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रविवार, 25 फ़रवरी 2018

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बच्चे 'वरियर’ नहीं, 'वारियर’ बनें

एक सप्ताह पहले
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दो फरवरी, 2016 को ‘मन की बात’ में परीक्षा और शिक्षा को लेकर कई सारी बातें कही थीं। उनका मुख्य जोर इस बात पर था कि शिक्षा सीखने का नाम है और परीक्षा को लेकर खौफ बच्चों में देखा जाता है, वह अनुचित है। इसी मौके पर उन्होंने परीक्षा को लेकर कुछ लोगों के सुझाव का जिक्र किया था। उनके ही शब्दों में, ‘तमिलनाडु के मिस्टर कामत ने बहुत अच्छे दो शब्द दिए हैं। वे कहते हैं कि स्टूडेंट्स 'वरियर’ न बनें, 'वारियर’ बनें।’ अब इसी शब्द को लेकर ‘एग्जाम वारियर्स’ नाम से बच्चों के लिए उनकी पुस्तक आ गई है। यह पुस्तक ऐसे समय आई है जब परीक्षाओं का वक्त नजदीक है। बच्च...
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आधी दुनिया के सवाल

8 सप्ताह पहले
अगर हम देश की आधी आबादी, यानी महिलाओं की बात करें तो उसके सामने यक्ष प्रश्नों का भंडार है। उनके जीवन से जुड़े इन सवालों के जवाब सदियों से अनसुलझे हैं और अब भी सही समाधान की तलाश में हैं। नमिता सिंह की यह किताब महिलाओं से जुड़े ऐसे ही कुछ यक्ष प्रश्नों को दर्ज करने की कोशिश करती है। नमिता ने सवाल तो बहुत बुनियादी उठाए हैं, लेकिन जरा लचर तरीके से। उत्तर भारत की जाति पंचायतों ने महिलाओं के जीवन को और ज्यादा संकटमय बनाने में काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। जिन पंचायतों का निर्माण समाज में न्याय की स्थापना के लिए किया गया था, वे महिलाओं के मामले में अक्सर ही बेहद अन्याय भरे निर्णय लेती हुई नजर आती हैं। नमिता बहुत सारी पंचायतों...
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​सीता से पुनर्परिचय

9 सप्ताह पहले
ईश्वर के रूपों से लेकर उनके किस्से हमारे जीवन में आज भी नैतिकता का रंग भरते हैं। इनमें राम, कृष्ण और शिव जैसे किरदार को लेकर तो भारतीय जनमानस सर्वाधिक आस्थावान है। बात करें महिला पात्रों की तो इसमें जो नाम सबसे पहले ध्यान में आता है, वह है सीता। वाल्मीकि रामायण और तुलसीदास की रामचरित मानस की सीता को हम, राजा जनक की बेटी, भगवान राम की पत्नी और लव-कुश की मां के रूप में ही ज्यादा जानते हैं। पौराणिक कथाअों और पात्रों को आधुनिक संदर्भ में पेश करने वाले अमीश ने सीता को लेकर जो अौपन्यासिक ताना-बाना बुना है, उसमें सीता के साथ महिला सशक्तिकरण का आधुनिक पक्ष काफी बेहतर तरीके से उभरा है। धार्मिक पात्रों को एक नए, सजीव और विश्वसनीय रूप में ...
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‘द लिविंग लीजेंड्स ऑफ मिथिला’ का भव्य विमोचन

14 सप्ताह पहले
मिथिला के आधुनिक दिग्गजों में सुलभ प्रणेता डॉ. विन्देश्वर पाठक का नाम सबसे पहले आता है। विवेकानंद झा ने कहा कि डॉ. पाठक मिथिला के भीष्म पितामह हैं और हम सभी के आदर्श हैं। मैं आज इस मंच से पीएम मोदी से आग्रह करता हूं कि वह डॉ. पाठक को देश के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से सम्मानित करें। यह बातें ‘द लिविंग लीजेंड्स ऑफ मिथिला’ पुस्तक के लेखक विवेकानंद झा ने कहीं। उन्होंने कहा कि मैं यह बात इसीलिए नहीं कह रहा हूं कि डॉ. पाठक मिथिला से हैं, बल्कि देश और समाज के प्रति किए गए उनके सराहनीय कार्यों को देख कर कह रहा हूं। देखा जाए तो डॉ. पाठक ही राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के सच्चे अनुयायी हैं। डॉ. पाठक ने महात्मा गांधी के सपने को सा...
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नरेंद्र मोदी के जीवन पर अनूठी किताब

26 सप्ताह पहले
‘नरेंद्र दामोदरदास मोदी- द मेकिंग ऑफ ए लीजेंड’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जीवन पर लिखी गई अनेक पुस्तकों से बिल्कुल हट कर है। लेखक डॉ. विन्देश्वर पाठक ने इस पुस्तक में उनके जीवन के तमाम पक्षों को संवेदनशील तरीके से व्यक्त किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदरदास मोदी उन दुर्लभ व्यक्तियों में हैं जिन्होंने अपनी सोच और करिश्माई नेतृत्व से मानवता और राष्ट्र के इतिहास को आकार दिया है। वह मशहूर अमेरिकी वैज्ञानिकों थॉमस एडिसन के सबसे प्रसिद्ध कथन-एक फीसदी प्रेरणा और निन्यानवे फीसदी पसीना के प्रतीक बन गए हैं। नरेंद्र मोदी की बौद्धिकता अपार है, परंतु अपने इस अद्भुत जीवन यात्रा में कड़ी मेहनत से प्राप्त उनका वृहद अनुभव तथा गहरा...
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‘नरेंद्र दामोदरदास मोदी : द मेकिंग ऑफ ए लीजेंड विलक्षण जीवन पर असाधारण पुस्तक

32 सप्ताह पहले
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदरदास मोदी उन दुर्लभ व्यक्तियों में हैं जिन्होंने अपनी सोच और करिश्माई नेतृत्व से मानवता और राष्ट्र के इतिहास को आकार दिया है। वह मशहूर अमेरिकी वैज्ञानिकों थॉमस एडिसन के सबसे प्रसिद्ध कथन-एक फीसदी प्रेरणा और निन्यानवे फीसदी पसीना के प्रतीक बन गए हैं। नरेंद्र मोदी की बौद्धिकता अपार है, परंतु अपने इस अद्भुत जीवन यात्रा में कड़ी मेहनत से प्राप्त उनका वृहद अनुभव तथा गहरा ज्ञान उन्हें दूसरों की तुलना में अधिक ऊंचाई पर ला रखता है और यही उन्हें अद्वितीय भी बनाता है। यह पुस्तक सुविख्यात समाजशास्त्री और सुलभ स्वच्छता और समाज सुधार आंदोलन के संस्थापक डॉ. विन्देश्वर पाठक की दूरदृष्टि का परिणाम है, जिन्होंने प्रधानमंत्री के जीवन को काल-क्रमानुसार इस तरह स...
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युवाओं के लिए प्रधानमंत्री की किताब

32 सप्ताह पहले
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी ढेर सारी व्यस्तताओं और जिम्मेदारियों के बीच युवाओं के लिए एक पुस्तक लिखी है। देश में यह पहली बार होगा, जब किसी प्रधानमंत्री ने पद पर रहते हुए कोई पुस्तक लिखी है। कुछ प्रधानमंत्रियों ने पद छोड़ने का बाद पुस्तक अवश्य लिखी है। इस पुस्तक में प्रधानमंत्री ने देश और दुनिया के युवाओं से जुड़ी कई सारे विषयों पर अपने विचार रखे हैं। पेंग्विन रेंडम हाउस इंडिया और ब्लूक्राफ्ट डिजिटल फाउंडेशन के संयुक्त सहयोग से यह पुस्तक इस साल के अंत तक बाजार में आ जाएगी। इसे एक साथ कई भाषाओं में भी प्रकाशित करने की योजना है।  पुस्तक को लिखने का विचार प्रधानमंत्री का अपना है। प्रधानमंत्री मोदी अपने ‘मन की...
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सामाजिक सौहार्द की राम लीला

39 सप्ताह पहले
राजधानी दिल्ली में भूमि पूजन के बाद रामलीला महोत्सव की तैयारियां शुरू हो गई हैं। सितंबर में दुर्गापूजा है। इस बार दिल्ली के सांसद व प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष मनोज तिवारी अंगद की भूमिका निभाने के लिए तैयार हो गए हैं। तिवारी का कहना है कि जब भी उन्हें रामलीला में किरदार निभाने का मौका मिलता है तो वे उसे हाथ से जाने नहीं देते। तिवारी सरीखे कई फिल्मी कलाकार दिल्ली की रामलीलाओं में अपना अभिनय प्रस्तुत कर आकर्षण का केंद्र बनते हैं, पर दिल्ली की रामलीलाओं में जो सबसे प्रमुख चीजें देखने को मिलती हैं वह है मुस्लिम कलाकारों का बढ़-चढ़कर भाग लेना। इन कलाकारों की बदौलत दिल्ली की रामलीलाओं में सदभाव का माहौल दिखता है। वह चाहे लाल किला...
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इतिहास में दर्ज पुस्तकालय

40 सप्ताह पहले
साल 1863 से पहले की दिल्ली में स्वायत शासन का कोई अभिलिखित इतिहास उपलब्ध नहीं है, लेकिन 1862 में किसी एक प्रकार की नगर पालिका की स्थिति के कुछ सबूत मौजूद हैं। पंजाब सरकार की अधिसूचना दिनांक 13 दिसंबर, 1862 द्वारा 1850 का अधिनियम दिल्ली में लागू हुआ था। नगर पालिका की पहली नियमित बैठक 23 अप्रैल, 1863 को हुई थी, जिसमें स्थानीय निवासी आमंत्रित किए गए थे। एक जून 1863 को आयोजित हुई अन्य बैठक की अध्यक्षता दिल्ली के कमिश्नर ने की थी और उपयुक्त ढंग से उसके कार्यवृत लिखे गए थे। यह दिल्ली नगर निगम का इतिहास है। पर इस इतिहास से एक साल पहले ही ‘हरदयाल म्युनिसिपल हेरीटेज पब्लिक लाइब्रेरी’ की स्थापाना की नींव पड़ चुकी थी। मौजूदा समय म...
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न्यू इंडिया की नई पहल

44 सप्ताह पहले
दिल्ली की सबसे बड़ी इमारत और सबसे पुराने कॉलेज के बीचों-बीच एक संकरी गली है, जो ख्वाजा मीर दर्द बस्ती की तरफ जाती है। सबसे बड़ी इमारत श्यामा प्रसाद मुखर्जी सिविक सेंटर और जाकिर हुसैन कॉलेज के बीचों-बीच जाने वाली इस संकरी गली में वैसे तो लोग जाना पसंद नहीं करते। लेकिन इस गली में पहुंचने पर कुछ ऐसा देखने को मिलता है कि बस देखते ही रह जाएंगे। मुहल्ले की मस्जिद से सटे मदरसे के एक बड़े से हॉल में 40 से ज्यादा बच्चे अपनी रिपोर्ट कार्ड बड़ी उत्सुकता के साथ दिखा रहे हैं। जाकिर हुसैन दिल्ली कॉलेज के इतिहास के प्रोफेसर डॉ. देवेश विजय इन बच्चों की रिपोर्ट कार्ड को ध्यान से देखते हुए उनकी हौसला आफजाई कर रहे हैं। गजब के आत्मविश्वास से लबरेज आर...
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लेमन ट्री की पहल

47 सप्ताह पहले
दिल्ली एयरपोर्ट पर स्थित 'क्लेवर फॉक्स कैफे' में आप जैसे ही प्रवेश करते हैं तो शिराज बड़े अदब के साथ हाथ जोड़कर आपका स्वागत करता है। उसके पास एक कार्ड है जिसपर लिखा है, 'हाय, मेरा नाम शिराज है। मैं इस क्लेवर फॉक्स कैफे में काम करता हूं। मुझे डाउन सिंड्रोम है। आप अपना आर्डर लिखकर दें तो अच्छा होगा। मुझे आपको सेवा प्रदान करके खुशी होगी। उसके बाद शिराज खाली टेबल की तरफ  इशारा करके बुलाता है। बैठने के बाद आपको मेन्यू कार्ड लाकर देता है। बड़े अदब से आर्डर लिखता है। एक पल के लिए भी उसके चेहरे से मुस्कुराहट गायब नहीं होती।  'क्लेवर फॉक्स कैफे', 'रेड फॉक्स होटल' का हिस्सा है, जो 'लेमन ट्री ग्रुप' का होटल है। 'लेमन ट्री' ...
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मोरा चरखा के टूटे न तार

47 सप्ताह पहले
सुुंदर सुघड़ भूमि भारत के रहे रामा   आजूृ इहे भइल मसान रे फिरंगिया। अन्न, धन,जन, बुद्धि सब नास भइल कवनो के ना रहल निसान रे फिरंगिया। पूरबी मिजाज के सुप्रसिद्ध कवि मनोरंजन प्रसाद सिंह के गीत 'फिरंगिया' की इन पंक्तियों के सहारे निलहों के जुल्म से जर्जर चंपारण के गांव किसानों की दशा को समझा जा सकता है। भोजपुरी के ये लोकगीत महज गीत नहीं, बल्कि व्यापक जन प्रतिरोध के ऐसे औजार हंै, जिनके सहारे निलहों के अत्याचार और आतंक का सफल प्रतिवाद चंपारण में किया गया। इसीलिए इस दौर के लोकगीतों में सिर्फ गांव किसानों पर किए जा रहे, जुल्म की चर्चा ही नहीं, बल्कि उनसे दो-दो हाथ करने का इरादा और जारी दमन चक्र से मुक्तिपाने के संकल्प के साथ अंग्रेजी हुकुमत ...


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