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शुक्रवार, 18 अगस्त 2017

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हेपेटाइटिस सी मुक्त होगा भारत

एक सप्ताह पहले
हेपेटाइटिस डे के मौके पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने हेपेटाइटिस सी से जूझ रहे मरीजों को मुफ्त में इलाज करने की घोषणा की है। आगामी 25 दिसंबर को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिन पर सरकार इस एक्शन प्लान को देशभर में लागू करेगी। भारत में इसके करीब 60 लाख मरीज हैं। लक्ष्य एक वर्ष में इस बीमारी को खत्म करने का है। राष्ट्रीय कार्यक्रम लागू होने पर हेपेटाइटिस सी की दवाएं मरीजों को मुफ्त मिलेंगी। इसके लिए सरकार राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के जरिए बजट उपलब्ध कराएगी। इसकी  घोषणा केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलियरी साइंसेज में एक कार्यक्रम के दौरान की। नड्डा ने कहा क...
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‘ट्रिटिकल’ गेहूं से मधुमेह व हृदय रोग पर रोक

2 सप्ताह पहले
खानपान से ही रोगों को दूर करने के प्रयास में जुटे कानपुर स्थित चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए) ने एक अहम सफलता हासिल की है। यहां की महिला कृषि विज्ञानी ने राई से मिलकर बनी गेहूं की नई प्रजाति ‘ट्रिटिकल’ से औषधीय उत्पाद तैयार किए हैं, जो लोगों को मधुमेह और हृदय रोग से बचाएंगे। ट्रिटिकल गेहूं में फाइबर, ग्लाइसेमिक इंडेक्स व प्रोटीन प्रचुर मात्रा में पाए जाने के कारण यह सेहत के लिए लाभदायक है। सीएसए में इस प्रजाति के बीज विकसित किए जा रहे हैं। औषधीय उत्पादों का अभी व्यावसायिक उत्पादन शुरू नहीं हुआ है।   विश्वविद्यालय में खाद्य विज्ञान एवं पोषण विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ.सीमा सोनकर ने इससे मेडिकेटेड ड्रिंक पाउडर और नॉन मेड...
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वेस्टर्न फूड से अल्जाइमर का खतरा

5 सप्ताह पहले
पश्चिमी भोजन के शौकीनों के लिए यह अच्छी खबर नहीं है। क्योंकि कोलेस्ट्रोल, वसा और शर्करा की उच्च मात्रा वाला पाश्चात्य आहार न्यूडीजनरेटिव रोग से जुड़े एपोई4 जीन वाले लोगों में अल्जाइमर के विकास पर असर डाल सकता है। एपोई4 और एपोई3 जीन के दो प्रकार प्रोटीन और एपोलिपोप्रोटीन के कोड हैं, जो वसा और कोलेस्ट्रॉल को बांधते हैं। एपोई4 सूजन, अल्जाइमर और कार्डियोवैस्कुलर रोग की वृद्धि से जुड़ा हुआ है, जबकि एपोई3 रोग के जोखिम में वृद्धि नहीं करता है, और यह बहुत अधिक सामान्य प्रकार है। शोध के निष्कर्षों से पता चलता है कि जब एपोई4 जीन वाले चूहों को पश्चिमी आहार से प्रेरित भोजन दिया गया तो इनमें बीटा एम्लॉइड प्रोटीन प्लेक की वृद्धि देखी ग...
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दफ्तरी तनाव से लगती है ज्यादा भूख

6 सप्ताह पहले
कार्यस्थल पर होने वाले तनाव का व्यक्ति के स्वास्थ्य पर तो कई तरह का फर्क पड़ता ही है, इससे उसकी पसंद-नापसंद भी काफी बदल जाती है। आप अपने कार्यस्थल पर तनाव में रहते हैं, तो यह आपको रात में ज्यादा खाने या जंक फूड लेने के लिए प्रेरित कर सकता है। यह स्थिति आपकी सेहत के लिए घातक हो सकती है। एक नया शोध बताता है कि रात में अच्छी नींद आपको कार्यस्थल के तनाव और शाम को अस्वस्थ करने वाले भोजन से बचा सकती है।  अमेरिका में मिशीगन राज्य विश्वविद्यालय में मनोविज्ञान की एसोसिएट प्रोफेसर और इस अध्ययन की सह लेखिका चू-सीयांग चांग ने कहा, ‘हमने पाया है कि जिन कर्मचारियों का कार्यस्थल का दिन तनावभरा रहता है, वे कार्यस्थल की अपनी नकारात्मक भावनाओं को खाने की मेज पर लाते हैं। इसका परिणाम यह...
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शौचालय की कमी से संक्रमण का खतरा

7 सप्ताह पहले
हर घर शौचालय हो और हर कोई इसका इस्तेमाल भी करे। केंद्र से लेकर राज्य की सरकारें ही नहीं, बल्कि स्वच्छता के लिए काम करने वाली स्वयंसेवी संस्थाओं से लेकर समाज का एक बड़ा तबका इसके लिए प्रयासरत है। क्योंकि इससे न सिर्फ विकास का रास्ता आसान होगा, बल्कि इससे लोगों की सेहत भी बेहतर होगी। हाल ही में जारी हुई फिल्म टॉयलेट एक प्रेमकथा के प्रोमो में भी इस बात को दिखाया गया है कि महिलाओं को खुले में शौच जाने पर किस तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है।  शौचालय का न होना और गंदा होना दोनों ही कई बीमारियों को न्योता देते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों व शहरों में काम करने वाली शौचालय की सुविधा से वंचित महिलाएं यूटीआई से पीड़ित होती हैं...
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बुरी लत से आगे का सबक

8 सप्ताह पहले
बड़े-बड़े योगगुरु इस बात को कहते हैं कि योग महज एक व्यायाम भर नहीं है, बल्कि यह साकारात्मक ऊर्जा से जीवन जीने की कला का नाम है। योग जीवन को कैसे संभाल लेता है, इसकी मिसाल हैं भोला चैहान। भोला कभी शराबी हुआ करते थे, लेकिन अब योगगुरु बनकर लोगों को जीने की कला सिखा रहे हैं। झारखंड में धनबाद के पास धनसार में रहने वाले भोला चौहान (61) अपने जीवन में आए इस परिवर्तन का सारा श्रेय योग को देते हैं। वे बताते हैं कि कई वर्षों से वे शराब का सेवन कर रहे थे, उनकी हालत काफी खराब हो चुकी थी। वो ठीक से बैठ भी नहीं पाते थे। पिछले साल उन्हें योग से होने वाले लाभ के बारे में पता चला। वे पहले टीवी देखकर योग करने लगे। फिर तीन माह बाद योग प्रशिक्षण शिव...
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एंबुलेंस में मरीज पर नजर रखेगी नई तकनीक

9 सप्ताह पहले
आईआईटी खड़गपुर ने ऐसी जीवन रक्षक प्रणाली विकसित की है, जिसकी मदद से चिकित्सक मरीज के अस्पताल पहुंचने से भी पहले एंबुलेंस में उनकी हालत पर नजर रख सकते हैं। आईआईटी खड़गपुर के प्रवक्ता ने बताया कि संस्थान के कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग विभाग (सीएसई) की स्वान प्रयोगशला में ‘एंबुसेंस’ नामक इस अपनी तरह की अलग प्रौद्योगिकी को विकसित किया गया है। एंबुसेंस ईसीजी, हृदय गति, तापमान और रक्तचाप समेत विभिन्न शारीरिक मापदंडों पर वायरलैस तरीके से नजर रखने में सक्षम है। यह प्रणाली मरीज के डेटा की गोपनीयता को संरक्षित रखने के लिए अनूठे यंत्र का इस्तेमाल करती है और साथ ही क्लाउड कम्प्यूटिंग की विश्लेषणात्मक और कम्प्यूटिंग क्षमता का भ...
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स्वच्छता का तकाजा उन खास दिनों में

10 सप्ताह पहले
तकरीबन सात साल पहले एसी निल्सन ने एक अहम सर्वे किया था। इसके मुताबिक भारत में लगभग 35 करोड़ महिलाएं सक्रिय माहवारी के दौर में हैं, लेकिन सेनिटरी नैपकिन का प्रयोग मात्र 12 प्रतिशत महिलाएं ही करती हैं, जबकि ग्रामीण इलाकों में सेनिटरी नैपकिन के प्रयोग दर की हालत और भी बदतर है। महिलाओं की कुल जनसंख्या का तकरीबन 75 फीसदी आज भी गांवों में है और उनमें से सिर्फ 2 प्रतिशत ही सेनिटरी नैपकिन का इस्तेमाल करती हैं। ये आंकड़े बताते हैं कि आज भी ज्यादातर महिलाओं तक सेनिटेरी नैपकिन की पहुंच नहीं है। सरकार का गैर जिम्मेदाराना रवैया और जागरुकता की कमी इस समस्या की मुख्य वजहें हैं।  हमारा सामाजिक ढांचा कुछ इस तरह बना हुआ है कि आज भी महिलाएं अपने व्यक्तिगत मसलों पर एक महिला से ही बात करने मे...
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एक कश यानी जिंदगी के पांच मिनट कम

11 सप्ताह पहले
ध्रूमपान निषेध के लिए जब भी कोई जागरुकता रैली निकाली जाती है, तो प्रदर्शनकारियों के हाथों में धूम्रपान के खतरनाक नतीजों को लेकर चेतावनी देती तख्तियां होती हैं। इन्हीं तख्तियों के बीच एक संदेश वाली तख्ती जो अक्सर दिखती है, उसमें पॉल डुडली व्हाइट की वह मशहूर उक्ति लिखी होती है, जिसमें उन्होंने कहा है, ‘सिगरेट वह पाइप है, जिसके एक सिरे पर आग है और दूसरे पर एक मूर्ख व्यक्ति।’ इस बार भी जब पूरी दुनिया भर में 31 मई को विश्व धूम्रपान निषेध दिवस पर तो व्हाइट के इस बयान को सामने रखकर तंबाकू का सेवन करने वालों को चेतावनी दी जाएगी। दरअसल, यह हमारे आसपास सघन तौर पर पसरा एक ऐसा खतरा है, जिसकी गंभीरता को समझते हुए भी हम अक्सर उ...
Eat-Tomato-and-Escaped-Cancer

टमाटर खाइए कैंसर भगाइए

12 सप्ताह पहले
यूं तो टमाटर खाने के बहुत फायदे हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं टमाटर का किसी भी रूप में सेवन करने से पेट के कैंसर से बचा जा सकता है। जी हां, एक नई रिसर्च कुछ ऐसा ही बताती है।  हाल ही में आई एक नई रिसर्च के मुताबिक, टमाटर का रस और टमाटर ऐसे सेल्स के विकास और क्लोनिंग को रोकता है जिनके कारण पेट का कैंसर होता है। शोधकर्ताओं ने पाया कि टमाटर के जरिए पेट के कैंसर सेल्स को रोकने में मदद मिलती है। रिसर्च में पाया गया कि सैन मरजानो और कॉरबारिनो वैरायटी के टमाटरों में पेट के कैंसर के खतरनाक सेल्स की ग्रोथ और क्लोनिंग को रोकने की क्षमता होती है। जर्नल ऑफ सेलुलर फिजियोलॉजी में प्रकाशित रिसर्च के मुताबिक, पेट के कैंसर के इलाज के द...
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कैंसर पीड़ित बच्चों को लेकर जाएंगे मलेशिया

13 सप्ताह पहले
अभिनेता और सामाजिक कार्यकर्ता विवेक ओबेरॉय गर्मियों की छुट्टियों में कैंसर पेशेंट एड एसोसिएशन (सीपीएए) के बच्चों को मलेशिया घुमाने ले जा रहे हैं। विवेक एसोसिएशन के ब्रांड एंबेसेडर हैं। पिछले 13 सालों से वे सीपीएए बच्चों के साथ अपना जन्मदिन मनाते आए हैं। साथ ही, एसोसिएशन के लिए होनेवाली फंड रेजिंग एक्टिविटी में भी वह हिस्सा लेते हैं। इसके अलावा कभी खिलौने देना हो या कभी फिल्म दिखाने लेकर जाना हो, विवेक इन बच्चों के लिए हर साल कुछ न कुछ करते ही रहते हैं। इस साल विवेक ने बच्चों को छुट्टियों में मलेशिया ले जाने का फैसला इसीलिए किया कि बच्चों ने भारत से बाहर घूमने और जिंदगी में एक बार फ्लाइट में बैठने की इच्छा जाहिर की थी। विवेक व्यक...
New-Hope-for-Cancer-Patients

कैंसर के मरीजों की नई उम्मीद

14 सप्ताह पहले
कैंसर के इलाज के लिए कई तकनीकें ‘डेन्ड्रिटिक सेल थेरेपी’ ने इस गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों में एक नयी आस जगाई है। यह थेरेपी जानलेवा कैंसर के लिए बहुत फायदेमंद साबित हो रही है और शायद यही वजह है कि ‘डेन्ड्रिटिक सेल’ की खोज करनेवाले राल्फ एम स्टाइनम को मेडिसिन और फिजियोलॉजी के लिए साल 2011 के नोबेल पुरस्कार से नवाजा गया है। ‘डेन्ड्रिटिक सेल थेरेपी’ प्रतिरोधक प्रणाली पर आधारित एक ऑटोलोगस चिकित्सा है जो कैंसर के मरीज की प्रतिरोध क्षमता को स्वाभाविक रूप से बढ़ाकर उसे कैंसरकारी कोशिकाओं से मुकाबला करने के काबिल बना देती है। गुड़गांव के मेदांता अस्पताल में चिकित्सा विज्ञान और रक्त विज्ञान वि...


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