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शनिवार, 21 अक्टूबर 2017

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नरेंद्र मोदी के जीवन पर अनूठी किताब

7 सप्ताह पहले
‘नरेंद्र दामोदरदास मोदी- द मेकिंग ऑफ ए लीजेंड’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जीवन पर लिखी गई अनेक पुस्तकों से बिल्कुल हट कर है। लेखक डॉ. विन्देश्वर पाठक ने इस पुस्तक में उनके जीवन के तमाम पक्षों को संवेदनशील तरीके से व्यक्त किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदरदास मोदी उन दुर्लभ व्यक्तियों में हैं जिन्होंने अपनी सोच और करिश्माई नेतृत्व से मानवता और राष्ट्र के इतिहास को आकार दिया है। वह मशहूर अमेरिकी वैज्ञानिकों थॉमस एडिसन के सबसे प्रसिद्ध कथन-एक फीसदी प्रेरणा और निन्यानवे फीसदी पसीना के प्रतीक बन गए हैं। नरेंद्र मोदी की बौद्धिकता अपार है, परंतु अपने इस अद्भुत जीवन यात्रा में कड़ी मेहनत से प्राप्त उनका वृहद अनुभव तथा गहरा...
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‘नरेंद्र दामोदरदास मोदी : द मेकिंग ऑफ ए लीजेंड विलक्षण जीवन पर असाधारण पुस्तक

13 सप्ताह पहले
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदरदास मोदी उन दुर्लभ व्यक्तियों में हैं जिन्होंने अपनी सोच और करिश्माई नेतृत्व से मानवता और राष्ट्र के इतिहास को आकार दिया है। वह मशहूर अमेरिकी वैज्ञानिकों थॉमस एडिसन के सबसे प्रसिद्ध कथन-एक फीसदी प्रेरणा और निन्यानवे फीसदी पसीना के प्रतीक बन गए हैं। नरेंद्र मोदी की बौद्धिकता अपार है, परंतु अपने इस अद्भुत जीवन यात्रा में कड़ी मेहनत से प्राप्त उनका वृहद अनुभव तथा गहरा ज्ञान उन्हें दूसरों की तुलना में अधिक ऊंचाई पर ला रखता है और यही उन्हें अद्वितीय भी बनाता है। यह पुस्तक सुविख्यात समाजशास्त्री और सुलभ स्वच्छता और समाज सुधार आंदोलन के संस्थापक डॉ. विन्देश्वर पाठक की दूरदृष्टि का परिणाम है, जिन्होंने प्रधानमंत्री के जीवन को काल-क्रमानुसार इस तरह स...
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युवाओं के लिए प्रधानमंत्री की किताब

14 सप्ताह पहले
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी ढेर सारी व्यस्तताओं और जिम्मेदारियों के बीच युवाओं के लिए एक पुस्तक लिखी है। देश में यह पहली बार होगा, जब किसी प्रधानमंत्री ने पद पर रहते हुए कोई पुस्तक लिखी है। कुछ प्रधानमंत्रियों ने पद छोड़ने का बाद पुस्तक अवश्य लिखी है। इस पुस्तक में प्रधानमंत्री ने देश और दुनिया के युवाओं से जुड़ी कई सारे विषयों पर अपने विचार रखे हैं। पेंग्विन रेंडम हाउस इंडिया और ब्लूक्राफ्ट डिजिटल फाउंडेशन के संयुक्त सहयोग से यह पुस्तक इस साल के अंत तक बाजार में आ जाएगी। इसे एक साथ कई भाषाओं में भी प्रकाशित करने की योजना है।  पुस्तक को लिखने का विचार प्रधानमंत्री का अपना है। प्रधानमंत्री मोदी अपने ‘मन की...
Ram-Lila-of-Social-Harmony-in-Delhi

सामाजिक सौहार्द की राम लीला

21 सप्ताह पहले
राजधानी दिल्ली में भूमि पूजन के बाद रामलीला महोत्सव की तैयारियां शुरू हो गई हैं। सितंबर में दुर्गापूजा है। इस बार दिल्ली के सांसद व प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष मनोज तिवारी अंगद की भूमिका निभाने के लिए तैयार हो गए हैं। तिवारी का कहना है कि जब भी उन्हें रामलीला में किरदार निभाने का मौका मिलता है तो वे उसे हाथ से जाने नहीं देते। तिवारी सरीखे कई फिल्मी कलाकार दिल्ली की रामलीलाओं में अपना अभिनय प्रस्तुत कर आकर्षण का केंद्र बनते हैं, पर दिल्ली की रामलीलाओं में जो सबसे प्रमुख चीजें देखने को मिलती हैं वह है मुस्लिम कलाकारों का बढ़-चढ़कर भाग लेना। इन कलाकारों की बदौलत दिल्ली की रामलीलाओं में सदभाव का माहौल दिखता है। वह चाहे लाल किला...
Old-Hardayal-Library-Recorded-in-History

इतिहास में दर्ज पुस्तकालय

22 सप्ताह पहले
साल 1863 से पहले की दिल्ली में स्वायत शासन का कोई अभिलिखित इतिहास उपलब्ध नहीं है, लेकिन 1862 में किसी एक प्रकार की नगर पालिका की स्थिति के कुछ सबूत मौजूद हैं। पंजाब सरकार की अधिसूचना दिनांक 13 दिसंबर, 1862 द्वारा 1850 का अधिनियम दिल्ली में लागू हुआ था। नगर पालिका की पहली नियमित बैठक 23 अप्रैल, 1863 को हुई थी, जिसमें स्थानीय निवासी आमंत्रित किए गए थे। एक जून 1863 को आयोजित हुई अन्य बैठक की अध्यक्षता दिल्ली के कमिश्नर ने की थी और उपयुक्त ढंग से उसके कार्यवृत लिखे गए थे। यह दिल्ली नगर निगम का इतिहास है। पर इस इतिहास से एक साल पहले ही ‘हरदयाल म्युनिसिपल हेरीटेज पब्लिक लाइब्रेरी’ की स्थापाना की नींव पड़ चुकी थी। मौजूदा समय म...
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न्यू इंडिया की नई पहल

26 सप्ताह पहले
दिल्ली की सबसे बड़ी इमारत और सबसे पुराने कॉलेज के बीचों-बीच एक संकरी गली है, जो ख्वाजा मीर दर्द बस्ती की तरफ जाती है। सबसे बड़ी इमारत श्यामा प्रसाद मुखर्जी सिविक सेंटर और जाकिर हुसैन कॉलेज के बीचों-बीच जाने वाली इस संकरी गली में वैसे तो लोग जाना पसंद नहीं करते। लेकिन इस गली में पहुंचने पर कुछ ऐसा देखने को मिलता है कि बस देखते ही रह जाएंगे। मुहल्ले की मस्जिद से सटे मदरसे के एक बड़े से हॉल में 40 से ज्यादा बच्चे अपनी रिपोर्ट कार्ड बड़ी उत्सुकता के साथ दिखा रहे हैं। जाकिर हुसैन दिल्ली कॉलेज के इतिहास के प्रोफेसर डॉ. देवेश विजय इन बच्चों की रिपोर्ट कार्ड को ध्यान से देखते हुए उनकी हौसला आफजाई कर रहे हैं। गजब के आत्मविश्वास से लबरेज आर...
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लेमन ट्री की पहल

29 सप्ताह पहले
दिल्ली एयरपोर्ट पर स्थित 'क्लेवर फॉक्स कैफे' में आप जैसे ही प्रवेश करते हैं तो शिराज बड़े अदब के साथ हाथ जोड़कर आपका स्वागत करता है। उसके पास एक कार्ड है जिसपर लिखा है, 'हाय, मेरा नाम शिराज है। मैं इस क्लेवर फॉक्स कैफे में काम करता हूं। मुझे डाउन सिंड्रोम है। आप अपना आर्डर लिखकर दें तो अच्छा होगा। मुझे आपको सेवा प्रदान करके खुशी होगी। उसके बाद शिराज खाली टेबल की तरफ  इशारा करके बुलाता है। बैठने के बाद आपको मेन्यू कार्ड लाकर देता है। बड़े अदब से आर्डर लिखता है। एक पल के लिए भी उसके चेहरे से मुस्कुराहट गायब नहीं होती।  'क्लेवर फॉक्स कैफे', 'रेड फॉक्स होटल' का हिस्सा है, जो 'लेमन ट्री ग्रुप' का होटल है। 'लेमन ट्री' ...
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मोरा चरखा के टूटे न तार

29 सप्ताह पहले
सुुंदर सुघड़ भूमि भारत के रहे रामा   आजूृ इहे भइल मसान रे फिरंगिया। अन्न, धन,जन, बुद्धि सब नास भइल कवनो के ना रहल निसान रे फिरंगिया। पूरबी मिजाज के सुप्रसिद्ध कवि मनोरंजन प्रसाद सिंह के गीत 'फिरंगिया' की इन पंक्तियों के सहारे निलहों के जुल्म से जर्जर चंपारण के गांव किसानों की दशा को समझा जा सकता है। भोजपुरी के ये लोकगीत महज गीत नहीं, बल्कि व्यापक जन प्रतिरोध के ऐसे औजार हंै, जिनके सहारे निलहों के अत्याचार और आतंक का सफल प्रतिवाद चंपारण में किया गया। इसीलिए इस दौर के लोकगीतों में सिर्फ गांव किसानों पर किए जा रहे, जुल्म की चर्चा ही नहीं, बल्कि उनसे दो-दो हाथ करने का इरादा और जारी दमन चक्र से मुक्तिपाने के संकल्प के साथ अंग्रेजी हुकुमत ...
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श्रमिकों की सेहत का रखवाला

31 सप्ताह पहले
जनाब मोहम्मद अशरफ (17) हावड़ा के पास लिलौह के एक छोटे से इंजीनियरिंग यूनिट में मजदूर थे। वह जस्ते से बने उपकरण को अल्कोहल से साफ कर रहे थे।वह अपने मुंह से अल्कोहल को जार में से खींच रहे थे। वह यह सब अपने साथियों के साथ हंसी-मजाक में कर रहे थे, लेकिन इसी दौरान कुछ अल्कोहल उनके गले में चला गया और उनकी आंतें जल गई। कोई भी अस्पताल उन्हें&n...
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खामोश खूबसूरती का खजाना

35 सप्ताह पहले
आशिमा   महज़ पर्यटक स्थल या पहाड़ी स्थान नहीं है किन्नौर, बल्कि हिमालय में बसा एक रूहानी सुकून है। ऐसा बहुत कुछ है जो किन्नौर को अन्य पहाड़ी स्थानों से अलग बनाता है और एक $खास महत्व रखता है। एक रोमांचकारी स$फर तय करने के बाद जब आप किन्नौर पहुंचेंगे तो खुद जान जाएंगे कि हिमालय के पास देने के लिए नित नया होता है   छुट्टियों का सुकून, भीड़ और शोरगुल से दूरी, कुछ दिन साफ  हवा में राहत। शहरों ...
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ईरान की लोककथा - जैसे को तैसा

36 सप्ताह पहले
एक जमींदार के लिए उसके कुछ किसान एक भुना हुआ मुर्गा और एक बोतल फल का रस ले आए। जमींदार ने अपने नौकर को बुलाकर चीजें उनके घर ले जाने को कहा। नौकर एक चालाक, शरीर लड़का था। यह जानते हुए जमींदार ने उससे कहा,'देखो, उस कपड़े में जिंदा चिडिय़ा है और बोतल में ज़हर है। खबरदार, जो रास्ते में उस पकड़े को हटाया, क्योंकि अगर उसने ऐसा किया तो चिडिय़ा उड़ जाएगी। और बोतल सूंघ भी ली तो तुम मर जाओगे। समझे?’ नौकर भी अपने मालिक को खूब पहचानता था। उसने एक आरामदेह कोना ढूंढा और बैठ कर भुना मुर्गा खा गया। उसने बोतल में जो रस था वह भी सारा पी डाला। एक बूंद भी नहीं छोड़ा। उधर जमींदार भोजन के समय घर पहुंचा और पत्नी से भोजन परोसने को कहा। उसकी प...
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थाइलैंड की लोककथा - ज्यादा चालाक कौन था?

36 सप्ताह पहले
क्ले और पिआ मंदिर में रहने वाले लड़के थे। एक दिन क्ले की मां उससे मिलने आई और उसको जेब खर्च के लिए पांच भात दे गई। क्ले ने बहुत सोचा कि उसे कहां रखा जाए। अंत में उसने उसे जमीन में गाड़ देने की सोची। उसने पैसे गाड़ दिए और उस जगह पर निशानी के लिए एक नोटिस लिख कर लगा दिया, 'यह वह जगह नहीं है जहां पांच भात गड़े हुए हैं।’ काम से निबट कर वह सैर करने निकला। इतने में पिआ उधर से निकला तो उसको नोटिस देखकर आश्चर्य हुआ। उसने जमीन खोदकर पैसे निकाले और लेकर चलता बना। लेकिन क्योंकि वह दिखाना था कि उसको भी लिखना आता है, उसने चलने के पहले क्ले के नोटिस पर जो लिखा था उसे मिटा कर लिख दिया, 'पैसे पिआ ने नहीं लिए।’ कुछ देर सैर करने के बाद क्ले को अपने भात (पैसे)की चि...


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