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शुक्रवार, 20 अक्टूबर 2017

water-and-other-questions

पानी का हाल और सवाल

4 दिन पहले
मानव जीवन के लिए जल आवश्यक है। वास्तव में मानव शरीर का 60 प्रतिशत हिस्सा जल है। यह कहा जा सकता है कि जल स्वयं जीवन है। जल के बिना किसी भी क्षेत्र में मानवीय गतिविधि पूरी नहीं हो सकती। आज विश्व इस विषय पर चर्चा कर रहा है कि क्या सूचना प्रवाह ऊर्जा प्रवाह से अधिक महत्वपूर्ण है। यह एक अच्छा प्रश्न है, लेकिन जल प्रवाह भी महत्वपूर्ण है। यह अर्थव्यवस्था और पारिस्थितिकी और मानव समानता का मूल है। जलवायु परिवर्तन और संबंधित पर्यावरण चिंताओं को देखते हुए जल विषय के रूप में और महत्वपूर्ण हो गया है। भारत में हमारे कुछ अग्रणी कार्यक्रमों के केंद्र में जल है। मैं यह कहना चाहूंगा कि भारत का आधुनिकीकरण जल प्रबंधन के आधुनिकीकरण पर निर्भर ...
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पधारो म्हारे देस!

4 दिन पहले
भारत को उसकी मेहमाननवाजी के लिए विश्वभर में जाना जाता है। अब तो कानून व्यवस्था और अन्य सुविधाअों की दृष्टि से भी भारत वर्ल्ड टूरिस्ट सर्किट का एक अहम डेस्टिनेशन बन गया है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में संवाद ‘मन की बात’ में लोगों से अपील की कि वे अद्भुत भारत के विभिन्न अद्भुत स्थलों को खोजें। प्रधानमंत्री का यह संदेश सरकार की इश मंशा को दिखाता है कि वह लोगों को पर्यटन से जुड़े फायदे के प्रति जागरूक करना चाहती है। पर्यटन मंत्रालय ने शहरी इलाकों में ‘बी एंड बी’ (ब्रेड एंड ब्रेकफास्ट) भवनों के विकास एवं निर्माण को बढ़ावा दिया है लेकिन अब समय आ गया है कि ग्रामीण इलाकों में गृह निवास (होम स्टे) बना...
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आत्मा, विवेक और स्वच्छ भारत

एक सप्ताह पहले
महाराष्ट्र के वाशिम जिले के साईखेड़ा गांव की रहने वाली संगीता अहवाले ने अपने घर में शौचालय का निर्माण करवाने के लिए अपना मंगलसूत्र तक बेच दिया। छत्तीसगढ़ के धमतारी जिले में स्थित कोटाभारी गांव की 104 वर्ष आयु की वृद्धा कुंवर बाई ने अपने घर में शौचालय बनवाने के लिए अपनी बकरियां बेच दीं। कोलारस ब्लॉक के गोपालपुरा गांव की आदिवासी नववधू प्रियंका ससुराल में शौचालय न होने के कारण अपने माता-पिता के घर लौट आई। आंध्रप्रदेश के गुंटुर जिले की एक मुस्लिम महिला ने अपनी नई पुत्रवधू को एक शौचालय उपहार में दिया। ऐसे अनेक उदाहरण हैं, जहां लड़कियों ने ऐसे घरों में शादी करने से मना कर दिया जहां शौचालय नहीं बने थे। इन सभी मामलों में महिलाएं ही आत्म...
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लक्ष्यहीन होना दृष्टिहीन होने से भी बुरा

एक सप्ताह पहले
एक यूनानी कहावत है कि दुनिया उतनी ही है, जितनी आपके आंखों के आगे है। महान यूनानी दार्शनिक सुकरात ने इस कहावत को अपनी तरह से बदला और कहा कि आंखें हैं तो जहान है। वैसे सुकरात ने इस बात को दार्शनिक अंदाज में कहा था, पर इस बात से कौन इंकार कर सकता है कि दृष्टि बाधित लोगों के लिए जीवन की चुनौतियां आम लोगों के मुकाबले काफी बढ़ जाती है। वैसे आम अनुभव यह बताता है कि दृष्टि बाधित लोगों में जहां गजब की बोधगम्यता होती है, वहीं वे कुछ असामान्य किस्म के गुणों से संपन्न होते हैं। इतिहास में विकलांगता के बावजूद अनुपम उपलब्धियां हासिल करने वाली महान विभूतियों की कमी नहीं, परंतु दृष्टिहीनता एवं बधिरता जैसी दोहरी विकलांगता के बावजूद न केवल अपना ज...
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मेरा जीवन, मेरा संदेश

2 सप्ताह पहले
महात्मा गांधी ने अपने जीवन दर्शन को इन शब्दों "मेरा जीवन ही मेरा संदेश है" से व्यक्त किया है। उनका विविध और सक्रिय व्यक्तित्व सत्य और सिर्फ सत्य पर ही आधारित था। अहिंसा इनके जीवन का दूसरा सबसे बड़ा सिद्धांत था। भारत छोड़ो आंदोलन की पूर्व संध्या पर 8 अगस्त 1942 को बंबई में आयोजित अखिल भारतीय कांग्रेस समिति की बैठक में महात्मा गांधी ने घोषणा की थी कि मैं अपने जीवन की पूरी अवधि को जीना चाहता हूं और मेरे अनुसार पूरी अवधि 125 वर्षों की है। उस समय तक न केवल भारत, बल्कि पूरी दुनिया मुक्त (आजाद) हो जाएगी। मैं नहीं मानता कि आज अंग्रेज स्वतंत्र हैं, मैं ये भी नहीं मानता कि आज अमेरिकन स्वतंत्र हैं। वे क्या करने के लिए स्वतंत्र है...
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देसी माटी का बहादुर लाल

2 सप्ताह पहले
एक अत्यंत साधारण परिवार में जन्म  लेने वाला कोई व्यक्ति भी देश के सर्वोच्च शासकीय पद पर पहुंच सकता है, यह जहां भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी खूबी और ताकत है तो वहीं इसके सबसे प्रेरक उदाहरण हैं लाल बहादुर शास्त्री। शास्त्री जी के जीवन में एक तरफ जहां काफी संघर्ष रहा, वहीं वे इन संघर्षपूर्ण चुनौतियों से आगे निकलते हुए आजादी से पूर्व ही देश की पहली पांत के नेताओं में शुमार होने लगते हैं, वे हमें प्रेरणा और संवेदना के कई स्तरों पर प्रभावित करते हैं। उनका जन्म 2 अक्टूबर 1901 को उत्तर प्रदेश के वाराणसी से सात मील दूर एक छोटे से रेलवे टाउन, मुगलसराय में हुआ था। उनके पिता एक स्कूल शिक्षक थे, जिनकी मृत्यु तब हुई जब शास्त्री महज डेढ़ ...
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बुलेट युग में भारत

3 सप्ताह पहले
भारत भी अब दुनिया के उन 15 देशों में शामिल होने की राह पर अग्रसर है, जहां हाईस्पीड कॉरिडोर बनेगा और बुलेट ट्रेन चलेगी। दशकों से देखा जा रहा यह सपना भारत की आजादी के 75वें ऐतिहासिक साल में जमीन पर उतर आएगा। इस ऐतिहासिक मौके पर लोग बुलेट ट्रेन से यात्रा करना आरंभ कर देंगे। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के प्रधानमंत्री शिंजो अबे ने इस बहुप्रतीक्षित परियोजना को भूमि पूजन रेलवे रेलवे स्टेडियम परिसर में किया। इस मौके पर तमाम दिग्गज मौजूद थे। मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर के चयन के पीछे कई कारण हैं। मुंबई और अहमदाबाद देश के व्यापारिक गतिविधियों के प्रमुख केंद्र हैं। हाल में अहमदाबाद विश्व धरोहर नगरों की बेहद प्रतिष्ठित सूची में भ...
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समाज के अंतिम व्यक्ति का विकास ही प्रगति का पैमाना

3 सप्ताह पहले
कहते हैं पूत के पांव पालने में ही नजर आ जाते हैं। महापुरुषों में बचपन से ही कुछ विलक्षणता होती है। पंडितजी के बचपन का एक बड़ा प्रेरक प्रसंग हैं। वह सब्जी लेने बाजार गए और सब्जी बेचने वाली वृद्धा को चवन्नी का भुगतान कर दिया। घर लौटते समय उन्होंने जेब टटोली तो, देखा कि वह वृद्धा को खोटी चवन्नी दे आए हैं। उनका मन इतना दुःखी और द्रवित हो गया कि वह दौड़ते हुए उस वृद्धा के पास गए और क्षमा प्रार्थना के साथ खरी चवन्नी दे दी। महापुरुष ऐसे ही होते हैं। वे स्वयं कितने भी कष्ट उठा लें, लेकिन अपने कारण दूसरों को कष्ट नहीं होने देते। जीवनभर सादगी की प्रतिमूर्ति रहे पंडित दीनदयाल उपाध्याय, डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी के सर्वप्रिय वैसे ही नही...
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न्यू इंडिया की रफ्तार

4 सप्ताह पहले
साढ़े तीन साल पहले तक जिस ‘गुजरात मॉडल’ की चर्चा होती थी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब इसे ‘न्यू इंडिया’ विजन की शक्ल में बदल दिया है। स्किल से डिजिटल इंडिया का मंत्र देने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आजादी के 75 साल पूरे होते-होते भारत को दुनिया के उन देशों की कतार में लाने का संकल्प लिया है, जिन्हें सर्वाधिक विकसित और समृद्ध माना जाता है। इस लिहाज से 14 सितंबर का दिन भारत के इतिहास में स्वर्णिम दिवस बन गया जब प्रधानमंत्री नरेंद मोदी और जापान के प्रधानमंत्री शिंजो अाबे ने महत्वाकांक्षी अहमदाबाद-मुंबई हाई स्पीड नेटवर्क परियोजना (बुलेट ट्रेन परियोजना) की आधारशिला रखी।  नरेंद्र मोदी और उनकी सर...
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नए भारत की जीवनरेखा

4 सप्ताह पहले
मुझे प्रसन्नता है कि मेरे अनन्य मित्र जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे का भारत में और विशेष रूप से गुजरात में स्वागत करने का अवसर मुझे मिला है। प्रधानमंत्री आबे और मैं कई बार अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों की साइडलाइंस पर मिले हैं, लेकिन भारत में उनका स्वागत करना मेरे लिए विशेष रूप से हर्ष का विषय होता है। मुझे उनके साथ साबरमती आश्रम जाने का अवसर मिला। हम दोनों दांडी कुटीर भी गए। हम दोनों ने मिल कर जापान के सहयोग से बनाए जा रहे मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेलवे प्रोजेक्ट का भूमिपूजन किया। यह एक बहुत बड़ा कदम है। यह सिर्फ हाई स्पीड रेल की शुरुआत नहीं है। भविष्य में हमारी आवश्यकताओं को देखते हुए मैं इस नई रेलवे फिलॉस्फी को नए भारत के निर्माण ...
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देश में वित्तीय समावेशन

5 सप्ताह पहले
‘वित्तीय समावेशन’ एक ऐसा मार्ग है, जिस पर सरकारें आम आदमी को अर्थव्यवस्था के औपचारिक माध्यम में शामिल करके ले जाने का प्रयास करती है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि अंतिम छोर पर खड़ा व्यक्ति भी आर्थिक विकास के लाभों से वंचित न रहे। उसे अर्थव्यवस्था की मुख्यधारा में शामिल किया जाए और ऐसा करके गरीब आदमी को बचत करने, विभिन्न वित्तीय उत्पादों में सुरक्षित निवेश करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है तथा उधार लेने की आवश्यकता पड़ने पर वह उन्हीं औपचारिक माध्यमों से उधार भी ले सकता है। वित्तीय समावेशन का अभाव होना समाज एवं व्य​िक्त  के लिए हानिकारक है। जहां तक व्यक्ति का संबंध है, वित्तीय समावेशन के अभाव में, बै...
welfare-of-the-divyang-people

...ताकि दिव्यांगों का हो कल्याण

5 सप्ताह पहले
भारतीय संविधान दिव्यांगजनों सहित सभी नागरिकों को स्वतंत्रता, समानता और न्याय के संबंध में स्वतंत्रता के अधिकार की गारंटी देता है। पर दिव्यांग लोगों के साथ भेदभाव के कारण दिव्यांगता की मात्रा दोगुनी हो जाती है। दिव्यांगता के अर्थ को रहस्यपूर्ण नहीं रखने और दिव्यांगता के मिथकों और गलतफहमियों का मुकाबला करने के लिए हम सब ने स्वयं को शिक्षित करने में एक लंबी समयावधि ली है। हमें प्रतिदिन इन नवीन अवधारणाओं को क्रियाशील बनाए रखने की जरूरत है, ताकि वे पुराने नकारात्मक मनोभाव और अनुभूतियां प्रकट न हो सकें। नीतिगत मामलों और क्रिया-कलापों के सार्थक रुझानों पर ध्यान केंद्रित करने और दिव्यांगजनों के कल्याण और सशक्तिकरण के उद्देश्य से ...


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