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बुधवार, 26 सितंबर 2018

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मोदी का जन्मदिन देश के लिए स्वच्छता और सेवा दिवस है

एक दिन पहले
‘स्वच्छ भारत अभियान के तहत नौ करोड़ से अधिक शौचालयों का निर्माण किया गया है, देश के 90 फीसदी इलाकों तक शौचालयों की सुविधा पहुंच चुकी है, 20 राज्य और साढ़े चार लाख गांवों को ‘खुले में शौच से मुक्त’ (ओडीएफ) घोषित किया जा चुका है। ‘स्वच्छ भारत अभियान’ के तहत ‘स्वच्छता ही सेवा है’ आज देश के आम लोगों की भागीदारी और जुनून के साथ एक बहुत प्रभावी मिशन बन चुका है।’ यह बातें सिर्फ आंकड़े भर नहीं हैं, बल्कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पिछले 4 सालों की कड़ी मेहनत का नतीजा है, शायद इसीलिए उनके जन्मदिन 17 सितंबर को पूरे देश में स्वच्छता दिवस के रूप में मनाया गया। स्वच्छता और शौचालय क्रांति की देश...
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सुलभ प्रणेता डॉ. पाठक को 'जीवन गौरव सम्मान'

3 सप्ताह पहले
डॉ. बाबा साहेब आंबेडकर मराठवाड़ा विश्वविद्यालय औरंगाबाद ने 23 अगस्त 2018 को अपना 60 वां स्थापना दिवस मनाया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति, प्रोफेसर बी.ए. चोपडे ने सुलभ सैनिटेशन और सामजिक सुधार आंदोलन के संस्थापक डॉ. विन्देश्वर पाठक को समाज के प्रति उनके योगदान के लिए ‘जीवन गौरव सम्मान’ से नवाजा और उन्हें एक स्मृति चिन्ह, मानपत्र और शाल भेंट की। भाजपा नेता और महाराष्ट्र विधान सभा के अध्यक्ष हरिभाऊ बागडे ने डॉ. पाठक को यह प्रतिष्ठित सम्मान दिया। विश्वविद्यालय हर साल उन प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों को ‘जीवन गौरव सम्मान’ से सम्मानित करता है, जो सामाजिक, शैक्षणिक, चिकित्सा, पर्यटन और पत्रकारिता आदि के क...
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संयुक्त राष्ट्र महासभा की नई अध्यक्ष के साथ डॉ. पाठक ने दिल्ली हाट का दौरा किया

4 सप्ताह पहले
संयुक्त राष्ट्र महासभा की नव-निर्वाचित अध्यक्षा मारिया फर्नांडा एस्पिनोसा गारिस भारत के दौरे पर हैं। उन्होंने 11 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि नई दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी के साथ एक सफल बैठक की, जहां दोनों संयुक्त राष्ट्र की दक्षता में सुधार करने पर सहमत हुए। वहीं भारत सरकार के विदेश मंत्रालय ने राजधानी दिल्ली के आईएनए स्थित दिल्ली हाट में अध्यक्षा गारिस के सम्मान में एक स्वागत बैठक आयोजित की। गारिस ने इस बैठक में, भारत में काम कर रहे विभिन्न गैर सरकारी संगठनों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की। गारिस ने यहां एनजीओ के लोगों से बातचीत की और भारतीय समाज के कल्याण के लिए, वे अपने संबंधित क्...
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‘सुलभ ऑनेस्ट मैन ऑफ द ईयर अवार्ड’

5 सप्ताह पहले
26 नवंबर 1998 को अटल जी को एक ऐसा पुरस्कार मिला, जो उनके कृतित्व और यश के साथ जीवन में अटल निष्कलंकता की देन था। ‘सुलभ ऑनेस्ट मैन ऑफ द ईयर अवार्ड’ के नाम पर यह प्रतिष्ठित पुरस्कार उन्हें सुलभ इंटरनेशनल की तरफ से दिया गया। उन्हें यह पुरस्कार वर्ष 1997 के लिए दिया गया था औऱ तब वे विपक्ष के नेता थे। पर 1998 में वे प्रधानमंत्री बन चुके थे, सो ​सरकारी एजेंसियों ने उन्हें पुरस्कार स्वीकार करने से यह कहकर मना किया कि आप प्रधानमंत्री हैं इसीलिए आपको किसी एनजीओ से पुरस्कार ग्रहण नहीं करना चाहिए। अटल जी ने उनसे कहा कि यह पुरस्कार मैंने तब स्वीकारा था जब मैं विपक्ष में था। इसीलिए प्रधानमंत्री बनने के बाद इस पुरस्कार को अस्वीकार न...
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‘होप’ एक स्वास्थ्य आंदोलन

6 सप्ताह पहले
एक लड़का था जो एक मेडिकल टेस्ट में खुद को एचआईवी पॉजिटिव पाता है, जैसे ही उसके गांव वालों को इसके बारे में पता चला, उन्होंने उससे मिलना-जुलना और बातें करना बंद कर दिया। यही नहीं, उसकी अपनी मां ने भी उसे छोड़ दिया। ऐसा इसीलिए है, क्योंकि लोगों को एड्स और हेपेटाइटिस जैसी बीमारियों के बारे में ज्यादा पता नहीं है और यह आम गलत धारणा है कि जो भी इन बीमारियों से पीड़ित रोगी को छुएगा, अपने आप ही संक्रमित हो जाएगा। वह लड़का अपने घर से भाग गया और दिल्ली आ गया। एक नए स्थान पर जिंदा रहने के तमाम संघर्षों के बीच, वह बिना पैसों के खतरनाक बीमारी से लड़ रहा था। एक दिन उसने एक गैर सरकारी संगठन की सड़क किनारे लगा हुआ होर्डिंग देखा, यह संगठन ए...
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मधुबनी स्टेशन की सुंदरता पर फिल्म

9 सप्ताह पहले
बिहार का मधुबनी रेलवे स्टेशन विगत कुछ महीनों से अपने अनोखे सौंदर्य को लेकर चर्चा में है। पूरे स्टेशन परिसर को जिस तरह मशहूर मधुबनी पेंटिंग से संवारा गया है, उसकी चर्चा विदेशी मीडिया तक में रही है। मधुबनी पेंटिंग के जरिए इस स्टेशन के सौंदर्यीकरण को लेकर एक डाक्यूमेंट्री फिल्म की शूटिंग शुरू हो चुकी है। सुलभ इंटरनेशनल के संस्थापक एवं रेलवे स्वच्छता मिशन के ब्रांड एंबेसेडर डॉ. विन्देश्वर पाठक की परिकल्पना एवं निर्देशन में इस डाक्यूमेंट्री की शूटिंग शुरू हुई है। यह फिल्म पूरी तरह स्वच्छता पर आधारित है। कैसे एक गंदे रेलवे स्टेशन (मधुबनी) को मधुबनी पेंटिंग ने स्वच्छता में पूरे देश में दूसरा स्थान दिलाया गया, उस अभिनव पहल से जुड़े तमाम...
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सुलभ प्रणेता के लिए सेवा ही धर्म

13 सप्ताह पहले
मैं अपनी संस्था सुलभ के संस्थापक डॉ. विन्देश्वर पाठक को टोक्यो में ‘निक्की एशिया पुरस्कार’ दिए जाने पर बधाई देता हूं। यह पुरस्कार प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों में से एक है। न सिर्फ मैं बल्कि मेरे साथ आप भी इस बात से पूरी तरह अवगत हैं कि इस पुरस्कार के लिए डॉ. पाठक से योग्य कोई और व्यक्ति हो ही नहीं सकता था। उनमें कई ऐसी विलक्षणताएं हैं, जिससे प्रेरित होकर मेरी इच्छा होती है कि मैं पूरी दुनिया के आगे यह कहूं, ‘देखो, कितना अद्भुत व्यक्ति न सिर्फ इस दुनिया में न सिर्फ जीवित है, बल्कि वह हमारे बीच है। हम वाकई काफी सौभाग्यशाली हैं।’  डॉ. विन्देश्वर पाठक के रूप में भारत को ईश्वर से एक अनुपम भ...
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सुलभ प्रणेता को निक्की पुरस्कार

14 सप्ताह पहले
कभी स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर के लिए प्रसिद्ध उद्घोषक हरीश भिमानी ने कहा था कि लता जी को देखकर लगता है कि सफलता ने संपूर्णता का वरण कर लिया है। इसी बात को अगर सामाजिक सेवा के क्षेत्र में कार्य कर रहे लोगों के लिए कहना हो तो कहेंगे कि अगर सेवा और सफलता एक दूसरे के पूरक बन जाएं तो इतिहास का एक सर्ग निर्मित होता है। पूरी दुनिया में स्वच्छता और मानव सेवा के क्षेत्र में सुलभ प्रणेता डॉ. विन्देश्वर पाठक की ख्याति कुछ ऐसी ही है। सुलभ शौचालय जैसी सस्ती तकनीक के जनक और इसे पूरी दुनिया में शौचालय का सबसे किफायती और उपयोगी मॉडल के रूप में स्वीकृति दिलाने वाले डॉ. पाठक को प्रतिष्ठित निक्की एशिया पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। 
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डॉ. पाठक ने समाज सेवा के लिए अपना जीवन दिया - दीपक द्विवेदी

16 सप्ताह पहले
आज देश में विकास, शिक्षा, महिला सुरक्षा जैसे कई मुद्दों पर हम चर्चा करते हैं, भले ही हमारी इसमें कोई सक्रिय भूमिका हो या ना हो। पढ़ाई के बाद लोग डॉक्टर, इंजीनियर और आईएएस-पीसीएस बनते हैं, लेकिन इन सबसे अलग डॉ. पाठक ने अपने लिए समाज सेवा को चुना। उन्होंने समाज सेवा के लिए अपना पूरा जीवन दे दिया। ऐसी महान विभूति को आज पूरा देश नमन करता है। यह बातें दैनिक भास्कर के मुख्य संपादक दीपक द्विवेदी ने ‘भारत के सामाजिक-आर्थिक और सतत विकास में स्वच्छता और स्वास्थ्य का महत्व’ विषय पर आयोजित सेमिनार में कहीं। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास डॉ. पाठक तक ही सीमित न  रहें, उनके इन प्रयासों की धारा सतत बहती रहे, इसके लिए समाचार...
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किताबें कुछ कहना चाहती हैं तुम्हारे पास रहना चाहती हैं

18 सप्ताह पहले
बारूद के बदले हाथों में आ जाए  किताब तो अच्छा हो ऐ काश हमारी आंखों का इक्कीसवां  ख्वाब तो अच्छा हो। गुलाम मोहम्मद कासिर के लिखे इस शेर से किताबों के महत्व को समझा जा सकता है। सदियों से ज्ञान के रूप में किताबें ही मानव जीवन का वो आधार रही हैं जिस पर आदर्श जीवन और बेहतर दुनिया का सपना साकार हो सका है। लेकिन आधुनिक युग में तकनीक के इस्तेमाल की बढ़ती ललक ने किताबों के अस्तित्व पर भी सवालिया निशान लगा दिया। इन्हीं सवालों के जवाब ढ़ूंढती निर्देशक कमलेश के. मिश्र की लघु फिल्म ‘किताब’ का प्रीमियर नई दिल्...
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वैज्ञानिकों ने कैसे बदली आम आदमी की जिंदगी

19 सप्ताह पहले
कई बार प्रश्न उठते हैं कि भारत में विज्ञान ने आम लोगों के लिए क्या किया है और देश के विकास में इसकी कैसी भूमिका रही है। आजादी के बाद भारत ने विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में कई उपलब्धियां हासिल की हैं, जो जीवन को प्रतिदिन प्रभावित करती हैं, पर इनके बारे में लोगों को अधिक जानकारी नहीं है। ज्यादातर चर्चाएं अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा तक ही सीमित रही हैं। सूरत को हीरा कटाई के प्रमुख औद्योगिक केंद्र के रूप में स्थापित करने वाली लेजर मशीन से लेकर पीवीसी (पॉलिविनाइल क्लोराइड) के उपयोग से रक्त के रखरखाव को आसान बनाने, लोकतंत्र की शुचिता बनाए रखने वाली अमिट स्याही के निर्माण, प्लांट टिश्यू कल्चर तकनीक, जेनेरिक दवाओं के निर्माण और सूच...
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जल, जंगल और जमीन पर चिंतन

20 सप्ताह पहले
जम्मू केंद्रीय विश्वविद्यालय के पर्यावरण विज्ञान विभाग ने जलवायु परिवर्तन और इससे जुड़े सामाजिक सरोकार तथा इस मुद्दे पर भावी नजरिए को लेकर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन के मुख्य अतिथि सुलभ इंटरनेशनल के संस्थापक डॉ. विन्देश्वर पाठक थे। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के उप-कुलपति प्रोफेसर अशोक एमा के अलावा, आईजीपी जम्मू, डॉ. एसडी सिंह जामवाल, प्रोफेसर केके शर्मा, प्रोफेसर नील रतन, प्रोफेसर एनके त्रिपाठी डीन स्कूल ऑफ लाइफ साइंसेज, सीयू जम्मू, डॉ. प्रशांत श्रीवास्तव (बीएचयू), प्रो मिलाप शर्मा (जेएनयू), डॉ आरपी सिंह (बीएचयू), अनिल सिंह (अध्यक्ष, सुलभ, जम्मू-कश्मीर राज्य), एजीएम एसबीआई, अजय शर्मा जैसे गणमान्य व्यक्त...


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