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बुधवार, 19 दिसंबर 2018

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छात्रों ने मानव मूत्र से बनाई ईंट

5 सप्ताह पहले
दक्षिण अफ्रीका के केप टाउन विश्वविद्यालय के कुछ छात्रों ने पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए एक नया प्रयोग किया है, इन छात्रों ने ईंट बनाने के लिए मानव मूत्र का इस्तेमाल किया है। इन छात्रों ने मूत्र के साथ रेत और बैक्टीरिया को मिलाया जिससे वे सामान्य तापमान में भी मजबूत ईंट बना सकें। केप टाउन विश्वविद्यालय में इन छात्रों के निरीक्षक डायलन रैंडल ने बताया कि ईंट बनाने की यह प्रक्रिया ठीक वैसी ही है जैसे समुद्र में कोरल (मूंगा) बनता है। सामान्य ईंटों को भट्ठियों में उच्च तापमान में पकाया जाता है, जिसकी वजह से काफी मात्रा में कार्बन-डाईऑक्साइड बनती है और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाती है। ईंट बनाने की प्रक्रिया में सबसे पहले...
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96 वर्षीय महिला को 100 में 98 अंक

5 सप्ताह पहले
केरल की 96 वर्षीय कार्तियनियम्मा कृष्णपिल्ला ने चौथी कक्षा की परीक्षा 98 प्रतिशत अंकों के साथ पास करके यह साबित कर दिया है कि सीखने की कोई उम्रसीमा नहीं होती। कार्ति ने केरल के अक्षरलक्षम प्रोजेक्ट के तहत आयोजित होने वाली परीक्षा में 100 में से 98 नंबर हासिल किए हैं। यह एक ऐसा प्रोजेक्ट है जिसे राज्य में 100 फीसदी साक्षरता दर हासिल करने के लिए चलाया जा रहा है। कार्ति ने बताया कि उन्होंने अपने परपोतियों की मदद से यह कारनामा कर दिखाया। कार्ति ने बताया कि उनकी परपोतियां अपर्णा (12) और अंजना (9) ने उनकी खूब मदद की और लिखने, पढ़ने और जोड़ने के बारे में बताया। कार्ति का कहना है कि वह सिर्फ इतने से रुकने वाली नहीं हैं। अब उन्हों...
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पानी लिख रहा खुशहाली की इबारत

7 सप्ताह पहले
बुंदेलखंड में कहते हैं कि 'पानी है तो खुशहाली है और जवानी है।' जीवन के इस सूत्र वाक्य को हमीरपुर जिले के बसरिया गांव में पहुंचकर समझा और महसूस किया जा सकता है, क्योंकि यहां पानी की उपलब्धता ने खुशहाली की नई इबारत लिखनी शुरू कर दी है।  बुंदेलखंड के सबसे समस्याग्रस्त जिलों में से एक है हमीरपुर। यहां के सरीला विकासखंड मुख्यालय से जब उबड़-खाबड़ रास्तों से होते हुए और लगभग दो किलोमीटर पैदल चलने के बाद बरसाती नाले पड़वार पर ठहरा हुआ पानी नजर आता है, जो एक तरफ मन को सुकून देता है तो दूसरी ओर सवाल खड़े कर जाता है कि क्या इस क्षेत्र के बरसाती नाले में बरसात गुजर जाने के बाद भी पानी ठहरा मिल सकता है? बुंदेलखंड औ...
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श्रमिकों के पुस्तकालय से बदल रहा बच्चों का संसार

7 सप्ताह पहले
पहली नजर में यह एक छोटा-सा कमरा दिखता है, जिसकी एक तरफ की दीवार जर्जर हालत में है, लेकिन 25 वर्ग गज की यह जगह पंजाब की औद्योगिक नगरी लुधियाना के कारखाना श्रमिकों के बच्चों के लिए काफी मायने रखती है। कमरा छोटा जरूर है, मगर इसमें समाहित है ज्ञान का अगाध सागर। दरअसल, यह कमरा नहीं, बल्कि पुस्तकालय है। इसका संचालन खुद कारखाना मजदूरों के सहयोग से हो रहा है। बगैर किसी कॉरपोरेट या सरकारी अनुदान या सहायता के लुधियाना के औद्योगिक क्षेत्र के मध्य स्थित जमालपुर कॉलोनी इलाके के निवासी कामगारों और दिहाड़ी मजदूरों के इस प्रयास से बच्चों के जीवन में उजाला आ रहा है। बच्चे यहां रोज अपने माता-पिता के साथ पढ़ने आते हैं। 'शहीद भगत ...
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अजगर करै न चाकरी, पंछी करै न काम...

15 सप्ताह पहले
अजगर करै न चाकरी, पंछी करै न काम- भक्त कवि मलूक दास  के इस दोहे का इस्तेमाल जनजीन में आलसी लोगों का उपहास उड़ाने के लिए किया जाता रहा है। लेकिन नए शोध से पता चला है कि मलूक दास बड़े पते की बात इस दोहे में बता गए। इसीलिए अगर आप सोफे पर लेटकर पूरा वक्त ऐसे ही बिता देना चाहते हैं बिना कोई काम किए तो टेंशन की कोई बात नहीं है, क्योंकि ईवॉल्यूशन यानी विकास का क्रम भी आप ही जैसे लोगों का फेवर कर रहा है। एक नए शोध में बताया गया है कि अब ईवॉल्यूशन 'सर्वाइवल ऑफ द लेजीएस्ट' का फेवर कर रहा है। शोधकर्ताओं ने करीब 299 प्रजातियों की आदतों के बारे में अध्ययन करने के बाद यह निष्कर्ष निकाला है। उनका मानना है कि मेटाबॉलिज्म की रेट अधि...
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झारखंड के 26 किसान इजरायल रवाना

15 सप्ताह पहले
झारखंड के मुख्यमंत्री रघुबर दास ने कृषि तकनीक का अध्ययन करने के लिए 26 सदस्यीय किसानों का दल इजरायल रवाना किया है। दास ने टीम को विदा करने के दौरान कहा, "आप (किसान) रक्षा बंधन के पावन दिन किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से इजरायल जा रहे हैं। इजरायल की खेती की तकनीक सीखें और उसे अपने राज्य में अपनाएं और दूसरों के साथ अपने अनुभव साझा करें।" उन्होंने कहा, "क्षेत्रफल के हिसाब से इजरायल झारखंड से छोटा है, लेकिन खेती के कारण देश की प्रति व्यक्ति आय भारत से अधिक है। हमें हमेशा ऐसी जगह से सीखना चाहिए, जहां कुछ बेहतर हो रहा है। जहां तक खाद्यान्न उत्पादन का सवाल है, आज झारखंड इसमें काफी पिछड़ा हुआ है। लेकिन, वह दिन ...
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पर्यटकों को लुभाएंगे बुंदेलखंड के तालाब

16 सप्ताह पहले
बुंदेलखंड की पहचान देश और दुनिया में सूखा, पलायन और बेरोजगारी की है, मगर यहां रमणीक पर्यटन स्थल भी कम नहीं हैं। झांसी और उसके आसपास के तालाबों तथा बांधों के जरिए पर्यटकों को लुभाने की पहल उत्तर प्रदेश पर्यटन विकास निगम ने की है। इसके लिए एक टूर पैकेज तैयार किया गया है।  बुंदेलखंड भले ही सूखे के लिए बदनाम हो, मगर यह भी उतना ही सच है कि इस इलाके में जितने तालाब और बांध हैं, उतने शायद ही देश के किसी दूसरे हिस्से में हों। ललितपुर इकलौता ऐसा जिला है, जहां सात बांध हैं। मानसून के मौसम में तालाब और बांधों का नजारा ही निराला होता है, क्योंकि हिलेारें मारता पानी और लहरें सम्मोहित कर लेती हैं। यही कारण है कि उत्तर प्रदेश के पर...
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कश्मीर में नफरत बीच सद्भाव की उम्मीद

16 सप्ताह पहले
प्रधानाध्यापक पद से सेवानिवृत्त राजनाथ (72) उत्तर कश्मीर स्थित मणिगाम में पैदा हुए और वह तब से अपने पैतृक गांव में ही रहते हैं। अल्पसंख्यक कश्मीरी पंडित समुदाय के उनके परिवार के अधिकांश सदस्य 1990 के दशक में घाटी में मचे उत्पात के कारण गांव से पलायन कर गए, लेकिन राजनाथ अपनी पत्नी और बेटी के साथ अपनी जन्मभूमि पर ही टिके रहे।  राजनाथ हिंदू हैं और उनको अपने पड़ोसी मुसलमानों की सद्भावना पर काफी भरोसा है। इनमें नई पीढ़ी के ज्यादातर लोग उनके विद्यार्थी हैं। यही कारण है कि स्थानीय मुसलमानों ने राजनाथ की बेटी को निजी स्कूल में अध्यापिका की नौकरी हासिल करने में उनकी मदद की। इलाके के मुसलमान न सिर्फ राजनाथ के, बल्कि वहां घाटी ...
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बुलेट ट्रेन में महिलाओं के लिए अलग शौचालय

18 सप्ताह पहले
मुंबई-अहमदाबाद उच्च-गति रेल गलियारा परियोजना के लिए जमीन के अधिग्रहण में देरी से इसके लांच की तारीख को भले ही आगे खिसकाना पड़ सकता है, लेकिन रेलवे बुलेट ट्रेन के विभिन्न कल-पुरजों और यात्रियों की सुविधाओं को अंतिम रूप देने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।  बुलेट ट्रेन में यात्रियों को बाल पोषण के लिए अलग से कमरा मुहैया कराया जाएगा। बीमार लोगों के लिए सुविधा प्रदान की जाएगी और पुरुषों व महिलाओं के लिए अलग-अलग शौचालय बनाए जाएंगे। भारतीय रेलवे में ये सुविधाएं पहली बार प्रदान की जाएंगी। सभी ट्रेनों में 55 सीटें बिजनेस क्लास और 695 सीटें स्टैंडर्ड क्लास के लिए आरक्षित होंगी। ट्रेन में यात्रियों को सामान रखने के लिए जगह दी जाएग...
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फूल बेचकर बना कबड्डी का खिलाड़ी

19 सप्ताह पहले
अपने हौसले और लगन की बदौलत परेशानियों को पीछे छोड़ते हुए कबड्डी खिलाड़ी ललित कुमार अपने सपनों में रंग भर रहे हैं। ग्रेटर फरीदाबाद के गांव मवई के ललित 11वीं में पढ़ रहे हैं और परिवार का पेट भरने के लिए फूल भी बेचते हैं। इसके बाद भी मात्र 4 महीने की कबड्डी प्रैक्टिस में वह नेशनल स्तर पर खेल चुके हैं। उनके शानदार खेल को देखकर कबड्डी कोच विजयपाल शर्मा भी हैरत में पड़ गए। ललित कुमार ने घरेलू कार्य, पढ़ाई, खेल सब में सामंजस्य कायम रखा है। वह इंटरनेशनल स्तर पर खेलकर देश का नाम रोशन करना चाहते हैं, इसीलिए प्रैक्टिस में वह कभी पीछे नहीं रहते।  17 वर्षीय ललित कुमार ओल्ड फरीदाबाद के सीनियर सेकंडरी स्कूल में 11वीं के छात्र हैं। ...
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भेंड़ चराते-चराते खोद डाले 14 तालाब

19 सप्ताह पहले
कर्नाटक के मांड्या निवासी केरे कामेगौड़ा ने ऐसा काम करके दिखाया है, जो सबके लिए उदाहरण बन गया है। दरअसल, 82 वर्षीय कामेगौड़ा ने अपने हाथों से कुल 14 छोटे तालाब खोद डाले हैं। चामराजनगर जिले में स्थित मंदिरों में दर्शन करने जानेवाले लोग जब बेंगलुरु-महावल्ली-कोल्लेगल रोड से गुजरते हैं तो रास्ते में उनको रास्ते में लोगों से कामेगौड़ा के बारे में सुनने को मिलता है। कामेगौड़ा का घर डासनाडोड्डी में है और आज भी उनका परिवार झोपड़ियों में ही रहता है। अकसर कामेगौड़ा अपने घर की बजाय कुंदिनीबेट्टा गांव के आसपास भेड़ चराते हैं। कामेगौड़ा जानवर चराने के दौरान या तो पेड़ लगाते हैं या फिर गड्ढे खोदते हैं।  अब तक कुल 14 तालाब ब...
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बच्चों के भविष्य की 'मणि'

21 सप्ताह पहले
मणि की कोशिशों से कई स्पेशल बच्चों का जीवन रंगों से भर  गया है। 17 साल का ब्रैन जूड पहले न ठीक से अपनी बात कह पाता था, न कुछ समझ पता था, लेकिन अब वह न   सिर्फ   लिखने व अपनी बातें शेयर लगा है, बल्कि 2011 में स्पेशल ओलिंपिक भारत की एथलेटिक्स प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीता। 2017 में भी उसने इसी आयोजन में नेटबॉल में गोल्ड हासिल किया। विभोर भी ब्रैन जूड की तरह  कुछ नहीं कर पाता था, पूरी तरह से दूसरों पर निर्भर था। लेकिन आज वह 60 प्रतिशत तक आत्मनिर्भर हो चुका है। वह टेलिग्राफिक लैंग्वेज के जरिए बात कर सकता है। शानदार पेंटिंग्स बनाता है। 5 साल का आर्यन एडीएचडी (अटेंशन डेफिसिट हाइपर एक्टिव डिसॉर्डर) का शिकार था। 3 ...


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