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मंगलवार, 19 जून 2018

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सुलभ प्रणेता को निक्की पुरस्कार

एक दिन पहले
कभी स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर के लिए प्रसिद्ध उद्घोषक हरीश भिमानी ने कहा था कि लता जी को देखकर लगता है कि सफलता ने संपूर्णता का वरण कर लिया है। इसी बात को अगर सामाजिक सेवा के क्षेत्र में कार्य कर रहे लोगों के लिए कहना हो तो कहेंगे कि अगर सेवा और सफलता एक दूसरे के पूरक बन जाएं तो इतिहास का एक सर्ग निर्मित होता है। पूरी दुनिया में स्वच्छता और मानव सेवा के क्षेत्र में सुलभ प्रणेता डॉ. विन्देश्वर पाठक की ख्याति कुछ ऐसी ही है। सुलभ शौचालय जैसी सस्ती तकनीक के जनक और इसे पूरी दुनिया में शौचालय का सबसे किफायती और उपयोगी मॉडल के रूप में स्वीकृति दिलाने वाले डॉ. पाठक को प्रतिष्ठित निक्की एशिया पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। 
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डॉ. पाठक ने समाज सेवा के लिए अपना जीवन दिया - दीपक द्विवेदी

2 सप्ताह पहले
आज देश में विकास, शिक्षा, महिला सुरक्षा जैसे कई मुद्दों पर हम चर्चा करते हैं, भले ही हमारी इसमें कोई सक्रिय भूमिका हो या ना हो। पढ़ाई के बाद लोग डॉक्टर, इंजीनियर और आईएएस-पीसीएस बनते हैं, लेकिन इन सबसे अलग डॉ. पाठक ने अपने लिए समाज सेवा को चुना। उन्होंने समाज सेवा के लिए अपना पूरा जीवन दे दिया। ऐसी महान विभूति को आज पूरा देश नमन करता है। यह बातें दैनिक भास्कर के मुख्य संपादक दीपक द्विवेदी ने ‘भारत के सामाजिक-आर्थिक और सतत विकास में स्वच्छता और स्वास्थ्य का महत्व’ विषय पर आयोजित सेमिनार में कहीं। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास डॉ. पाठक तक ही सीमित न  रहें, उनके इन प्रयासों की धारा सतत बहती रहे, इसके लिए समाचार...
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किताबें कुछ कहना चाहती हैं तुम्हारे पास रहना चाहती हैं

4 सप्ताह पहले
बारूद के बदले हाथों में आ जाए  किताब तो अच्छा हो ऐ काश हमारी आंखों का इक्कीसवां  ख्वाब तो अच्छा हो। गुलाम मोहम्मद कासिर के लिखे इस शेर से किताबों के महत्व को समझा जा सकता है। सदियों से ज्ञान के रूप में किताबें ही मानव जीवन का वो आधार रही हैं जिस पर आदर्श जीवन और बेहतर दुनिया का सपना साकार हो सका है। लेकिन आधुनिक युग में तकनीक के इस्तेमाल की बढ़ती ललक ने किताबों के अस्तित्व पर भी सवालिया निशान लगा दिया। इन्हीं सवालों के जवाब ढ़ूंढती निर्देशक कमलेश के. मिश्र की लघु फिल्म ‘किताब’ का प्रीमियर नई दिल्...
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वैज्ञानिकों ने कैसे बदली आम आदमी की जिंदगी

5 सप्ताह पहले
कई बार प्रश्न उठते हैं कि भारत में विज्ञान ने आम लोगों के लिए क्या किया है और देश के विकास में इसकी कैसी भूमिका रही है। आजादी के बाद भारत ने विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में कई उपलब्धियां हासिल की हैं, जो जीवन को प्रतिदिन प्रभावित करती हैं, पर इनके बारे में लोगों को अधिक जानकारी नहीं है। ज्यादातर चर्चाएं अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा तक ही सीमित रही हैं। सूरत को हीरा कटाई के प्रमुख औद्योगिक केंद्र के रूप में स्थापित करने वाली लेजर मशीन से लेकर पीवीसी (पॉलिविनाइल क्लोराइड) के उपयोग से रक्त के रखरखाव को आसान बनाने, लोकतंत्र की शुचिता बनाए रखने वाली अमिट स्याही के निर्माण, प्लांट टिश्यू कल्चर तकनीक, जेनेरिक दवाओं के निर्माण और सूच...
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जल, जंगल और जमीन पर चिंतन

6 सप्ताह पहले
जम्मू केंद्रीय विश्वविद्यालय के पर्यावरण विज्ञान विभाग ने जलवायु परिवर्तन और इससे जुड़े सामाजिक सरोकार तथा इस मुद्दे पर भावी नजरिए को लेकर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन के मुख्य अतिथि सुलभ इंटरनेशनल के संस्थापक डॉ. विन्देश्वर पाठक थे। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के उप-कुलपति प्रोफेसर अशोक एमा के अलावा, आईजीपी जम्मू, डॉ. एसडी सिंह जामवाल, प्रोफेसर केके शर्मा, प्रोफेसर नील रतन, प्रोफेसर एनके त्रिपाठी डीन स्कूल ऑफ लाइफ साइंसेज, सीयू जम्मू, डॉ. प्रशांत श्रीवास्तव (बीएचयू), प्रो मिलाप शर्मा (जेएनयू), डॉ आरपी सिंह (बीएचयू), अनिल सिंह (अध्यक्ष, सुलभ, जम्मू-कश्मीर राज्य), एजीएम एसबीआई, अजय शर्मा जैसे गणमान्य व्यक्त...
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सुलभ ने बदली लाखों लोगों की जिंदगियां

6 सप्ताह पहले
  'जबतक हर भारतीय अपने आचरण में स्वच्छता नहीं लाएगा, स्वच्छ भारत अभियान सफल नहीं हो सकता। यह तथ्य है कि जो राष्ट्र स्वच्छता के महत्व को स्वीकार करता है, वह तेजी से विकास करता है और राष्ट्र जल्द ही संपन्न राष्ट्र बन जाता है। सुलभ हमेशा से ही स्वच्छता के इस महत्व को समझता और समझाता आया है। सुलभ की पहलों और अविष्कारों के बिना शायद भारत ऐसा नहीं होता जैसा आज दिखता है, लेकिन अभी हमें और लंबा सफर तय करना है, जिसमें राष्ट्र के सभी लोगों का योगदान जरुरी है।' यह बातें सुलभ इंटरनेशनल के संस्थापक डॉ. विन्द्वेश्वर पाठक ने नई दिल्ली स्थित नेहरु स्मारक संग्रहालय एवं पुस्तकालय (एनएमएमएल) द्वारा आयोजित ‘स्वच्छ भारत अभियान’ के तहत ‘र...
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सेवा ने किया सेवा करने वालों का सम्मान

8 सप्ताह पहले
  सितारों से सजी एक शाम और उस शाम में ध्रुव तारे की तरह चमकते सुलभ प्रणेता डॉ. विन्देश्वर पाठक। मौका था, नई दिल्ली के एनडीएमसी कन्वेंशन सेंटर में सोशल इंपावरमेंट विलेजर्स एसो​िसएशन (सेवा) के तत्वाधान में आयोजित आनंदोत्सव एवं बिहार गौरव सम्मान का। सेवा द्वारा आयोजित इस समारोह में मुख्य अतिथि केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री शिव प्रताप शुक्ल ने समाज सेवा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यों के लिए सुलभ इंटरनेशनल के संस्थापक डॉ. विन्देश्वर पाठक को ‘बिहार गौरव सम्मान’ से सम्मानित किया। इस मौके पर डॉ. पाठक के अलावा कई अन्य हस्तियों को भी सम्मानित किया गया, जिसमें पूर्व आईपीएस आमोद कंठ, बि...
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महान व्यक्तित्व का काव्यात्मक आख्यान

9 सप्ताह पहले
 प्रियंका तिवारी किसी व्यक्ति का जीवन जब न सिर्फ अपने समय में ही एक प्रेरक आदर्श, बल्कि वह अपने दौर के सबसे जरूरी सवालों को समाधानकारी विकल्प तक पहुंचाने का हेतु बन जाए तो इस असाधरणता का फलक बहुत व्यापक हो जाता है। राष्ट्रवादी कवि-आलोचक डॉ. राजेश ने जब इस विस्तृत फलक को सुलभ प्रणेता डॉ. विन्देश्वर पाठक के जीवन और कर्म में देखा तो इसे वे रचनात्मक सूत्र में पिरोने के इरादे से जुट गए। इसका नतीजा उनके द्वारा रचित अनूठा प्रबंध काव्य विन्देश्वर विभा है। डॉ. पाठक को केंद्र में रखकर रची गई इस काव्य कृति को लेकर वरिष्ठ आलोचक आचार्य निशांतकेतु ने सही ही लिखा है, डॉ. राहुल ने अपने प्रबंध काव्य में समकालीन ज्वलंत सामाजिक समस्याओं को रेखांकित करते हुए, समाधान-साधक पद्मभूषण डॉ. विन्दे...
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गुरुकुलम प्रणाली संस्कृति और धर्म के बारे में करती है जागरूक- मोहन भागवत

11 सप्ताह पहले
सुलभ स्वच्छता और सामाजिक सुधार आंदोलन के संस्थापक डॉ. विन्देश्वर पाठक, सरसंघचालक मोहन भागवत और आध्यत्मिक गुरु श्री श्री रवि शंकर कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ा जिले में आयोजित मैत्रेयी गुरुकुलम के वार्षिकोत्सव समारोह में शामिल हुए। समारोह में डॉ. पाठक, सर कार्यवाह भैयाजी जोशी, डॉ. सुधीर कुमार मिश्रा, सुब्रमण्यम सेठी और आभा कुमार ने गुरुकुल के नई शाखा ‘ब्राह्मी’ का उद्घाटन किया। इस मौके पर डॉ. पाठक ने सर संघ संचालक मोहन भागवत, श्री श्री रविशंकर को शॉल, मधुबनी पेटिंग और पुष्प गुच्छ देकर स्वागत किया। वहीं डॉ. विन्देश्वर पाठक को मोहन भागवत ने सामाजिक सेवा के क्षेत्र में उनके द्वारा किए गए उल्लेखनीय कार्यों के लिए सम्मा...
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ज्ञान योग और कर्म योग दोनों जीवन के अपरिहार्य रत्न

12 सप्ताह पहले
अध्यात्म की दुनिया में खुद को जानने का सबसे बेहतर साधन ज्ञान योग को माना जाता है। कहते हैं कि ज्ञान योग के द्वारा व्यक्ति ज्ञान के माध्यम से ईश्वर प्राप्ति की ओर अग्रसर होता है। ज्ञान योग की ही एक शाखा है वेदांत दर्शन, जिसके द्वारा व्यक्ति ज्ञान प्राप्ति की दिशा में अग्रसर होता है। वेदांत दर्शन मुख्यतः उपनिषद से लिए गए हैं। उपनिषद हिंदू धर्म के महत्वपूर्ण श्रुति धर्मग्रंथ हैं, साथ ही यह वैदिक साहित्य का अंतिम भाग है, इसीलिए इसको वेदांत कहते हैं। 'वेदांत' का अर्थ है - वेदों का सार। वेदांत की मुख्यता तीन शाखाएं हैं अद्वैत वेदांत, विशिष्ट अद्वैत और द्वैत। अद्वैत वेदांत का संस्कृत सहित्य में अति महत्वपूर्ण ग्रंथ है – य...
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अहर्निशं सेवामहे

14 सप्ताह पहले
पांच मार्च को सुलभ इंटरनेशनल ने अपना 48 वां स्थापना दिवस मनाया। दुनिया के सबसे बड़े गैर-सरकारी संगठनों में से एक सुलभ की यात्रा अपने आप में अनूठी है। सुलभ ने बिना कोई चंदा या लाभांश लिए 48 साल से निरंतर स्वच्छता, सेवा और सामाजिक सुधार के लिए सक्रिय है। सुलभ ने समाज में सबसे दीन-हीन समझे जाने वाले और मानव-मल ढोने वाले लोगों के लिए काम कर स्वच्छता के दर्शन को ही बदल दिया। शौचालयों के निर्माण के इतर सुलभ का दर्शन सेवा भाव ही रहा है। सेवा ही सुलभ का दर्शन इस अवसर पर सुलभ के संस्थापक डॉ. विन्देश्वर पाठक ने कहा कि सुलभ का दर्शन ही है &nda...
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देश को नेतृत्वकर्ताओं की आवश्यकता है -डॉ. पाठक

15 सप्ताह पहले
ग्लोबल लीडर्स फाउंडेशन (जीएलएफ) द्वारा नई दिल्ली के रफी मार्ग स्थित कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया के डिप्टी स्पीकर हॉल में "जीएलएफ ग्रीन एंबेसडर शिखर सम्मेलन और राष्ट्रीय उत्कृष्टता पुरस्कार - 2017" का आयोजन किया गया। इस अवसर पर, जीएलएफ ने "व्यक्तिगत उपलब्धियों के माध्यम से राष्ट्रीय विकास" पर एक शिखर सम्मेलन का भी आयोजन किया। इस समारोह में सिक्किम के पूर्व गवर्नर माननीय बाल्मीकि प्रसाद सिंह, मुख्य अतिथि के रूप में और सुलभ इंटरनेशनल फाउंडेशन के संस्थापक डॉ. विन्देश्वर पाठक, विशेष अतिथि के रूप में मौजूद थे। अन्य गणमान्य व्यक्तियों में पूर्व दिल्ली नगर निगम (ईडीएमसी) की महापौर नीना भगत और लखनऊ विश...


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