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शनिवार, 21 अक्टूबर 2017

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मोटापा से दूर तो बीमारी से महफूज

4 दिन पहले
मोटापा परेशानियों का कारण बनता है, फिर भी जो लोग सचेत नहीं हैं, वे इसे बीमारी मानने को तैयार नहीं होते। इतना ही नहीं, मोटापे से ग्रस्त लोग कोई टीका-टिप्पणी भी सहन नहीं करते। मोटापे को कोई भले ही न माने, लेकिन चिकित्सक तो कहते हैं कि यह कई रोगों को बुलावा देता है। दक्षिणी दिल्ली स्थित हैबिलाइट बरिएट्रिक्स ने मोटापा संबंधी जानकारी देने के लिए एक कार्यक्रम की शुरुआत की है। इस कार्यक्रम के जरिए सेंटर के चिकित्सक यह जानकारी दे रहे हैं कि कैसे मोटापे के कारण गैर-संचारी रोग (नॉन कम्युनिकेबल डिजीज) की गिरफ्त में आ जाते हैं और ऐसी स्थिति में वह खुद को कैसे बचा सकते हैं।  हैबिलाइट बरिएट्रिक्स के संस्थापक डॉ. कपिल अग्रवाल, वरिष...
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नवजात शिशुओं के संक्रमण और मृत्यु दर में गिरावट

एक सप्ताह पहले
देश में नवजात शिशुओं में निमोनिया, डायरिया के संक्रमण और जन्म के समय दम घुटने से मृत्यु की दर में भारी गिरावट आई है। लैंसेट पत्रिका के ताजा अध्ययन में कहा गया है कि राष्ट्रीय स्वास्थ   मिशन के अंतर्गत प्रथमिकता के रूप में तय स्थितियों का बहुत गहरा प्रभाव मृत्यु में गिरावट में दिखा। निमोनिया और डायरिया से होने वाली मृत्यु  में 60 प्रतिशत से अधिक (कारगर इलाज के कारण) की गिरावट आई। जन्म  संबंधी सांस की कठिनाई और प्रसव के दौरान अभिघात से होने वाली मृत्यु  में 66 प्रतिशत ( अधिकतर जन्म  अस्पतालों में होने के कारण) की कमी आई। खसरे और टिटनेस से होने वाली मृत्यु में 90 प्रतिशत (अधिकतर विशेष टीकाकरण अभियान के कारण...
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स्क्रब टाइफस के बारे में जागरूकता जरूरी

3 सप्ताह पहले
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) का कहना है कि प्राथमिक और माध्यमिक देखभाल के स्तर पर काम करने वाले चिकित्सकों के लिए स्क्रब टायफस को लेकर अधिक जागरूक होने की जरूरत है। साथ ही, स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली में इस रोग की पहचान करने की सुविधाएं होना भी नितांत आवश्यक है। स्क्रब टाइफस एक जीवाणु जनित संक्रमण है, जो अनेक लोगों की मृत्यु का कारण बनता है और इसके लक्षण चिकनगुनिया जैसे ही होते हैं। बीते वर्ष 150 व्यक्ति संक्रमित पाए गए, जिनमें से 33 को यह रोग था। यदि इस रोग का इलाज न किया जाए तो 35 से 40 प्रतिशत मामलों में मृत्यु की आशंका रहती है। आईएमए के अध्यक्ष डॉ. के.के. अग्रवाल के मुताबिक, ‘स्क्रब टाइफस की शुरुआत सिरदर्द और ठं...
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पारिवारिक तनाव से बढ़ रहा बच्चों में एडीएचडी रोग

4 सप्ताह पहले
अध्ययन के अनुसार, भारत में लगभग 1.6 प्रतिशत से 12.2 प्रतिशत तक बच्चों में एडीएचडी की समस्या पाई जाती है। अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिस्ऑर्डर अथवा ध्यान की कमी और अत्यधिक सक्रियता की बीमारी को एडीएचडी कहा जाता है। एडीएचडी की समस्या ऐसे परिवारों में अधिक बिगड़ सकती है, जहां घर में तनाव का वातावरण रहता है और जहां पढ़ाई पर अधिक जोर देने की प्रवृत्ति रहती है।  इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के मुताबिक, एडीएचडी की समस्या ज्यादातर प्री-स्कूल या केजी कक्षाओं के बच्चों में होती है। कुछ बच्चों में, किशोरावस्था की शुरुआत में स्थिति खराब हो सकती है। यह वयस्कों में भी हो सकता है। आईएमए के अध्यक्ष डॉ. केके अग्रवाल ने कह...
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एवोकैडो खाएं, मेमोरी बढ़ाएं

5 सप्ताह पहले
रोजाना एक ताजा एवोकैडो खाने से वयस्कों की मेमोरी और कार्य करने की क्षमता में वृद्धि होती है। ऐसा एक शोध में कहा गया है। शोध में 50 वर्ष से अधिक आयु वाले वयस्कों को छह महीने तक प्रति दिन एक ताजा एवोकैडो खिलाने से उनके मस्तिष्क और आंखों में ल्यूटेन के स्तर में 25 प्रतिशत वृद्धि हुई, जिससे उनकी मेमोरी और कार्य करने की क्षमता में काफी सुधार हुआ। ल्यूटेन एक तरह का पिगमेंट है, जो सामान्य तौर पर फलों और सब्जियों में पाया जाता है और हमारे आंखों और मस्तिष्क के लिए एक एंटीऑक्सीडेंट की तरह कार्य करता है। टफट्स यूनिवर्सिटी मैसाचुसेट्स के प्रमुख शोधकर्ता एलिजाबेथ जॉनसन ने कहा कि एवोकैडो में वसा, फाइबर, बायोएक्टिव न्यूरल पाए जाते हैं, जो ल्यू...
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सौंदर्य और स्वास्थ्य का योग

6 सप्ताह पहले
भारतीय परंपरा हमेशा से ही जीवन को समग्र और संतुलित रूप से जीने की दृष्टि प्रदान करती रही है। भारतीय चिंतन और परंपरा का आधार रहा है योगशास्त्र। योग एक ऐसी अनमोल निधि है, जिसके उपयोग से शारीरिक सौंदर्य और मानसिक शक्ति हासिल की जा सकती है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव, अनिंद्रा, रक्तचाप, मोटापा और आपाधापी से जन्मे अनेक रोगों को योग के माध्यम से दूर रखा जा सकता है और शारीरिक सौंदर्य को हासिल किया जा सकता है। छरहरी काया, दमकती त्वचा और कांतिमय केश की चाहत को योग एवं आयुर्वेदिक जीवन प्रणाली के जरिए प्राप्त किया जा सकता है।   बालों तथा त्वचा के सौंदर्य को बनाए रखने में प्राणायाम महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। प्राणायाम से जहां तनाव कम होता है, वहीं दूसरी ओर शरीर में प्राण वाय...
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खतरनाक है लिथियम आयन बैटरी!

6 सप्ताह पहले
स्मार्टफोन भले ही आज हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गए हों, पर इसके अंदरूनी निर्माण और उसमें प्रयुक्त होने वाले पदार्थों के बारे में हमारी जानकारी न के बराबर है। बात करें स्मार्टफोन्स और कई और इलेक्ट्रानिक उपकरणों में इस्तेमाल होने वाले लीथियम बैटरियों की तो चीन की शिन्हुआ यूनिवर्सिटी और अमेरिका के इंस्टीट्यूट ऑफ एनबीसी डिफेंस के शोधकर्ताओं के अनुसार इनसे कार्बन मोनोऑक्साइड समेत 100 से अधिक खतरनाक गैसें निकलती हैं। दरअसल, स्मार्टफोन का दखल जितनी तेजी से हमारी जिंदगी में बढ़ रहा है, उससे भी अधिक तेजी से उससे जुड़े खतरे बढ़ते जा रहे हैं। जिंदगी की राह आसान करने वाले स्मार्टफोन, लैपटॉप और टैबलेट आदि इलेक्ट्रानिक उपकरणों में ...
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असंक्रामक रोगों का बढ़ा खतरा

7 सप्ताह पहले
देश में कैंसर, हृदय रोग, मधुमेह और फेफड़ों की बीमारियों जैसे असंक्रामक रोगों (एनसीडी) से होने वाली मौतों के मामले 70 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। यह आंकड़ा तीन साल पहले 42 प्रतिशत था। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के मुताबिक, एनसीडी का भार भारत में तेजी से बढ़ रहा है। देश में इन रोगों के चलते, प्रति चार में से एक व्यक्ति को 70 साल की उम्र तक पहुंचने से पहले ही मृत्यु का खतरा बना रहता है। एनसीडी एक ऐसी मेडिकल कंडीशन या बीमारी है, जो लोगों के बीच किसी संक्रमण से नहीं फैलती। प्रमुख एनसीडी रोग व्यवहार संबंधी जोखिम वाले चार कारणों से होते हैं-अस्वास्थ्यकर आहार, शारीरिक गतिविधि की कमी और तंबाकू व शराब का सेवन। भारत में एनसीडी के खिलाफ चलाए...
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हेपेटाइटिस सी मुक्त होगा भारत

10 सप्ताह पहले
हेपेटाइटिस डे के मौके पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने हेपेटाइटिस सी से जूझ रहे मरीजों को मुफ्त में इलाज करने की घोषणा की है। आगामी 25 दिसंबर को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिन पर सरकार इस एक्शन प्लान को देशभर में लागू करेगी। भारत में इसके करीब 60 लाख मरीज हैं। लक्ष्य एक वर्ष में इस बीमारी को खत्म करने का है। राष्ट्रीय कार्यक्रम लागू होने पर हेपेटाइटिस सी की दवाएं मरीजों को मुफ्त मिलेंगी। इसके लिए सरकार राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के जरिए बजट उपलब्ध कराएगी। इसकी  घोषणा केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलियरी साइंसेज में एक कार्यक्रम के दौरान की। नड्डा ने कहा क...
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‘ट्रिटिकल’ गेहूं से मधुमेह व हृदय रोग पर रोक

11 सप्ताह पहले
खानपान से ही रोगों को दूर करने के प्रयास में जुटे कानपुर स्थित चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए) ने एक अहम सफलता हासिल की है। यहां की महिला कृषि विज्ञानी ने राई से मिलकर बनी गेहूं की नई प्रजाति ‘ट्रिटिकल’ से औषधीय उत्पाद तैयार किए हैं, जो लोगों को मधुमेह और हृदय रोग से बचाएंगे। ट्रिटिकल गेहूं में फाइबर, ग्लाइसेमिक इंडेक्स व प्रोटीन प्रचुर मात्रा में पाए जाने के कारण यह सेहत के लिए लाभदायक है। सीएसए में इस प्रजाति के बीज विकसित किए जा रहे हैं। औषधीय उत्पादों का अभी व्यावसायिक उत्पादन शुरू नहीं हुआ है।   विश्वविद्यालय में खाद्य विज्ञान एवं पोषण विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ.सीमा सोनकर ने इससे मेडिकेटेड ड्रिंक पाउडर और नॉन मेड...
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वेस्टर्न फूड से अल्जाइमर का खतरा

14 सप्ताह पहले
पश्चिमी भोजन के शौकीनों के लिए यह अच्छी खबर नहीं है। क्योंकि कोलेस्ट्रोल, वसा और शर्करा की उच्च मात्रा वाला पाश्चात्य आहार न्यूडीजनरेटिव रोग से जुड़े एपोई4 जीन वाले लोगों में अल्जाइमर के विकास पर असर डाल सकता है। एपोई4 और एपोई3 जीन के दो प्रकार प्रोटीन और एपोलिपोप्रोटीन के कोड हैं, जो वसा और कोलेस्ट्रॉल को बांधते हैं। एपोई4 सूजन, अल्जाइमर और कार्डियोवैस्कुलर रोग की वृद्धि से जुड़ा हुआ है, जबकि एपोई3 रोग के जोखिम में वृद्धि नहीं करता है, और यह बहुत अधिक सामान्य प्रकार है। शोध के निष्कर्षों से पता चलता है कि जब एपोई4 जीन वाले चूहों को पश्चिमी आहार से प्रेरित भोजन दिया गया तो इनमें बीटा एम्लॉइड प्रोटीन प्लेक की वृद्धि देखी ग...
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दफ्तरी तनाव से लगती है ज्यादा भूख

15 सप्ताह पहले
कार्यस्थल पर होने वाले तनाव का व्यक्ति के स्वास्थ्य पर तो कई तरह का फर्क पड़ता ही है, इससे उसकी पसंद-नापसंद भी काफी बदल जाती है। आप अपने कार्यस्थल पर तनाव में रहते हैं, तो यह आपको रात में ज्यादा खाने या जंक फूड लेने के लिए प्रेरित कर सकता है। यह स्थिति आपकी सेहत के लिए घातक हो सकती है। एक नया शोध बताता है कि रात में अच्छी नींद आपको कार्यस्थल के तनाव और शाम को अस्वस्थ करने वाले भोजन से बचा सकती है।  अमेरिका में मिशीगन राज्य विश्वविद्यालय में मनोविज्ञान की एसोसिएट प्रोफेसर और इस अध्ययन की सह लेखिका चू-सीयांग चांग ने कहा, ‘हमने पाया है कि जिन कर्मचारियों का कार्यस्थल का दिन तनावभरा रहता है, वे कार्यस्थल की अपनी नकारात्मक भावनाओं को खाने की मेज पर लाते हैं। इसका परिणाम यह...


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