियाणा के यमुनानगर के मंडोली गांव में शरण ली थी। इसके बाद उनका परिवार लखनऊ गया और सुनील दत्त लखनऊ से बंबई चले गए...
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दुर्गा खोटे ने खोली राह

17 सप्ताह पहले
सिनेमा न जाने कितने ही कलाकारों, निर्देशकों, लेखकों की कहानियां अपने अंदर समेटे हुए है। कई कहानियां अनकही और अनसुनी होती हैं। ऐसी ही एक कहानी है, अभिनेत्री दुर्गा खोटे की, जिन्होंने उस दौर में फिल्मों में काम करना शुरू किया जब प्रतिष्ठित परिवार की औरतें फिल्मों में काम नहीं करती थीं। दरअसल, भारतीय सिनेमा जगत में दुर्गा खोटे को एक ऐसी अभिनेत्री के रूप में याद किया जाता है, जिन्होंने महिलाओं और युवतियों को फिल्म इंडस्ट्री में काम करने का मार्ग प्रशस्त किया। दुर्गा खोटे जिस समय फिल्मों में आईं, उन दिनों फिल्मों में काम करने से पहले पुरुष ही स्त्री पात्र का भी अभिनय किया करते थे। दुर्गा खोटे ने फिल्मों में काम करने का फैसला किया और ...
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जिन्हें लता ने माना अपना मॉडल

18 सप्ताह पहले
लाहौर से लगभग 45 किलोमीटर दूर एक जगह है कसूर। यहां 21 सितंबर, 1926 को बेहद गरीब परिवार में जन्मीं अल्लाह वसाई अपनी दो बहनों, ईदन बाई और हैदरी बांदी में सबसे छोटी थीं। मशहूर सूफी दार्शनिक बुल्ले शाह की मजार इसी शहर में है। शहर की आबोहवा कुछ ऐसी है या बुल्ले शाह की रुमानियत अब भी इसकी फिजाओं में घुली हुई है कि यहां से एक से एक बड़े फनकार निकले और हिंदुस्तान में मशहूर हुए। यहां ब्रिटिश हिंदुस्तान की बात हो रही है। हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के जाने-माने नाम और संगीत के पटियाले घराने से ताल्लुक रखने वाले उस्ताद बड़े गुलाम अली खान साहब और उनके भाई उस्ताद बरकत अली खान साहब यहीं से हैं। और तो और पाकिस्तान के मशहूर जर्नलिस्ट इरशाद अहमद ह...
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सिनेमा में महात्मा

34 सप्ताह पहले
फिल्म गांधी देखी है आपने? उसमें महात्मा गांधी की अंतिम यात्रा के सीन में तीन लाख लोग शामिल हुए हैं। फिल्म बनाने वालों ने 40,000 एक्स्ट्रा कलाकारों के लिए अखबारों में विज्ञापन दिया। जगह जगह पर्चे बांटे गए और 31 जनवरी 1982 के दिन शूटिंग के लिए पहुंचे तीन लाख से ज्यादा लोग। उनमें से सिर्फ 94,560 कलाकारों को ही पैसा दिया गया। बाकी अपनी खुशी से शामिल हुए और यह तब था जबकि उन्हीं लोगों को शूटिंग में शामिल किया गया जो सफेद कपड़ों में आए। यह सिनेमा का आकर्षण था या बापू के लिए भारत की दीवानगी, समझना दिलचस्प है। गांधी जी जनमानस के नेता थे। जनसंचार की पढ़ाई में पढ़ाया जाता है कि महात्मा गांधी से बड़ा कोई ‘मास कम्युनिकेटर’ यानी आ...
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अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों

35 सप्ताह पहले
1964 में रिलीज हुई फिल्म ‘हकीकत’। यह देशभक्ति की भावना से भरी एक महान फिल्म तो थी ही, यह भारतीय फिल्म‍ इतिहास की पहली युद्ध विषय फिल्म भी थी। इस फिल्म ने रिलीज होने के बाद भारतीय सिनेमा की तस्वी‍र बदल गई। अलबत्ता फिल्म  निर्माता चेतन आनंद के लिए इस फिल्म को बनाने का सफर आसान नहीं रहा। चेतन आनंद देशभक्ति के साथ एक युद्ध विषय फिल्म बनाना चाहते थे। उस समय हिंदी सिनेमा में चॉकलेटी प्रेम कहानियों को बोलबाला था। किसी नए साहस के लिए संसाधन जुटाना आसान कार्य नहीं था। भारत-चीन युद्ध पर आधारित फिल्म ‘हकीकत’ के बारे में एन रघुरमन की प्रेरणादायक किताब ‘क्योंकि जीना इसी का नाम है’ में एक ...
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हरि काका बन गए संजीव

37 सप्ताह पहले
दिलीप कुमार हुए प्रभावित  1968 में रिलीज हुई 'राजा और रंक' की सफलता ने संजीव कुमार के पैर हिंदी फिल्मों में मजबूती से जमा दिए। संघर्ष (1968) में वे दिलीप कुमार के साथ छोटे-से रोल में नजर आए। छोटी सी भूमिका में उन्होंने बेहतरीन अभिनय कर अपनी छाप छोड़ी। दिलीप कुमार उनसे बेहद प्रभावित हुए। जवानी में बूढ़े का रोल संजीव कुमार उम्रदराज व्यक्ति की भूमिका निभाने में माहिर समझे जाते थे। 22 वर्ष की उम्र में ही उन्होंने एक नाटक में बूढ़े का रोल अदा किया था। कई फिल्मों में उन्होंने अपनी उम्र से अधिक उम्र वाले व्यक्ति के किरदार निभाए और काफी पसंद किए गए। गुलजार के साथ जोड़...
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2017 की ऑफबीट फिल्में

39 सप्ताह पहले
वर्ष 2017 बॉलीवुड के लिए बदलावों से भरा रहा। जहां एक तरह इस साल कई बड़े स्टार्स की फिल्में फ्लॉप हुईं, वहीं छोटे बजट की फिल्मों ने कमाल कर दिया। माइंडलेस सिनेमा के साथ इस वर्ष कई ऐसी जबरदस्त कंटेंट वाली फिल्में आईं जिन्होंने 2017 को यादगार वर्ष बना दिया। इन्हीं फिल्मों से राजकुमार राव जैसे टैलेंटेड स्टार्स भी उभरकर आए। इन फिल्मों ने नॉन कॉमर्शियल फिल्मों को लेकर दर्शक को भी सोचने पर मजबूर कर दिया। इसके साथ ही बॉलीवुड में ऐसी फिल्मों को नया नजरिया देने के साथ-साथ नया ट्रेंड भी स्थापित किया। इस ट्रेंड में बॉलीवुड के कमर्शियल फिल्मों के सुपरस्टार एक्टर अक्षय कुमार भी जुड़ते दिखे। छोटे बजट से तैयार की गई इन फिल्मों ने 2017 मे...
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एक किशोर कई अफसाने

40 सप्ताह पहले
महान अभिनेता एवं गायक केएल सहगल के गानों से प्रभावित किशोर कुमार उनकी ही तरह के गायक बनना चाहते थे। सहगल से मिलने की चाह लिए किशोर कुमार 18 वर्ष की उम्र मे मुंबई पहुंचे, लेकिन उनकी इच्छा पूरी नहीं हो पाई। उस समय तक उनके बड़े भाई अशोक कुमार बतौर अभिनेता अपनी पहचान बना चुके थे। भाई की इच्छा अशोक कुमार चाहते थे कि किशोर नायक के रूप में अपनी पहचान बनाएं, लेकिन खुद किशोर कुमार को अदाकारी की बजाय पार्श्व गायक बनने की चाह थी, जबकि उन्होंने संगीत की प्रारंभिक शिक्षा कभी किसी से नहीं ली थी। बॉलीवुड में अशोक कुमार की पहचान के कारण उन्हें बतौर अभिनेता काम मिल रहा था। ओपी नैय्यर की तारीफ किशोर कुमार को अपने जीवन में वह दौर भी देखन...
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शार्ट फिल्म, बिग मैसेज

42 सप्ताह पहले
इरा टाक इरा टाक द्वारा लिखित व निर्देशित शार्ट फिल्म 'इवन द चाइल्ड नोज' है, जिसमें एक छोटा बच्चा अपने चाचा को सफाई का सबक सिखाता है।  स्वच्छ भारत अभियान पर आधारित यह फिल्म यू ट्यूब पर उपलब्ध है। दो मिनट 23 सेकंड की इस फिल्म की इस फिल्म को सूचना और प्रसारण विभाग की तरफ से सर्टिफिकेट ऑफ  एक्सीलेंस से नवाजा गया है राखी रॉय  कोलकाता की राखी रॉय ने कई शॉर्ट...
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11 बार री-टेक हुआ था-टॉम अल्टार

75 सप्ताह पहले
शतरंज के खिलाड़ी का एक  सिक्वेंस था, जहां मैं सर रिचर्ड एटनबरो के साथ वाजिद अली शाह के बारे में चर्चा कर रहा हूं। हर बार शॉट दे रहा था और देख रहा था कि मिस्टर रे कैमरे के पीछे से ओके गुड शॉट कहकर एक और शॉट देने के लिए कह रहे है। लगभग 11 बार री-टे के बाद मैं और रिचर्ड सर समझ पाए कि असल में कैमरे के अंदर कोई रील ही नहीं है। पूरा ही डमी रिहर्सल था। मिस्टर रे पूरी तरह से होमवर्क  करने के बिना कोई काम नहीं करते थे। शूटिंग समाप्त होने के बाद उन्होंने मुझसे कहा था-टॉम वेरी गुड....कीप अप द गुड वर्क’ उनकी यह बातें आज भी मेरे अंदर एक  ऊर्जा भर देती हैं।
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'गोलमाल तो सिर्फ एक है

76 सप्ताह पहले
'गोलमाल का हल्का-फुल्का टाइटल ट्रैक  'गोलमाल है भाई, सब गोलमाल है आज भी बेहद प्रासंगिक है। कई ऐसी फिल्में हैं, जिनमें इस गाने के बोल को पाश्र्व संगीत के रूप में उपयोग किया गया है। प्रियदर्शन की फिल्म 'हेरा-फेरी  में जब अभिनेता सुनील शेट्टी परेश रावल द्वारा दिए गए कागज पर हस्ताक्षर करने वाले होते हैं, तो पृष्ठभूमि में यह गाना बज रहा होता है। पिछले कई साल से इसके री-मेक की बातें गाहे-बगाहे सुनने को मिलती रही हैं। पर हर बार यह बात घोषणा तक  ही सीमित रह जाती है। शेमारु के पास इस फिल्म के वीडियो राइट्स है। शेमारु के कर्ता-धर्ता हीरेन गाडा बताते हैं, 'यह फिल्म आज भी इतनी ज्यादा लोकप्रिय है कि इसका रीमेक बन...
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'एक्टर को वर्सेटाइल होना जरूरी'

80 सप्ताह पहले
कई आलोचक मानते हैं कि आपकी पहली फिल्म 'स्टूडेंट ऑफ  द ईयर' की आलिया के साथ आज की आलिया का कोई मेल नहीं है?वेल, मैंने इसे कांप्लीमेंट के तौर पर इसे लिया। हर एक्टर का सपना होता है कि वह वक्त के साथ अपने आपको वर्सेटाइल बनाए।उसकी कोशिश यही होती है कि दर्शकों को कुछ और नया दे। मेरी उम्र 23 साल है। मुझे पता नहीं है कि इंडस्ट्री में&n...


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