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बुधवार, 26 सितंबर 2018

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अजगर करै न चाकरी, पंछी करै न काम...

3 सप्ताह पहले
अजगर करै न चाकरी, पंछी करै न काम- भक्त कवि मलूक दास  के इस दोहे का इस्तेमाल जनजीन में आलसी लोगों का उपहास उड़ाने के लिए किया जाता रहा है। लेकिन नए शोध से पता चला है कि मलूक दास बड़े पते की बात इस दोहे में बता गए। इसीलिए अगर आप सोफे पर लेटकर पूरा वक्त ऐसे ही बिता देना चाहते हैं बिना कोई काम किए तो टेंशन की कोई बात नहीं है, क्योंकि ईवॉल्यूशन यानी विकास का क्रम भी आप ही जैसे लोगों का फेवर कर रहा है। एक नए शोध में बताया गया है कि अब ईवॉल्यूशन 'सर्वाइवल ऑफ द लेजीएस्ट' का फेवर कर रहा है। शोधकर्ताओं ने करीब 299 प्रजातियों की आदतों के बारे में अध्ययन करने के बाद यह निष्कर्ष निकाला है। उनका मानना है कि मेटाबॉलिज्म की रेट अधि...
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झारखंड के 26 किसान इजरायल रवाना

3 सप्ताह पहले
झारखंड के मुख्यमंत्री रघुबर दास ने कृषि तकनीक का अध्ययन करने के लिए 26 सदस्यीय किसानों का दल इजरायल रवाना किया है। दास ने टीम को विदा करने के दौरान कहा, "आप (किसान) रक्षा बंधन के पावन दिन किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से इजरायल जा रहे हैं। इजरायल की खेती की तकनीक सीखें और उसे अपने राज्य में अपनाएं और दूसरों के साथ अपने अनुभव साझा करें।" उन्होंने कहा, "क्षेत्रफल के हिसाब से इजरायल झारखंड से छोटा है, लेकिन खेती के कारण देश की प्रति व्यक्ति आय भारत से अधिक है। हमें हमेशा ऐसी जगह से सीखना चाहिए, जहां कुछ बेहतर हो रहा है। जहां तक खाद्यान्न उत्पादन का सवाल है, आज झारखंड इसमें काफी पिछड़ा हुआ है। लेकिन, वह दिन ...
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पर्यटकों को लुभाएंगे बुंदेलखंड के तालाब

4 सप्ताह पहले
बुंदेलखंड की पहचान देश और दुनिया में सूखा, पलायन और बेरोजगारी की है, मगर यहां रमणीक पर्यटन स्थल भी कम नहीं हैं। झांसी और उसके आसपास के तालाबों तथा बांधों के जरिए पर्यटकों को लुभाने की पहल उत्तर प्रदेश पर्यटन विकास निगम ने की है। इसके लिए एक टूर पैकेज तैयार किया गया है।  बुंदेलखंड भले ही सूखे के लिए बदनाम हो, मगर यह भी उतना ही सच है कि इस इलाके में जितने तालाब और बांध हैं, उतने शायद ही देश के किसी दूसरे हिस्से में हों। ललितपुर इकलौता ऐसा जिला है, जहां सात बांध हैं। मानसून के मौसम में तालाब और बांधों का नजारा ही निराला होता है, क्योंकि हिलेारें मारता पानी और लहरें सम्मोहित कर लेती हैं। यही कारण है कि उत्तर प्रदेश के पर...
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कश्मीर में नफरत बीच सद्भाव की उम्मीद

4 सप्ताह पहले
प्रधानाध्यापक पद से सेवानिवृत्त राजनाथ (72) उत्तर कश्मीर स्थित मणिगाम में पैदा हुए और वह तब से अपने पैतृक गांव में ही रहते हैं। अल्पसंख्यक कश्मीरी पंडित समुदाय के उनके परिवार के अधिकांश सदस्य 1990 के दशक में घाटी में मचे उत्पात के कारण गांव से पलायन कर गए, लेकिन राजनाथ अपनी पत्नी और बेटी के साथ अपनी जन्मभूमि पर ही टिके रहे।  राजनाथ हिंदू हैं और उनको अपने पड़ोसी मुसलमानों की सद्भावना पर काफी भरोसा है। इनमें नई पीढ़ी के ज्यादातर लोग उनके विद्यार्थी हैं। यही कारण है कि स्थानीय मुसलमानों ने राजनाथ की बेटी को निजी स्कूल में अध्यापिका की नौकरी हासिल करने में उनकी मदद की। इलाके के मुसलमान न सिर्फ राजनाथ के, बल्कि वहां घाटी ...
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बुलेट ट्रेन में महिलाओं के लिए अलग शौचालय

6 सप्ताह पहले
मुंबई-अहमदाबाद उच्च-गति रेल गलियारा परियोजना के लिए जमीन के अधिग्रहण में देरी से इसके लांच की तारीख को भले ही आगे खिसकाना पड़ सकता है, लेकिन रेलवे बुलेट ट्रेन के विभिन्न कल-पुरजों और यात्रियों की सुविधाओं को अंतिम रूप देने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।  बुलेट ट्रेन में यात्रियों को बाल पोषण के लिए अलग से कमरा मुहैया कराया जाएगा। बीमार लोगों के लिए सुविधा प्रदान की जाएगी और पुरुषों व महिलाओं के लिए अलग-अलग शौचालय बनाए जाएंगे। भारतीय रेलवे में ये सुविधाएं पहली बार प्रदान की जाएंगी। सभी ट्रेनों में 55 सीटें बिजनेस क्लास और 695 सीटें स्टैंडर्ड क्लास के लिए आरक्षित होंगी। ट्रेन में यात्रियों को सामान रखने के लिए जगह दी जाएग...
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फूल बेचकर बना कबड्डी का खिलाड़ी

7 सप्ताह पहले
अपने हौसले और लगन की बदौलत परेशानियों को पीछे छोड़ते हुए कबड्डी खिलाड़ी ललित कुमार अपने सपनों में रंग भर रहे हैं। ग्रेटर फरीदाबाद के गांव मवई के ललित 11वीं में पढ़ रहे हैं और परिवार का पेट भरने के लिए फूल भी बेचते हैं। इसके बाद भी मात्र 4 महीने की कबड्डी प्रैक्टिस में वह नेशनल स्तर पर खेल चुके हैं। उनके शानदार खेल को देखकर कबड्डी कोच विजयपाल शर्मा भी हैरत में पड़ गए। ललित कुमार ने घरेलू कार्य, पढ़ाई, खेल सब में सामंजस्य कायम रखा है। वह इंटरनेशनल स्तर पर खेलकर देश का नाम रोशन करना चाहते हैं, इसीलिए प्रैक्टिस में वह कभी पीछे नहीं रहते।  17 वर्षीय ललित कुमार ओल्ड फरीदाबाद के सीनियर सेकंडरी स्कूल में 11वीं के छात्र हैं। ...
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भेंड़ चराते-चराते खोद डाले 14 तालाब

7 सप्ताह पहले
कर्नाटक के मांड्या निवासी केरे कामेगौड़ा ने ऐसा काम करके दिखाया है, जो सबके लिए उदाहरण बन गया है। दरअसल, 82 वर्षीय कामेगौड़ा ने अपने हाथों से कुल 14 छोटे तालाब खोद डाले हैं। चामराजनगर जिले में स्थित मंदिरों में दर्शन करने जानेवाले लोग जब बेंगलुरु-महावल्ली-कोल्लेगल रोड से गुजरते हैं तो रास्ते में उनको रास्ते में लोगों से कामेगौड़ा के बारे में सुनने को मिलता है। कामेगौड़ा का घर डासनाडोड्डी में है और आज भी उनका परिवार झोपड़ियों में ही रहता है। अकसर कामेगौड़ा अपने घर की बजाय कुंदिनीबेट्टा गांव के आसपास भेड़ चराते हैं। कामेगौड़ा जानवर चराने के दौरान या तो पेड़ लगाते हैं या फिर गड्ढे खोदते हैं।  अब तक कुल 14 तालाब ब...
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बच्चों के भविष्य की 'मणि'

9 सप्ताह पहले
मणि की कोशिशों से कई स्पेशल बच्चों का जीवन रंगों से भर  गया है। 17 साल का ब्रैन जूड पहले न ठीक से अपनी बात कह पाता था, न कुछ समझ पता था, लेकिन अब वह न   सिर्फ   लिखने व अपनी बातें शेयर लगा है, बल्कि 2011 में स्पेशल ओलिंपिक भारत की एथलेटिक्स प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीता। 2017 में भी उसने इसी आयोजन में नेटबॉल में गोल्ड हासिल किया। विभोर भी ब्रैन जूड की तरह  कुछ नहीं कर पाता था, पूरी तरह से दूसरों पर निर्भर था। लेकिन आज वह 60 प्रतिशत तक आत्मनिर्भर हो चुका है। वह टेलिग्राफिक लैंग्वेज के जरिए बात कर सकता है। शानदार पेंटिंग्स बनाता है। 5 साल का आर्यन एडीएचडी (अटेंशन डेफिसिट हाइपर एक्टिव डिसॉर्डर) का शिकार था। 3 ...
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मदद की 'सुरभि'

9 सप्ताह पहले
बच्चों की पहली पाठशाला उनका घर होता है। वे अपने घर से तमाम बातें सीखते हैं। ऐसी ही एक अच्छी सीख सुरभि को भी अपने घर से मिली। यह सीख थी दूसरों की मदद करने की। आलमबाग की रहने वाली सुरभि नेशनल पीजी कॉलेज से ग्रेजुएशन कर रही हैं। 20 साल की कम उम्र में भी वह आज कई चेहरों पर मुस्कान बिखेर रही हैं। सुरभि पढ़ाई के साथ ही शहर के कुछ वृद्धाश्रमों और अनाथालयों से जुड़ी हैं। वह न सिर्फ बच्चों और बुजुर्गों की मदद करती हैं, बल्कि राह चलते अगर उन्हें कोई जरूरतमंद मिलता है तो वह उसकी भी मदद के लिए तैयार रहती हैं। साथ ही वह स्ट्रीट डॉग्स की भी देखभाल करती हैं।  'मैं अक्सर स्लम के बच्चों को खाना और कपड़े बांटती हूं।' एक घटना क...
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ट्वीट ने लड़कियों को तस्करी से बचाया!

10 सप्ताह पहले
आप क्या करेंगें अगर आप किसी ट्रेन में यात्रा करते समय कुछ लड़कियों को डरा हुआ व रोता हुआ देखेंगे? क्या आप उनसे मुंह फेर लेंगें या फिर बात की तह तक जाने की कोशिश करेंगें? 5 जुलाई को आदर्श श्रीवास्तव मुजफ्फरपुर-बांद्रा अवध एक्सप्रेस में यात्रा कर रहे थे। अपने कोच में उन्होंने 26 लड़कियों के एक ग्रुप को सहमा हुआ और रोता हुआ देखा। और उन्होंने उन लड़कियों की मदद करने का फैसला किया। यहां एक महत्वपूर्ण बात यह है कि आदर्श का ट्विटर अकाउंट 5 जुलाई, 2018 को ही बना है। अपने पहले पोस्ट में उन्होंने प्रशासन को उन लड़कियों के बारे में आगाह किया। उन्होंने तुरंत ट्रेन और कोच की सभी जानकारी के साथ ट्वीट किया। खबरों के मुताबिक वाराणसी और लखनऊ ...
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तिरंगा बनाने वाली देश की अकेली कंपनी

10 सप्ताह पहले
इन औरतों ने भले ही अपने गांव से बाहर की दुनिया नहीं देखी, लेकिन इनके द्वारा बनाए गए तिरंगों का पूरी दुनिया में सम्मान होता है। देश की राजधानी से 2,000 किलोमीटर (1,200 मील) दूर इस कंपनी में लगभग 400 कर्मचारी काम करते हैं, जिनमें से औरतों की संख्या पुरुषों की तुलना में बहुत ज्यादा है। कंपनी की सुपरवाइजर अन्नपूर्णा कोटी ने कहा, ‘औरतों के मुकाबले आदमियों में कम धैर्य होता है। बहुत बार जल्दी में वे माप गलत ले लेते हैं। ऐसा होने पर फिर से सिलाई उधेड़ कर दोबारा सारी प्रक्रिया करनी पड़ती है। 4 दिन के बाद वे काम छोड़कर चले जाते हैं और वापिस नहीं आते।’ यहां औरतें ही सब कुछ करती हैं। कपास की कताई से लकेर सिलाई तक। पि...
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मधुबनी से पटना पहुंची क्राफ्टवाला की टीम

11 सप्ताह पहले
बिहार के मुख्यमंत्री आवास पहुंचने वाला कोई भी व्यक्ति अब दुनियाभर में विख्यात लोक कला मधुबनी पेंटिंग की विविध कलाकृतियों को देख यहां की प्राचीन कला-संस्कृति से न केवल रूबरू होगा, बल्कि उनकी बारिकियों को भी समझेगा।  बिहार के मधुबनी स्टेशन परिसर को मधुबनी पेंटिंग से सजाने-संवारने के बाद गांव के कलाकर अब राजधानी पटना की दीवारों पर अपनी कला को उकेर कर उन्हें खूबसूरत बनाने में जुटे हैं। पटना स्थित प्रसिद्ध विद्यापति भवन की दीवारों पर भी कलाकार मधुबनी पेंटिंग उकेर कर इस भवन की रौनक बढ़ा रहे हैं।  बिहार के मिथिलांचल क्षेत्र खासकर दरभंगा और मधुबनी के अलावा नेपाल के कुछ क्षेत्रों में मधुबनी पेंटिंग की खास पहचान है...


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