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बुधवार, 19 दिसंबर 2018

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चीन ने बनाया 'अपना चांद'!

7 सप्ताह पहले
चौदहवीं का चांद और चांदनी रात की बात हम अक्सर फिल्मी गीतों में सुनते रहते हैं। कवि, लेखक और शायर पूरे चांद के इंतजार पर अपनी रचनाएं रच गए, लेकिन अब चीन के आसमान पर हर रात पूरा चांद दिखने का दावा किया गया है। चीनी कंपनी ने घोषणा की है कि वो एक नकली चांद को चीन के आसमान पर भेजने की योजना बना रही है, जिससे रात में चीन का आसमान चांदनी रात से गुलजार रहेगा। चीन के अखबार पीपल्स डेली के अनुसार चेंगडु इलाके में स्थित एक निजी एयरोस्पेस संस्थान में अधिकारियों ने कहा कि वे साल 2020 तक पृथ्वी की कक्षा में एक चमकदार सेटेलाइट भेजने की योजना बना रहे हैं, जिससे स्ट्रीट लाइट लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इस खबर के सामने आते ही वैज्ञान...
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मकान निर्माण में होगा प्लास्टिक का इस्तेमाल

10 सप्ताह पहले
भारत में हर साल बड़ी मात्रा में प्लास्टिक का कचरा निकलता है जिसका फिर से इस्तेमाल नहीं होता। अब एक अध्ययन के अनुसार निर्माण कार्य में बालू के बजाय प्लास्टिक का आंशिक तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है और यह देश में सतत निर्माण कार्य के लिए एक संभावित समाधान है।  ब्रिटेन के यूनिवर्सिटी ऑफ बाथ और भारत में गोवा इंजिनियरिंग कॉलेज के संयुक्त शोध में यह पाया गया कि कंक्रीट में 10 प्रतिशत बालू के बजाय प्लास्टिक का इस्तेमाल करने से भारतीय सड़कों पर पड़े रहने वाले प्लास्टिक के कचरे को कम किया जा सकता है और देश में रेत की कमी से निपटा जा सकता है। मुख्य शोधकर्ता डॉ. जॉन ओर ने कहा, ‘आम तौर पर जब आप कंक्रीट में प्लास्टिक &nbsp...
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कैंसर का पता लगाने वाला उपकरण विकसित

10 सप्ताह पहले
आनेवाले वक्त में कैंसर का पता लगाना आसान होगा। इसकी वजह है वैज्ञानिकों द्वारा की गई लंच बॉक्स के साइज वाली नई खोज। दरअसल, वैज्ञानिकों ने कैंसर का पता लगाने वाला एक उपकरण विकसित किया है जो कि एक लंच बॉक्स के आकार का है। इसका इस्तेमाल विश्व के दूरदराज वाले इलाकों के इस बीमारी का त्वरित और सटीक तरीके से पता लगाने में किया जा सकता है। कापोसी सारकोमा (केएस) एक तरह का कैंसर होता है जो रक्त वाहिकाओं में होता है। यह आमतौर पर त्वचा, मुंह में या आंतरिक घाव के रूप में उभरता है। इसका जल्द पता लगाने के बेहतर परिणाम होते हैं। विकासशील देशों में ऐसा हमेशा संभव नहीं होता क्योंकि वहां पैथालॉजिकल जांच में एक से दो हफ्ते का वक्त लग जाता है।...
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अब गाड़ी करेगी शराबी की पहचान

15 सप्ताह पहले
बिहार में शराबबंदी के बाद यहां के छात्र भी अब सरकार की मदद के लिए आगे आए हैं। इसी क्रम में पूर्णिया जिले के भावनीपुर प्रखंड की ऐश्वर्य प्रिया ने वाहनों में लगने वाले एक ऐसे यंत्र का निर्माण किया है, जो न केवल 'अल्कोहल' (शराब) की पहचान करता है, बल्कि अगर आप शराब पीकर गाड़ी चलाएंगे तो गाड़ी स्वत: बंद भी हो जाएगी।  बिहार में शराबबंदी के बाद पूर्णिया की ऐश्वर्य लगातार इस पर काम कर रही थीं। ऐश्वर्य का मानना है कि इस यंत्र को राज्य के वाहनों में लगाए जाने से वाहन दुर्घटना को भी रोका जा सकता है। पूर्णिया जिला के पत्रकार रवि गुप्ता की बेटी ने यह आविष्कार कर न सिर्फ पूर्णिया का बल्कि बिहार का नाम भी रौशन किया है।&nbsp...
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पोर्टेबल पेट्रोल पंप को मंजूरी

15 सप्ताह पहले
भारत सरकार ने पिछले दिनों पोर्टेबल पेट्रोल पंप के कॉन्सेप्ट को मंजूरी दे दी है। जल्द ही आपको सड़कों के किनारे 'मिल्क बूथ' की तरह ये पेट्रोल पंप मिलेंगे, जहां से आप खुद अपनी गाड़ी में पेट्रोल, डीजल या सीएनजी भर सकते हैं। यह दुनिया के करीब 35 देशों में पहले से मौजूद और पहली बार भारत में इसका प्रयोग होने जा रहा है। जैसा की इसके नाम से ही जाहिर है, पोर्टेबल पेट्रोल पंप को आसानी से किसी स्थान पर ले जाया जा सकता है। इसमें कंटेनर के साथ फ्यूल डिस्पेंसिंग मशीन जुड़ी होती है। पूरे यूनिट को ट्रक पर लाद कर सड़क किनारे रख दिया जाता है। इसे किसी स्थान पर लगाने या हटाने में महज 2 घंटे का समय लगता है। इसके लिए जमीन भी बहुत कम चाहिए। इस...
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उत्पादन बढ़ाने के लिए गेहूं की जीन मैपिंग

16 सप्ताह पहले
मौसम में बदलाव के कारण फसलें अक्सर बर्बाद हो जाती हैं। कहीं भयानक सूखा तो कहीं बिन मौसम बरसात फसलों को नष्ट कर देती है। लेकिन अब गेहूं की एक ऐसी नस्ल उपजाने पर काम हो रहा है जो जलवायु परिवर्तन से प्रभावित न हो। जो गर्म हवाओं को सह सके और जिसे कम पानी की जरूरत हो। शोधकर्ताओं का कहना है कि ये जीन मैपिंग ऐसी नस्ल के विकास को बढ़ावा देगी जो जलवायु परिवर्तन के कारण चलने वाली गर्म हवाओं से फसल को बचा सकती है। यह शोध जर्नल साइंस में प्रकाशित हुआ है। प्रोजेक्ट लीडर प्रोफेसर क्रिस्टोबल यूवेयूई गेहूं के इस जीन को एक गेम चेंजर की तरह मानते हैं। उन्होंने कहा, 'हमें जलवायु परिवर्तन और बढ़ती हुई मांग को देखते हुए गेहूं के टिकाऊ उत्...
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दशकों बाद मिली मलेरिया की असरदार दवा

16 सप्ताह पहले
मलेरिया के ठीक होने के बाद भी इसका अंश लीवर में कहीं रह जाता है, जिसकी वजह से इसके बार-बार होने का खतरा रहता है। इस तरह मलेरिया से हर साल विश्व में पीड़ित होने वालों की संख्या 85 लाख है। 'प्लाजमोडियम विवॉक्स' नाम के इस मलेरिया के इलाज के लिए एक खास दवा को हाल ही में अमरीका में मंजूरी दी गई है। पिछले साठ सालों की कोशिशों के बाद वैज्ञानिकों को यह कामयाबी मिली है। इस दवा का नाम टैफेनोक्वाइन है। दुनियाभर के रेगुलेटर अब इस दवा की जांच कर रहे हैं, ताकि अपने यहां मलेरिया-प्रभावितों को इस दवा का फायदा पहुंचा सकें। प्लाजमोडियम विवॉक्स मलेरिया उप-सहारा अफ्रीका के बाहर होने वाला सबसे आम मलेरिया है। यह इसीलिए खत...
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नासा की 'जीनियस' बना रही है हाई स्पीड ट्रेन!

20 सप्ताह पहले
मंगल ग्रह भेजे गए नासा के क्यूरोसिटी रोवर को वहां उतरे 5 साल बीत चुके हैं। वहां जीवन होने की भरपूर संभावनाएं पाई गई हैं। इस मिशन की एक महत्वपूर्ण सदस्य भारतीय मूल की एयरोस्पेस इंजीनियर अनीता सेनगुप्ता हैं।पश्चिम बंगाल की रहने वाले अनीता एक भारतीय-अमेरिकी साइंटिस्ट हैं, जिन्हें नासा की जीनियस कहा जाता है। अनीता वहीं हैं, जिन्होंने ब्रह्मांड में सबसे ठंडा स्थान बनाने के लिए नासा के भौतिकी प्रयोग पर काम किया है। अनीता सेनगुप्ता दक्षिणी कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय में विटरबी स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग के एयरोस्पेस और मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्नातक हैं, वह नासा के एम्प्लॉई में से एक नहीं हैं- बल्कि वह एक स्टार एम्प्लॉई हैं। अनीता उस...
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भारत में निर्मित रडार से मानसून की निगरानी

20 सप्ताह पहले
हिंद महासागर के ऊपर मौसम और मानसून की अधिक सटीक निगरानी के लिए भारत में निर्मित सीयूसैट-एसटी-205 रडार ने कोचीन यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी में काम करना शुरू कर दिया है। भारतीय वैज्ञानिकों द्वारा डिजाइन और विकसित किए गए इस रडार को केरल में ऐसे स्थान पर लगाया गया है, जहां से मानसून भारतीय उपमहाद्वीप में प्रवेश करता है। इससे मौसम, खासतौर पर मानसून संबंधी अधिक सटीक भविष्यवाणी करने में मदद मिल सकती है। पृथ्वी के ऊपरी वातावरण में वायुमंडल की दशाओं की निगरानी के लिए देश में पहले से कई रडार तथा सोनार मौजूद हैं। इस नए रडार के आने से मौसम पूर्वानुमान की भारत की क्षमता में बढ़ोत्तरी हो सकती है। रडार का उपयोग आमतौर पर विमानों...
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दुनिया से अंधेरा मिटाना चाहती हैं मेनासा

21 सप्ताह पहले
भारत में करीब पांच करोड़ परिवार आज भी अंधेरे में जीवन बिताने करने को मजबूर हैं, लेकिन पंद्रह साल की मेनासा मेंडू इन लोगों की जिंदगियों में रोशनी लाकर उसे बदलना चाहती हैं। उन्होंने कुछ ऐसा बनाया है जिसका फायदा दुनिया के कई हिस्सों के करोड़ों लोग उठा सकते हैं। अमेरिका के ओहायो की रहने वाली मेनासा ने एक नई तकनीक विकसित की है जिसके जरिए दुनिया के उन हिस्सों को रोशन किया जा सकता है जहां सूरज छिपने के बाद जिंदगी रुक जाती है। इसके जरिए विकासशील देशों में सस्ती कीमतों में बिजली पहुंचाई जा सकती है। अपने इस आविष्कार के लिए मेनासा को 2016 में अमेरिका का टॉप यंग साइंटिस्ट का पुरस्कार मिल चुका है। विज्ञान की इस प्रतियोगिता का आ...
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केरल में कक्षाएं हुईं हाईटेक

21 सप्ताह पहले
केरल सरकार की पहल केरल इंफ्रास्ट्रक्चर एंड टेक्नोलॉजी फॉर एजुकेशन (काइट) के हिस्से के तौर पर 40,000 से ज्यादा कक्षाओं को हाईटेक बना दिया गया है और 4,500 से ज्यादा को इस महीने के अंत तक हाईटेक बना दिया जाएगा। काइट के उपाध्यक्ष व कार्यकारी निदेशक के. अनवर सदात ने कहा कि उन्होंने सरकारी स्कूलों की 40,083 से अधिक कक्षाओं को हाईटेक बना दिया है। इस महीने के बाद कक्षा आठ से 12 के सभी छात्र इस सुविधा का उपयोग करने में समर्थ होंगे। उन्होंने कहा कि हमने लैपटॉप, मल्टीमीडिया प्रोजेक्टर, साज-सामान, यूएसबी स्पीकर को लगाने का काम पूरा कर दिया है और इसके अलावा कंप्यूटर प्रयोगशालाओं के लिए 16,500 लैपटॉप भी इस हफ्ते लगाए जा रहे हैं। मल्लपुरम जिले...
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नई थेरेपी नशे की लत से निपटने में मददगार

23 सप्ताह पहले
शोधकर्ताओं ने एक थेरेपी विकसित की है, जो मादक पदार्थो के सेवन से दिमाग को होने वाले रासायनिक असंतुलन को दूर करने में मदद कर सकती है और भविष्य में मादक पदार्थों के आदी लोगों को ठीक करने व इसके सेवन से बचने में मदद कर सकती है। शोध के निष्कर्षो के अनुसार, इस नई थेरेपी का जब चूहों पर परीक्षण किया गया तो इसे जानवरों में लत कम करने में प्रभावी पाया गया। इस निष्कर्ष को जर्नल ऑफ मेडिसिनल केमिस्ट्री में प्रकाशित किया गया है। जब भी कोई व्यक्ति आदतन मादक पदार्थो का सेवन करता है, उसके दिमाग के रसायन इस तरीके से बदल जाते हैं कि वह नकारात्मक परिणामों के बावजूद मादक पदार्थ छोड़ नहीं पाता है। किसी के दिमाग में यह विकृति एक बार विक...


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